UP Board Class 7 Science 18. अपशिष्ट जल की कहानी is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर :
(क) प्रदूषकों
(ख) मल जल (सीवेज)
(ग) आपंक
(घ) खाना पकाने का तेल और वसाओं
उत्तर :
वाहित मल वह गंदा पानी है जो घरों, स्कूलों, अस्पतालों, कारखानों और दफ्तरों से निकलता है। इसमें नहाने, कपड़े धोने, शौचालयों से आने वाला पानी और बारिश का पानी भी शामिल होता है।
अनुपचारित वाहित मल को नदी या समुद्र में डालना खतरनाक है क्योंकि इसमें हानिकारक रसायन, गंदगी और रोग फैलाने वाले कीटाणु (बैक्टीरिया व वायरस) होते हैं। यह पानी को जहरीला बना देता है। इस दूषित पानी के संपर्क में आने से लोगों को हैजा, टाइफाइड, पेचिश जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। यह पानी में रहने वाले जीवों जैसे मछलियों के लिए भी घातक है और पूरे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है।
उत्तर :
खाना पकाने के बचे हुए तेल या घी को कभी भी सिंक या नाली में नहीं बहाना चाहिए। ऐसा करने से यह ठंडा होकर पाइपों की दीवारों पर चिपक जाता है और एक मोटी परत बना लेता है। इससे पाइप पूरी तरह बंद हो सकते हैं और गंदा पानी बाहर न निकलकर वापस घर में आ सकता है। खुले नालों में यह तेल जमीन के छिद्रों को बंद कर देता है, जिससे जमीन पानी सोख नहीं पाती और जलभराव की समस्या होती है। बचे हुए तेल को कागज या कपड़े में सोखकर कूड़ेदान में ही फेंकना चाहिए।
उत्तर :
अपशिष्ट जल को साफ करने के लिए वाहित मल उपचार संयंत्र (Sewage Treatment Plant) में निम्नलिखित चरणों से गुजारा जाता है:
1. छानना (Screening): सबसे पहले अपशिष्ट जल को लोहे की छड़ों से बनी जाली (बार स्क्रीन) से गुजारा जाता है। इससे प्लास्टिक थैली, कपड़े, लकड़ी, पत्थर जैसी बड़ी चीजें अलग हो जाती हैं।
2. गिट्टी व रेत हटाना (Grit and Sand Removal): फिर इस पानी को एक बड़ी टंकी में धीरे-धीरे बहाया जाता है। इससे भारी पदार्थ जैसे रेत, कंकड़ आदि टंकी के तल में बैठ जाते हैं, जिन्हें अलग कर लिया जाता है।
3. अवसादन (Sedimentation): अब पानी को एक ऐसी टंकी में ले जाया जाता है जिसका तला बीच में नीचा हो। यहाँ पानी को कई घंटों तक शांत खड़ा रखा जाता है। इससे हल्के ठोस कण (जैसे मल) नीचे बैठ जाते हैं। इस गाद को आपंक (Sludge) कहते हैं। पानी के ऊपर तैरने वाली चिकनाई (ग्रीस) और तेल को स्किमर नामक यंत्र से हटा दिया जाता है।
4. आपंक का उपचार (Sludge Treatment): नीचे बैठे आपंक को एक अलग टैंक में भेजा जाता है। यहाँ बिना ऑक्सीजन वाले बैक्टीरिया इसे सड़ाते हैं। इस प्रक्रिया में बायोगैस पैदा होती है, जिसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. जैविक उपचार (Biological Treatment): अब तक साफ हुए पानी में हवा के बुलबुले छोड़े जाते हैं। इससे पानी में मौजूद लाभदायक बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं और बची हुई गंदगी (जैसे साबुन, खाद्य कचरा) को खा जाते हैं।
6. रोगाणुनाशन (Disinfection): अंत में, पानी को पूरी तरह रोगाणुमुक्त करने के लिए उसमें क्लोरीन या ओज़ोन मिलाई जाती है। इसके बाद यह साफ पानी नदियों में छोड़ा जा सकता है या सिंचाई आदि के काम में लाया जा सकता है।
