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UP Board class 7 History (10. अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन) solution PDF

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UP Board class 7 History (10. अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन) solution

UP Board class 7 History 10. अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 7 History (हमारे अतीत) – अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन

1. औरंगजेब के शासनकाल में किन-किन लोगों ने मुगल सत्ता को सबसे लम्बे समय तक चुनौती दी? (एन०्सी०ई०आरगन्टी० पाठ्यक्रम पुस्तक, पेज-139)

उत्तर: औरंगजेब के लंबे शासनकाल के दौरान मुगल सत्ता को कई क्षेत्रों से चुनौतियाँ मिलीं। उत्तर भारत में सिक्खों, जाटों और सतनामियों ने विद्रोह किया। उत्तर-पूर्व में अहोम लोगों ने और दक्कन में मराठों ने ज़बरदस्त विरोध किया। इनमें से मराठों ने सबसे लंबे समय तक और सबसे प्रबल चुनौती प्रस्तुत की, जिससे मुगल संसाधन कमज़ोर हो गए।

2. अपने राज्य को सुदृढ़ करने की कोशिशों में मुगल सूबेदार दीवान के कार्यालय पर भी क्‍यों नियंत्रण जमाना चाहते थे? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यक्रम पुस्तक, पेज-144)

उत्तर: दीवान का कार्यालय राज्य की आर्थिक व्यवस्था का केंद्र था। दीवान ही विभिन्न क्षेत्रों से कर (राजस्व) वसूल करता था और राजकोष का प्रबंधन करता था। किसी भी राज्य को मज़बूत बनाने के लिए धन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, मुगल सूबेदार जब अपनी शक्ति बढ़ाना चाहते थे, तो वे सेना पर नियंत्रण के साथ-साथ दीवान के कार्यालय पर भी नियंत्रण स्थापित करना चाहते थे, ताकि राजस्व सीधे उनके हाथ में आ सके और वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।

3. खालसा से क्या अभिप्राय है? (एन०सी०ई०आरग्टी० पाठ्यक्रम पुस्तक, पेज-148)

उत्तर: खालसा शब्द का शाब्दिक अर्थ "शुद्ध" है। इसका अर्थ है ऐसा समुदाय जो शुद्ध आचरण और निडर विश्वास वाला हो। सन 1699 में, गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की। इस पंथ में शामिल होने वाले सिखों को पाँच ककार (केश, कंघा, कड़ा, किरपान, कच्छैरा) धारण करने और सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की शपथ दिलाई गई। खालसा पंथ ने सिखों को एक सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में संगठित किया।

प्रश्न-अभ्यास (पाठ्यपुस्तक से)

फिर से याद करें

1. निम्नलिखित में मेल बैठाएँ :

स्तंभ (क) स्तंभ (ख)
सूबेदार प्रांतीय गवर्नर
फ़ौजदार एक मुगल सैन्य कमांडर
इजारादार एक राजस्व कृषक (कर वसूली का ठेकेदार)
मिस्ल सिख योद्धाओं का समूह
चौथ मराठों द्वारा लगाया गया कर
कुनबी मराठा कृषक योद्धा
उमरा उच्च अभिजात (मुगल दरबारी)

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें :

(क) औरंगजेब ने दक्कन में एक लंबी लड़ाई लड़ी।
(ख) उमरा और जागीरदार मुगल साम्राज्य के शक्तिशाली अंग थे।
(ग) आसफ़ जाह ने हैदराबाद राज्य की स्थापना 18वीं शताब्दी में की।
(घ) अवध राज्य का संस्थापक सआदत खाँ था।

3. बताएँ सही या गलत :

(क) नादिरशाह ने बंगाल पर आक्रमण किया। (गलत – नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया था।)
(ख) सवाई राजा जयसिंह इन्दौर का शासक था। (गलत – सवाई राजा जयसिंह आमेर/जयपुर के शासक थे।)
(ग) गुरु गोविंद सिंह सिक्‍्खों के दसवें गुरु थे। (सही)
(घ) पुणे अठारहवीं शताब्दी में मराठों की राजधानी बना। (सही)

4. सआदत ख़ान के पास कौन-कौन से पद थे ?

