UP Board Class 12 Hindi 8. तुलसीदास is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- कवितावली में वर्णित छंदों से यह स्पष्ट होता है कि तुलसीदास को अपने युग में व्याप्त आर्थिक विषमताओं का गहरा ज्ञान था। उन्होंने समकालीन समाज का सजीव एवं यथार्थपरक चित्रण किया है, जो आज भी प्रासंगिक लगता है। उनके अनुसार, उस समय लोग बेरोजगारी एवं भूखमरी की समस्या से बुरी तरह परेशान थे। मजदूर, किसान, नौकर, भिखारी आदि सभी तबाही का सामना कर रहे थे। गरीबी इतनी भयानक थी कि लोग अपनी संतान तक को बेचने के लिए विवश थे। सभी ओर विवशता और निराशा का वातावरण था।
उत्तर:- तुलसीदास जी ने कहा है कि पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति रूपी मेघ ही कर सकता है। उनका मानना है कि मनुष्य का जन्म, कर्म और कर्म-फल सब ईश्वर के अधीन हैं। निष्ठा और पुरुषार्थ से मनुष्य की आर्थिक पीड़ा तभी शांत हो सकती है, जब ईश्वर की कृपा हो। अर्थात, सफलता के लिए मेहनत और ईश्वर पर विश्वास दोनों का संतुलन आवश्यक है। पेट की आग बुझाने के लिए की गई मेहनत तभी सफल होती है जब उसमें ईश्वरीय कृपा का सहयोग हो। यह सिद्धांत आज के युग में भी प्रासंगिक है, क्योंकि आस्था और कर्म दोनों मिलकर ही मनुष्य को कठिनाइयों से उबारते हैं।
उत्तर:- तुलसीदास जी ने इस सवैये में अपने बेटे की शादी न करने की बात कही है। यदि वे अपनी बेटी की शादी न करने की बात करते, तो सामाजिक संदर्भ में बड़ा अंतर आ जाता। क्योंकि विवाह के बाद बेटी को अपनी जाति छोड़कर पति की जाति अपनानी पड़ती है, जिससे जातिगत 'बिगाड़' का दोष उसके मायके पर नहीं, बल्कि ससुराल पर लगता। दूसरे, यदि तुलसी अपनी बेटी की शादी ही न करने का निर्णय लेते, तो इसे समाज में और भी गलत समझा जाता, क्योंकि कन्या का विवाह न करना उस समय एक सामाजिक दायित्व माना जाता था। तीसरे, यदि वे किसी अन्य जाति में अपनी बेटी का विवाह करवा देते, तो इससे समाज में जातिगत संघर्ष बढ़ने की संभावना थी। इस प्रकार, 'बेटा' शब्द का प्रयोग करके तुलसी ने सामाजिक आलोचना को सीधे स्वयं पर केंद्रित किया और अपनी बात को अधिक प्रभावशाली ढंग से रखा।
उत्तर:- हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं कि तुलसीदास एक स्वाभिमानी भक्त हृदय के व्यक्ति थे। 'धूत कहौ...' वाले छंद में भक्ति की गहनता और सघनता में उपजे आत्मविश्वास का सजीव चित्रण है, जिससे समाज में व्याप्त जाति-पाँति और दुराग्रहों का तिरस्कार करने का साहस पैदा होता है। वे कहते हैं कि उन्हें संसार के लोगों की चिंता नहीं है कि वे उनके बारे में क्या सोचते हैं। तुलसी राम में एकनिष्ठा एवं समर्पण भाव रखकर समाज में व्याप्त दूषित रीति-रिवाजों का विरोध करते हैं तथा अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि महत्त्व देते हैं। बाहरी दिखावे की सरलता के पीछे उनका दृढ़ आंतरिक स्वाभिमान ही उनकी वास्तविक पहचान है।
उत्तर:- प्रस्तुत पंक्तियाँ रामचरितमानस से ली गई हैं, जहाँ लक्ष्मण के मूर्छित होने पर श्रीराम विलाप कर रहे हैं। राम कहते हैं – हे भाई! तुम मेरे हित के लिए माता-पिता को भी छोड़कर आए और वन में जाड़ा, गर्मी और तूफान सब कुछ सहन किया। तुम्हारा स्वभाव सदा मेरे प्रति कोमल रहा। यदि मुझे पहले से ही यह ज्ञात होता कि वन में आकर मुझे अपने प्रिय भाई से बिछड़ना पड़ेगा, तो मैं पिता के उस वचन को (जिसका पालन मेरा परम कर्तव्य था) कभी न मानता और न ही तुम्हें अपने साथ लाता। इन पंक्तियों में भाई के प्रति गहन प्रेम, पश्चाताप और विरह की वेदना स्पष्ट झलकती है।
