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उत्तर--
(अ) श्वसन तथा दहन में अन्तर
| क्र. सं. | श्वसन (Respiration) | दहन (Combustion) |
|---|---|---|
| 1. | यह एक जैविक क्रिया है। | यह एक रासायनिक क्रिया है। |
| 2. | इस क्रिया में ऊर्जा विभिन्न चरणों में निकलती है। | इसमें ऊर्जा एक साथ निकलती है। |
| 3. | शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। | तापमान में अत्यधिक वृद्धि होती है। |
| 4. | ऊर्जा ATP के रूप में संचित होती है। | ऊर्जा ऊष्मा एवं प्रकाश के रूप में निकलती है। |
| 5. | सम्पूर्ण क्रिया विभिन्न एन्जाइमों द्वारा नियन्त्रित होती है। | सम्पूर्ण क्रिया उच्च ताप पर सम्पन्न होती है। |
(ब) ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र में अन्तर
| क्र. सं. | ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis) | क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle) |
|---|---|---|
| 1. | यह 10 चरणों का रेखीय पथ है। | यह 8 चरणों का चक्रीय पथ है। |
| 2. | यह कोशिकाद्रव्य में होता है। क्रियाधार ग्लूकोज होता है। | यह माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। क्रियाधार ऐसीटिल कोएन्जाइम-A होता है। |
| 3. | इसमें CO₂ मुक्त नहीं होती। | इसमें CO₂ मुक्त होती है। |
| 4. | इसमें 2 ATP अणुओं का प्रयोग होता है। यह क्रिया ऑक्सी तथा अनॉक्सी दोनों परिस्थितियों में होती है। | इसमें ATP का प्रयोग नहीं होता। यह क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में ही होती है। |
| 5. | इसके अन्त में पाइरुविक अम्ल के 2 अणु बनते हैं। | इसके अन्त में CO₂, जल तथा ऊर्जा मुक्त होती है। |
| 6. | ग्लूकोज के एक अणु से 8 ATP अणु प्राप्त होते हैं। | ग्लूकोज के एक अणु से 24 ATP अणु प्राप्त होते हैं। |
(स) ऑक्सीश्वसन तथा किण्वन में अन्तर
| क्र. सं. | ऑक्सीश्वसन (Aerobic Respiration) | किण्वन (Fermentation) |
|---|---|---|
| 1. | ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। | इसके लिए ऑक्सीजन आवश्यक नहीं होती। यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। |
| 2. | यह क्रिया जीवित कोशिकाओं में होती है। | यह क्रिया क्रियाधार तथा एन्जाइम की उपस्थिति में होती है, जीवित कोशिकाओं की उपस्थिति आवश्यक नहीं है। यह सामान्यतया जीवाणु तथा कवकों (जैसे-यीस्ट) में होती है। |
| 3. | इसमें शर्करा के ऑक्सीकरण से CO₂ तथा जल बनता है। | इसमें क्रियाधार तथा सूक्ष्म जीव के आधार पर विभिन्न कार्बनिक अम्ल या ऐल्कोहॉल बनता है। |
| 4. | इसमें भोज्य पदार्थों के पूर्ण ऑक्सीकरण से अधिक ऊर्जा (38 ATP) प्राप्त होती है। | इसमें अपूर्ण ऑक्सीकरण के फलस्वरूप कम ऊर्जा (2 ATP) प्राप्त होती है। |
| 5. | इस क्रिया में बहुत से एन्जाइम्स काम आते हैं। | इस क्रिया में कुछ एन्जाइम्स ही काम आते हैं। |
उत्तर-- वे कार्बनिक पदार्थ जो एनाबोलिक विधि से संश्लेषित हों अथवा संचित भोजन के रूप में संग्रह किए जाएँ और ऊर्जा के विमोचन के लिए उनका विघटन हो, उन्हें श्वसनीय क्रियाधार कहते हैं। सर्वाधिक साधारण क्रियाधार ग्लूकोज (मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट) है।
उत्तर-- ग्लाइकोलिसिस को EMP मार्ग (Embden-Meyerhof-Parnas Pathway) भी कहते हैं। यह कोशिकाद्रव्य में सम्पन्न होता है। इसमें ऑक्सीजन का प्रयोग नहीं होता; अतः ऑक्सी तथा अनॉक्सीश्वसन दोनों में यह क्रिया होती है। इस क्रिया के अन्त में ग्लूकोज के एक अणु से पाइरुविक अम्ल (Pyruvic Acid) के 2 अणु बनते हैं। ग्लाइकोलिसिस में 4 ATP बनते हैं, 2 ATP खर्च होते हैं; अतः 2 ATP अणु का लाभ होता है। इन अभिक्रियाओं में मुक्त H⁺ आयन हाइड्रोजनग्राही NAD⁺ से जुड़कर NADH + H⁺ बनाते हैं। ये क्रियाएँ विभिन्न चरणों में पूर्ण होती हैं। ग्लाइकोलिसिस से कुल 8 ATP अणु ऊर्जा प्राप्त होती है।
चित्र: ग्लाइकोलिसिस की प्रक्रिया
उत्तर-- जीवित कोशिका में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज (कार्बनिक पदार्थ) के जैव-रासायनिक ऑक्सीकरण को ऑक्सीश्वसन कहते हैं। इस क्रिया के अन्तर्गत रासायनिक ऊर्जा गतिज ऊर्जा के रूप में ATP में संचित हो जाती है।
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + 673 kcal
