UP Board Class 7 Science 15. प्रकाश is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) जिस प्रतिबिंब को पर्दे पर न प्राप्त किया जा सके, वह ______ कहलाता है।
(ख) यदि प्रतिबिंब सदैव आभासी तथा साइज़ में छोटा हो, तो यह किसी ______ द्वारा बना होगा।
(ग) यदि प्रतिबिंब सदैव बिंब के साइज़ का बने, तो दर्पण ______ होगा।
(घ) जिस प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके, वह ______ प्रतिबिंब कहलाता है।
(च) ______ द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
उत्तर:
(क) आभासी प्रतिबिंब
(ख) उत्तल दर्पण
(ग) समतल दर्पण
(घ) वास्तविक
(च) समतल दर्पण (या उत्तल दर्पण)
(क) हम उत्तल दर्पण से आवर्धित तथा सीधा प्रतिबिंब प्राप्त कर सकते हैं।
(ख) अवतल लेंस सदैव आभासी प्रतिबिंब बनाता है।
(ग) अवतल दर्पण से हम वास्तविक, आवर्धित तथा उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त कर सकते हैं।
(घ) वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
(च) अवतल दर्पण सदैव वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है।
उत्तर:
(क) असत्य – उत्तल दर्पण से प्रतिबिंब सीधा तथा बिंब से छोटा बनता है, आवर्धित नहीं।
(ख) सत्य – अवतल लेंस (अपसारी लेंस) सदैव आभासी, सीधा तथा छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
(ग) सत्य – जब बिंब अवतल दर्पण के फोकस और वक्रता केंद्र के बीच रखा जाता है, तो वास्तविक, उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनता है।
(घ) असत्य – वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि प्रकाश की किरणें वास्तव में आपस में मिलती हैं।
(च) असत्य – अवतल दर्पण वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है। जब बिंब दर्पण के बहुत पास होता है, तो आभासी प्रतिबिंब बनता है।
| कॉलम A | कॉलम B |
|---|---|
| (क) समतल दर्पण | (i) आवर्धक लेंस की भाँति उपयोग होता है। (v) प्रतिबिंब सीधा तथा बिंब के साइज़ का प्रतिबिंब बनाता है। |
| (ख) उत्तल दर्पण | (ii) अधिक क्षेत्र के दृश्य का प्रतिबिंब बना सकता है। (vi) सीधा तथा बिंब के साइज़ से छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
| (ग) उत्तल लेंस | (i) आवर्धक लेंस की भाँति उपयोग होता है। (iv) उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सकता है। |
| (घ) अवतल दर्पण | (iii) दंत चिकित्सक दांतों का आवर्धित प्रतिबिंब देखने के लिए उपयोग करते हैं। (iv) उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सकता है। |
| (च) अवतल लेंस | (vi) सीधा तथा बिंब के साइज़ से छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
उत्तर: समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के निम्नलिखित अभिलक्षण (विशेषताएँ) हैं:
1. प्रतिबिंब सीधा (खड़ा) होता है।
2. यह आभासी होता है, अर्थात इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
3. प्रतिबिंब का साइज़ बिंब के साइज़ के बराबर होता है।
4. प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर बिंब दर्पण के सामने रखा होता है।
5. प्रतिबिंब में पार्श्व परिवर्तन होता है। इसका अर्थ है कि बिंब का बायाँ भाग प्रतिबिंब के दाएँ भाग की तरह और बिंब का दायाँ भाग प्रतिबिंब के बाएँ भाग की तरह दिखाई देता है।
उत्तर: अंग्रेजी वर्णमाला के कुछ अक्षर ऐसे हैं जिनके समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब मूल अक्षर के समान ही दिखते हैं। ये अक्षर हैं: A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y.
