UP Board Class 7 Science 6. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) प्रकाश संश्लेषण
(ख) जल में शक्कर को घोलना
(ग) कोयले को जलाना
(घ) मोम को पिघलाना
(च) ऐलुमिनियम के टुकड़े को पीटकर उसका पतला पत्र (फॉइल) बनाना।
(छ) भोजन का पाचन
उत्तर :
(क) रासायनिक परिवर्तन - प्रकाश संश्लेषण में पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज जैसा नया पदार्थ बनाते हैं।
(ख) भौतिक परिवर्तन - शक्कर घुलने पर केवल उसका रूप बदलता है, कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
(ग) रासायनिक परिवर्तन - कोयला जलने पर राख और गैसें बनती हैं, जो नए पदार्थ हैं।
(घ) भौतिक परिवर्तन - मोम पिघलने पर केवल अवस्था बदलती है, ठंडा होने पर वापस ठोस बन जाता है।
(च) भौतिक परिवर्तन - ऐलुमिनियम को पीटकर पतला करने से केवल आकार बदलता है, पदार्थ वही रहता है।
(छ) रासायनिक परिवर्तन - भोजन के पाचन में जटिल खाद्य पदार्थ सरल अणुओं में टूटते हैं, जो एक रासायनिक प्रक्रिया है।
(क) लकड़ी के लट्टे को टुकड़ों में काटना एक रासायनिक परिवर्तन है। (सत्य/असत्य)
(ख) पत्तियों से खाद का बनना एक भौतिक परिवर्तन है। (सत्य/असत्य)
(ग) जस्ते (जिंक) लेपित लोहे के पाइपों में आसानी से जंग नहीं लगती है। (सत्य/असत्य)
(घ) लोहा और जंग एक ही पदार्थ हैं। (सत्य/असत्य)
(च) भाप का संघनन रासायनिक परिवर्तन नहीं है। (सत्य/असत्य)
उत्तर :
(क) असत्य - लकड़ी के लट्टे को टुकड़ों में काटना एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें केवल आकार बदलता है, नया पदार्थ नहीं बनता।
(ख) असत्य - पत्तियों से खाद का बनना एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि सड़ने की प्रक्रिया में नए पदार्थ बनते हैं।
(ग) सत्य - जस्ते की परत लोहे को संक्षारण से बचाती है, इसलिए जंग नहीं लगती।
(घ) असत्य - लोहा एक तत्व है जबकि जंग आयरन ऑक्साइड है, ये दोनों अलग-अलग पदार्थ हैं।
(च) सत्य - भाप का संघनन (पानी बनना) एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि पानी की अवस्था बदलती है, रासायनिक संरचना नहीं।
(क) जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो यह ________ के बनने के कारण दुधिया हो जाता है।
(ख) खाने के सोडे का रासायनिक नाम ________ है।
(ग) ऐसी दो विधियाँ, जिनके द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है ________ और ________ हैं।
(घ) ऐसे परिवर्तन भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं, जिनमें किसी पदार्थ के केवल ________ गुणों में परिवर्तन होता है।
(च) ऐसे परिवर्तन जिनमें नए पदार्थ बनते हैं, ________ परिवर्तन कहलाते हैं।
उत्तर :
(क) जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो यह कैल्शियम कार्बोनेट के बनने के कारण दुधिया हो जाता है।
(ख) खाने के सोडे का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट है।
(ग) ऐसी दो विधियाँ, जिनके द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है पेंटिंग और गैल्वनाइजेशन (जस्ता लेपन) हैं।
(घ) ऐसे परिवर्तन भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं, जिनमें किसी पदार्थ के केवल भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है।
(च) ऐसे परिवर्तन जिनमें नए पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाते हैं।
उत्तर :
यह एक रासायनिक परिवर्तन है। नींबू के रस में सिट्रिक अम्ल होता है और खाने का सोडा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट है। जब ये दोनों मिलते हैं तो एक रासायनिक अभिक्रिया होती है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यही गैस बुलबुलों के रूप में बाहर निकलती है। चूँकि इस प्रक्रिया में नए पदार्थ (गैस) बनते हैं, इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर :
मोमबत्ती के जलने में होने वाले परिवर्तन:
1. भौतिक परिवर्तन: मोमबत्ती का मोम गर्मी पाकर पिघलता है। यह केवल अवस्था का परिवर्तन है (ठोस से द्रव)। पिघला हुआ मोम ठंडा होकर फिर से ठोस बन सकता है।
2. रासायनिक परिवर्तन: मोमबत्ती की बत्ती और पिघले हुए मोम का वास्तव में जलना। यह दहन की क्रिया है जिसमें मोम (एक हाइड्रोकार्बन) ऑक्सीजन के साथ मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प और ऊर्जा पैदा करता है। यहाँ नए पदार्थ बनते हैं।
एक अन्य उदाहरण - भोजन का सेवन एवं पाचन:
- भौतिक परिवर्तन: भोजन को चबाने से वह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है। यह केवल आकार का परिवर्तन है।
- रासायनिक परिवर्तन: पाचन तंत्र में एंजाइम भोजन के जटिल अणुओं (जैसे स्टार्च, प्रोटीन) को सरल अणुओं (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल) में तोड़ते हैं। यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर :
दही का जमना एक रासायनिक परिवर्तन है, इसे निम्नलिखित तर्कों से सिद्ध किया जा सकता है:
1. उत्क्रमणीय नहीं है: जमे हुए दही से वापस दूध प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह दर्शाता है कि मूल पदार्थ (दूध) स्थायी रूप से बदल गया है।
2. नए पदार्थ का निर्माण: दही में लैक्टिक अम्ल बनता है जो दूध में नहीं होता। दूध की प्रोटीन (केसीन) का संरचनात्मक परिवर्तन होता है, जिससे वह जम जाता है।
3. गुणों में अंतर: दही का स्वाद (खट्टापन), गंध और स्थिरता दूध से भिन्न होती है। ये नए गुण रासायनिक परिवर्तन का संकेत देते हैं।
उत्तर :
लकड़ी को काटना (भौतिक परिवर्तन):
जब लकड़ी को छोटे टुकड़ों में काटा जाता है, तो केवल उसका आकार और रूप बदलता है। लकड़ी का पदार्थ वही रहता है। काटे गए टुकड़ों को जोड़कर या किसी अन्य तरीके से वापस मूल लट्ठे जैसा नहीं बनाया जा सकता, लेकिन लकड़ी के रासायनिक गुण (जैसे जलने की क्षमता) नहीं बदलते। यह एक भौतिक परिवर्तन है।
लकड़ी का जलना (रासायनिक परिवर्तन):
जब लकड़ी जलती है, तो वह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करती है। इस दहन प्रक्रिया में लकड़ी (मुख्यतः सेल्युलोज) नष्ट हो जाती है और नए पदार्थ जैसे राख (मुख्यतः कार्बन), कार्बन डाइऑक्साइड गैस, जल वाष्प आदि बनते हैं। ये नए पदार्थ लकड़ी से पूरी तरह भिन्न होते हैं और इस प्रक्रिया को उलटाया नहीं जा सकता। अतः यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर :
कॉपर सल्फेट के सुंदर नीले क्रिस्टल बनाने की विधि निम्नलिखित है:
सामग्री: कॉपर सल्फेट पाउडर, जल, एक बीकर, तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें, चम्मच, फिल्टर पेपर, धागा।
विधि:
1. एक बीकर में लगभग एक कप जल लें।
2. इसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की 2-3 बूँदें मिलाएँ (यह कॉपर सल्फेट के जल में विघटन में मदद करता है)।
3. बीकर को गर्म करें। जब जल उबलने लगे, तो इसमें धीरे-धीरे कॉपर सल्फेट पाउडर चम्मच से डालते रहें और लगातार हिलाते रहें।
4. तब तक कॉपर सल्फेट डालें जब तक कि और अधिक पाउडर घोल में न घुल सके (संतृप्त विलयन बन जाए)।
5. गर्म विलयन को फिल्टर पेपर की सहायता से छान लें ताकि अघुलनशील अशुद्धियाँ दूर हो जाएँ।
6. इस छने हुए गर्म विलयन को एक साफ बीकर में डालकर बिना हिलाए-डुलाए ठंडा होने दें।
7. कुछ घंटों या एक रात बाद आप बीकर की तली में सुंदर नीले रंग के कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल देखेंगे।
