जनजातियाँ, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय
UP Board Solutions for Class 7 History हमारे अतीत 7
1. उपमहाद्वीप का एक भौतिक मानचित्र लेकर वे इलाके बताइए जहाँ जनजातीय लोग रहते रहे होंगे। (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-92)
उत्तर: उपमहाद्वीप में जनजातीय लोग मुख्यतः पहाड़ी, वनाच्छादित और दुर्गम क्षेत्रों में रहते थे। मानचित्र पर निम्नलिखित क्षेत्रों को चिह्नित किया जा सकता है:
| जनजाति |
निवास क्षेत्र (राज्य) |
| भील, कोली | महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान |
| संथाल | झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा |
| गोंड | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश |
| नागा | नागालैंड |
| खासी | मेघालय |
| मुंडा | झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
| भोटिया | हिमालयी क्षेत्र (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम) |
| बक्करवाल | जम्मू-कश्मीर (खानाबदोश) |
इसके अलावा, उत्तर-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र (बलूच, अफगान), दक्षिण के पठारी एवं वन क्षेत्र (कोरागा, कोया) और उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी अनेक जनजातियाँ निवास करती थीं।
2. पता करें कि आजकल गाँव से शहरों तक अनाज ले जाने का काम कैसे होता है? बंजारों के तौर-तरीकों से यह किन मायनों में भिन्न या समान हैं? (एन०सी०ई०आरग्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-95)
उत्तर:
आजकल गाँव से शहरों तक अनाज ले जाने के तरीके: आज अनाज की ढुलाई आधुनिक परिवहन के साधनों जैसे ट्रकों, रेलगाड़ियों, कभी-कभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों या बड़े वाहनों द्वारा की जाती है। यह एक संगठित और तेज़ प्रक्रिया है जिसमें बड़ी मात्रा में अनाज एक साथ ले जाया जा सकता है।
बंजारों के तरीके से तुलना:
समानताएँ:
- बंजारे और आज के परिवहन दोनों ही व्यापारिक कड़ी का काम करते हैं, जो गाँव के उत्पादक को शहर के उपभोक्ता से जोड़ते हैं।
- दोनों ही लंबी दूरी तय करते हैं।
अंतर:
- साधन: बंजारे बैलों के काफिले (टांडा) का उपयोग करते थे, जबकि आज मोटरयुक्त वाहनों का।
- गति एवं क्षमता: आधुनिक साधन बहुत अधिक तेज़ और ज़्यादा माल ढोने की क्षमता रखते हैं।
- संगठन: बंजारों का काम एक खानाबदोश समुदाय द्वारा चलाया जाता था, जबकि आज यह काम ट्रांसपोर्ट कंपनियों, व्यापारियों या सरकारी एजेंसियों द्वारा होता है।
- लचीलापन: बंजारे पगडंडियों और कठिन रास्तों से भी गुज़र सकते थे, जबकि आज के बड़े वाहनों के लिए पक्की सड़कों की आवश्यकता होती है।
3. चर्चा करें कि मुगल लोग गोंड प्रदेश पर क्यों कब्जा करना चाहते थे? (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-99)
उत्तर: मुगल गोंड प्रदेश, विशेष रूप से गढ़ कटंगा राज्य पर निम्नलिखित कारणों से कब्जा करना चाहते थे:
- आर्थिक समृद्धि: गढ़ कटंगा एक समृद्ध राज्य था। यहाँ घने जंगलों से प्राप्त हाथियों का व्यापार बहुत लाभदायक था। हाथी उस समय सेना की शक्ति और राजसी ठाठ-बाट का प्रतीक थे।
- कृषि योग्य भूमि: इस क्षेत्र में उपजाऊ भूमि थी, जो राजस्व का एक स्थिर स्रोत हो सकती थी।
