UP Board class 7 History 1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
प्रश्न - अभ्यास (पाठ्यपुस्तक से)
उत्तर- प्राचीन और मध्यकाल में, 'विदेशी' शब्द का अर्थ आज के समान नहीं था। उस समय किसी गाँव या समुदाय में आने वाला कोई भी अनजान व्यक्ति जो उस स्थानीय समाज और संस्कृति का हिस्सा नहीं होता था, उसे 'विदेशी' माना जाता था। ऐसे लोगों को हिंदी में परदेसी और फारसी में अजनबी कहा जाता था। यह पहचान राष्ट्रीय सीमाओं के बजाय सामाजिक परिचय और अपनेपन पर आधारित थी।
(क) सन् 700 के बाद के काल के संबंध में अभिलेख नहीं मिलते हैं।
(ख) इस काल के दौरान मराठों ने अपने राजनीतिक महत्त्व की स्थापना की।
(ग) कृषि-केंद्रित बस्तियों के विस्तार के साथ कभी-कभी वनवासी अपनी जमीन से उखाड़ बाहर कर दिए जाते थे।
(घ) सुलतान ग़यासुद्दीन बलबन असम, मणिपुर तथा कश्मीर का शासक था।
उत्तर-
(क) गलत – सन् 700 के बाद भी अनेक अभिलेख मिलते हैं, जैसे चोल, पाल, प्रतिहार शासकों के ताम्रपत्र और शिलालेख।
(ख) सही – मराठों ने 17वीं-18वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व में एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरकर अपना महत्त्व स्थापित किया।
(ग) सही – कृषि के विस्तार के लिए जंगल साफ किए जाते थे, जिससे वहाँ रहने वाले वनवासी समुदायों को अक्सर अपनी भूमि छोड़नी पड़ती थी या उन्हें विस्थापित कर दिया जाता था।
(घ) गलत – सुलतान ग़यासुद्दीन बलबन (1266-1287 ई.) दिल्ली सल्तनत का शासक था। उसका शासन असम, मणिपुर या कश्मीर तक नहीं फैला था।
(क) अभिलेखागारों में ................. रखे जाते हैं।
(ख) .................. चौदहवीं सदी का एक इतिहासकार था।
(ग) ............... , ............... , ............... और ............... इस उपमहाद्वीप में इस काल के दौरान लाई गई कुछ नई फसलें हैं।
उत्तर-
(क) अभिलेखागारों में ऐतिहासिक दस्तावेज, पांडुलिपियाँ, अभिलेख और सरकारी रिकॉर्ड रखे जाते हैं।
(ख) जियाउद्दीन बरनी चौदहवीं सदी का एक प्रसिद्ध इतिहासकार था, जिसने 'तारीख-ए-फ़िरोज़शाही' नामक ग्रंथ लिखा।
(ग) आलू, मक्का, मिर्च, तम्बाकू, अनन्नास और पपीता इस उपमहाद्वीप में इस काल (लगभग 16वीं-17वीं शताब्दी) के दौरान विदेशों से लाई गई कुछ नई फसलें हैं।
उत्तर- सन् 700 से 1750 के बीच के हज़ार वर्षों में निम्नलिखित प्रौद्योगिकीय परिवर्तन हुए:
| क्षेत्र | प्रौद्योगिकीय परिवर्तन | प्रभाव / महत्त्व |
|---|---|---|
| कृषि | सिंचाई के लिए रहट (पानी खींचने की घिरनी) और अरहट (पर्सियन व्हील) का प्रचलन। | सूखे क्षेत्रों में भी सिंचाई संभव हुई, कृषि उत्पादन बढ़ा। |
| बुनाई एवं कताई | चरखे का व्यापक उपयोग शुरू हुआ। | सूत कातने की गति और गुणवत्ता में वृद्धि हुई, वस्त्र उद्योग को बढ़ावा मिला। |
| युद्ध एवं सैन्य | आग्नेयास्त्रों (बारूद वाले हथियार) जैसे तोप और बंदूक का प्रवेश। | युद्ध की रणनीति और किलेबंदी के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आया। |
