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UP Board Class 6 Social Studies (8. ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका) solution PDF

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UP Board Class 6 Social Studies (8. ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका) solution

UP Board Class 6 Social Studies 8. ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका Hindi Medium Solutions - PDF

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ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका

1. ऊपर दी गई तस्वीरों में लोग जो काम करते हुए दिख रहे हैं, उस काम का वर्णन कीजिए। (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-77)

उत्तर: ऊपर दी गई तस्वीरों में लोग विभिन्न प्रकार के काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें से कुछ लोग निर्माण कार्य में लगे हैं, जैसे दीवार बनाना। कुछ लोग छोटा व्यवसाय कर रहे हैं, जैसे रेहड़ी चलाना या दुकानदारी करना। कुछ लोग प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर काम कर रहे हैं, जैसे मछली पकड़ना, फूल तोड़ना या खेतों में कृषि का काम करना। ये सभी ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका चलाने के विभिन्न तरीके दर्शाते हैं।

2. खेती से जुड़े कामों को अलग कीजिए और जो काम खेती से जुड़े हुए नहीं हैं, उनकी एक सूची बनाइए। (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-77)

उत्तर:

(क) खेती से जुड़े काम:

  1. खेतों में हल चलाना, बुवाई करना, सिंचाई करना।
  2. फसल की देखभाल करना, जैसे निराई-गुड़ाई और कीटनाशक छिड़कना।
  3. फसल काटना, जैसे धान, गेहूं की कटाई।
  4. फल और सब्जियाँ तोड़ना।
  5. खलिहान में फसल को साफ करना और भंडारण करना।

(ख) खेती से न जुड़े काम:

  1. रेहड़ी या ठेला चलाकर सामान बेचना।
  2. मकान बनाना या मजदूरी करना (जैसे दीवार बनाना)।
  3. मछली पकड़ना।
  4. दुकान चलाना।
  5. लकड़ी काटना या जंगल से लाना।

3. आपने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कई तरह के काम करते हुए देखा है। उनमें से कुछ का चित्र बनाकर उनके बारे में लिखिए। (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-77)

उत्तर: इस प्रश्न का उत्तर छात्रों को स्वयं करना है। आप ग्रामीण क्षेत्र में देखे गए किसी एक काम, जैसे कुम्हार द्वारा बर्तन बनाना, लोहार द्वारा लोहे का काम करना, बुनकर द्वारा कपड़ा बुनना, नाई द्वारा हजामत बनाना या चरवाहे द्वारा पशु चराने का चित्र बनाकर उसके बारे में संक्षिप्त विवरण लिख सकते हैं।

4. क्या तुलसी को साल भर कमाई के मौके मिलते हैं? ऊपर दिए गए चित्र के आधार पर बताइए। (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-79)

उत्तर: नहीं, तुलसी को साल भर कमाई के मौके नहीं मिलते हैं। चित्र में दिखाए गए कैलेंडर के अनुसार, उसे केवल कुछ विशेष महीनों में ही काम मिलता है। जून में धान की रोपाई, अगस्त में निराई, सितंबर में फिर से निराई और नवंबर में कटाई का काम मिलता है। साल के बाकी आठ-नौ महीनों में उसके पास कोई नियमित काम नहीं होता, जिससे उसकी आय बहुत अनिश्चित और कम रहती है।

5. तुलसी के काम का विवरण दीजिए। यह रमन के काम से कैसे अलग है? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-80 )

उत्तर:
तुलसी का काम: तुलसी एक भूमिहीन खेतिहर मजदूर है। उसका मुख्य काम रामलिंगम जैसे बड़े किसानों के खेतों पर मजदूरी करना है। वह धान की रोपाई, निराई और कटाई जैसे काम करती है। यह काम मौसमी होता है, इसलिए उसे साल भर रोजगार नहीं मिलता। काम न मिलने के दिनों में वह घर के काम, जंगल से लकड़ी लाने और दूर से पानी भरने जैसे काम करती है।

रमन का काम: रमन भी एक मजदूर है, लेकिन वह केवल खेती पर निर्भर नहीं है। वह खेतों में दवाई छिड़कने का काम करता है। जब खेतों में काम नहीं होता, तो वह आस-पास की खान से पत्थर ढोने या नदी से बालू निकालने जैसे अन्य शारीरिक श्रम के काम ढूंढ लेता है। इस तरह, रमन को तुलसी की तुलना में काम के थोड़े अधिक अवसर मिल जाते हैं।

6. तुलसी को अपने काम के लिए बहुत कम पैसा मिलता है। आपकी समझ में खेतों में काम करने वाले मजदूरों को कम पैसे पर काम क्यों करना पड़ता है? (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-80)

