UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board class 11 Biology (15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन) solution PDF

UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board class 11 Biology (15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन) solution

UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 1
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 2
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 3
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 4
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 5
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 6
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 7
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 8
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 9
UP Board Solution class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Image 10

पादप वृद्धि एवं परिवर्धन
Plant Growth and Development

अध्याय - 15

UP Board पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. वृद्धि, विभेदन, परिवर्धन, निर्विभेदन, पुनर्विभेदन, सीमित वृद्धि, मेरिस्टेम तथा वृद्धि दर की परिभाषा दें।

उत्तर:

वृद्धि (Growth): ऊर्जा खर्च करके होने वाली उपापचयी क्रियाओं के परिणामस्वरूप जीव के आकार, लम्बाई, आयतन, भार या कोशिका संख्या में होने वाली अनपलट (स्थायी) वृद्धि को वृद्धि कहते हैं। यह जीवों की एक मूलभूत विशेषता है।

विभेदन (Differentiation): विभज्योतक (मेरिस्टेम) से उत्पन्न समान कोशिकाएँ विशिष्ट कार्य करने के लिए विभिन्न संरचनाओं एवं कार्यों में परिवर्तित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को विभेदन कहते हैं। उदाहरण: जाइलम व फ्लोएम के तत्वों का निर्माण।

परिवर्धन (Development): यह एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें पौधे के जीवनकाल में होने वाले सभी गुणात्मक परिवर्तन शामिल हैं। यह बीज के अंकुरण से लेकर पौधे की जरावस्था तक के सभी संरचनात्मक एवं कार्यात्मक परिवर्तनों का योग है।

निर्विभेदन (Dedifferentiation): कुछ विभेदित एवं स्थायी कोशिकाएँ (जैसे पैरेन्काइमा), जिन्होंने विभाजन की क्षमता खो दी होती है, पुनः विभाजन की क्षमता प्राप्त कर लेती हैं। इस प्रक्रिया को निर्विभेदन कहते हैं। उदाहरण: कॉर्क एधा (कॉर्क कैम्बियम) का निर्माण।

पुनर्विभेदन (Redifferentiation): निर्विभेदित कोशिकाएँ पुनः विभाजित होकर जो नई कोशिकाएँ बनाती हैं, वे पुनः विभेदित होकर विशिष्ट कार्य करने वाले ऊतकों में बदल जाती हैं। इस प्रक्रिया को पुनर्विभेदन कहते हैं।

सीमित वृद्धि (Limited Growth): कुछ पादप अंगों (जैसे पत्तियाँ, फूल, फल) की वृद्धि एक निश्चित सीमा तक ही होती है, उसके बाद रुक जाती है। इसे सीमित वृद्धि कहते हैं। इसके विपरीत, पौधे का तना एवं जड़ें जीवनपर्यन्त बढ़ती रह सकती हैं, इसे असीमित वृद्धि कहते हैं।

मेरिस्टेम (Meristem): ये विभज्योतकी ऊतक हैं जिनकी कोशिकाएँ निरंतर विभाजन की क्षमता रखती हैं। ये पौधे की वृद्धि के लिए उत्तरदायी होते हैं। ये शीर्षस्थ (जड़ व तने के शीर्ष पर), पार्श्व (कैम्बियम) तथा अंतर्वेशी मेरिस्टेम के रूप में पाए जाते हैं।

वृद्धि दर (Growth Rate): समय की प्रति इकाई में होने वाली वृद्धि को वृद्धि दर कहते हैं। इसे गणितीय रूप से व्यक्त किया जा सकता है। वृद्धि दर ज्यामितीय (तेज) या अंकगणितीय (स्थिर) हो सकती है।

प्रश्न 2. पुष्पित पौधों के जीवन में किसी एक प्राचालिक (Parameter) से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता है, क्यों?

