UP Board class 5 Hindi 8. वे दिन भी क्या दिन थे is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर- कुम्मी के हाथ जो किताब आई थी, वह हमारे वर्तमान समय में छपी हुई होगी। यह किताब आजकल के आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस से छपी होगी, जिसमें साफ अक्षर और चमकदार चित्र होंगे।
उत्तर- हाँ, कई बार ऐसा होता है। कुछ पुस्तकें, जैसे कि स्कूल की पुरानी कक्षा की किताबें या कुछ विशेष उद्देश्य से ली गई किताबें, एक बार पढ़ने के बाद अलमारी में रख दी जाती हैं और उनका दोबारा उपयोग नहीं हो पाता। इस तरह वे बेकार हो जाती हैं। हालाँकि, अच्छी और ज्ञानवर्धक किताबें हम बार-बार पढ़ते हैं और वे कभी बेकार नहीं होतीं।
उत्तर- हम कागज़ के पन्नों वाली किताब को पसंद करेंगे। ऐसी किताब को हम कहीं भी, कभी भी आसानी से पढ़ सकते हैं। इसे पलटकर पढ़ने, महत्वपूर्ण बातों को रेखांकित करने और अपने पास सहेजकर रखने में आसानी होती है। टीवी पर चलने वाली किताब के लिए बिजली और उपकरण की ज़रूरत होती है और उसे रोककर या धीरे पढ़ना मुश्किल होता है।
उत्तर- कागज़ के आविष्कार से पहले, लोग लेखन और छपाई के लिए विभिन्न चीजों का उपयोग करते थे। इनमें पेड़ की छाल (भोजपत्र), ताड़ के पत्ते (तालपत्र), मिट्टी की पट्टियाँ, पत्थर, धातु की चादरें, चमड़ा और कपड़ा जैसी सामग्रियाँ शामिल थीं। प्राचीन भारत में ज्ञान को ताड़ के पत्तों पर लिखकर सुरक्षित रखा जाता था।
उत्तर- हम अध्यापक की मदद से पढ़ना पसंद करेंगे।
अध्यापक से पढ़ने में:
आसानियाँ: अध्यापक किसी भी बात को अलग-अलग तरीकों से समझा सकते हैं। वे हमारे सवालों का तुरंत जवाब दे सकते हैं और हमारी गलतियों को सुधार सकते हैं। उनका स्नेह और प्रोत्साहन हमें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
मुश्किलें: कभी-कभी एक साथ कई बच्चों को पढ़ाने के कारण हर किसी को व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पाता।
मशीन से पढ़ने में:
आसानियाँ: मशीन (कंप्यूटर/टैबलेट) से हम कभी भी, कहीं भी पढ़ सकते हैं। इसमें विडियो, ऐनिमेशन और गेम के जरिए पढ़ाई रोचक बन सकती है। हम एक ही बात को बार-बार सुन सकते हैं।
मुश्किलें: मशीन हमारे सवालों का जवाब नहीं दे सकती या हमारी उलझन को समझकर स्पष्ट नहीं कर सकती। इसके लिए बिजली और इंटरनेट की ज़रूरत होती है और ज्यादा देर तक स्क्रीन देखने से आँखों पर बुरा असर पड़ सकता है।
उत्तर- हाँ, हमने अक्सर बड़े-बुजुर्गों को यह कहते सुना है। मेरे लिए "वे दिन भी क्या दिन थे!" कहने लायक समय मेरा बचपन है, जब मैं बहुत छोटा था। उन दिनों पढ़ाई का कोई दबाव नहीं था, पूरा दिन खेलने-कूदने और मस्ती में बीतता था। माता-पिता और दादा-दादी का प्यार और लाड़ बहुत मिलता था। छोटी-छोटी बातों पर भी सब हँसते थे और हर छोटी इच्छा पूरी हो जाती थी। वह निश्चिंत और खुशहाल समय वाकई यादगार था।
उत्तर-
पेन: भविष्य में पेन हवा में लिख सकेंगे। ये 3D होलोग्राफिक पेन होंगे जो हवा में चित्र बना सकेंगे या सीधे कंप्यूटर स्क्रीन पर लिख सकेंगे। इनकी स्याही कभी ख़त्म नहीं होगी।
