UP Board Class 7 Science 11. जंतुओं और पादप में परिवहन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
कॉलम & कॉलम 8
(क) रंध्र (i) Fea का अवशोषण
(ख) जाइलम (ii) TASS
(ग) मूल रोम (४४) भोजन का परिवहन
(घ) फ्लोएम (1५४) जल का परिवहन
(५) कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण
उत्तर:
(क) रंध्र → (ii) वाष्पोत्सर्जन
(ख) जाइलम → (1५४) जल का परिवहन
(ग) मूल रोम → (i) जल का अवशोषण
(घ) फ्लोएम → (४४) भोजन का परिवहन
(क) हृदय से रक्त का शरीर के सभी अंगों में परिवहन धमनियों के द्वारा होता है।
(ख) हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है।
(ग) धमनियाँ और शिराएँ कोशिकाओं के जाल द्वारा जुड़ी रहती हैं।
(घ) हृदय का लयबद्ध विस्तार और संकुचन हृदय स्पंद कहलाता है।
(च) मानव शरीर के प्रमुख उत्सर्जित उत्पाद यूरिया है।
(छ) पसीने में जल और लवण होता है।
(ज) वृक्क अपशिष्ट पदार्थों को द्रव रूप में बाहर निकालते हैं, जिसे हम मूत्र कहते हैं।
(झ) वृक्षों में बहुत अधिक ऊँचाइयों तक जल पहुँचाने के कार्य में वाष्पोत्सर्जन द्वारा उत्पन्न चूषण अभिकर्षण बल सहायता करता है।
(क) पादपों में जल का परिवहन होता है।
(i) जाइलम के द्वारा
(ii) फ्लोएम के द्वारा
(iii) रंध्रों के द्वारा
(iv) मूलरोमों के द्वारा
उत्तर : (क) (i) जाइलम के द्वारा
(ख) मूलों द्वारा जल के अवशोषण की दर को बढ़ाया जा सकता है, उन्हें
(i) छाया में रखकर।
(ii) He प्रकाश में रखकर।
(iii) पंखे के नीचे रखकर।
(iv) पॉलीथीन की थैली से
उत्तर : (ख) (iii) पंखे के नीचे रखकर।
उत्तर : पादपों और जंतुओं दोनों में ही पदार्थों का परिवहन एक मूलभूत आवश्यकता है। शरीर की प्रत्येक जीवित कोशिका को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। साथ ही, कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, यूरिया) को शरीर से बाहर निकालना भी जरूरी है। यदि परिवहन न हो तो ऑक्सीजन और भोजन कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पाएंगे और अपशिष्ट जमा होकर जीव को नुकसान पहुंचाएंगे। इसीलिए, जंतुओं में रक्त परिवहन तंत्र और पादपों में जाइलम व फ्लोएम का जटिल नेटवर्क इस आवश्यक कार्य को पूरा करता है।
उत्तर : पट्टिकाणु (प्लेटलेट्स) रक्त का थक्का जमाने में मदद करते हैं। यदि रक्त में पट्टिकाणु नहीं होंगे, तो चोट लगने पर रक्त का थक्का नहीं बनेगा। इससे रक्तस्राव बिना रुके लगातार होता रहेगा, जिससे शरीर से अत्यधिक मात्रा में रक्त निकल सकता है और व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है। इस प्रकार, पट्टिकाणु की अनुपस्थिति एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या होगी।
उत्तर : रंध्र पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जो दो दरार कोशिकाओं से घिरे रहते हैं।
रंध्रों के दो प्रमुख कार्य हैं:
1. गैसों का आदान-प्रदान: ये पौधों के लिए वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड लेने और ऑक्सीजन व जल वाष्प बाहर छोड़ने का मार्ग प्रदान करते हैं।
2. वाष्पोत्सर्जन: इन्हीं छिद्रों के माध्यम से पौधे अतिरिक्त जल को वाष्प के रूप में वातावरण में छोड़ते हैं, जिससे पौधे को ठंडक मिलती है और जल व खनिजों के ऊपर चढ़ने में सहायता मिलती है।
उत्तर : हाँ, वाष्पोत्सर्जन पादपों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसके दो मुख्य लाभ हैं:
1. चूषण अभिकर्षण (खिंचाव) उत्पन्न करना: जब पत्तियों से जल वाष्पित होता है, तो यह जाइलम वाहिनियों में एक खिंचाव पैदा करता है। इस खिंचाव के कारण जड़ों से जल ऊपर की ओर खिंचकर पेड़ की ऊँची शाखाओं तक पहुँच पाता है।
2. तापमान नियंत्रण: वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया में ऊष्मा का उपयोग होता है, जिससे पौधे का तापमान नियंत्रित रहता है और वह गर्मी में भी ठंडा बना रहता है।
उत्तर : रक्त निम्नलिखित चार मुख्य घटकों से मिलकर बना होता है:
1. लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs): इनमें हीमोग्लोबिन नामक लाल वर्णक होता है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी ऊतकों तक पहुँचाता है।
2. श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs): ये शरीर की रक्षा कोशिकाएँ हैं जो बैक्टीरिया, वायरस आदि रोगाणुओं से लड़कर हमें संक्रमण से बचाती हैं।