उत्तर: पौधों की वृद्धि एक जटिल प्रक्रिया है जो विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग तरीके से घटित होती है। इसे किसी एक मापदंड (प्राचालिक) जैसे केवल लम्बाई, भार या कोशिका संख्या से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  • बहुआयामी प्रकृति: वृद्धि कोशिका विभाजन, कोशिका दीर्घीकरण और कोशिका विभेदन जैसी कई प्रक्रियाओं का सम्मिलित परिणाम है।
  • विभिन्न मापदंड: विभिन्न अवस्थाओं में वृद्धि अलग-अलग मापदंडों से प्रकट होती है। उदाहरण के लिए, प्रारंभिक अवस्था में कोशिका संख्या बढ़ती है, बाद में कोशिका का आकार (दीर्घीकरण) और अंत में विशेषीकरण (विभेदन) होता है।
  • अंग विशेष की वृद्धि: पौधे के विभिन्न अंगों (जड़, तना, पत्ती) की वृद्धि दर और प्रतिरूप भिन्न होता है। जड़ की लम्बाई में वृद्धि को मापना पत्ती के क्षेत्रफल में वृद्धि से भिन्न है।
  • गुणात्मक परिवर्तन: परिवर्धन में केवल मात्रात्मक वृद्धि ही नहीं, बल्कि पुष्पन, फलन जैसे गुणात्मक परिवर्तन भी शामिल हैं, जिन्हें केवल भार या लम्बाई से नहीं मापा जा सकता।
अतः पौधों की संपूर्ण वृद्धि एवं परिवर्धन की प्रक्रिया को समझने के लिए लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन, ताजा व शुष्क भार, कोशिका संख्या आदि कई मापदंडों का एक साथ अध्ययन आवश्यक है।

प्रश्न 3. संक्षिप्त वर्णित कीजिए-- (अ) अंकगणितीय वृद्धि, (ब) ज्यामितीय वृद्धि, (स) सिग्मॉइड वृद्धि वक्र, (द) सम्पूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर।

उत्तर:

(अ) अंकगणितीय वृद्धि (Arithmetic Growth): इस प्रकार की वृद्धि में, कोशिका विभाजन के बाद बनी दो संतति कोशिकाओं में से केवल एक ही कोशिका लगातार विभाजित होती रहती है जबकि दूसरी कोशिका विभेदित हो जाती है। इससे वृद्धि एक निश्चित दर से होती है और ग्राफ पर यह एक सीधी रेखा (रैखिक वक्र) के रूप में दिखाई देती है। उदाहरण: एक जड़ की लम्बाई में नियत दर से वृद्धि। इसे सूत्र Lt = L0 + rt से व्यक्त किया जाता है।

(ब) ज्यामितीय वृद्धि (Geometric Growth): इसमें प्रारंभिक अवस्था में वृद्धि धीमी (लेग फेज) होती है, फिर तेज (लॉग फेज या घातांकीय फेज) हो जाती है और अंत में संसाधनों की सीमा के कारण धीमी होकर रुक (स्थिर फेज) जाती है। इस पैटर्न को ग्राफ पर दर्शाने पर एक S-आकार का वक्र (सिग्मॉइड वक्र) प्राप्त होता है। अधिकांश जीवों एवं पादप कोशिकाओं में यही वृद्धि पैटर्न देखने को मिलता है। इसे सूत्र Wt = W0 ert से व्यक्त किया जाता है।

सिग्मॉइड वृद्धि वक्र
सिग्मॉइड वृद्धि वक्र का प्रारूप

(स) सिग्मॉइड वृद्धि वक्र (Sigmoid Growth Curve): ज्यामितीय वृद्धि के तीन चरणों (लेग, लॉग व स्थिर फेज) को मिलाकर बनने वाला S-आकार का वक्र ही सिग्मॉइड वृद्धि वक्र कहलाता है। यह किसी पादप अंग या सम्पूर्ण पादप की वृद्धि का सामान्य प्रतिरूप है।

(द) सम्पूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर (Absolute and Relative Growth Rate):

  • सम्पूर्ण वृद्धि दर (AGR): प्रति इकाई समय में हुई वृद्धि की कुल मात्रा। उदाहरण: एक पत्ती का क्षेत्रफल एक सप्ताह में 5 cm² बढ़ गया।
  • सापेक्ष वृद्धि दर (RGR): प्रति इकाई समय में प्रति इकाई प्रारंभिक माप में हुई वृद्धि। यह वृद्धि की दक्षता को दर्शाता है। उदाहरण: एक छोटी पत्ती और बड़ी पत्ती दोनों ने 5 cm² की वृद्धि की, लेकिन छोटी पत्ती की सापेक्ष वृद्धि दर (प्रतिशत में) अधिक होगी क्योंकि उसका प्रारंभिक आकार कम था।