उत्तर :
अपशिष्ट जल को साफ करने की प्रक्रिया में जो गाढ़ा, गाद जैसा पदार्थ टंकी के तल में जम जाता है, उसे आपंक (Sludge) कहते हैं। यह मुख्य रूप से मानव मल, खाद्य कचरा और अन्य कार्बनिक पदार्थों से बना होता है।
आपंक के उपचार की विधि: आपंक को एक विशेष बंद टैंक (डाइजेस्टर टैंक) में डाला जाता है। इस टैंक में ऑक्सीजन नहीं होती। यहाँ अवायवीय जीवाणु (Anaerobic Bacteria) आपंक को विघटित कर देते हैं। इस प्रक्रिया में दो उपयोगी चीजें बनती हैं:
1. बायोगैस: यह एक ज्वलनशील गैस है जिसका उपयोग खाना बनाने, वाहन चलाने या बिजली बनाने के लिए किया जा सकता है।
2. शुष्क आपंक: उपचार के बाद बचा हुआ ठोस पदार्थ सूख जाता है। इसमें पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इसे खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उत्तर :
हाँ, अनुपचारित मानव मल एक गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है। जब मल का सही ढंग से निपटान नहीं किया जाता, तो यह पर्यावरण में फैल जाता है और निम्नलिखित खतरे पैदा करता है:
1. जल प्रदूषण: बारिश का पानी इस मल को बहाकर नदियों, तालाबों और कुँओं में ले जाता है। इससे पीने का पानी दूषित हो जाता है।
2. रोगों का फैलाव: दूषित पानी पीने या उसके संपर्क में आने से अनेक जलजनित रोग फैलते हैं, जैसे कि हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, पोलियो और पेचिश। ये बीमारियाँ कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती हैं।
3. मृदा प्रदूषण: यह मल जमीन में मिलकर मिट्टी को भी प्रदूषित कर देता है, जिससे उगाई गई सब्जियाँ और फल भी असुरक्षित हो सकते हैं।
इसीलिए शौचालयों का निर्माण और वाहित मल का उचित उपचार स्वस्थ समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उत्तर :
जल को रोगाणुमुक्त करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले दो प्रमुख रसायन हैं:
1. क्लोरीन (Chlorine)
2. ओज़ोन (Ozone)
उत्तर :
शलाका छन्ने (बार स्क्रीन) लोहे की मोटी छड़ों से बनी एक जाली होती है, जो उपचार संयंत्र के प्रवेश द्वार पर लगी होती है। इसके दो मुख्य कार्य हैं:
1. बड़े कचरे को रोकना: जब सारा गंदा पानी संयंत्र में आता है, तो सबसे पहले इस जाली से गुजरता है। यह जाली कपड़े, प्लास्टिक की थैलियाँ, पत्ते, लकड़ी, पत्थर, काँच के टुकड़े जैसे बड़े और ठोस कचरे को रोक लेती है।
2. मशीनों की सुरक्षा करना: अगर ये बड़ी चीजें अंदर चली जाएँ तो वे संयंत्र की पंप, पाइप और अन्य नाजुक मशीनों को खराब कर सकती हैं। शलाका छन्ने इन मशीनों की रक्षा करते हुए उपचार प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलने देते हैं। रोके गए इस कचरे को हाथ या मशीन से हटाकर सुरक्षित ढंग से नष्ट कर दिया जाता है।
उत्तर :
स्वच्छता और रोग का गहरा संबंध है। अस्वच्छता रोगों को आमंत्रण देती है। जहाँ सफाई नहीं रहती, वहाँ गंदगी, कचरा और सड़न पैदा होती है। यह वातावरण मक्खियाँ, मच्छर, चूहे और कॉकरोच जैसे कीट पैदा करता है, जो रोगाणुओं को फैलाते हैं।