- रणनीतिक विस्तार: मुगल साम्राज्य का दक्कन (दक्षिण) की ओर विस्तार जारी था। गोंडवाना क्षेत्र पर नियंत्रण दक्कन तक पहुँच के रास्ते को सुरक्षित करने में मददगार होता।
- लूट का माल: गोंड राज्य की दौलत को लूटना मुगल सेना के लिए आकर्षक था। रानी दुर्गावती के शासनकाल में जब मुगलों ने आक्रमण किया और विजय प्राप्त की, तो उन्हें भारी मात्रा में धन-संपदा और हाथियों की प्राप्ति हुई।
4. आपके विचार में मुगलों ने अहोम प्रदेश को जीतने का प्रयास क्यों किया? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-100)
उत्तर: मुगलों द्वारा अहोम प्रदेश (वर्तमान असम) को जीतने के प्रयास के पीछे निम्न कारण थे:
- साम्राज्यवादी विस्तार की नीति: मुगल पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते थे। उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली अहोम राज्य उनकी इस नीति में बाधक था।
- बढ़ती हुई अहोम शक्ति: अहोम एक संगठित और शक्तिशाली राज्य के रूप में उभर रहे थे। उन्होंने पड़ोसी राज्यों को जीतकर अपना विस्तार किया था और आग्नेय अस्त्रों (तोपखाने) में भी माहिर हो गए थे। मुगल ऐसी बढ़ती शक्ति को चुनौती के रूप में देखते थे।
- आर्थिक संसाधन: ब्रह्मपुत्र घाटी एक उपजाऊ क्षेत्र था। यहाँ चावल की भरपूर पैदावार होती थी। साथ ही, क्षेत्र में हाथी और अन्य प्राकृतिक संसाधन भी प्रचुर मात्रा में थे।
- रणनीतिक नियंत्रण: इस क्षेत्र पर नियंत्रण से मुगलों को पूर्वी सीमा सुरक्षित करने और पड़ोसी राज्यों पर दबाव बनाने में मदद मिलती।
प्रश्न-अभ्यास (पाव्यपुस्तक से)
फिर से याद करें
1. निम्नलिखित में मेल बैठाएँ :
उत्तर:
| गढ़ |
दुर्ग |
| टांडा |
बंजारों का कारवाँ (ढुलाई का समूह) |
| श्रमिक |
पाइक (अहोम सेना के सैनिक/श्रमिक) |
| कुल |
खेल (अहोम समाज का वंश/कबीला) |
| सिब सिंह |
अहोम राज्य (एक प्रसिद्ध अहोम शासक) |
| दुर्गावती |
गढ़ कटंगा (गोंड राज्य की वीर रानी) |
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें :
उत्तर:
(क) वर्गों के भीतर पैदा होती नयी जातियाँ श्रेणियाँ कहलाती थीं।
(ख) बुरंजी अहोम लोगों के द्वारा लिखी गई ऐतिहासिक कृतियाँ थीं।
(ग) अकबरनामा ने इस बात का उल्लेख किया है कि गढ़ कटंगा में 70,000 गाँव थे।
(घ) बड़े और ताकतवर होने पर जनजातीय राज्यों ने मंदिर बनवाए और ब्राह्मणों को भूमि-अनुदान दिए।
3. सही या गलत बताइए :
उत्तर:
(क) जनजातीय समाजों के पास समृद्धवाचक परंपराएँ थीं। - सही (उनकी मौखिक परंपराएँ, गीत, कथाएँ समृद्ध थीं।)
(ख) उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में कोई जनजातीय समुदाये नहीं था। - गलत (बलूच, अफगान, खानाबदोश पशुचारी जैसे समुदाय वहाँ थे।)
(ग) गोंड राज्यों में अनेक नगरों को मिलाकर चौरासी बनता था। - गलत (चौरासी गाँवों का एक समूह होता था, न कि नगरों का।)
(घ) भील, उपमहाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में रहते थे। - गलत (भील मुख्यतः मध्य भारत (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश) में रहते थे।)
4. खानाबदोश पशुचारकों और एक जगह बसे हुए खेतिहरों के बीच किस तरह का विनिमय होता था?