| भवन निर्माण | कमानदार (आर्क) और गुंबद जैसी नई स्थापत्य शैलियों का विकास। | मस्जिदों, मकबरों और महलों जैसे विशाल और मजबूत भवन बनाए जाने लगे। |
उत्तर- इस लंबे काल में धार्मिक जीवन में निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए:
1. हिंदू धर्म में नए रुझान: पुराने वैदिक देवताओं के स्थान पर विष्णु, शिव और देवी की पूजा का बोलबाला हुआ। राजाओं द्वारा भव्य मंदिरों के निर्माण से ब्राह्मण पुरोहितों का प्रभाव बढ़ा।
2. भक्ति आंदोलन का उदय: दक्षिण से शुरू हुए इस आंदोलन ने पूरे भारत में जोर पकड़ा। संतों और भक्त कवियों (जैसे- अलवार, नयनार, कबीर, मीरा, गुरु नानक) ने जाति-पाति के भेद और बाहरी कर्मकांडों की आलोचना करते हुए ईश्वर की सीधी भक्ति पर जोर दिया।
3. इस्लाम का आगमन: 7वीं-8वीं शताब्दी में व्यापारियों, सूफी संतों और फिर शासकों के माध्यम से इस्लाम धर्म भारत आया। इससे एक नए एकेश्वरवादी धर्म और संस्कृति का परिचय हुआ।
4. सूफी परंपरा: सूफी संतों (पीर, फकीर) ने प्रेम, भक्ति और सादगी का संदेश दिया। उनके खानकाह (आश्रम) धार्मिक चर्चा और सामुदायिक सेवा के केंद्र बने।
5. ईसाई धर्म: 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली और अन्य यूरोपीय लोगों के साथ ईसाई मिशनरी भी आए, जिन्होंने धर्म प्रचार किया।
उत्तर- 'हिंदुस्तान' शब्द का अर्थ समय के साथ बदलता रहा है:
• 13वीं शताब्दी में (मिन्हाज-ए-सिराज): इस फारसी इतिहासकार ने 'हिंदुस्तान' शब्द का प्रयोग मुख्यतः दिल्ली सल्तनत के उन क्षेत्रों के लिए किया जो गंगा-यमुना के दोआब, पंजाब और हरियाणा में फैले थे। यहाँ इसका अर्थ राजनीतिक इकाई था।
• 14वीं शताब्दी में (अमीर खुसरो): कवि अमीर खुसरो ने 'हिंद' शब्द का प्रयोग इस भूभाग और यहाँ की संस्कृति और लोगों के लिए किया।
• 16वीं शताब्दी में (बाबर): मुगल बादशाह बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के भूगोल, जलवायु, पशु-पक्षियों और निवासियों का वर्णन करने के लिए किया। यह एक भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान का शब्द बन गया।
• वर्तमान में: आज 'हिंदुस्तान' अक्सर भारत गणराज्य के लिए एक लोकप्रिय नाम के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो देश के लोगों की एकता को दर्शाता है।
उत्तर- जातियों के अपने आंतरिक मामलों और नियमों को नियंत्रित करने की एक व्यवस्था थी:
1. जाति के स्वयं के नियम: प्रत्येक जाति अपने सदस्यों के व्यवहार, व्यवसाय, विवाह और सामाजिक संबंधों के लिए नियम (जाति-धर्म) बनाती थी।
2. जाति पंचायत: इन नियमों को लागू करने और विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी जाति के बुजुर्गों की एक सभा की होती थी, जिसे अक्सर 'जाति पंचायत' कहा जाता था। यह पंचायत नियम तोड़ने वालों को दंड भी दे सकती थी।
3. गाँव के रिवाजों का पालन: जाति को अपने निवास स्थान (गाँव या शहर) के स्थानीय रिवाजों और प्रशासनिक आदेशों का भी पालन करना पड़ता था। इस प्रकार जाति पंचायत और स्थानीय प्रशासन दोनों मिलकर सामाजिक व्यवस्था बनाए रखते थे।