उदाहरण के लिए, खुले में शौच करने से मल के कीटाणु पानी और मिट्टी में मिल जाते हैं। यदि यही दूषित पानी पीने के काम आए, तो हैजा, पेचिश जैसी बीमारियाँ फैलती हैं। इसी तरह, घर के आसपास गंदा पानी जमा रहने से डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर पनपते हैं।
इस प्रकार, अच्छी स्वच्छता की आदतें जैसे हाथ धोना, साफ पानी पीना, कचरा उचित स्थान पर फेंकना और शौचालय का उपयोग करना, हमें इन रोगों से बचाती हैं। स्वच्छता स्वस्थ जीवन की नींव है।
उत्तर :
एक सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक के रूप में स्वच्छता बनाए रखने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका है:
1. व्यक्तिगत जिम्मेदारी: सबसे पहले, हमें अपने घर और आसपास की जगह साफ रखनी चाहिए। कचरा केवल कूड़ेदान में ही डालें, नालियों में नहीं। पानी की बर्बादी रोकें और बचे हुए तेल को नाली में न बहाएँ।
2. जागरूकता फैलाना: हम अपने पड़ोसियों, दोस्तों और परिवार को स्वच्छता के महत्व के बारे में समझा सकते हैं, जैसे खुले में शौच न करने और टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
3. शिकायत दर्ज करना: यदि हमारे इलाके में सफाई कर्मचारी कचरा नहीं उठा रहे, नाली बह रही है या पानी की टंकी गंदी है, तो हमें तुरंत नगर निगम, ग्राम पंचायत या संबंधित अधिकारी को लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
4. सामुदायिक भागीदारी: हम सामूहिक सफाई अभियानों में भाग ले सकते हैं और दूसरों को भी जोड़ सकते हैं। एक सक्रिय नागरिक बनकर हम न केवल अपना बल्कि पूरे समुदाय का स्वास्थ्य सुरक्षित रख सकते हैं।
संकेत
बाएँ से दाएँ
2. वाहित मल उपचार संयंत्र से प्राप्त गैसीय उत्पाद
4. इस प्रक्रम में प्रदूषित जल से बायु को गुजारा जाता है।
7. वाहित मल ले जाने वाले पाइपों की व्यवस्था
8. उपयोग के बाद नालियों में बहता जल
ऊपर से नीचे
1. जल उपचार में रोगाणुनाशन के लिए प्रयुक्त एक रसायन
3. वह सूक्ष्मजीव, जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैव पदारथों का विघटन करते हैं।
5. संदृषित जल |
6. वह स्थान, जहाँ वाहित मल से ee षक पृथक किए जाते हैं।
9. अनेक व्यक्ति इसका विसर्जन खुले स्थानों में करते हैं।
उत्तर :
नोट: मूल पाठ में पहेली का ग्रिड और उत्तर स्पष्ट नहीं थे। एक सामान्य उत्तर इस प्रकार है:
बाएँ से दाएँ: 2. बायोगैस, 4. वातन, 7. सीवर, 8. अपशिष्ट जल
ऊपर से नीचे: 1. क्लोरीन, 3. अवायवीय जीवाणु, 5. प्रदूषित, 6. संयंत्र, 9. मल
उत्तर :
(ii) (ख) और (ग)
स्पष्टीकरण:
(ख) सही है – ओज़ोन एक शक्तिशाली रोगाणुनाशक है, इसलिए इसका उपयोग पानी को शुद्ध करने में किया जाता है।
(ग) सही है – वायुमंडल की ओज़ोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोख लेती है और हमारी रक्षा करती है।
(क) गलत है – श्वसन के लिए अनिवार्य गैस ऑक्सीजन है, ओज़ोन नहीं। ओज़ोन साँस लेने के लिए हानिकारक है।
(घ) गलत है – वायु में ओज़ोन का अनुपात बहुत कम (लगभग 0.000001%) होता है, 3% नहीं।
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