उत्तर: खानाबदोश पशुचारकों और स्थायी खेतिहरों के बीच वस्तु विनिमय (सामान के बदले सामान) का संबंध होता था। यह विनिमय दोनों के लिए फायदेमंद था:
- पशुचारक खेतिहरों को दूध, दही, घी, ऊन, चमड़ा और कभी-कभी मांस जैसे पशु उत्पाद देते थे।
- खेतिहर बदले में पशुचारकों को अनाज, कपड़ा, बर्तन, औजार और कभी-कभी चारा भी देते थे।
यह विनिमय अक्सर निश्चित मौसम या मेलों के दौरान होता था। कुछ खानाबदोश समुदाय, जैसे बंजारे, इन उत्पादों को दूर-दराज के शहरी बाजारों तक पहुँचाकर व्यापारिक कड़ी का भी काम करते थे।
आइए समझें
5. अहोम राज्य का प्रशासन कैसे संगठित था?
उत्तर: अहोम राज्य का प्रशासन निम्नलिखित तरीके से संगठित था:
- केन्द्रीकृत शासन: सत्रहवीं शताब्दी तक अहोम प्रशासन एक केन्द्रीय सत्ता (राजा) के अधीन आ चुका था।
- कुल (खेल) व्यवस्था: अहोम समाज कुलों या खेलों में बँटा हुआ था। प्रत्येक कुल के अंतर्गत कई गाँव होते थे, जिनका प्रबंधन उस कुल का प्रमुख करता था।
- भूमि व्यवस्था: अधिकांश लोग किसान थे। राजा सीधे किसान से भूमि नहीं छीन सकता था। ग्राम समुदाय द्वारा ही भूमि आवंटित की जाती थी।
- पाइक प्रथा: राज्य के पास एक स्थायी सेना थी। युद्ध के समय सेना में शामिल होने वाले सैनिकों को पाइक कहा जाता था। शांति के समय ये पाइक अपनी ज़मीन पर खेती करते थे। इस प्रकार राज्य को सेना रखने का खर्च नहीं उठाना पड़ता था।
- बुरंजी: अहोमों ने अपने इतिहास को संस्कृत और स्थानीय भाषा में लिखने की परंपरा शुरू की, जिसे बुरंजी कहा जाता है।
6. वर्ण आधारित समाज में क्या परिवर्तन आए?
उत्तर: मध्यकाल में वर्ण आधारित समाज में निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तन आए:
- जातियों का उदय: प्रत्येक वर्ण के भीतर अनेक छोटी-छोटी जातियाँ (श्रेणियाँ) बनने लगीं। उदाहरण के लिए, ब्राह्मणों में भी अलग-अलग जातियाँ उभरीं।
- नए व्यवसायों को जाति का दर्जा: नए पेशे अपनाने वाले समूहों, जैसे सुनार, लोहार, बढ़ई, राजमिस्त्री, जुलाहे आदि को भी अलग-अलग जातियों के रूप में मान्यता मिलने लगी।
- जनजातियों का समाज में समावेश: कई शक्तिशाली जनजातीय समूहों को हिंदू समाज की जाति व्यवस्था में शामिल कर लिया गया। उनके मुखिया ऊँची जातियों (जैसे राजपूत) में शामिल हो गए, जबकि आम जनजातीय लोगों को अलग जाति का दर्जा दिया गया।
- जाति का मुख्य आधार बनना: धीरे-धीरे जाति ही समाज के संगठन का मुख्य आधार बन गई, न कि केवल चार वर्ण।
7. एक राज्य के रूप में संगठित हो जाने के बाद जनजातीय समाज कैसे बदला?
उत्तर: एक राज्य के रूप में संगठित होने के बाद जनजातीय समाज में निम्नलिखित परिवर्तन आए:
- सामाजिक स्तरीकरण: पहले जहाँ समाज में अधिक समानता थी, वहीं अब शासक वर्ग (राजा, सरदार) और आम जनता के बीच स्पष्ट अंतर आ गया। शासक वर्ग अमीर और शक्तिशाली हो गया।
- जाति व्यवस्था में प्रवेश: शासक वर्ग ने अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए ब्राह्मणों को भूमि दान दी और मंदिर बनवाए। धीरे-धीरे वे हिंदू जाति व्यवस्था (जैसे राजपूत) का हिस्सा बन गए। गुर्जर-प्रतिहार, चंदेल आदि राजवंश इसके उदाहरण हैं।
- कृषि पर बल: खानाबदोश या झूम खेती करने वाले समुदाय स्थायी कृषि की ओर बढ़े, क्योंकि राज्य के लिए नियमित राजस्व का स्रोत ज़रूरी था।
- प्रशासनिक ढाँचा: सरल जनजातीय प्रशासन के स्थान पर एक जटिल प्रशासनिक ढाँचा विकसित हुआ, जिसमें अधिकारी, सेना और कर व्यवस्था शामिल थी।
आइए विचार करें
8. क्या बंजारे लोग अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण थे?