उत्तर- सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य वह विशाल साम्राज्य होता है जो अनेक छोटे-बड़े क्षेत्रीय राज्यों, प्रांतों और विविध संस्कृतियों वाले इलाकों को एक ही केंद्रीय सत्ता के अधीन लाता है। ऐसे साम्राज्य का विस्तार बहुत बड़ा भू-भाग पर होता है।
उदाहरण: दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य थे क्योंकि इन्होंने लगभग पूरे उत्तर भारत और काफी दक्षिणी भाग पर भी शासन किया। इन साम्राज्यों में अलग-अलग भाषा, रीति-रिवाज वाले लोग एक ही प्रशासनिक व्यवस्था में बंधे थे।
उत्तर- पांडुलिपियों (हस्तलिखित ग्रंथों) का अध्ययन करते समय इतिहासकारों को निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
1. पढ़ने में कठिनाई: पुरानी पांडुलिपियाँ अक्सर पुरानी लिपि (जैसे- शारदा, मोडी, कैथी) में लिखी होती हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए विशेष ज्ञान की आवश्यकता होती है। लिखावट धुंधली या कटी-फटी भी हो सकती है।
2. मूल प्रति का अभाव: लेखक द्वारा लिखी गई मूल पांडुलिपि (प्रथम प्रति) बहुत ही कम मामलों में बची है। इतिहासकारों के पास आमतौर पर बाद की शताब्दियों में बनी प्रतिलिपियाँ ही होती हैं।
3. प्रतिलिपियों में अंतर: प्रतिलिपि बनाने वाले लिपिक (नकलनवीस) अक्सर छोटे-बड़े बदलाव कर देते थे। कहीं शब्द छूट जाते, कहीं नए जोड़ दिए जाते या अर्थ बदल जाता। सदियों तक प्रतिलिपियों की प्रतिलिपियाँ बनने से एक ही ग्रंथ की अलग-अलग प्रतियों में बहुत अंतर आ जाता था।
4. मूल सामग्री का पता लगाना: यह जानने के लिए कि लेखक ने वास्तव में क्या लिखा था, इतिहासकारों को एक ही ग्रंथ की विभिन्न प्रतिलिपियों की तुलनात्मक जाँच करनी पड़ती है, जो एक कठिन और समय लेने वाला कार्य है।
उत्तर-
विभाजन का आधार: इतिहासकार अतीत को सुविधा के लिए विभिन्न कालों में बाँटते हैं। यह विभाजन मुख्य रूप से आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के आधार पर किया जाता है। सबसे सामान्य विभाजन है - प्राचीन काल, मध्यकाल और आधुनिक काल।
कठिनाइयाँ: हाँ, इस कार्य में इतिहासकारों के सामने कठिनाइयाँ आती हैं:
1. विभाजन का सही बिंदु चुनना: यह तय करना मुश्किल होता है कि किस घटना या परिवर्तन को एक युग की समाप्ति और दूसरे की शुरुआत माना जाए। परिवर्तन एकाएक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आते हैं।
2. यूरोप केंद्रित दृष्टिकोण: 'प्राचीन', 'मध्य' और 'आधुनिक' जैसे विभाजन मूल रूप से यूरोप के इतिहास के लिए बने थे। भारत जैसे देश के इतिहास पर इन्हें लागू करना हमेशा उचित नहीं होता, क्योंकि यहाँ के अनुभव अलग थे।
3. विविधता को समेटना: एक विशाल देश में एक ही समय में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग स्थितियाँ हो सकती हैं। एक साझा काल-विभाजन सभी क्षेत्रों की विशेषताओं को पूरी तरह नहीं दर्शा पाता।
उत्तर-
मानचित्र 1 (अल-इद्रीसी द्वारा 1154 ई. में बनाया गया) और आज के मानचित्र की तुलना:
समानताएँ:
1. भारतीय उपमहाद्वीप का मोटा आकार (त्रिकोणीय) दिखाई देता है।
2. कुछ परिचित स्थानों के नाम जैसे कन्नौज, सोमनाथ आदि पहचाने जा सकते हैं (हालाँकि अरबी लिपि में लिखे हैं)।
3. इसमें नदियों, पर्वतों और समुद्रों जैसी प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं को दर्शाने का प्रयास किया गया है।
असमानताएँ:
1. दिशाओं में भिन्नता: इस मानचित्र में दक्षिण भारत ऊपर की ओर और उत्तर भारत नीचे की ओर दिखाया गया है। श्रीलंका ऊपर की तरफ है।
2. आकार और आकृति में अशुद्धि: भूभाग का आकार वास्तविकता से काफी भिन्न और कभी-कभी विकृत है।
3. सीमा रेखाओं का अभाव: आज के मानचित्रों जैसी स्पष्ट राज्यों या देशों की सीमाएँ नहीं दिखाई गई हैं।
4. भाषा: सभी नाम और विवरण अरबी भाषा में हैं।
मानचित्र 2 (1720 ई. के फ्रांसीसी मानचित्र) और आज के मानचित्र की तुलना:
समानताएँ:
1. आज के मानचित्र के अधिक निकट है। दिशाएँ (उत्तर-दक्षिण) सही हैं।
2. तट रेखा का आकार अधिक सही है।
3. अधिक स्थानों के नाम और विवरण दिए गए हैं।
असमानताएँ:
1. कुछ क्षेत्रों का आकार अभी भी पूरी तरह सही नहीं है (जैसे गुजरात और महाराष्ट्र का तटीय भाग)।
2. आंतरिक भागों का विवरण सीमित है।
3. इसमें उस समय के यूरोपीय व्यापारिक केंद्रों (जैसे सूरत, मद्रास, पांडिचेरी) पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उत्तर- (यह एक सामान्य उत्तर है। छात्र अपने स्थानीय अनुभव के आधार पर इसे भर सकते हैं।)
1. अभिलेखों का स्थान: गाँवों में अभिलेख (जैसे जमीन के कागजात, जन्म-मृत्यु रजिस्टर) अक्सर ग्राम पंचायत कार्यालय या तहसील/ब्लॉक कार्यालय में रखे जाते हैं। शहरों में ये नगर निगम, नगर पालिका या जिला प्रशासन के कार्यालयों में होते हैं।
2. अभिलेख तैयार करने वाले: इन्हें संबंधित सरकारी विभाग के कर्मचारी, लेखापाल या पटवारी आदि तैयार करते और रखते हैं।
3. अभिलेखागार: बड़े शहरों या राज्य की राजधानी में राज्य अभिलेखागार होते हैं।
4. देखभाल: अभिलेखागार की देखभाल प्रशिक्षित अभिलेखाधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा की जाती है।
5. दस्तावेज़ों के प्रकार: अभिलेखागारों में प्राचीन पांडुलिपियाँ, ऐतिहासिक फरमान, मानचित्र, फोटोग्राफ, सरकारी रिपोर्ट, जनगणना रिकॉर्ड और अन्य महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ सुरक्षित रखे जाते हैं।
6. उपयोगकर्ता: इन दस्तावेज़ों का उपयोग इतिहासकार, शोधार्थी, विद्यार्थी, वकील, पत्रकार और सरकारी विभाग समय-समय पर अपने कार्यों के लिए करते हैं।
UP Board class 7 History 1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 7 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board class 7 History 1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 7 History 1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल :
There are various features of UP Board class 7 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.