उत्तर: खेतों में काम करने वाले मजदूरों को कम पैसे पर काम करना इसलिए पड़ता है क्योंकि:

  1. काम की कमी: उन्हें साल भर नियमित रोजगार नहीं मिलता। काम के लिए उनकी जरूरत केवल बुवाई, निराई और कटाई के समय ही होती है।
  2. विकल्प का अभाव: उनके पास कोई विशेष कौशल या शिक्षा नहीं होती, जिससे वे दूसरा काम पा सकें।
  3. आपस में प्रतिस्पर्धा: गाँव में ऐसे मजदूरों की संख्या अधिक होती है, इसलिए अगर एक मजदूर अधिक मजदूरी माँगे तो किसान किसी दूसरे मजदूर से काम करवा लेता है।
  4. आर्थिक मजबूरी: उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर होती है कि तुरंत कमाई की जरूरत के कारण वे कम मजदूरी पर भी काम करने को मजबूर हो जाते हैं।

7. आपके क्षेत्र में या पास के गाँव में कौन-सी फ़सलें उगाई जाती हैं? वहाँ खेतिहर मज़दूर किस तरह का काम करते हैं? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-80)

उत्तर: यह प्रश्न छात्रों को अपने क्षेत्र के अनुसार स्वयं करना है। सामान्य तौर पर, भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं, जैसे धान, गेहूँ, गन्ना, कपास, दलहन, तिलहन, सब्जियाँ और फल। खेतिहर मजदूर इन फसलों की बुवाई, रोपाई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, कीटनाशक छिड़काव, कटाई, मड़ाई और भंडारण जैसे सभी कामों में हाथ बंटाते हैं।

8. अगर तुलसी के पास खेती की जमीन होती तो उसकी कमाई यानी आजीविका के तरीके कैसे अलग होते? चर्चा कीजिए (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-80)

उत्तर: यदि तुलसी के पास खेती की अपनी जमीन होती, तो उसकी आजीविका पूरी तरह बदल जाती:

  1. वह दूसरों के खेतों पर मजदूरी करने के बजाय अपने खेत पर काम करती, जिससे उसे अधिक आत्मसम्मान और स्वतंत्रता मिलती।
  2. पैदा होने वाली पूरी फसल पर उसका और उसके परिवार का अधिकार होता। वह फसल बेचकर या घर में रखकर अपनी आय बढ़ा सकती थी।
  3. उसे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए कम मजदूरी पर काम करने की मजबूरी नहीं रहती।
  4. फसल कटाई जैसे व्यस्त समय में वह दूसरे मजदूरों को काम पर रख सकती थी, जिससे गाँव में रोजगार भी पैदा होता।
  5. उसकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ जाती और वह व्यापारियों से उधार लेने की जरूरत से भी काफी हद तक बच जाती।

9. शेखर का परिवार क्‍या काम करता है? आपके विचार से शेखर दूसरे मज़दूरों को अपने खेत पर काम करने के लिए क्‍यों नहीं लगाता? (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-81)

उत्तर: शेखर का परिवार एक छोटा किसान परिवार है जिसके पास केवल दो एकड़ जमीन है। वे सारा काम- खेत जोतना, बुवाई करना, सिंचाई करना, निराई-गुड़ाई करना- अपने परिवार के सदस्यों (पत्नी और बच्चों) की मदद से ही कर लेते हैं।

शेखर दूसरे मजदूरों को इसलिए नहीं लगाता क्योंकि:

  1. उसकी जमीन इतनी कम है कि परिवार के सदस्य ही उसका प्रबंधन कर सकते हैं।
  2. मजदूरों को मजदूरी देना उसकी आर्थिक स्थिति पर बोझ डाल देता, क्योंकि उसकी फसल से होने वाली आय पहले से ही सीमित है।
  3. वह अन्य छोटे किसानों के साथ 'सहयोग' या 'अदला-बदली' (जैसे कटाई के समय एक-दूसरे की मदद करना) का रिश्ता बनाए रखता है, जिससे उसे मुफ्त या कम लागत में मदद मिल जाती है।

10. शेखर शहर के बाजार में अपना धान क्‍यों नहीं बेच पाता? (एन०सी०ई०आरण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-81)

उत्तर: शेखर शहर के बाजार में अपना धान नहीं बेच पाता क्योंकि उसने फसल की बुवाई से पहले ही बीज और खाद खरीदने के लिए एक स्थानीय व्यापारी से उधार ले रखा है। उधार लेते समय ही यह शर्त होती है कि फसल तैयार होने पर शेखर उसे उसी व्यापारी को बेचेगा। व्यापारी फसल का दाम बहुत कम रखता है, ताकि शेखर का उधार चुकाने के बाद बहुत कम पैसा बचे। अगर शेखर बाजार में धान बेचने की कोशिश करे तो व्यापारी उस पर दबाव डाल सकता है या भविष्य में उसे उधार देने से मना कर सकता है, जिसकी शेखर जैसे छोटे किसान को हमेशा जरूरत पड़ती है।