सावधानी: ठंडा होते समय विलयन को न छेड़ें, इससे छोटे क्रिस्टल बनते हैं। शांत वातावरण में बड़े और स्पष्ट क्रिस्टल बनते हैं।
उत्तर :
लोहे के गेट पर पेंट करने से जंग लगने से बचाव इसलिए होता है क्योंकि पेंट की परत लोहे की सतह और वायुमंडल के बीच एक रक्षात्मक अवरोध बना देती है। जंग लगने के लिए लोहे का वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी के सीधे संपर्क में आना आवश्यक है। पेंट की परत:
1. लोहे को नमी के संपर्क में आने से रोकती है।
2. लोहे को सीधे ऑक्सीजन के संपर्क में आने से रोकती है।
इस प्रकार, पेंट लोहे को उन दोनों कारकों से अलग कर देता है जो जंग लगाने के लिए आवश्यक हैं, और इस तरह संक्षारण रुक जाता है।
उत्तर :
समुद्रतटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में जंग अधिक लगने के मुख्य कारण हैं:
1. उच्च आर्द्रता (नमी): समुद्र के निकट वायु में नमी की मात्रा बहुत अधिक होती है क्योंकि समुद्र से लगातार पानी वाष्पित होता रहता है। जंग लगने के लिए नमी एक अनिवार्य कारक है।
2. लवणता: समुद्री हवा में नमक के कण (सोडियम क्लोराइड) मौजूद होते हैं। जब ये नमक के कण लोहे की सतह पर जमा होते हैं, तो वे विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया को तेज कर देते हैं, जिससे जंग लगने की दर बहुत बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, रेगिस्तानी क्षेत्रों में वायु शुष्क होती है (नमी बहुत कम)। जंग लगने के लिए आवश्यक नमी की कमी के कारण वहाँ लोहे की वस्तुओं में जंग बहुत धीमी गति से या नहीं के बराबर लगती है।
(क) प्रक्रम- A एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ख) प्रक्रम- B एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ग) प्रक्रम- A और प्रक्रम- B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।
(घ) इनमें से कोई भी प्रक्रम रासायनिक परिवर्तन नहीं है।
उत्तर : (ख) प्रक्रम- B एक रासायनिक परिवर्तन है।
व्याख्या:
- परिवर्तन A (द्रव से गैस): यह केवल अवस्था का परिवर्तन है। दबाव हटते ही LPG द्रव से गैस बन जाती है, लेकिन उसका रासायनिक सूत्र (प्रोपेन/ब्यूटेन) नहीं बदलता। यह एक भौतिक परिवर्तन है।
- परिवर्तन B (गैस का जलना): जब LPG की गैस जलती है, तो वह वायु की ऑक्सीजन के साथ मिलकर नए पदार्थ - कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनाती है। इसमें ऊष्मा और प्रकाश भी निकलते हैं। चूँकि नए पदार्थ बनते हैं, यह एक रासायनिक परिवर्तन (दहन) है।
(क) प्रक्रम-A एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ख) प्रक्रम-B एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ग) प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं ।
(घ) इनमें से कोई भी प्रक्रम रासायनिक परिवर्तन नहीं है।
उत्तर : (ग) प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं ।
व्याख्या:
- परिवर्तन A (बायोगैस बनना): अवायवीय जीवाणु जैविक कचरे (गोबर, पौधों के अवशेष) को तोड़ते हैं। इस जैव रासायनिक प्रक्रिया में कचरे के जटिल कार्बनिक पदार्थ (जैसे सेल्युलोज) टूटकर नए पदार्थों - मुख्यतः मीथेन गैस (CH4) और कार्बन डाइऑक्साइड - में बदल जाते हैं। यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
- परिवर्तन B (बायोगैस का जलना): बायोगैस (मुख्यतः मीथेन) के जलने पर वह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनाती है। यह दहन की क्रिया भी एक रासायनिक परिवर्तन है।
अतः दोनों ही प्रक्रमों में नए पदार्थ बनते हैं, इसलिए दोनों रासायनिक परिवर्तन हैं।
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