प्रश्न 4. प्राकृतिक पादप वृद्धि नियामकों के पाँच मुख्य समूहों के बारे में लिखिए। इनके आविष्कार, कार्यिकी प्रभाव तथा कृषि/बागवानी में इनके प्रयोग के बारे में लिखिए।

उत्तर: पादप हॉर्मोन्स या वृद्धि नियामक अति सूक्ष्म मात्रा में कार्य करने वाले कार्बनिक पदार्थ हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास एवं उपापचय को नियंत्रित करते हैं। इनके पाँच मुख्य समूह हैं:

समूह आविष्कार/खोजकर्ता मुख्य कार्यिकी प्रभाव कृषि/बागवानी में उपयोग
1. ऑक्सिन
(IAA, NAA, 2,4-D)
फ्रिट्स वेंट (1928) ने जई के प्रांकुर चोल से प्रमाणित किया। कोशिका दीर्घीकरण, शीर्ष प्रभाविता, प्रकाशानुवर्तन, जड़ विभेदन। कलम लगाकर पौध तैयार करना (रूटिंग), खरपतवार नाशक (2,4-D), अनिषेकफलन द्वारा बीजरहित फल उत्पादन।
2. जिबरेलिन
(GA)
कुरोसावा (1926) ने 'बकाने' रोग के कवक से खोजा। याबुता व हयाशी (1939) ने शुद्ध किया। तने की लम्बाई बढ़ाना (बोल्टिंग), बीज अंकुरण, अनिषेकफलन, पुष्पन प्रेरण। अंगूर के डंठल को लम्बा करना, बीजरहित फल उत्पादन, द्विवर्षी पौधों में शीघ्र पुष्पन।
3. साइटोकाइनिन
(काइनेटिन, जिएटिन)
मिलर एवं स्कूग (1955) ने खोजा। लेथम ने मक्का से जिएटिन प्राप्त किया। कोशिका विभाजन को प्रेरित करना, जीर्णता (बुढ़ापा) रोकना, अंग निर्माण को नियंत्रित करना। ऊतक संवर्धन में कोशिका विभाजन हेतु, फलों व फूलों की ताजगी बनाए रखना, पौधों में शाखाओं का विकास।
4. एब्सिसिक अम्ल (ABA)
(तनाव हॉर्मोन)
एडिकोट एवं कार्न्स (1963) ने कपास से 'एब्सिसिन' तथा वेयरिंग ने 'डॉरमिन' खोजा। वृद्धि रोधक, बीज व कलिका प्रसुप्ति, रन्ध्र बंद करना, जल अभाव में पौधे की रक्षा, विलगन। पौधों को सूखे के प्रति सहनशील बनाना, फलों के पकने में देरी करना, प्रतिरोपण के समय पौधों के मुरझाने को कम करना।
5. एथिलीन
(गैसीय हॉर्मोन)
डिमिट्री नेलजुबोव (1901) ने प्रभाव देखा। गेन (1934) ने हॉर्मोन सिद्ध किया। फल पकाना, पत्ती व फल विलगन, तने की मोटाई बढ़ाना, पुष्पन को प्रभावित करना। फलों को कृत्रिम रूप से पकाना (इथेफोन का उपयोग), अनन्नास में एक साथ पुष्पन, ककड़ी कुल में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाना।

प्रश्न 5. दीप्तिकालिता तथा वसन्तीकरण क्या है? इनके महत्त्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

दीप्तिकालिता (Photoperiodism): पौधों द्वारा दिन (प्रकाश) एवं रात (अंधकार) की अवधि के प्रति की जाने वाली अनुक्रिया को दीप्तिकालिता कहते हैं। यह विशेष रूप से पुष्पन को प्रभावित करती है।

  • महत्त्व: इसके आधार पर पौधों को अल्प प्रदीप्तकाली (कम दिन में फूलने वाले, जैसे गुलदाउदी), दीर्घ प्रदीप्तकाली (लंबे दिन में फूलने वाले, जैसे गेहूँ) और तटस्थ प्रदीप्तकाली (दिन की लंबाई से प्रभावित नहीं, जैसे कपास) में वर्गीकृत किया जाता है। फूलों की खेती में मौसम से इतर फूल प्राप्त करने के लिए ग्रीन हाउस में प्रकाश अवधि को नियंत्रित किया जाता है।

वसन्तीकरण (Vernalization): कुछ पौधों में पुष्पन के लिए निम्न तापक्रम पर एक निश्चित अवधि तक रहने की आवश्यकता होती है। इस क्रिया को वसन्तीकरण कहते हैं। टी.डी. लाइसेन्को (1928) ने इसकी खोज की।

  • महत्त्व: इसकी सहायता से शीत ऋतु की फसलों (जैसे गेहूँ की शीतकालीन किस्म) को वसंत ऋतु में भी उगाया जा सकता है। इससे फसल चक्र में लचीलापन आता है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह पौधों में पाला सहनशीलता भी बढ़ाता है।

प्रश्न 6. एब्सिसिक अम्ल को तनाव हार्मोन क्यों कहते हैं?