घड़ी: घड़ियाँ हमारी कलाई पर टैटू की तरह दिखेंगी या हवा में समय प्रोजेक्ट करेंगी। ये हमारे स्वास्थ्य, मौसम और खबरों की भी जानकारी देने लगेंगी।
टेलीफोन / मोबाइल: मोबाइल फोन इतने छोटे और लचीले होंगे कि उन्हें हम कलाई पर बाँध सकेंगे या कपड़ों में लगा सकेंगे। वे हवा में सामने वाले का 3D होलोग्राम दिखाकर बात करने की सुविधा देंगे।
टेलीविजन: टीवी की स्क्रीन पूरी दीवार पर फैल जाएगी और हम उसके अंदर की दुनिया में खुद को महसूस कर पाएँगे, जैसे कि वहाँ मौजूद हों। इसे हाथ के इशारे से चला सकेंगे।
रसोईघर: रसोईघर पूरी तरह स्वचालित होगा। हम सिर्फ बोलकर ही रेसिपी बता सकेंगे और रोबोटिक हाथ सारा खाना तैयार करके परोस देंगे। फ्रिज अपने आप बताएगा कि कौन सी चीज ख़त्म हो रही है।
उत्तर- बड़ों से पूछने पर पता चला कि कीमतें समय के साथ बदलती रहती हैं। यहाँ एक अनुमानित तुलना दी गई है:
| वस्तु | लगभग 20 साल पहले कीमत (प्रति किलो) | आज की अनुमानित कीमत (प्रति किलो) |
|---|---|---|
| आलू | 2-3 रुपये | 15-25 रुपये |
| लड्डू (मिठाई) | 40-50 रुपये | 200-300 रुपये |
| शक्कर | 10-12 रुपये | 40-45 रुपये |
| दाल (अरहर) | 15-20 रुपये | 80-100 रुपये |
| चावल | 8-10 रुपये | 30-50 रुपये |
| दूध (प्रति लीटर) | 10-12 रुपये | 50-60 रुपये |
उत्तर-
| व्यक्तिगत जीवन में | सार्वजनिक जीवन में |
|---|---|
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उत्तर-
| जानकारी देने के साधन (एकतरफा संप्रेषण - →) | भावनाएँ अभिव्यक्त करने के साधन (दोतरफा संवाद - ↔) |
|---|---|
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→ रेडियो → टी.वी. → विज्ञापन → नोटिस → इश्तहार (पोस्टर) → फैक्स → तार (टेलीग्राम) |
↔ फ़ोन ↔ मोबाइल ↔ मोबाइल सन्देश ↔ इन्टरनेट (चैट) ↔ अभिनय ↔ नृत्य के हाव-भाव ↔ संकेत-भाषा ↔ चित्र (बनाकर दिखाना) ↔ सन्देश (बातचीत के रूप में) |
उत्तर- छात्र पुस्तकालय से या इंटरनेट पर महान व्यक्तियों जैसे अन्ना हजारे, महात्मा गांधी ('सत्य के प्रयोग') या अपर्णा जैन ('ए लाइफ इन सीक्रेट') की प्रकाशित डायरी ढूंढकर पढ़ सकते हैं। कक्षा में उस डायरी के एक छोटे से रोचक अंश को सुनाना चाहिए, जिससे उनके विचारों और अनुभवों का पता चले।
उत्तर- (छात्र इस प्रारूप को देखकर अपनी डायरी बना सकते हैं)
दिनांक: 26 अक्टूबर, 2023
दिन: गुरुवार
आज का दिन बहुत अच्छा रहा। सुबह जल्दी उठकर मैंने योग किया और पढ़ाई की। स्कूल में हिंदी की कविता का अर्थ बहुत अच्छे से समझ आया। दोपहर में दोस्तों के साथ फुटबॉल खेला और हमारी टीम जीत गई! शाम को दादाजी ने रामायण की एक नई कहानी सुनाई। आज मैंने यह भी सीखा कि गुस्सा आने पर गहरी साँस लेनी चाहिए। आज का दिन सीख और मस्ती से भरा रहा।
