UP Board class 5 Hindi 17. छोटी-सी हमारी नदी is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर- उजली सी हमारी नदी, तेज इसकी धार। गर्मियों में कम हो जाता है पानी, इसके पानी में घुसकर आसानी से जाते पार।
उत्तर-
धार - हमारी नदी की धार बहुत तेज नहीं है, यह शांत और सुहावनी है।
पाट - नदी का पाट चौड़ा नहीं है, यह संकरा और घुमावदार है।
बालू - नदी के किनारे और तल में सुनहरी बालू बिछी रहती है।
कीचड़ - पानी कम होने पर किनारों पर थोड़ा कीचड़ जरूर दिखाई देता है।
किनारे - किनारे हरे-भरे पेड़ों और झाड़ियों से घिरे हैं।
बरसात में नदी - बरसात के मौसम में नदी खतरनाक रूप ले लेती है, पानी का स्तर बढ़ जाता है और वह गंदला व तेज बहने लगता है।
उत्तर- हमारी नदी के किनारे सुबह-शाम काफी चहल-पहल रहती है। सुबह महिलाएं पानी भरने और कपड़े धोने आती हैं। बच्चे शाम को नहाने और खेलने आते हैं। कुछ लोग मछली पकड़ते हैं और कुछ लोग शांति से बैठकर प्रकृति का आनंद लेते हैं। त्योहारों के समय लोग पूजा-अर्चना भी करते हैं।
उत्तर- हमारे इलाके के पास गोमती और सई नदियाँ बहती हैं। गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जिले के माधोटांडा ताल से होता है और यह लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर आदि शहरों से होती हुई गाजीपुर में गंगा नदी में मिल जाती है। सई नदी की उत्पत्ति भी उत्तर प्रदेश में ही होती है और यह अंत में गोमती नदी में ही मिल जाती है।
उत्तर- इस किताब में नदी का जिक्र “नदी का सफर” नामक पाठ में हुआ है। इस पाठ में नदी के जन्म (उद्गम स्थल) से लेकर उसके समुद्र में मिलने (मुहाने) तक के सफर के बारे में बताया गया है। इसमें नदी के रास्ते में आने वाले जलप्रपात, घाटियों, उसकी गति और उससे होने वाले लाभों का भी वर्णन किया गया है।
उत्तर- नदी
नदी कल-कल बहती जाती,
पहाड़ों से निकल घाटियों में समाती।
सिंचती है खेत, लाती उपजाऊ मिट्टी,
हरियाली फैलाकर बनाती है सभी को खुशी।
बच्चे किनारे खेलते हैं, पक्षी गाते हैं,
यह प्रकृति की देन हम सबको प्यारी लगती है।
उत्तर- नदी में नहाने का अनुभव नल के पानी से बिल्कुल अलग होता है। नदी का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और ताज़ा होता है। उसमें उतरते ही शरीर की सारी गर्मी और थकान दूर हो जाती है। पैरों के नीचे बहती रेत और मछलियों के छूने का एहसास बहुत अच्छा लगता है। नहाकर बाहर आने पर शरीर में एक अद्भुत स्फूर्ति और मन को शांति मिलती है।
उत्तर- हाँ, एक बार मैंने अपने चाचा के साथ नदी में मछली पकड़ी थी। हमने एक छोटी सी बाँस की छड़ी में डोरी और काँटा बाँधा। काँटे पर आटे की गोली लगाकर पानी में डाली। मछली के काँटे पर आते ही छड़ी हिलने लगी, मैंने तुरंत खींचा और एक छोटी सी चमकदार मछली बाहर आ गई! यह देखकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हालाँकि, बाद में हमने उस मछली को वापस पानी में छोड़ दिया क्योंकि हम उसे सिर्फ मनोरंजन के लिए पकड़ रहे थे।
उत्तर- नदी की टेढ़ी-मेढ़ी धार रेंगते हुए एक लंबे साँप की तरह लगती है।
उत्तर- किचपिच-किचपिच करती मैना एक शरारती और बातूनी बच्चे की तरह लगती है।
उत्तर- उछल-उछल के नदी में नहाते कच्चे-बच्चे पानी में कूदते हुए मेंढकों की तरह लगते हैं।
* कविता से पहले पद को दुबारा पढ़ो | वर्णन पर ध्यान दो | इसे पढ़कर जो चित्र तुम्हारे मन में उभरा उसे बनाओ | बताओ चित्र में तुमने क्या - क्या दर्शाया?
उत्तर- कविता पढ़कर मेरे मन में जो चित्र उभरा, उसमें मैंने एक छोटी सी नदी बनाई जो पहाड़ियों के बीच से घूमती हुई बह रही है। उसके एक किनारे पर हरे-भरे पेड़ (अमराई) हैं और दूसरे किनारे पर रेतीला तट है। पानी में कुछ बच्चे उछल-कूद कर नहा रहे हैं और किनारे पर गाय-भैंस पानी पी रही हैं। आकाश में चिड़ियाँ उड़ रही हैं और दूर से कुछ महिलाएं घड़े लेकर आती दिख रही हैं।
उत्तर- इस कविता के पद में निम्नलिखित शब्द तुकांत (समान अंत वाले शब्द) हैं-
धार-पार
चालू-ढालू
नाम-धाम
दार-सियार
वन-सघन
लें-ढालें
नहाना-छाना
रेती-देतीं
उतराती-दंनाती
कोलाहल-चंचल
रोला-टोला
उत्तर- “पार जाते ढोर डंगर” इस पंक्ति से पता चलता है कि नदी के किनारे पशु (जैसे गाय, भैंस, बैल आदि) भी पानी पीने या नहाने के लिए आते-जाते थे।
उत्तर- इस नदी के तट की खासियत यह थी कि वे ऊँचे और मजबूत थे। ऊँचे तट होने के कारण बरसात में नदी का पानी आसपास के इलाकों में नहीं फैल पाता था और बाढ़ का खतरा कम रहता था।
उत्तर- हफ्ते में एक बार लगने वाला हाट
हर रविवार को हमारे मोहल्ले के पास एक बड़ा हाट लगता है। सुबह से ही ठेले, गाड़ियाँ और दुकानें सजने लगती हैं। एक तरफ रंग-बिरंगे कपड़ों और चूड़ियों की दुकानें होती हैं तो दूसरी तरफ ताजी सब्जियों और फलों के ढेर लगे होते हैं। बच्चों के लिए खिलौने और मिठाइयों की दुकानें सबसे आकर्षक होती हैं। पूरे बाजार में खरीदारों की भीड़, दुकानदारों के आवाज लगाने की आवाज और तरह-तरह के स्वादों व खुशबुओं का मेल होता है। यह हाट न सिर्फ खरीदारी का, बल्के लोगों से मिलने-जुलने और गपशप करने का भी एक बड़ा केंद्र बन जाता है।
उत्तर-
तेज गति - वेग
शोर - रोला
मोहल्ला - टोला
धूप - घाम
किनारा - पाट
घना - सघन
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