उत्तर: हाँ, बंजारे लोग मध्यकालीन अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे। उनकी भूमिका निम्नलिखित कारणों से थी:
- महत्वपूर्ण व्यापारिक कड़ी: वे ग्रामीण उत्पादक क्षेत्रों और शहरी बाजारों के बीच सेतु का काम करते थे। गाँवों का अनाज, कपास आदि शहरों तक पहुँचाते थे।
- लचीला परिवहन: उनके बैलों के काफिले (टांडा) पहाड़ी और दुर्गम रास्तों से भी गुजर सकते थे, जहाँ बैलगाड़ियों या बड़े वाहनों का चलना मुश्किल था।
- सैन्य सहायता: मुगलों जैसे बड़े साम्राज्यों की सेनाएँ युद्ध के दौरान बंजारों पर निर्भर रहती थीं। बंजारे हजारों बैलों पर लादकर सेना के लिए रसद (अनाज, चारा) पहुँचाते थे।
- बाजारों को जोड़ना: वे विभिन्न क्षेत्रों के बाजारों को आपस में जोड़ते थे, जिससे व्यापार सुचारू रूप से चलता था और क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता टूटती थी।
9. गोंड लोगों का इतिहास, अहोमों के इतिहास से किन मायनों में भिन्न था? क्या कोई समानता भी थी?
उत्तर:
भिन्नताएँ:
| आधार |
गोंड |
अहोम |
| क्षेत्र |
मध्य भारत (गोंडवाना) |
उत्तर-पूर्व भारत (असम) |
| मूल |
भारत के मूल निवासी |
म्यांमार से आकर बसे (13वीं सदी में) |
| सैन्य तकनीक |
पारंपरिक हथियार; आग्नेय अस्त्रों में कमजोर |
आग्नेय अस्त्रों (तोप, बारूद) में माहिर |
| शासन ढाँचा |
कई छोटे राज्य (जैसे गढ़ कटंगा); कम केन्द्रीकृत |
एक संगठित, केन्द्रीकृत राज्य |
| इतिहास लेखन |
मुख्यतः मौखिक परंपरा |
लिखित इतिहास (बुरंजी) की मजबूत परंपरा |
समानताएँ:
- दोनों ही जनजातीय समुदाय थे जिन्होंने शक्तिशाली राज्य स्थापित किए।
- दोनों ने कृषि को अपनाया और स्थायी राज्य बनाए।
- दोनों को मुगल साम्राज्य से संघर्ष करना पड़ा और अंततः उनके प्रभाव में आ गए।
- दोनों के शासक वर्ग ने ब्राह्मणों को प्रश्रय दिया और हिंदू रीति-रिवाज अपनाए।
आइए करके देखें
10. एक मानचित्र पर इस अध्याय में उल्लिखित जनजातियों के इलाकों को चिह्नित करें। किन््हीं दो के संबंध में यह चर्चा करें कि क्या उनके जीविकोपार्जन का तरीका अपने-अपने इलाकों की भौगोलिक विशेषताओं और पर्यावरण के अनुरूप था?
उत्तर: (छात्र स्वयं मानचित्र पर चिह्नित करें।)
चर्चा:
1. भील: भील मुख्यतः पश्चिमी और मध्य भारत के पहाड़ी और वनाच्छादित क्षेत्रों (अरावली, विंध्य, सतपुड़ा) में रहते थे। उनका जीवन पर्यावरण के अनुरूप था:
- झूम खेती: पहाड़ी ढलानों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में झूम (स्थानांतरित) खेती करना उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त था।
- शिकार एवं संग्रहण: घने जंगलों से वे शिकार करते, फल-जड़ियाँ इकट्ठा करते और लकड़ी, गोंद आदि एकत्र करते थे।
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