UP Board Class 7 Science 14. विधुत और इसके प्रभाव is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
| अवयव | प्रतीक |
|---|---|
| विद्युत सेल | --- + - |
| स्विच 'ऑन' स्थिति में | |
| स्विच 'ऑफ' स्थिति में | |
| विद्युत बल्ब | |
| बैटरी (दो सेल) | --- --- + - + - |
| संयोजी तार |
सुझाव: अपनी नोटबुक में इन प्रतीकों को साफ-सुथरे ढंग से बनाएं और उनके नाम लिखें। यह आरेख बनाना विद्युत परिपथों को समझने का पहला कदम है।
(ऊपर दिए गए चित्र 14.21 के अनुसार एक बैटरी, एक बल्ब और एक स्विच जुड़े हुए हैं।)
परिपथ आरेख:
इसका परिपथ आरेख निम्नलिखित तरीके से बनाया जाएगा:
एक बैटरी (दो सेलों की श्रृंखला), एक बल्ब और एक स्विच ('ऑन' स्थिति में) सभी संयोजक तारों से श्रृंखला क्रम में जुड़े होंगे। बैटरी के धन टर्मिनल से तार स्विच से जुड़ेगा, स्विच से तार बल्ब से जुड़ेगा और बल्ब से तार बैटरी के ऋण टर्मिनल पर वापस आ जाएगा, जिससे पूरा परिपथ बंद हो जाएगा।
बैटरी बनाने का तरीका:
बैटरी बनाने के लिए सेलों को श्रृंखला क्रम में जोड़ा जाता है। इसका मतलब है कि पहले सेल के धन (+) टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण (-) टर्मिनल से तार द्वारा जोड़ेंगे। फिर दूसरे सेल के धन टर्मिनल को तीसरे सेल के ऋण टर्मिनल से और तीसरे सेल के धन टर्मिनल को चौथे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ेंगे। इस तरह जुड़ने के बाद, पहले सेल का ऋण टर्मिनल और चौथे सेल का धन टर्मिनल बैटरी के दो मुक्त टर्मिनल होंगे, जिनसे हम अपना परिपथ जोड़ सकते हैं। इस संयोजन से बैटरी का कुल विभवांतर (वोल्टेज) बढ़ जाता है।
कारण: दिए गए परिपथ में दोनों सेलों के समान टर्मिनल (यहाँ दोनों के धन टर्मिनल) एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सेलों को इस तरह जोड़ने पर वे एक-दूसरे का प्रभाव रद्द कर देते हैं, जिससे परिपथ में पर्याप्त विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो पाती और बल्ब नहीं जलता।
आवश्यक परिवर्तन: बल्ब को प्रदीप्त करने के लिए सेलों को श्रृंखला क्रम में जोड़ना होगा। यानी पहले सेल के धन (+) टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण (-) टर्मिनल से जोड़ना होगा। इस सही संयोजन से बैटरी बनेगी और परिपथ में धारा प्रवाहित होकर बल्ब को जला देगी।
उत्तर:
स्पष्टीकरण: जब किसी तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। यह चुंबकीय क्षेत्र उस तार को एक अस्थायी चुंबक की तरह व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है। जब इस धारावाही तार के पास एक चुंबकीय सुई (जो स्वयं एक छोटा चुंबक है) रखी जाती है, तो तार के चुंबकीय क्षेत्र और सुई के चुंबकीय क्षेत्र के बीच अन्योन्य क्रिया (आकर्षण या प्रतिकर्षण) होती है। इसी अन्योन्य क्रिया के कारण चुंबकीय सुई अपनी सामान्य उत्तर-दक्षिण दिशा से हटकर विक्षेपित हो जाती है।
उत्तर: नहीं, चुंबकीय सुई विक्षेप नहीं दर्शाएगी। कारण: स्विच को 'ऑफ' करने का मतलब है कि परिपथ टूट गया है और उसमें से विद्युत धारा का प्रवाह बंद हो गया है। चुंबकीय क्षेत्र केवल तभी उत्पन्न होता है जब तार में धारा प्रवाहित हो रही हो। धारा के बिना, तार के चारों ओर कोई चुंबकीय क्षेत्र नहीं होगा जो चुंबकीय सुई को प्रभावित कर सके। इसलिए, सुई अपनी सामान्य स्थिति (उत्तर-दक्षिण दिशा) में ही रहेगी और विक्षेपित नहीं होगी।
(क) विद्युत सेल के प्रतीक में लंबी रेखा, उसके धन टर्मिनल को निरूपित करती है तथा छोटी रेखा ऋण टर्मिनल को।
