UP Board Class 12 Hindi 16. रशिया सज्जाद शहीर is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- सफ़िया अपने घरवालों से मिलने लाहौर गई थी। वहाँ से लौटते समय उसने सिख बीबी की इच्छा के अनुसार नमक लाने के लिए अपने भाई से सहयोग माँगा, परन्तु भाई ने निम्नलिखित कारणों से मना कर दिया:
उत्तर:- नमक की पुड़िया ले जाने के संबंध में सफ़िया के मन में भयंकर द्वंद्व चल रहा था। वह यह नहीं तय कर पा रही थी कि प्यार के तोहफे के रूप में इस नमक को चोरी-छिपे ले जाए या फिर कस्टम अधिकारियों को दिखाकर और उनकी सहमति से ले जाए।
उत्तर:- कस्टम अधिकारी सफ़िया की देश-प्रेम की भावना से प्रभावित हो गए थे। उन्हें महसूस हुआ कि इंसान चाहे कहीं भी चला जाए, अपना वतन याद आ ही जाता है। सिख बीबी का प्रसंग सुनकर अधिकारी को भी अपने वतन ढाका की याद आ गई। उसकी मन:स्थिति भी सिख बीबी जैसी ही थी – वतन की याद आते ही वह द्रवित हो उठते थे।
उत्तर:- ये उद्गार इस कठोर सामाजिक यथार्थ को प्रस्तुत करते हैं कि देश की सीमाएँ मनुष्य के मन को विभाजित नहीं कर सकतीं। प्रेम और भावनात्मक लगाव को किसी बंधन में नहीं बाँधा जा सकता। राजनीतिक स्तर पर भले ही लोग विस्थापित हो जाएँ, परन्तु भावनात्मक रूप से उनका लगाव अपनी मातृभूमि से बना रहता है।
उत्तर:- सफ़िया के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
उत्तर:- राजनीतिक कारणों से मानचित्र पर रेखा खींचकर देश का विभाजन तो हो जाता है, परन्तु यह विभाजन जनता को भावनात्मक रूप से अपनी मातृभूमि से अलग नहीं कर पाता। पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी, भारतीय कस्टम अधिकारी और सिख बीबी आज भी क्रमशः दिल्ली, ढाका और लाहौर को अपना वतन मानते हैं। पुरानी यादें और लगाव उन्हें हमेशा घेरे रहते हैं। सिख बीबी द्वारा नमक जैसी साधारण चीज़ मँगवाना इसी भावनात्मक जुड़ाव का प्रमाण है। अतः, मानचित्र पर रेखा खींचने भर से ज़मीन और जनता का वास्तविक विभाजन नहीं होता।
उत्तर:- भले ही भारत-पाकिस्तान का राजनीतिक और धार्मिक आधार पर विभाजन हुआ हो, पर दोनों देशों के लोगों के हृदय में आज भी भाईचारा, सौहार्द, स्नेह और सहानुभूति की भावना बनी हुई है। सिख बीबी का लाहौर से लगाव, पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी का दिल्ली को सलाम भेजना और भारतीय कस्टम अधिकारी का ढाका की याद करना – ये सभी उदाहरण दर्शाते हैं कि राजनीतिक तनावों के बीच भी सामाजिक और मानवीय स्तर पर दोनों देशों की जनता के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद बरकरार है।
उत्तर:- जब सफ़िया के भाई ने पुलिस अफसर होने के नाते नमक ले जाने को गैरकानूनी बताया, तब लेखिका ने यह तर्क दिया कि सरकार के कानूनों के अलावा भी मुहब्बत, इंसानियत और मानवीय रिश्तों के कुछ नियम होते हैं, जो अक्सर सरकारी कानूनों से भी ऊपर होते हैं।
उत्तर:- प्रारंभ में भावनाओं में बहकर सफ़िया अपने भाई से नमक ले जाने के लिए तर्क कर रही थी। लेकिन जब उसका आक्रोश शांत हुआ, तो उसने बुद्धिमत्ता से सोच-विचार कर नमक ले जाने का सही तरीका ढूँढना शुरू कर दिया।
उत्तर:- पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी ने सफ़िया से कहा कि प्रेम के आगे कस्टम के सारे कानून बेअसर हो जाते हैं। प्रेम की शक्ति इतनी प्रबल होती है कि वह कानूनी बंधनों को पार कर जाती है। यह कहते हुए अधिकारी ने स्वयं नमक की पुड़िया सफ़िया के बैग में रख दी।
