UP Board class 7 History 10. अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: औरंगजेब के लंबे शासनकाल के दौरान मुगल सत्ता को कई क्षेत्रों से चुनौतियाँ मिलीं। उत्तर भारत में सिक्खों, जाटों और सतनामियों ने विद्रोह किया। उत्तर-पूर्व में अहोम लोगों ने और दक्कन में मराठों ने ज़बरदस्त विरोध किया। इनमें से मराठों ने सबसे लंबे समय तक और सबसे प्रबल चुनौती प्रस्तुत की, जिससे मुगल संसाधन कमज़ोर हो गए।
उत्तर: दीवान का कार्यालय राज्य की आर्थिक व्यवस्था का केंद्र था। दीवान ही विभिन्न क्षेत्रों से कर (राजस्व) वसूल करता था और राजकोष का प्रबंधन करता था। किसी भी राज्य को मज़बूत बनाने के लिए धन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, मुगल सूबेदार जब अपनी शक्ति बढ़ाना चाहते थे, तो वे सेना पर नियंत्रण के साथ-साथ दीवान के कार्यालय पर भी नियंत्रण स्थापित करना चाहते थे, ताकि राजस्व सीधे उनके हाथ में आ सके और वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
उत्तर: खालसा शब्द का शाब्दिक अर्थ "शुद्ध" है। इसका अर्थ है ऐसा समुदाय जो शुद्ध आचरण और निडर विश्वास वाला हो। सन 1699 में, गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की। इस पंथ में शामिल होने वाले सिखों को पाँच ककार (केश, कंघा, कड़ा, किरपान, कच्छैरा) धारण करने और सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की शपथ दिलाई गई। खालसा पंथ ने सिखों को एक सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में संगठित किया।
| स्तंभ (क) | स्तंभ (ख) |
|---|---|
| सूबेदार | प्रांतीय गवर्नर |
| फ़ौजदार | एक मुगल सैन्य कमांडर |
| इजारादार | एक राजस्व कृषक (कर वसूली का ठेकेदार) |
| मिस्ल | सिख योद्धाओं का समूह |
| चौथ | मराठों द्वारा लगाया गया कर |
| कुनबी | मराठा कृषक योद्धा |
| उमरा | उच्च अभिजात (मुगल दरबारी) |
(क) औरंगजेब ने दक्कन में एक लंबी लड़ाई लड़ी।
(ख) उमरा और जागीरदार मुगल साम्राज्य के शक्तिशाली अंग थे।
(ग) आसफ़ जाह ने हैदराबाद राज्य की स्थापना 18वीं शताब्दी में की।
(घ) अवध राज्य का संस्थापक सआदत खाँ था।
(क) नादिरशाह ने बंगाल पर आक्रमण किया। (गलत – नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया था।)
(ख) सवाई राजा जयसिंह इन्दौर का शासक था। (गलत – सवाई राजा जयसिंह आमेर/जयपुर के शासक थे।)
(ग) गुरु गोविंद सिंह सिक््खों के दसवें गुरु थे। (सही)
(घ) पुणे अठारहवीं शताब्दी में मराठों की राजधानी बना। (सही)
उत्तर: अवध के संस्थापक सआदत ख़ान के पास निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण पद थे:
1. सूबेदारी – प्रांत का गवर्नर बनना।
2. फ़ौजदारी – सैन्य कमांडर का दायित्व संभालना।
3. दीवानी – राजस्व और वित्तीय मामलों का प्रमुख बनना।
इन तीनों पदों को मिलाकर उसने अवध में एक शक्तिशाली और अर्ध-स्वतंत्र राज्य की नींव रखी।
उत्तर: अवध और बंगाल के नवाबों ने निम्नलिखित कारणों से जागीरदारी प्रथा को हटाने या कम करने की कोशिश की:
1. मुगल सम्राट के प्रभाव को कम करके अपनी स्वायत्तता (आज़ादी) बढ़ाना चाहते थे, क्योंकि जागीरदार अक्सर मुगलों के प्रति वफादार रहते थे।
2. राजस्व (कर) का पुनर्निर्धारण करना और सीधे किसानों से कर वसूल करके आय बढ़ाना चाहते थे।
3. अपने विश्वसनीय लोगों और सैनिकों को सीधे वेतन (नकद) देना चाहते थे, ताकि उन पर नियंत्रण रख सकें।
4. जागीरदारों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी और राजस्व छिपाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना चाहते थे।
उत्तर: अठारहवीं शताब्दी में सिक्खों ने निम्न तरीके से अपना संगठन मज़बूत किया:
1. सबसे पहले उन्होंने छोटे-छोटे जत्थों (दलों) का गठन किया।
2. बाद में, इन जत्थों ने मिलकर बड़ी इकाइयाँ बनाईं, जिन्हें मिस्ल कहा गया। प्रत्येक मिस्ल का अपना एक नेता होता था।
3. इन विभिन्न मिस्लों की संयुक्त सेना को "दल खालसा" कहा जाता था।