ऑक्सीश्वसन निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होता है--
चित्र: क्रेब्स चक्र (ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र) - यह माइटोकॉन्डिया में घटित होने वाली प्रक्रिया है। इसमें ETS की आवश्यकता होती है।
उत्तर-- ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र के विभिन्न पदों में अपघटन के फलस्वरूप उत्पन्न हाइड्रोजन आयन (H⁺) एवं इलेक्ट्रॉन (e⁻) हाइड्रोजनग्राही (NAD⁺, FAD) द्वारा ग्रहण किए जाते हैं। इन्हें वापस ऑक्सीकृत करने के लिए इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र (ETS) की आवश्यकता होती है। यह तन्त्र माइटोकॉन्डिया की अन्तःकला में स्थित साइटोक्रोम एन्जाइमों की एक श्रृंखला है। इलेक्ट्रॉन एक के बाद एक साइटोक्रोम से गुजरते हुए अपना ऊर्जा स्तर कम करते हैं। इस प्रक्रिया में निर्मुक्त ऊर्जा ADP के फॉस्फोरिलीकरण द्वारा ATP में संचित हो जाती है। श्रृंखला के अन्त में इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन से मिलते हैं, जो H⁺ आयनों के साथ जुड़कर जल (H₂O) का निर्माण करती है।
उत्तर--
(अ) ऑक्सीश्वसन तथा अनॉक्सीश्वसन में अन्तर
| क्र. सं. | ऑक्सीश्वसन | अनॉक्सीश्वसन |
|---|---|---|
| 1. | ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। | ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती। |
| 2. | ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से CO₂ व जल बनता है। | पूर्ण ऑक्सीकरण नहीं होता, ऐल्कोहॉल तथा CO₂ आदि बनते हैं। |
| 3. | सभी जीवों में सामान्य रूप से पाया जाता है। | कुछ पौधों, जन्तुओं या उनके विशेष ऊतकों में पाया जाता है। |
| 4. | ग्लाइकोलिसिस को छोड़कर सभी क्रियाएँ माइटोकॉन्ड्रिया में होती हैं। | सभी क्रियाएँ कोशिकाद्रव्य में होती हैं। |
| 5. | ऊर्जा अधिक मात्रा में मुक्त (673 kcal) होती है। | ऊर्जा बहुत कम मात्रा में (21-24 kcal) मुक्त होती है। |
| 6. | एक अणु ग्लूकोज से 38 ATP अणु प्राप्त होते हैं। | एक अणु ग्लूकोज से केवल 2 ATP अणु प्राप्त होते हैं। |
(ब) ग्लाइकोलिसिस तथा किण्वन में अन्तर (प्रश्न 1(स) के उत्तर में दिया गया है।)
(स) ग्लाइकोलिसिस तथा सिट्रिक अम्ल चक्र में अन्तर (प्रश्न 1(ब) के उत्तर में दिया गया है। क्रेब्स चक्र को ही सिट्रिक अम्ल चक्र कहते हैं।)
उत्तर-- ATP अणुओं की प्राप्ति की गणना करते समय निम्नलिखित कल्पनाएँ की जाती हैं:
उत्तर-- श्वसनीय पथ को ऐम्फीब्रोलिक पथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें अपचय (Catabolic) तथा उपचय (Anabolic) दोनों प्रकार की क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं।
चित्र: श्वसन मार्ग विभिन्न कार्बनिक अणुओं के विखण्डन एवं संश्लेषण का केन्द्र है।
उत्तर-- एक निश्चित ताप व दाब पर, श्वसन क्रिया में निष्कासित CO₂ के आयतन तथा अवशोषित O₂ के आयतन के अनुपात को श्वसन गुणांक (R.Q.) कहते हैं।
R.Q. = निष्कासित CO₂ का आयतन / अवशोषित O₂ का आयतन
श्वसन क्रियाधार के अनुसार R.Q. का मान बदलता है। वसा के लिए श्वसन गुणांक 1 से कम (लगभग 0.7) होता है क्योंकि वसा के ऑक्सीकरण में अवशोषित ऑक्सीजन की तुलना में निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम होती है।
उदाहरण: ट्राइपैल्मिटिन के ऑक्सीकरण में R.Q. = 102 CO₂ / 145 O₂ ≈ 0.7
उत्तर-- श्वसन क्रिया के इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र (ETS) में, इलेक्ट्रॉनों के एक साइटोक्रोम से दूसरे साइटोक्रोम तक स्थानान्तरण के दौरान मुक्त होने वाली ऊर्जा का उपयोग ADP के अणु में अकार्बनिक फॉस्फेट (Pi) जुड़कर ATP बनाने में किया जाता है। चूँकि यह फॉस्फोरिलीकरण की क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में एवं ऑक्सीकरण क्रिया के साथ जुड़ी होती है, इसलिए इसे ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण कहते हैं। यह क्रिया माइटोकॉन्डिया की अन्तःकला पर सम्पन्न होती है और ATP संश्लेषण का प्रमुख स्रोत है।
चित्र: माइटोकॉन्डिया में ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण द्वारा ATP संश्लेषण
उत्तर-- श्वसन के प्रत्येक चरण में मुक्त होने वाली ऊर्जा का महत्त्व निम्नलिखित है:
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