3. पट्टिकाणु (प्लेटलेट्स): ये छोटी कोशिकाएँ रक्त का थक्का बनाने में सहायता करती हैं, ताकि चोट लगने पर अधिक रक्तस्राव न हो।
4. प्लाज़्मा: यह रक्त का तरल भाग है जिसमें उपरोक्त सभी कोशिकाएँ तैरती रहती हैं। यह पोषक तत्वों, हार्मोन्स और अपशिष्ट पदार्थों को शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है।
उत्तर : शरीर के प्रत्येक अंग को जीवित रहने और सही ढंग से कार्य करने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है, क्योंकि रक्त निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य करता है:
- ऑक्सीजन का वितरण: फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है, जो भोजन से ऊर्जा मुक्त करने के लिए जरूरी है।
- कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन: कोशिकाओं से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक ले जाता है, ताकि उसे शरीर से बाहर निकाला जा सके।
- पोषण का वितरण: पचे हुए भोजन (ग्लूकोज, अमीनो अम्ल आदि) को आँतों से लेकर सम्पूर्ण शरीर में पहुँचाता है।
- तापमान नियंत्रण: शरीर के गर्म भागों से ठंडे भागों की ओर रक्त प्रवाहित होकर शरीर के तापमान को संतुलित रखता है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: श्वेत रक्त कोशिकाएँ रोगाणुओं से लड़ती हैं और पट्टिकाणु चोट लगने पर रक्तस्राव रोकते हैं।
उत्तर : रक्त का लाल रंग उसमें उपस्थित हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन के कारण होता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है और इसमें लौह (आयरन) तत्व होता है। यह हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है, जो चमकीला लाल दिखाई देता है (धमनियों में)। जब यह ऑक्सीजन कोशिकाओं को दे देता है, तो यह गहरे लाल रंग का दिखने लगता है (शिराओं में)।
उत्तर : हृदय शरीर का एक शक्तिशाली पंप है जो निम्नलिखित प्रमुख कार्य करता है:
1. रक्त का संचार: यह लगातार धड़ककर शुद्ध (ऑक्सीजन युक्त) रक्त को धमनियों के माध्यम से पूरे शरीर में पहुँचाता है और अशुद्ध (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) रक्त को शिराओं के माध्यम से वापस फेफड़ों में भेजता है।
2. दोहरा परिसंचरण: मानव हृदय चार कक्षों वाला है। यह शरीर में रक्त के दो अलग-अलग चक्र चलाता है - एक शरीर और हृदय के बीच (शारीरिक परिसंचरण) और दूसरा हृदय और फेफड़ों के बीच (फुफ्फुसीय परिसंचरण)।
3. रक्त का मिश्रण रोकना: हृदय के बीचों-बीच एक मोटी दीवार होती है जो बाएँ भाग के शुद्ध रक्त और दाएँ भाग के अशुद्ध रक्त को आपस में मिलने नहीं देती, जिससे शरीर को हमेशा शुद्ध ऑक्सीजन युक्त रक्त मिलता रहे।
4. लयबद्ध संकुचन: हृदय स्पंदन (धड़कन) एक निश्चित लय में होता है, जो रक्त के प्रवाह को नियमित और प्रभावी बनाता है।
उत्तर : शरीर से अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन इसलिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये पदार्थ शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं (जैसे श्वसन, पाचन) के दौरान बनते हैं और यदि शरीर में जमा हो जाएँ तो विषैले हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, यूरिया रक्त में जमा होने पर गुर्दे को नुकसान पहुँचा सकता है, कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता शरीर को अम्लीय बना सकती है, और अतिरिक्त लवण व जल रक्तचाप बढ़ा सकते हैं। उत्सर्जन तंत्र इन हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालकर आंतरिक संतुलन (होमियोस्टेसिस) बनाए रखने में मदद करता है।
उत्तर:
नामांकित भाग:
1. वृक्क (Kidneys): ये सेम के बीज के आकार के दो अंग होते हैं जो रक्त को छानकर मूत्र बनाते हैं।
2. मूत्रवाहिनी (Ureters): ये दो पतली नलिकाएँ हैं जो प्रत्येक वृक्क से मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती हैं।
3. मूत्राशय (Urinary Bladder): यह एक मांसपेशियों वाली थैली है जो मूत्र को एकत्रित करके रखती है।
4. मूत्रमार्ग (Urethra): यह एक नलिका है जो मूत्राशय से जुड़ी होती है और मूत्र को शरीर के बाहर निकालती है।
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