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UP Board class 7 History (9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण) solution PDF

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UP Board class 7 History (9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण) solution

UP Board class 7 History 9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 7 History (हमारे अतीत) - क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण

1. पता लगाएँ कि पिछले दस सालों में कितने नए राज्य बनाए गए हैं। क्या इनमें से प्रत्येक राज्य एक अलग क्षेत्र है? (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-122)

उत्तर: पिछले दस वर्षों (वर्ष 2000 के आसपास) में भारत में तीन नए राज्य बनाए गए थे: झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड (जिसे पहले उत्तरांचल कहा जाता था)। ये सभी राज्य भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अलग पहचान रखते थे। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र है, जबकि छत्तीसगढ़ एक वन-प्रधान पठारी इलाका है। इसलिए, जब ये बड़े राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) से अलग हुए, तो वास्तव में ये अलग-अलग क्षेत्रीय पहचान वाले क्षेत्रों के रूप में सामने आए।

2. पता लगाएँ कि आपके घर में आप जो भाषा बोलते हैं, उसका लेखन में सर्वप्रथम कब प्रयोग हुआ होगा? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-123)

उत्तर: मान लीजिए हम अपने घर में हिंदी भाषा बोलते हैं। हिंदी की पुरानी रूप, जिसे 'अवधी' या 'ब्रजभाषा' कहा जा सकता है, का साहित्यिक प्रयोग लगभग 8वीं-9वीं शताब्दी से मिलने लगता है। हालाँकि, हिंदी का प्रसिद्ध और प्रमाणिक पहला महाकाव्य 'पृथ्वीराज रासो' (12वीं शताब्दी) माना जाता है, जिसे चंदबरदाई ने लिखा था। इस प्रकार हिंदी का लेखन में प्रयोग लगभग एक हजार वर्ष पुराना है।

3. भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथाकली (केरल), ओडिसी (उड़ीसा), कुचिपुड़ (आन्ध्र प्रदेश), मणिपुरी (मणिपुर) में से किसी एक नृत्य के रूप में अधिक जानकारी प्राप्त करें। (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-127)

उत्तर: कथकली (केरल)
कथकली केरल की एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य-नाटिका है। इसकी विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • इसका नाम दो शब्दों – 'कथा' (कहानी) और 'कली' (नाटक) – से मिलकर बना है, यानी कहानी को नाटक के रूप में प्रस्तुत करना।
  • यह मुख्य रूप से रामायण, महाभारत और पुराणों की कहानियों पर आधारित होता है।
  • इसमें नर्तक भव्य वेशभूषा और जटिल मेकअप (जैसे हरे रंग का चेहरा देवताओं और पीला राक्षसों के लिए) पहनते हैं।
  • नृत्य में चेहरे के भाव (मुद्राएँ), हाथों की संकेत भाषा (हस्त मुद्राएँ) और नेत्रों की गति बहुत महत्वपूर्ण होती है।
  • इसकी संगत ढोल, झांझ और मंजीरा जैसे वाद्य यंत्रों से होती है।

4. आपके विचार से द्वितीय श्रेणी की कृतियाँ लिखित रूप में क्‍यों नहीं रखी जाती थीं? (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-132)

उत्तर: द्वितीय श्रेणी की कृतियाँ (जैसे लोकगीत, कहावतें, लोककथाएँ) मुख्य रूप से मौखिक परंपरा का हिस्सा थीं। इन्हें लिखित रूप में न रखने के कई कारण हो सकते हैं:

  1. इन कृतियों को समाज के एक बड़े वर्ग द्वारा सुन-सुनकर याद कर लिया जाता था और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाया जाता था।
  2. उस समय लिखने के साधन (जैसे कागज, ताड़पत्र) महँगे और सीमित थे, इसलिए उनका उपयोग अधिक महत्वपूर्ण धार्मिक या शासकीय दस्तावेजों के लिए किया जाता था।
  3. लोक साहित्य लचीला होता था, इसमें समय और स्थान के अनुसार बदलाव होते रहते थे, जबकि लिखित रूप स्थिर हो जाता।
  4. इन कृतियों को कम शिक्षित या सामान्य जनता द्वारा रचा और सराहा जाता था, जिनकी पहुँच लिखित संस्कृति तक सीमित थी।

प्रश्न-अभ्यास (पाठ्यपुस्तक से)

फिर से याद करें

1. निम्नलिखित में मेल बैठाएँ :

उत्तर:

स्तंभ (क)स्तंभ (ख)
अनंतवर्मनउड़ीसा
जगन्नाथपुरी
महोदयपुरमकेरल
लीला तिलकमकेरल
मंगलकाव्यबंगाल
कांगड़ा लघुचित्रहिमाचल प्रदेश

2. मणिप्रवालम क्या है? इस भाषा में लिखी पुस्तक का नाम बताएँ।

उत्तर: 'मणिप्रवालम' एक साहित्यिक शैली थी जिसमें संस्कृत और स्थानीय मलयालम भाषा को मिलाकर लिखा जाता था। 'मणि' का अर्थ मोती या रत्न (संस्कृत) और 'प्रवालम' का अर्थ मूँगा (मलयालम) है। इस मिश्रित शैली का उद्देश्य विद्वानों की भाषा (संस्कृत) और आम लोगों की भाषा (मलयालम) के बीच एक सेतु बनाना था। इस शैली में लिखी एक प्रसिद्ध पुस्तक 'लीला तिलकम' है।

3. कत्थक के प्रमुख संरक्षक कौन थे?