उत्तर: अवध के संस्थापक सआदत ख़ान के पास निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण पद थे:
1. सूबेदारी – प्रांत का गवर्नर बनना।
2. फ़ौजदारी – सैन्य कमांडर का दायित्व संभालना।
3. दीवानी – राजस्व और वित्तीय मामलों का प्रमुख बनना।
इन तीनों पदों को मिलाकर उसने अवध में एक शक्तिशाली और अर्ध-स्वतंत्र राज्य की नींव रखी।

आइए विचार करें

5. अवध और बंगाल के नवाबों ने जागीरदारी प्रथा को हटाने की कोशिश क्यों की?

उत्तर: अवध और बंगाल के नवाबों ने निम्नलिखित कारणों से जागीरदारी प्रथा को हटाने या कम करने की कोशिश की:
1. मुगल सम्राट के प्रभाव को कम करके अपनी स्वायत्तता (आज़ादी) बढ़ाना चाहते थे, क्योंकि जागीरदार अक्सर मुगलों के प्रति वफादार रहते थे।
2. राजस्व (कर) का पुनर्निर्धारण करना और सीधे किसानों से कर वसूल करके आय बढ़ाना चाहते थे।
3. अपने विश्वसनीय लोगों और सैनिकों को सीधे वेतन (नकद) देना चाहते थे, ताकि उन पर नियंत्रण रख सकें।
4. जागीरदारों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी और राजस्व छिपाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना चाहते थे।

6. अठारहवीं शताब्दी में सिक्‍खों को किस प्रकार संगठित किया गया?

उत्तर: अठारहवीं शताब्दी में सिक्खों ने निम्न तरीके से अपना संगठन मज़बूत किया:
1. सबसे पहले उन्होंने छोटे-छोटे जत्थों (दलों) का गठन किया।
2. बाद में, इन जत्थों ने मिलकर बड़ी इकाइयाँ बनाईं, जिन्हें मिस्ल कहा गया। प्रत्येक मिस्ल का अपना एक नेता होता था।
3. इन विभिन्न मिस्लों की संयुक्त सेना को "दल खालसा" कहा जाता था।
4. दल खालसा बैसाखी और दीवाली के अवसर पर अमृतसर में इकट्ठा होता था और सामूहिक निर्णय लेता था, जिन्हें "गुरमत्ता" कहते थे।
5. उन्होंने राखी व्यवस्था भी शुरू की, जिसमें किसानों की उपज का 20% कर लेकर उन्हें सैन्य संरक्षण दिया जाता था।

7. मराठा शासक दक्‍्कन के पार विस्तार क्‍यों करना चाहते थे?

उत्तर: मराठा शासक निम्नलिखित उद्देश्यों से दक्कन के पार (उत्तर भारत की ओर) अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहते थे:
1. संसाधन जुटाना: उत्तरी भारत के उपजाऊ और समृद्ध क्षेत्रों से अधिक धन और संसाधन प्राप्त करके अपनी विशाल सेना का खर्च वहन करना।
2. कर वसूली: विभिन्न क्षेत्रों से चौथ (कुल राजस्व का 25%) और सरदेशमुखी (अतिरिक्त 10%) वसूल कर आय बढ़ाना।
3. राजनीतिक प्रभुत्व: एक विशाल क्षेत्र पर शासन करके भारत की राजनीति में मुख्य शक्ति बनना और मुगल साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित होना।
4. सैन्य गौरव: अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करना और नए क्षेत्र जीतकर मराठा सरदारों को संतुष्ट करना।

8. आसफजाह ने अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के लिए क्या-क्या नीतियाँ अपनाई?

उत्तर: हैदराबाद राज्य के संस्थापक आसफ़ जाह (चिन किलिच खान) ने अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए ये नीतियाँ अपनाईं:
1. उन्होंने अपने लिए कुशल सैनिकों और प्रशासकों को उत्तरी भारत से बुलाया, जो उनके प्रति वफादार थे।
2. उन्होंने नए मनसबदार नियुक्त किए और उन्हें जागीरें दीं, ताकि एक नई वफादार अभिजात वर्ग की रचना हो सके।
3. उन्होंने कूटनीति का सहारा लिया। पश्चिम में मराठों के ख़तरे से बचने और पूर्वी पठार के स्वतंत्र तेलुगु सेनानायकों (नायकों) को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने समझौते और सैन्य अभियान दोनों चलाए।
4. उन्होंने हैदराबाद को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित किया, हालाँकि औपचारिक रूप से मुगल साम्राज्य का हिस्सा बने रहे।

9. क्या आपके विचार से आज महाजन और बैंकर उसी तरह का प्रभाव रखते हैं, जैसाकिं वे अठारहवीं शताब्दी में रखा करते थे?