उत्तर- डायरी में हम अपने स्कूल के बारे में बहुत कुछ लिखना चाहेंगे। जैसे कि आज स्कूल में कौन सा नया पाठ पढ़ाया गया, कौन सी प्रयोगशाला में मजेदार प्रयोग किया, खेल के मैदान में क्या नया खेल खेला, किस शिक्षक ने कौन सी दिलचस्प बात बताई, स्कूल के किसी उत्सव या प्रतियोगिता का वर्णन, और अपने दोस्तों के साथ बिताए गए मजेदार पलों के बारे में लिखना चाहेंगे।
उत्तर- दोस्तों से बात करने और कल्पना करने पर लगता है कि 50 साल बाद:
फिल्में: फिल्में और भी ज्यादा आधुनिक तकनीक से भरी होंगी। हम फिल्म के किरदारों के साथ बातचीत भी कर पाएँगे और खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करेंगे। फिल्में छोटी और व्यक्तिगत पसंद के हिसाब से बनने लगेंगी।
गाँव की हालत: गाँव शहरों जैसे विकसित हो जाएँगे। वहाँ भी अच्छी सड़कें, अस्पताल, स्मार्ट स्कूल और हाई-स्पीड इंटरनेट होगा। खेती में रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल होगा।
हमारी परिचित नदी: अगर हम अभी नदी को नहीं बचाएंगे, तो 50 साल बाद उसका पानी और गंदा हो सकता है और पानी का स्तर बहुत कम हो सकता है। लेकिन अगर हम सावधानी बरतें, तो नदी फिर से साफ और भरी हुई हो सकती है।
स्कूल: स्कूलों में कॉपी-किताब की जगह टैबलेट और कंप्यूटर होंगे। पढ़ाई वर्चुअल रियलिटी के जरिए होगी, जैसे इतिहास पढ़ते समय उस युग में चले जाना। होमवर्क रोबोट चेक करेंगे और हर बच्चे को उसकी गति के अनुसार पढ़ाया जाएगा।
उत्तर- ऐसा इसलिए है क्योंकि यह कहानी साल 2155 में रहने वाले एक बच्चे की ज़ुबानी सुनाई गई है। वह बच्चा हमारे आज (यानी 21वीं सदी) के बारे में बात कर रहा है। उसके लिए हमारा वर्तमान समय बीता हुआ अतीत है। इसलिए वह हमारे स्कूलों, किताबों और तरीकों के बारे में बताते हुए "थे", "थी", "था" जैसे भूतकाल के शब्दों का इस्तेमाल करता है।
उत्तर- शीर्षक: जब मुझे बहुत डर लगा था
मैं जब छोटा था, तब एक बार रात में अकेले कमरे में सो रहा था। अचानक मेरी नज़र खिड़की पर पड़ी, जहाँ किसी पेड़ की डाली का साया पर्दे पर एक विशालकाय राक्षस जैसा दिख रहा था। हवा के झोंके से वह साया हिलता था, लगता था जैसे वह मेरी तरफ बढ़ रहा है। मैं डर से चिल्ला उठा और रोने लगा। माँ-पापा दौड़े आए और लाइट जलाकर मुझे समझाया। उन्होंने पर्दा हटाकर पेड़ की डाली दिखाई, तब जाकर मेरा डर दूर हुआ। आज सोचता हूँ तो हँसी आती है, लेकिन उस रात का डर आज भी याद है।
उत्तर- विकल्प 1: 'मैं'
मैं एक शांत और सोचने वाला लड़का हूँ। मेरी अच्छाई यह है कि मैं हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता हूँ और झूठ नहीं बोलता। मेरी एक कमी यह है कि मैं कभी-कभी किसी काम को कल पर टाल देता हूँ। मुझे किताबें पढ़ना, क्रिकेट खेलना और नई चीजें सीखना बहुत पसंद है। लेकिन शोर-शराबे और गंदगी मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। मैं चाहता हूँ कि बड़े होकर एक वैज्ञानिक बनूँ।
विकल्प 2: मैच का आँखों देखा हाल
मैदान में तनाव साफ दिख रहा है। आखिरी ओवर की आखिरी गेंद है, जीत के लिए 2 रन चाहिए। गेंद
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