उत्तर:- इस दोहे में श्रीराम मूर्छित लक्ष्मण को संबोधित करते हुए अपनी दयनीय दशा का वर्णन कर रहे हैं। वे कहते हैं – हे भाई! तुम्हारे बिना मेरी दशा उस पक्षी के समान हो गई है जिसके पंख न हों, उस साँप के समान जिसके सिर पर मणि न हो और उस हाथी के समान जिसकी सूँड न हो। इसी प्रकार, यदि नियति (भाग्य) मुझे तुम्हारे बिना भी जीवित रखेगी, तो मेरा जीवन भी उतना ही दयनीय और अपूर्ण रहेगा। राम के इन वचनों में भ्रातृ प्रेम की गहनता और बंधु के बिना जीवन की निरर्थकता का मार्मिक चित्रण है।
उत्तर:- इस पंक्ति में तुलसीदास जी समाज की रूढ़ियों और आलोचनाओं से मुक्त होकर अपनी निर्भयता प्रकट करते हैं। वे कहते हैं कि मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि समाज मेरे बारे में क्या सोचता है। मैं भिक्षा माँगकर खाऊँगा, मस्जिद में सो जाऊँगा, और न किसी से कुछ लूँगा न ही किसी को कुछ दूँगा। यहाँ कवि ने सांप्रदायिक सद्भाव और सादगीपूर्ण जीवन का संदेश दिया है। वे श्रीराम के नाम पर निर्भर रहकर भी पूर्णतः स्वाभिमानी और निर्भय जीवन जीने का दृष्टांत प्रस्तुत करते हैं।
उत्तर:- इस पंक्ति में तुलसीदास जी ने समाज में व्याप्त गहरी आर्थिक विषमता और उससे उपजे नैतिक पतन का मार्मिक चित्रण किया है। वे कहते हैं कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग ऊँचे-नीचे, धर्म-अधर्म सभी प्रकार के कर्म करने को तैयार हैं। वे अपनी भूख मिटाने के लिए अपनी संतान (बेटा-बेटी) तक को बेच देते हैं। यहाँ कवि ने गरीबी और भुखमरी की विकट स्थिति को दर्शाया है, जहाँ मनुष्य को अमानवीय कार्य करने के लिए विवश होना पड़ता है। यह चित्रण तत्कालीन युग की कठोर सच्चाई को उजागर करता है।
उत्तर:- हाँ, हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं। लक्ष्मण के वियोग में विलाप करते हुए राम के भाव निस्संदेह एक सामान्य मानव की गहन भावनाओं को दर्शाते हैं। वे कहते हैं कि यदि उन्हें पता होता कि वन में उन्हें भाई से बिछड़ना पड़ेगा, तो वे पिता के वचन का पालन भी नहीं करते। यह कथन एक भाई की असहनीय पीड़ा, पश्चाताप और व्याकुलता को दर्शाता है। यदि यह केवल एक 'लीला' होती, तो इतनी गहन भावुकता और मानवीय कमजोरी का इतना सजीव चित्रण संभव नहीं होता। तुलसीदास ने राम को एक आदर्श भाई के रूप में प्रस्तुत करते हुए भी उनकी मानवीय संवेदनशीलता को बखूबी उकेरा है।
उत्तर:- लक्ष्मण के मूर्छित होने पर सारा वातावरण शोक और करुणा से भर गया था। हनुमान जी के संजीवनी बूटी लेकर लौटने में विलंब हो रहा था, जिससे चिंता और बढ़ गई थी। ठीक उसी निराशाजनक क्षण में हनुमान का संपूर्ण पर्वत के साथ वीरतापूर्वक प्रकट होना, एक नई आशा और उत्साह का संचार करता है। करुण रस से घिरे वातावरण में अचानक हनुमान की वीरता, शक्ति और सफलता के कारण वीर रस का आविर्भाव होता है। यह परिवर्तन दृश्य को गतिशील बनाता है और पाठक/श्रोता के मन में नवीन उत्साह जगाता है।