उत्तर: नहीं, आज के बैंकर और वित्तीय संस्थान अठारहवीं शताब्दी के महाजनों जैसा प्रत्यक्ष राजनीतिक प्रभाव नहीं रखते। अठारहवीं शताब्दी में:
1. राज्य और शासक युद्ध और प्रशासन के लिए धन उधार लेने हेतु सीधे महाजनों और साहूकारों पर निर्भर थे।
2. महाजन जमीन बंधक रखकर ऋण देते थे और कई बार बड़े ज़मींदार बन जाते थे, जिससे उनकी सामाजिक-राजनीतिक ताकत बढ़ती थी।
3. वे राजस्व वसूली के ठेके (इजारा) भी लेते थे, जिससे उनका प्रशासन पर सीधा नियंत्रण हो जाता था।
आज: आजकल बैंक और वित्तीय संस्थान एक विनियमित (रेगुलेटेड) व्यवस्था के तहत काम करते हैं। वे सरकार से ऋण दे सकते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों को सीधे नियंत्रित नहीं करते। आज की अर्थव्यवस्था जटिल है और सरकार के पास राजस्व के अन्य स्रोत (जैसे कर) हैं, जिससे वह वित्तीय संस्थानों पर उतनी निर्भर नहीं है।

10. क्या अध्याय में उल्लिखित कोई भी राज्य आपके अपने प्रांत में विकसित हुए थे? यदि हाँ, तो आपके विचार से अठारहवीं शताब्दी का जनजीवन आगे इक्कीसवीं शताब्दी के जनजीवन से किस रूप में भिन्‍न था?

उत्तर: (छात्र स्वयं करें। यह एक विचारात्मक प्रश्न है।)
सुझाव: यदि आप उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब या तेलंगाना आदि से हैं, तो आप अवध, बंगाल, मराठा, सिख या हैदराबाद राज्य का उल्लेख कर सकते हैं। अठारहवीं शताब्दी के जनजीवन और आज के जीवन में अंतर बताते हुए आप ये बिंदु लिख सकते हैं: यातायात और संचार के साधन, शिक्षा का प्रसार, चिकित्सा सुविधाएँ, तकनीक, लोकतांत्रिक अधिकार, सामाजिक ढाँचा और आजीविका के साधन।

आइए करके देखें

11. अवध, बंगाल या हैदराबाद में से किसी एक की वास्तुकला और नए क्षेत्रीय दरबारों के साथ जुड़ी संस्कृति के बारे में कुछ और पता लगाएँ।

उत्तर: (छात्र स्वयं करें।)
सुझाव: अवध (लखनऊ) की वास्तुकला के लिए भूल-भुलैया, बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, रूमी दरवाज़ा और संस्कृति के लिए कथक नृत्य, शायरी (मुशायरा), और नवाबी रहन-सहन के बारे में शोध करें।

12. राजपूतों, जाटों, सिक्‍्खों अथवा मराठों में से किसी एक समूह के शासकों के बारे में कुछ और कहानियों का पता लगाएँ।

उत्तर: (छात्र स्वयं करें।)
सुझाव: सिखों के लिए बंदा सिंह बहादुर, महाराजा रणजीत सिंह; मराठों के लिए ताराबाई, महादजी शिंदे; जाटों के लिए सूरजमल; या राजपूतों के लिए मिर्जा राजा जयसिंह की कहानियाँ पढ़ सकते हैं।

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Other Chapters of class 7 History
1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल
2. नये राजा और उनके राज्य
3. दिल्ली के सुलतान
4. मुग़्ल साम्राज्य
5. शासक और इमारतें
6. नगर व्यापारी और शिल्पीजन
7. जनजातियाँ खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय
8. ईश्वर से अनुराग
9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण
10. अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन
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