UP Board class 7 History 6. नगर व्यापारी और शिल्पीजन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: लोग तंजावूर को एक महान नगर मानते थे क्योंकि यह चोल साम्राज्य की राजधानी थी। यह नगर कावेरी नदी के किनारे बसा था, जिससे यहाँ पूरे साल पानी की उपलब्धता रहती थी। इस नगर में राजराजेश्वर जैसे भव्य मंदिर, विशाल राजमहल और सुंदर मंडप थे जहाँ राजा दरबार लगाते थे। यह एक सक्रिय व्यापारिक केंद्र भी था जहाँ बाज़ारों में हमेशा हलचल रहती थी। मंदिरों के केंद्र के रूप में इसने नगरीकरण का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था।
उत्तर: 'लुप्तमोम' या 'मोम-ताऊ' तकनीक के प्रयोग के निम्नलिखित लाभ थे:
1. इस तकनीक से बनी धातु की मूर्तियाँ बहुत सुंदर, चमकदार और बारीक विवरणों वाली होती थीं।
2. यह विधि अपेक्षाकृत सस्ती और कुशल थी, जिससे जटिल आकृतियाँ भी आसानी से बनाई जा सकती थीं।
3. इससे बनी प्रतिमाएँ हल्की होने के साथ-साथ मजबूत भी होती थीं क्योंकि इनमें धातु एक समान रूप से भर जाती थी।
4. यह तकनीक कांस्य मूर्तिकला के क्षेत्र में भारतीय शिल्पकारों की उन्नत कौशल क्षमता को दर्शाती है।
उत्तर: आज बाज़ार पर लगने वाले मुख्य कर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) है।
कर वसूल करने वाला: यह कर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाता है और इसका संग्रह जीएसटी विभाग के अधिकारी करते हैं।
वसूली का तरीका: व्यापारी और दुकानदार अपने द्वारा की गई बिक्री पर निर्धारित दर से जीएसटी लगाते हैं और फिर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सरकार को जमा कर देते हैं।
प्रयोग: इन करों का प्रयोग सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी जनकल्याणकारी योजनाएँ चलाने, प्रशासनिक खर्च और देश के विकास कार्यों के लिए किया जाता है।
उत्तर: हम्पी नगर किलेबंद इसलिए था क्योंकि यह विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। किसी भी साम्राज्य की राजधानी को शत्रुओं के आक्रमण से सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक होता है। मजबूत किलेबंदी, चारदीवारी और प्रवेश द्वार नगर को सुरक्षा प्रदान करते थे। इसके अलावा, हम्पी एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र भी था, जहाँ बहुमूल्य धन और वस्तुएँ होती थीं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए भी किलेबंदी जरूरी थी।
उत्तर: अंग्रेज़ों (ईस्ट इंडिया कंपनी) और हॉलैंडवासियों (डच) ने मसूलीपट्टनम में अपनी बस्तियाँ बसाने का निर्णय निम्न कारणों से लिया:
1. भौगोलिक स्थिति: यह बंगाल की खाड़ी पर स्थित एक प्राकृतिक बंदरगाह था, जहाँ जहाज आसानी से लंगर डाल सकते थे।
2. व्यापारिक महत्त्व: यह क्षेत्र कपास और कपड़ा उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र था, जिससे यूरोप में इन वस्तुओं का लाभदायक व्यापार किया जा सकता था।
3. स्थानीय सुविधा: स्थानीय शासकों से व्यापारिक छूट और अनुमति प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान था।
4. प्रतिस्पर्धा: यूरोपीय कंपनियाँ एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए भारत में ऐसे रणनीतिक स्थानों पर अपने कारखाने (फैक्ट्री) स्थापित करना चाहती थीं।
उत्तर:
(क) ग्यारहवीं सदी में
(ख) ख्वाजा मुइनुउद्दीन चिश्ती
(ग) विजयनगर
(घ) मसूलीपट्टनम।
उत्तर:
(क) सही (शिलालेख में कुंजरमल्लन राजराजपेरुन्थच्चन का नाम मिलता है।)
(ख) गलत (सौदागर डाकुओं के भय से सुरक्षा के लिए काफिलों में यात्रा करते थे।)
(ग) गलत (काबुल घोड़ों के व्यापार का मुख्य केंद्र था। हाथियों का व्यापार दक्षिण भारत से होता था।)
(घ) गलत (सूरत अरब सागर के तट पर स्थित था, बंगाल की खाड़ी पर नहीं।)
उत्तर: तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति का मुख्य स्रोत कावेरी नदी थी। इसके अलावा, नगर में कुएँ, तालाब और जलाशय बनाए गए थे। शासकों द्वारा बनवाई गई एक व्यवस्थित जल-निकासी और वितरण प्रणाली के माध्यम से नगर के विभिन्न भागों, खासकर मंदिर परिसर और राजमहलों तक पानी पहुँचाया जाता था।
उत्तर: 'ब्लैक टाउन्स' वे क्षेत्र थे जहाँ भारतीय निवासी रहते थे। इनमें स्थानीय व्यापारी, दस्तकार, बुनकर, कारीगर, मजदूर, क्लर्क और अन्य सेवाकर्मी शामिल थे। ये इलाके यूरोपीय लोगों के रहने वाले 'व्हाइट टाउन्स' से अलग होते थे और अक्सर इनकी सुविधाएँ और साफ-सफाई भी कमतर होती थी।
उत्तर: मंदिरों के आस-पास नगरों के विकसित होने के प्रमुख कारण थे:
1. आर्थिक गतिविधियों का केंद्र: मंदिरों के पास जमा धन को व्यापार और उधार के काम में लगाया जाता था, जिससे आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ीं।
2. रोजगार का सृजन: मंदिर के निर्माण व रखरखाव के लिए शिल्पकार, मजदूर, पुजारी और प्रशासक की जरूरत होती थी, जो वहीं बसने लगे।
3. तीर्थयात्रियों की आवश्यकताएँ: आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भोजन, आवास, परिवहन और अन्य सेवाएँ प्रदान करने वाले लोग (जैसे दुकानदार, धर्मशाला चलाने वाले) मंदिर के पास ही रहने लगे।
4. सांस्कृतिक केंद्र: मंदिर संगीत, नृत्य, शिक्षा और उत्सवों का केंद्र बन गए, जिससे लोगों का आकर्षण बढ़ा और स्थायी बस्तियाँ बसीं।
उत्तर: शिल्पीजन मंदिरों के निर्माण और रखरखाव के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण थे:
1. विशेषज्ञता: मंदिर बनाने के लिए स्थपति (वास्तुकार), राजमिस्त्री, सुनार, काष्ठकार (बढ़ई), लोहार और मूर्तिकार जैसे विभिन्न कौशल वाले शिल्पियों की आवश्यकता होती थी।
2. कलात्मक योगदान: मंदिरों की सुंदर नक्काशी, मूर्तियाँ, गुंबद और स्तंभ इन्हीं शिल्पकारों के हाथों की कला थे।
3. निरंतर रखरखाव: समय-समय पर मंदिरों की मरम्मत, सफाई और सजावट का काम भी इन शिल्पियों द्वारा ही किया जाता था, जिससे मंदिर सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रह सके।
उत्तर: लोग दूर-दूर से सूरत आते थे क्योंकि यह एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह और व्यापारिक नगर था:
1. व्यापार का केंद्र: यहाँ से यूरोप, फारस और अरब के देशों के साथ सूती वस्त्र, नील, मसालों आदि का व्यापार होता था।
2. हज का प्रस्थान द्वार: सूरत को 'मक्का का द्वार' कहा जाता था, क्योंकि बहुत से मुस्लिम हज यात्री यहीं से जहाज पर सवार होकर मक्का जाते थे।
3. विविध बाजार: यहाँ हीरे-जवाहरात, सोने-चाँदी के गहने और बहुमूल्य वस्तुओं के बाजार थे, जो व्यापारियों को आकर्षित करते थे।
4. शिल्प उत्पादन: सूरत और उसके आसपास के क्षेत्रों में बुनकरों और रंगरेजों द्वारा उच्च गुणवत्ता के कपड़े बनाए जाते थे।