विवेचना: ये सभी अक्षर ऊर्ध्वाधर सममित हैं। अगर हम इन अक्षरों के बीच में एक ऊर्ध्वाधर रेखा खींचें, तो रेखा के बायीं ओर का हिस्सा दायीं ओर के हिस्से का दर्पण प्रतिबिंब जैसा दिखेगा। चूंकि समतल दर्पण पार्श्व परिवर्तन करता है, और ये अक्षर पहले से ही सममित हैं, इसलिए उनका प्रतिबिंब भी मूल अक्षर जैसा ही लगता है।
उत्तर: आभासी प्रतिबिंब वह प्रतिबिंब है जिसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। ऐसा प्रतिबिंब तब बनता है जब प्रकाश की किरणें एक बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, लेकिन वास्तव में वहाँ मिलती नहीं हैं।
उदाहरण: जब हम किसी समतल दर्पण के सामने खड़े होते हैं, तो हमें अपना आभासी प्रतिबिंब दिखाई देता है। इस प्रतिबिंब को दीवार या किसी पर्दे पर नहीं लाया जा सकता।
उत्तर: उत्तल (अभिसारी) और अवतल (अपसारी) लेंस में दो प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:
| उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|
| 1. यह बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है। | 1. यह बीच में पतला और किनारों पर मोटा होता है। |
| 2. यह प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर अभिसरित (इकट्ठा) करता है। | 2. यह प्रकाश की किरणों को अपसरित (फैलाता) करता है। |
| 3. यह वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बना सकता है। | 3. यह सदैव आभासी, सीधा तथा बिंब से छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
उत्तर:
अवतल दर्पण का उपयोग: इसका उपयोग दाढ़ी बनाने वाले दर्पण के रूप में किया जाता है। जब चेहरा दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच रखा जाता है, तो बड़ा, सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनता है, जिससे दाढ़ी बनाना आसान हो जाता है।
उत्तल दर्पण का उपयोग: इसका उपयोग वाहनों के साइड-व्यू मिरर (पश्च-दृश्य दर्पण) के रूप में किया जाता है। यह ड्राइवर को वाहन के पीछे का एक विस्तृत क्षेत्र दिखाता है, हालाँकि प्रतिबिंब छोटा दिखाई देता है, जिससे सुरक्षित ड्राइविंग में मदद मिलती है।
उत्तर: अवतल दर्पण वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है। जब बिंब अवतल दर्पण के सामने फोकस दूरी से अधिक दूरी पर रखा जाता है, तो प्रकाश की किरणें वास्तव में मिलती हैं और एक वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बनता है जिसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर: अवतल लेंस सदैव आभासी प्रतिबिंब बनाता है। चाहे बिंब को कहीं भी रखा जाए, अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा तथा बिंब से छोटा होता है।
(i) अवतल लेंस द्वारा
(ii) अवतल दर्पण द्वारा
(iii) उत्तल लेंस द्वारा
(iv) समतल दर्पण द्वारा
उत्तर: (ii) अवतल दर्पण द्वारा
जब बिंब को अवतल दर्पण के फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच रखा जाता है, तो दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा प्रतिबिंब बनता है। यही कारण है कि इसे शेविंग मिरर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
(i) 3 m
(ii) 5 m
(iii) 6 m
(iv) 8 m
उत्तर: (iii) 6 m
व्याख्या: प्रारंभ में, दर्पण और प्रतिबिंब के बीच की दूरी 4 m है। इसका मतलब है कि डेविड दर्पण से 4 m दूर खड़ा है (क्योंकि प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है)। तो, डेविड और उसके प्रतिबिंब के बीच की कुल दूरी = 4 m (डेविड से दर्पण) + 4 m (दर्पण से प्रतिबिंब) = 8 m होगी।
जब वह दर्पण की ओर 1 m चलता है, तो अब वह दर्पण से 3 m दूर रह जाता है। इस स्थिति में प्रतिबिंब भी दर्पण के पीछे 3 m पर बनेगा।
अतः नई दूरी = डेविड से दर्पण (3 m) + दर्पण से प्रतिबिंब (3 m) = 6 m.
(i) 1 m/s
(ii) 2 m/s
(iii) 4 m/s
(iv) 8 m/s
उत्तर: (iii) 4 m/s
व्याख्या: समतल दर्पण में, प्रतिबिंब की सापेक्ष गति वास्तविक वस्तु की गति से दोगुनी होती है जब वस्तु और प्रेक्षक दोनों एक-दूसरे की ओर गति कर रहे हों।
यहाँ, कार (और ड्राइवर) ट्रक की ओर 2 m/s की चाल से पीछे की ओर बढ़ रही है। ट्रक स्थिर है, लेकिन ड्राइवर के सापेक्ष ट्रक 2 m/s की चाल से उसकी ओर बढ़ रहा है।
समतल दर्पण में, ट्रक का प्रतिबिंब भी ड्राइवर की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होगा। चूंकि ड्राइवर स्वयं भी प्रतिबिंब की ओर बढ़ रहा है, इसलिए प्रतिबिंब की सापेक्ष चाल दोगुनी यानी 2 m/s + 2 m/s = 4 m/s प्रतीत होगी।
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