उत्तर:- सफ़िया की लाहौरी नमक वाली बात सुनकर भारतीय कस्टम अधिकारी भावुक हो गया और उसे अपने वतन ढाका की याद आ गई। अपनी मातृभूमि की याद में डूबकर ही उसने यह वाक्य कहा और सिख बीबी की इच्छा का सम्मान किया।
उत्तर:- लाहौर की बात करते हुए सिख बीबी इतनी भावुक हो उठीं कि उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े। ये आँसू उनके सफेद मलमल के दुपट्टे (दूधिया आँचल) पर टपककर लुप्त हो गए। 'सितारे' आँसुओं की बूंदों के लिए प्रयुक्त एक सुंदर रूपक है।
उत्तर:- सफ़िया यह सोच रही थी कि पाकिस्तानी अधिकारी दिल्ली को और भारतीय अधिकारी ढाका को अपना वतन बता रहे हैं, जबकि वे दोनों अलग-अलग देशों में रह रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मन की भावनाएँ और शारीरिक निवास स्थान में कोई सामंजस्य नहीं है। वतन तो मन में बसता है, न कि केवल सीमा के एक ओर।
उत्तर:- वर्तमान संदर्भ में स्थिति में काफी परिवर्तन आ चुका है। विभाजन का दर्द झेलने वाली पीढ़ी अब लगभग समाप्त हो चुकी है। नई पीढ़ी, जिसका जन्म विभाजन के बाद हुआ है, के मन में पुरानी यादें और भावनात्मक लगाव पहले जितना गहरा नहीं है। हालाँकि, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी व्याप्त है। निजी स्वार्थों के चलते रिश्तों में कड़वाहट बनी रहती है। अतः आज संबंधों में मधुरता लाने के लिए सार्थक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
उत्तर:- हाँ, सफ़िया की जगह होने पर मेरी मनःस्थिति भी लगभग वैसी ही होती। मैं भी सीधे तौर पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करता और सफ़िया की तरह ही अपने प्रियजन की इच्छा पूरी करने के लिए लाहौरी नमक लाने का हर संभव प्रयास करता। दूसरों की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान करना मानवीय धर्म है।
उत्तर:- व्यक्तिगत स्तर पर हम निम्नलिखित योगदान दे सकते हैं:
वाक्य (क) "हमारा वतन तो जी लाहौर ही है।"
यहाँ 'ही' के प्रयोग से यह बल मिलता है कि वतन केवल और केवल लाहौर है, कोई और नहीं।
वाक्य (ख) "क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं?"
यहाँ 'ही' के प्रयोग से यह प्रश्न उठता है कि क्या केवल सरकार के ही कानून होते हैं? इससे अन्य प्रकार के कानूनों (जैसे नैतिक कानून) के अस्तित्व की ओर संकेत होता है।
'ही' से बल देने वाले वाक्य:
1. मुझे यही किताब चाहिए।
2. वह कल ही आएगा।
3. यह काम तुम्हें ही करना है।
4. मैंने तो बस इतना ही कहा था।
5. वह घर पर ही बैठा रहता है।
'ही' से प्रश्न/संदेह उत्पन्न करने वाले वाक्य:
1. क्या तुमने यही पढ़ा है?
2. क्या यह सब तुम्हारा ही है?
3. क्या उसने यही कहा था?
4. क्या तुम यहीं रहते हो?
5. क्या यही रास्ता है?
| उर्दू शब्द | हिन्दी रूप / अर्थ |
|---|---|
| मुरौवत | इंसानियत, उदारता |
| आदमियत | मानवता |
| अदीब | साहित्यकार |
| साड़ा | हमारा |
| मायने | अर्थ |
| सरहद | सीमा |
| अक्स | छवि, प्रतिबिम्ब |
| लबोलहजा | बोलने का ढंग |
| नफीस | सुरुचिपूर्ण, बढ़िया |
उत्तर:-
1. वह यों ही चला गया कि पता ही नहीं चला।
2. मैं यों ही बाज़ार जा रहा था कि मित्र मिल गया।
3. पुस्तक यों ही खुल गई कि वह पृष्ठ दिख ही गया।
4. बारिश यों ही शुरू हुई कि सब भीग ही गए।
5. समय यों ही बीत गया कि होश ही नहीं रहा।
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