उत्तर: कथक नृत्य शैली के प्रमुख संरक्षक विभिन्न राजदरबार थे। राजस्थान के राजपूत शासकों और अवध (लखनऊ) के नवाबों ने इस कला को विशेष संरक्षण दिया। अवध के अंतिम नवाब, वाजिद अली शाह, स्वयं एक कलाप्रेमी थे और उन्होंने कथक को एक उच्च कोटि की शास्त्रीय कला के रूप में विकसित करने में बहुत योगदान दिया।

4. बंगाल के मंदिरों की स्थापत्य कला के महत्त्वपूर्ण लक्षण क्‍या हैं?

उत्तर: बंगाल के मंदिरों की स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. इन मंदिरों की आकृति स्थानीय छप्परदार झोपड़ियों (चाला) से प्रेरित थी, जैसे दो छत वाले (दोचाला) या चार छत वाले (चौचाला) मंदिर।
  2. ये मंदिर आमतौर पर एक वर्गाकार चबूतरे पर बनाए जाते थे।
  3. मंदिरों के भीतरी भाग में अधिक सजावट नहीं होती थी, वे सादे रहते थे।
  4. मंदिरों की बाहरी दीवारें मिट्टी की पट्टियों (टेराकोटा), चित्रकारी या सजावटी टाइलों से अत्यंत सुंदर ढंग से सजाई जाती थीं, जिन पर देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और रोजमर्रा के जीवन के दृश्य उकेरे होते थे।
  5. ये मंदिर अक्सर स्थानीय देवी-देवताओं को समर्पित होते थे, जिनकी पहले झोपड़ियों में पूजा होती थी।

आइए विचार करें

5. चारण-भाटों ने शूरवीरों की उपलब्धियों की उद्घोषणा क्‍यों की?

उत्तर: चारण-भाट मध्यकालीन भारत के कवि और गायक थे। वे शूरवीरों (विशेषकर राजपूत योद्धाओं) की उपलब्धियों का बखान निम्नलिखित कारणों से करते थे:

  1. स्मृति को अमर बनाना: उनके गीतों और काव्यों के माध्यम से शूरवीरों की वीरता और बलिदान की गाथाएँ लोगों के बीच जीवित रहती थीं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती थीं।
  2. समाज को प्रेरित करना: इन गाथाओं को सुनकर युवा पीढ़ी वीरता, स्वाभिमान और देशभक्ति के गुणों से प्रेरित होती थी और उन शूरवीरों का अनुकरण करने के लिए प्रोत्साहित होती थी।
  3. शासक का समर्थन जुटाना: शूरवीरों (जो अक्सर शासक या सामंत होते थे) की प्रशंसा करके, चारण-भाट उनकी वैधता बढ़ाते थे और जनता में उनके प्रति सम्मान पैदा करते थे।

6. हम जनसाधारण की तुलना में शासकों के सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के बारे में बहुत अधिक क्‍यों जानते हैं?

उत्तर: शासक वर्ग के सांस्कृतिक जीवन के बारे में हमें अधिक जानकारी मिलती है, क्योंकि:

  1. स्थायी साक्ष्य: शासकों ने विशाल और स्थायी स्मारक (मंदिर, मस्जिद, महल, किले) बनवाए, जो आज भी मौजूद हैं। इनसे उनकी कला, वास्तुकला और धार्मिक रुचि का पता चलता है।
  2. लिखित दस्तावेज: दरबारी इतिहासकारों, कवियों और यात्रियों ने शासकों के जीवन, उत्सवों और रीति-रिवाजों के बारे में विस्तार से लिखा है। जनसाधारण के बारे में ऐसे विस्तृत विवरण दुर्लभ हैं।
  3. संसाधन और प्रदर्शन: शासकों के पास संसाधन थे, इसलिए वे बड़े सांस्कृतिक आयोजन, नृत्य-संगीत के कार्यक्रम और कला के संरक्षण कर सकते थे, जिनका रिकॉर्ड रखा जाता था। सामान्य जनता की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति मौखिक और स्थानीय स्तर तक सीमित रहती थी।

7. विजेताओं ने पुरी स्थित जगन्नाथ के मंदिर पर नियंत्रण प्राप्त करने के प्रयत्न क्यों किए?