4. दल खालसा बैसाखी और दीवाली के अवसर पर अमृतसर में इकट्ठा होता था और सामूहिक निर्णय लेता था, जिन्हें "गुरमत्ता" कहते थे।
5. उन्होंने राखी व्यवस्था भी शुरू की, जिसमें किसानों की उपज का 20% कर लेकर उन्हें सैन्य संरक्षण दिया जाता था।
उत्तर: मराठा शासक निम्नलिखित उद्देश्यों से दक्कन के पार (उत्तर भारत की ओर) अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहते थे:
1. संसाधन जुटाना: उत्तरी भारत के उपजाऊ और समृद्ध क्षेत्रों से अधिक धन और संसाधन प्राप्त करके अपनी विशाल सेना का खर्च वहन करना।
2. कर वसूली: विभिन्न क्षेत्रों से चौथ (कुल राजस्व का 25%) और सरदेशमुखी (अतिरिक्त 10%) वसूल कर आय बढ़ाना।
3. राजनीतिक प्रभुत्व: एक विशाल क्षेत्र पर शासन करके भारत की राजनीति में मुख्य शक्ति बनना और मुगल साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित होना।
4. सैन्य गौरव: अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करना और नए क्षेत्र जीतकर मराठा सरदारों को संतुष्ट करना।
उत्तर: हैदराबाद राज्य के संस्थापक आसफ़ जाह (चिन किलिच खान) ने अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए ये नीतियाँ अपनाईं:
1. उन्होंने अपने लिए कुशल सैनिकों और प्रशासकों को उत्तरी भारत से बुलाया, जो उनके प्रति वफादार थे।
2. उन्होंने नए मनसबदार नियुक्त किए और उन्हें जागीरें दीं, ताकि एक नई वफादार अभिजात वर्ग की रचना हो सके।
3. उन्होंने कूटनीति का सहारा लिया। पश्चिम में मराठों के ख़तरे से बचने और पूर्वी पठार के स्वतंत्र तेलुगु सेनानायकों (नायकों) को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने समझौते और सैन्य अभियान दोनों चलाए।
4. उन्होंने हैदराबाद को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित किया, हालाँकि औपचारिक रूप से मुगल साम्राज्य का हिस्सा बने रहे।
उत्तर: नहीं, आज के बैंकर और वित्तीय संस्थान अठारहवीं शताब्दी के महाजनों जैसा प्रत्यक्ष राजनीतिक प्रभाव नहीं रखते। अठारहवीं शताब्दी में:
1. राज्य और शासक युद्ध और प्रशासन के लिए धन उधार लेने हेतु सीधे महाजनों और साहूकारों पर निर्भर थे।
2. महाजन जमीन बंधक रखकर ऋण देते थे और कई बार बड़े ज़मींदार बन जाते थे, जिससे उनकी सामाजिक-राजनीतिक ताकत बढ़ती थी।
3. वे राजस्व वसूली के ठेके (इजारा) भी लेते थे, जिससे उनका प्रशासन पर सीधा नियंत्रण हो जाता था।
आज: आजकल बैंक और वित्तीय संस्थान एक विनियमित (रेगुलेटेड) व्यवस्था के तहत काम करते हैं। वे सरकार से ऋण दे सकते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों को सीधे नियंत्रित नहीं करते। आज की अर्थव्यवस्था जटिल है और सरकार के पास राजस्व के अन्य स्रोत (जैसे कर) हैं, जिससे वह वित्तीय संस्थानों पर उतनी निर्भर नहीं है।
उत्तर: (छात्र स्वयं करें। यह एक विचारात्मक प्रश्न है।)
सुझाव: यदि आप उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब या तेलंगाना आदि से हैं, तो आप अवध, बंगाल, मराठा, सिख या हैदराबाद राज्य का उल्लेख कर सकते हैं। अठारहवीं शताब्दी के जनजीवन और आज के जीवन में अंतर बताते हुए आप ये बिंदु लिख सकते हैं: यातायात और संचार के साधन, शिक्षा का प्रसार, चिकित्सा सुविधाएँ, तकनीक, लोकतांत्रिक अधिकार, सामाजिक ढाँचा और आजीविका के साधन।
उत्तर: (छात्र स्वयं करें।)
सुझाव: अवध (लखनऊ) की वास्तुकला के लिए भूल-भुलैया, बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, रूमी दरवाज़ा और संस्कृति के लिए कथक नृत्य, शायरी (मुशायरा), और नवाबी रहन-सहन के बारे में शोध करें।
उत्तर: (छात्र स्वयं करें।)
सुझाव: सिखों के लिए बंदा सिंह बहादुर, महाराजा रणजीत सिंह; मराठों के लिए ताराबाई, महादजी शिंदे; जाटों के लिए सूरजमल; या राजपूतों के लिए मिर्जा राजा जयसिंह की कहानियाँ पढ़ सकते हैं।
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