11. शेखर की बहन मीना ने भी व्यापारी से उधार लिया था, परंतु वह अपना धान उसको नहीं बेचना चाहती। उसने व्यापारी के एजेंट से कहा कि वह अपना उधार चुका देगी। मीना और व्यापारी के एजेंट के बीच में इसको लेकर क्या बातचीत हुई होगी? दोनों के तकों को लिखिए। (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-81)

उत्तर:
एजेंट: मीना, तुम्हारा धान तैयार हो गया लगता है। हम कल गाड़ी भेज देंगे, तुम तैयार रहना।
मीना: नहीं भैया, मैं इस बार अपना धान शहर के बाजार में ले जाकर बेचूंगी। वहाँ दाम अच्छा मिलेगा।
एजेंट: (गुस्से से) क्या कहा? तुम्हें याद है तुमने बीज और खाद के पैसे हमसे उधार लिए थे! उधार की शर्त यही थी कि फसल हमें ही बेचोगी।
मीना: मैं बाजार से जो अधिक पैसा कमाऊंगी, उसमें से आपका सारा उधार चुका दूंगी, ब्याज सहित।
एजेंट: यह नहीं चलेगा! अगर सब ऐसा करने लगे तो हमारा व्यापार कैसे चलेगा? तुम्हें जरूरत पड़ी थी तो हमने पैसे दिए, बाजार ने नहीं दिए। इसलिए फसल हमें ही बेचनी पड़ेगी।
मीना: लेकिन आप तो बहुत कम दाम देते हैं, इससे मेरा घर नहीं चल पाता।
एजेंट: (धमकी भरे अंदाज में) मीना, अगर तुमने ऐसा किया तो आगे कभी कोई तुम्हें उधार नहीं देगा। सोच लो!

12. शेखर और तुलसी के जीवन में क्या समानताएँ हैं और क्या अंतर है? आपके उत्तर के निम्नलिखित | आधार हो सकते हैं- उनके पास कितनी जमीन है, उनको उधार क्‍यों लेना पड़ता है, उनकी कमाई के साधन क्या हैं और उन्हें दूसरों की जमीन पर काम करने की क्‍या ज़रूरत है। (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-81)

उत्तर: शेखर और तुलसी के जीवन की तुलना:

आधार शेखर (छोटा किसान) तुलसी (भूमिहीन मजदूर)
जमीन उसके पास अपनी दो एकड़ जमीन है। उसके पास अपनी कोई जमीन नहीं है।
उधार लेने का कारण खेती के लिए बीज, खाद और पारिवारिक जरूरतों के लिए व्यापारी से उधार लेना पड़ता है। पारिवारिक आपातकाल (जैसे बीमारी) के समय जमींदार या साहूकार से उधार लेना पड़ता है।
कमाई के साधन मुख्य साधन अपनी जमीन से होने वाली फसल है। साथ ही चावल मिल में काम और गाय का दूध बेचकर अतिरिक्त आय। कमाई का एकमात्र साधन दूसरों के खेतों पर मजदूरी करना है। कोई अन्य स्थायी आय का स्रोत नहीं है।
दूसरों की जमीन पर काम उसे दूसरों की जमीन पर काम करने की जरूरत नहीं है। वह अपने खेत पर ही काम करता है। उसकी आजीविका पूरी तरह दूसरों की जमीन पर काम करने पर निर्भर है। बिना इसके उसका गुजारा नहीं हो सकता।

समानता: दोनों ही गरीबी की स्थिति में जी रहे हैं, दोनों को आर्थिक मजबूरी के कारण उधार लेना पड़ता है, और दोनों की आय अनिश्चित व कम है।

13. रामलिंगम के पास कितनी जमीन है? (एन०्सी०ई०आरण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-82)

उत्तर: रामलिंगम एक बड़ा किसान है। उसके पास कलपट्टू गाँव में लगभग बीस (20) एकड़ जमीन है, जिस पर वह मुख्य रूप से धान की खेती करता है।

14. अपनी जमीन पर उगने वाले धान का वह क्या करता है? (एन०सी०ई०आरण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-82)

उत्तर: रामलिंगम अपनी जमीन पर उगने वाले धान को अपनी ही चावल मिल में भेजता है। वहाँ धान को प्रोसेस करके चावल बनाया जाता है। यह चावल वह आस-पास के कस्बों और शहरों के व्यापारियों को ऊँचे दाम पर बेचता है, जिससे उसे अच्छा मुनाफा होता है।