उत्तर: पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर पर नियंत्रण पाने के लिए विजेताओं (जैसे मुगल, मराठे, अंग्रेज) के प्रयासों के पीछे मुख्य कारण राजनीतिक और सामाजिक वैधता हासिल करना था। यह मंदिर केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि उड़ीसा की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक था। मंदिर पर नियंत्रण का मतलब था:

  1. जनता का विश्वास जीतना: स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करके, नए शासक अपने शासन को स्वीकार्य और वैध बना सकते थे।
  2. आर्थिक लाभ: मंदिर के पास विशाल भूसंपत्ति और दान के रूप में आने वाला धन था, जिस पर नियंत्रण फायदेमंद था।
  3. प्रतिष्ठा और अधिकार: जगन्नाथ मंदिर का संरक्षक होने का दावा करके, शासक स्वयं को एक धर्मरक्षक और क्षेत्र के वास्तविक स्वामी के रूप में प्रस्तुत कर सकता था।

8. बंगाल में मंदिर क्यों बनाए गए?

उत्तर: बंगाल में 15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बड़ी संख्या में मंदिर बनाए गए। इसके प्रमुख कारण थे:

  1. सामाजिक-आर्थिक उन्नति: इस काल में बंगाल के कुछ समूहों (जैसे जमींदार, व्यापारी, साहूकार) की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। मंदिर बनवाकर वे अपनी नई समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन करते थे।
  2. धार्मिक भावना और शक्ति प्रदर्शन: मंदिर निर्माण भक्ति भाव का प्रमाण था। साथ ही, शक्तिशाली हो रहे लोग इन भव्य इमारतों के माध्यम से अपना राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी दिखाना चाहते थे।
  3. स्थानीय देवताओं को मान्यता: गाँवों में पूजे जाने वाले स्थानीय देवी-देवताओं को अब भव्य मंदिरों में स्थापित किया जाने लगा, जिससे उनकी मान्यता और बढ़ी।

आइए करके देखें

9. भवनों, प्रदर्शन कलाओं, चित्रकला के विशेष संदर्भ में अपने क्षेत्र की संस्कृति के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लक्षणों/विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर: (छात्र अपने क्षेत्र के आधार पर स्वयं करें। उदाहरण के तौर पर देखें)
उदाहरण: यदि आप राजस्थान से हैं, तो आप लिख सकते हैं – भवन: विशाल किले और हवेलियाँ; प्रदर्शन कला: घूमर नृत्य, कालबेलिया नृत्य; चित्रकला: फड़ चित्रण, मिनिएचर पेंटिंग। इनकी विशेषताएँ बताएँ।

10. क्‍या आप (क) बोलने, (ख) पढ़ने, (ग) लिखने के लिए भिन्न-भिन्न भाषाओं का प्रयोग करते हैं? इनमें से किसी एक भाषा की किसी प्रमुख रचना के बारे में पता लगाएँ और चर्चा करें कि आप इसे रोचक क्‍यों पाते हैं?

उत्तर: (छात्र अपने अनुभव के आधार पर स्वयं करें।)

11. उत्तरी, पश्चिमी, दक्षिणी पूर्वी और मध्य भारत से एक-एक राज्य चुनें। इनमें से प्रत्येक के बारे में उन भोजनों की सूची बनाएँ, जो आमतौर पर सभी के द्वारा खाए जाते हैं। आप उनमें कोई अंतर या समानताएँ पाएँ, तो उन पर प्रकाश डालें

उत्तर: (छात्र स्वयं करें। उदाहरण: उत्तर-पंजाब (मक्की की रोटी, सरसों का साग), पश्चिम-गुजरात (ढोकला, खाखरा), दक्षिण-तमिलनाडु (इडली, डोसा), पूर्व-पश्चिम बंगाल (माछेर झोल, रसगुल्ला), मध्य-मध्य प्रदेश (पोहा, दाल बाफला)। समानता: सभी में दाल और चावल प्रमुख हैं। अंतर: उत्तर में गेहूं और दक्षिण में चावल आधारित व्यंजन प्रमुख हैं।)

12. इनमें से प्रत्येक क्षेत्र से पाँच-पाँच राज्यों की एक-एक अन्य सूची बनाएँ और यह बताएँ कि प्रत्येक राज्य में महिलाओं तथा पुरुषों द्वारा आमतौर पर कौन-से वस्त्र पहने जाते हैं। अपने निष्कर्षों पर चर्चा करें।

उत्तर: (छात्र स्वयं करें। उदाहरण: राजस्थान- महिलाएँ: घाघरा-चोली, ओढ़नी; पुरुष: धोती-कुर्ता, साफा। केरल- महिलाएँ: कासवु साड़ी; पुरुष: मुंडु। आदि। निष्कर्ष: जलवायु और स्थानीय संस्कृति के अनुसार पहनावे में विविधता है, लेकिन कई जगह साड़ी और धोती-कुर्ता सामान्य हैं।)

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Other Chapters of class 7 History
1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल
2. नये राजा और उनके राज्य
3. दिल्ली के सुलतान
4. मुग़्ल साम्राज्य
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6. नगर व्यापारी और शिल्पीजन
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8. ईश्वर से अनुराग
9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण
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