उत्तर: कलकत्ता और तंजावूर के शिल्प उत्पादन में निम्नलिखित भिन्नताएँ थीं:
कलकत्ता (औपनिवेशिक काल का नगर):
- यहाँ शिल्प उत्पादन मुख्यतः यूरोपीय व्यापारिक माँग के अनुसार होता था।
- मुख्य उत्पाद सूती वस्त्र, रेशम, जूट और अफीम थे, जिनका निर्यात किया जाता था।
- उत्पादन बड़े पैमाने पर और नए औद्योगिक तरीकों से होने लगा था।
तंजावूर (प्राचीन मंदिर नगर):
- यहाँ शिल्प उत्पादन स्थानीय राजदरबार, मंदिर और समुदाय की जरूरतों के लिए होता था।
- मुख्य उत्पाद कांस्य मूर्तियाँ, मंदिर के उपकरण, पीतल के बर्तन, हथियार और हाथ से बुने हुए वस्त्र थे।
- उत्पादन पारंपरिक कारीगरी और छोटे पैमाने पर होता था, जिसमें कलात्मकता पर जोर दिया जाता था।
उत्तर: सूरत (ऐतिहासिक नगर) और एक आधुनिक छोटे कस्बे (जैसे - मोदीनगर) की तुलना
समानताएँ:
1. दोनों ही व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र हैं।
2. दोनों में विभिन्न पेशों और जातियों के लोग एक साथ रहते हैं।
3. दोनों में बाजार, दुकानें और सेवा प्रदाता मौजूद हैं।
अंतर:
1. आकार: सूरत एक विशाल महानगर और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह था, जबकि एक कस्बा सीमित क्षेत्र और आबादी वाला होता है।
2. व्यापार का दायरा: सूरत का व्यापार वैश्विक था, जबकि कस्बे का व्यापार मुख्यतः स्थानीय या क्षेत्रीय होता है।
3. शासन: सूरत पर राजाओं और मुगल सूबेदारों का शासन था, जबकि आज के कस्बे का प्रशासन नगर पालिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत होता है।
4. यातायात: सूरत में यातायात के लिए जहाज, ऊँट और बैलगाड़ी प्रमुख थे, जबकि आज के कस्बे में मोटरगाड़ियाँ, बाइक और सार्वजनिक वाहन हैं।
उत्तर: प्राचीन और मध्यकालीन सौदागरों की समस्याएँ:
1. यात्रा का जोखिम: लंबी यात्राओं में डाकुओं, जंगली जानवरों और प्रतिकूल मौसम का खतरा बना रहता था।
2. करों का बोझ: विभिन्न राज्यों की सीमाओं पर चुंगी कर, रास्ता कर और अन्य शुल्क देना पड़ता था, जिससे मुनाफा कम हो जाता था।
3. अवसंरचना की कमी: अच्छी सड़कें, पुल और विश्राम स्थल की कमी थी।
4. भाषा और संस्कृति का अंतर: अलग-अलग क्षेत्रों में भाषा और रीति-रिवाजों को समझना एक चुनौती थी।
क्या आज भी ऐसी समस्याएँ हैं? हाँ, कुछ समस्याएँ आज भी हैं, लेकिन उनका स्वरूप बदल गया है:
- आज भी व्यापारियों को विभिन्न कर (जीएसटी, आयकर आदि) चुकाने पड़ते हैं।
- यातायात की समस्या, दुर्घटनाओं का खतरा और ईंधन की लागत आधुनिक चुनौतियाँ हैं।
- कागजी कार्रवाई, लाइसेंस और नियम-कानूनों की जटिलता एक नई समस्या है।
- हालाँकि, डकैती का खतरा कम हुआ है, लेकिन साइबर धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध नए रूप में सामने आए हैं।
UP Board class 7 History 6. नगर व्यापारी और शिल्पीजन Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 7 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board class 7 History 6. नगर व्यापारी और शिल्पीजन textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 7 History 6. नगर व्यापारी और शिल्पीजन :
There are various features of UP Board class 7 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.