उत्तर:- भाई के शोक में व्याकुल राम के इस कथन में तत्कालीन पुरुषप्रधान समाज की झलक मिलती है। राम कहते हैं कि स्त्री के लिए प्यारे भाई को खोकर वे अयोध्या कैसे लौटेंगे? स्त्री की हानि से कोई विशेष क्षति नहीं होती, अर्थात स्त्री का विकल्प संभव है पर भाई का नहीं। यह दृष्टिकोण उस युग में स्त्री के प्रति हीन और असम्मानजनक भावना को दर्शाता है, जहाँ नारी को पुरुष के समान अधिकार और महत्त्व नहीं दिया जाता था। हालाँकि, यह राम का व्यक्तिगत विचार न होकर उस समय के प्रचलित सामाजिक मूल्यों का प्रतिबिंब है, जिसे तुलसीदास ने यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत किया है।
उत्तर:- तीनों ही रचनाओं में शोक की गहन अभिव्यक्ति है, परंतु परिस्थिति और संबंध की प्रकृति के कारण उनमें अंतर है।
कालिदास के 'रघुवंश' में राजा अज का शोक: यह पत्नी इंदुमती के अकस्मात निधन पर है। यह शोक प्रेम और साथी के खो जाने की पीड़ा को दर्शाता है, जिसमें एकाकीपन की भावना प्रबल है।
निराला की 'सरोज-स्मृति' में पिता का शोक: यह पुत्री की मृत्यु पर है। इसमें पिता का वियोग, स्नेह और पालन-पोषण के सुख की स्मृतियों का मार्मिक चित्रण है। संतान का शोक अत्यंत गहरा और व्यक्तिगत होता है।
तुलसी के यहाँ राम का भ्रातृशोक: यहाँ लक्ष्मण मृत नहीं, बल्कि मूर्छित हैं। इसलिए राम के विलाप में पीड़ा के साथ-साथ एक आशा और उन्हें बचाने की जद्दोजहद भी शामिल है। यह शोक सहोदर के प्रति स्नेह, साथ और सहयोग के अचानक खो जाने के भय से उपजा है।
निष्कर्षतः, निराला का पितृ-शोक स्थायी विरह के कारण सबसे गहरा प्रतीत होता है, जबकि राम का भ्रातृशोक संकट की घड़ी में उपजी असहायता और भय की मिश्रित भावना को दर्शाता है।
उत्तर:- तुलसीदास के युग और वर्तमान समय में आर्थिक विषमता की स्थिति में दुखद समानता है।
तुलसी का युग: बेरोजगारी, अकाल और गहरी गरीबी के कारण लोग अपनी भूख मिटाने के लिए अनैतिक कार्यों पर उतारू थे। संसाधनों के अभाव में लोग अपनी संतान तक को बेचने को मजबूर थे। समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा था।
वर्तमान युग: आज भी आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और कर्ज के बोझ तले दबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। गरीबी, मानव तस्करी और दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के चलते आज भी बेटियों को बेचने या परित्यक्त करने की घटनाएँ सुनने को मिलती हैं। शहरीकरण और भौतिकवाद के बावजूद, ग्रामीण और urban slums में आज भी भुखमरी और अभाव का जीवन जी रहे लोग हैं।
तुलना: मूल समस्या आर्थिक असुरक्षा और विषमता आज भी वैसी ही बनी हुई है, हालाँकि इसके रूप बदल गए हैं। पहले अकाल प्रमुख कारण था, आज बाजारवाद, कर्ज और आर्थिक नीतियों के दबाव प्रमुख कारण हैं। दोनों ही युगों में गरीबी मनुष्य को नैतिक पतन और अमानवीय कृत्यों की ओर धकेलती है, जो तुलसी की इस पंक्ति को आज भी सत्य सिद्ध करती है।
उत्तर:- तुलसीदास जी ने अपने साहित्य में अनेक छंदों एवं काव्य-रूपों का प्रयोग किया है। उनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
| छंदों के प्रकार | काव्य-रूप के प्रकार |
|---|---|
|
|
UP Board Class 12 Hindi 8. तुलसीदास Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 12 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board Class 12 Hindi 8. तुलसीदास textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 12 Hindi 8. तुलसीदास :
There are various features of UP Board Class 12 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.