(ख) दो या अधिक विद्युत सेलों के संयोजन को बैटरी कहते हैं।
(ग) जब किसी विद्युत हीटर के स्विच को 'ऑन' करते हैं तो इसका तापन अवयव (फिलामेंट) लाल हो जाता है।
(घ) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर आधारित सुरक्षा युक्ति को फ्यूज़ कहते हैं।
(क) दो सेलों की बैटरी बनाने के लिए एक सेल के ऋण टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से संयोजित करते हैं। (असत्य)
सही तरीका: एक सेल के ऋण टर्मिनल को दूसरे सेल के धन टर्मिनल से जोड़ते हैं।
(ख) जब किसी फ़्यूज़ में से किसी निश्चित सीमा से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह पिघलकर टूट जाता है। (सत्य)
(ग) विद्युत चुंबक, चुंबकीय पदार्थों को आकर्षित नहीं करता। (असत्य)
सही कथन: विद्युत चुंबक, चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, निकल, कोबाल्ट) को आकर्षित करता है।
(घ) विद्युत घंटी में विद्युत चुंबक होता है। (सत्य)
उत्तर: नहीं, विद्युत चुंबक का उपयोग कचरे के ढेर से प्लास्टिक को अलग करने के लिए नहीं किया जा सकता।
कारण: विद्युत चुंबक केवल चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, स्टील, निकल आदि) को ही आकर्षित करते हैं। प्लास्टिक एक अचुंबकीय पदार्थ है, यानी यह चुंबक द्वारा आकर्षित नहीं होता। इसलिए, चुंबक प्लास्टिक को कचरे के ढेर से नहीं खींच पाएगा। कचरे से प्लास्टिक को अलग करने के लिए अन्य विधियाँ जैसे हवा का झोंका देना या हाथ से छँटाई का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर: नहीं, हम उससे सहमत नहीं होंगे और उसे ताँबे के तार को फ्यूज़ के रूप में इस्तेमाल करने से रोकेंगे।
कारण: फ्यूज़ एक सुरक्षा उपकरण है। यह एक विशेष मिश्रधातु (जैसे टिन और सीसा) का बना होता है जिसका गलनांक कम होता है। जब परिपथ में किसी दोष (जैसे ओवरलोड या शॉर्ट सर्किट) के कारण सुरक्षा सीमा से अधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज़ का तार तुरंत पिघलकर टूट जाता है और परिपथ को तोड़ देता है। इससे आग लगने या अन्य नुकसान से बचाव होता है।
ताँबे के तार का गलनांक बहुत अधिक होता है। अधिक धारा प्रवाहित होने पर भी यह आसानी से नहीं पिघलेगा और परिपथ को बंद नहीं करेगा, जिससे तारों के अत्यधिक गर्म होने, आग लगने या विद्युत उपकरणों के खराब होने का गंभीर खतरा रहेगा। इसलिए, फ्यूज़ के स्थान पर कभी भी साधारण ताँबे के तार का उपयोग नहीं करना चाहिए।
संभावित दोष और समाधान:
(क) जब स्विच 'ऑफ' की स्थिति में है, तो क्या कोई भी बल्ब दीप्त होगा?
उत्तर: नहीं, जब स्विच 'ऑफ' की स्थिति में है तो कोई भी बल्ब दीप्त नहीं होगा। स्विच 'ऑफ' होने से परिपथ टूट जाता है और विद्युत धारा का प्रवाह पूरे परिपथ में रुक जाता है। बिना धारा प्रवाह के बल्ब नहीं जल सकते।
(ख) जब स्विच को 'ऑन' की स्थिति में लाते हैं, तो बल्बों A, B तथा C के दीप्त होने का क्रम क्या होगा?
उत्तर: जब स्विच को 'ऑन' की स्थिति में लाया जाएगा, तो तीनों बल्ब एक साथ तुरंत दीप्त होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि चित्र में दर्शाए गए परिपथ में सभी बल्ब श्रृंखला क्रम में जुड़े हुए हैं। श्रृंखला क्रम में जुड़े सभी अवयवों में एक ही धारा एक साथ प्रवाहित होती है, इसलिए सभी बल्ब एक साथ ही जलेंगे। उनके जलने में कोई क्रम (जैसे पहले A, फिर B, फिर C) नहीं होगा।
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