15. खेती के अलावा उसकी कमाई के और क्या साधन हैं? (एन०्सी०ई०आरण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-82)

उत्तर: खेती के अलावा रामलिंगम की कमाई के अन्य साधन हैं:

  1. चावल मिल: उसकी अपनी एक चावल मिल है, जहाँ न सिर्फ उसकी बल्कि आस-पास के अन्य किसानों का भी धान प्रोसेस किया जाता है।
  2. दुकान: उसके पास बीज और खाद की एक दुकान है, जहाँ से वह छोटे किसानों को सामान बेचता और अक्सर उधार देता है।
  3. साहूकारी: वह गाँव के गरीब लोगों और मजदूरों को ऊँचे ब्याज पर पैसा उधार देता है, जो उसकी आय का एक बड़ा स्रोत है।

16. ऊपर दिए गए ऑकड़ों को देखते हुए क्या आप यह कह सकते हैं कि भारत के अधिकतर किसान गरीब हैं? आपकी राय में इस स्थिति को बदलने के लिए क्या किया जा सकता है? (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-83)

उत्तर: हाँ, आँकड़े बताते हैं कि भारत के अधिकतर किसान गरीब हैं क्योंकि लगभग 80% किसानों के पास बहुत कम जमीन (छोटे और सीमांत किसान) है, जो उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

इस स्थिति को बदलने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. सरकार को छोटे किसानों को सस्ती दर पर बीज, खाद और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
  2. किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य (MSP) सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि वे व्यापारियों के शोषण से बच सकें।
  3. किसानों को कम ब्याज दर पर आसान कर्ज (बैंकों से) मिलना चाहिए, ताकि वे साहूकारों पर निर्भर न रहें।
  4. खेती के अलावा गाँवों में ही अन्य रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए, जैसे डेयरी, मुर्गीपालन, हस्तशिल्प आदि, ताकि खाली समय में भी आय हो सके।
  5. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना भी जरूरी है।

17. शेखर और अरुणा दोनों के ही परिवारों को उधार क्‍यों लेना पड़ता है? आपको उसमें क्या समानताएँ और अंतर दिखते हैं? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-85)

उत्तर:
शेखर के परिवार को उधार लेने का कारण: शेखर एक छोटा किसान है। उसकी दो एकड़ जमीन से मिलने वाली फसल उसके परिवार के पूरे साल के खर्चे के लिए पर्याप्त नहीं होती। फसल बेचकर वह पुराना उधार चुकाता है, लेकिन अगली फसल की बुवाई के लिए फिर से बीज-खाद खरीदने हेतु उसे व्यापारी से उधार लेना पड़ता है। यह एक चक्र बन जाता है।

अरुणा के परिवार को उधार लेने का कारण: अरुणा का परिवार मछुआरा है। मानसून के चार महीनों (जून से सितंबर) तक समुद्र में तूफान के कारण मछली पकड़ना खतरनाक होता है, इसलिए उन दिनों उनकी कोई आय नहीं होती। इस दौरान घर चलाने और जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें मछली व्यापारी से पहले से ही उधार लेना पड़ता है।

समानताएँ:

  1. दोनों ही परिवार मेहनत से काम करते हैं, फिर भी आय अनियमित है।
  2. दोनों को ही मजबूरी में स्थानीय व्यापारी से उधार लेना पड़ता है, जो बाद में उनकी उपज (धान/मछली) को कम दाम पर खरीदकर उनका शोषण करता है।
  3. दोनों ही एक ऐसे चक्र में फंसे हैं जहाँ उधार लेना और कम दाम पर अपना माल बेचना उनकी नियति बन गई है।
अंतर:
  1. शेखर का काम कृषि पर आधारित है, जबकि अरुणा का परिवार मछली पकड़ने (मत्स्य पालन) पर निर्भर है।
  2. शेखर को उधार खेती के लिए आवश्यक चीजें खरीदने के लिए लेना पड़ता है, जबकि अरुणा के परिवार को उधार दैनिक जीवनयापन के लिए लेना पड़ता है।
  3. शेखर के पास चावल मिल में काम करने जैसा एक अतिरिक्त आय का विकल्प है, जबकि अरुणा के परिवार के पास मानसून में कोई विकल्प नहीं है।

18. क्‍या आपने सुनामी के बारे में सुना है? यह क्या होता है? इससे अरुणा जैसे परिवारों को क्या नुकसान हुआ होगा? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-85)

उत्तर: हाँ, सुनामी के बारे में सुना है। सुनामी समुद

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