उत्तर: एब्सिसिक अम्ल (ABA) को 'तनाव हार्मोन' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पौधों को विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों (तनाव) जैसे सूखा, लवणता, अधिक तापमान आदि से निपटने में मदद करता है। यह निम्नलिखित तरीकों से कार्य करता है:

  • रन्ध्र बंद करना: जल की कमी होने पर ABA का स्तर बढ़ जाता है, जो रन्ध्रों को बंद करवाकर वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल हानि को रोकता है।
  • प्रसुप्ति प्रेरण: यह बीजों और कलिकाओं में प्रसुप्ति (सुषुप्तावस्था) को प्रेरित करता है, जिससे पौधा प्रतिकूल मौसम (जैसे सर्दी या गर्मी) को आराम से पार कर लेता है।
  • वृद्धि रोकना: तनाव की स्थिति में पौधे की वृद्धि को रोककर, यह संसाधनों का संरक्षण करता है ताकि पौधा जीवित रह सके।
इस प्रकार, ABA पौधे की अस्तित्व रक्षा के लिए एक सुरक्षात्मक हॉर्मोन का कार्य करता है।

प्रश्न 7. उच्च पादपों में वृद्धि एवं विभेदन खुला होता है, टिप्पणी करें?

उत्तर: उच्च पादपों में वृद्धि एवं विभेदन 'खुला' होने का तात्पर्य है कि इनमें वृद्धि एवं नए अंगों के निर्माण की क्षमता जीवनपर्यंत बनी रहती है। यह क्षमता विशेष विभज्योतकी ऊतकों (मेरिस्टेम) के कारण होती है जो पौधे के विभिन्न भागों (जड़ व तने के शीर्ष, कैम्बियम) में स्थित रहते हैं। ये ऊतक लगातार विभाजित होकर नई कोशिकाएँ बनाते रहते हैं। इन नई कोशिकाओं का कुछ भाग विभेदित होकर विशिष्ट ऊतक बनाता है तो कुछ भाग स्वयं विभज्योतक के रूप में बना रहता है। इस प्रकार, पौधा अपने जीवनकाल में लगातार नई पत्तियाँ, शाखाएँ, फूल व फल बनाता रहता है, जबकि अधिकांश जंतुओं में वृद्धि एवं अंग निर्माण एक निश्चित आयु तक ही सीमित ('बंद') होता है।

प्रश्न 8. अल्प प्रदीप्तकाली पौधे और दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधे किसी एक स्थान पर साथ-साथ फूलते हैं। विस्तृत व्याख्या कीजिए।

उत्तर: यह संभव है क्योंकि पौधों का वर्गीकरण उनके निर्णायक दीप्तिकाल (Critical Photoperiod) के आधार पर किया जाता है, न कि उस विशेष दिन की लंबाई के आधार पर जिस दिन वे फूलते हैं।

  • निर्णायक दीप्तिकाल: वह प्रकाश अवधि है जो पुष्पन के लिए आवश्यक न्यूनतम (दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधों के लिए) या अधिकतम (अल्प प्रदीप्तकाली पौधों के लिए) सीमा होती है।
उदाहरण: मान लीजिए एक स्थान पर दिन की लंबाई 14 घंटे है।
  • पौधा A (जैसे जैन्थियम) का निर्णायक दीप्तिकाल 15 घंटे है। यह 14 घंटे (अपने निर्णायक दीप्तिकाल से कम) पर फूलता है, इसलिए यह एक अल्प प्रदीप्तकाली पौधा है।
  • पौधा B (जैसे हाइओसायमस नाइजर) का निर्णायक दीप्तिकाल 11 घंटे है। यह 14 घंटे (अपने निर्णायक दीप्तिकाल से अधिक) पर फूलता है, इसलिए यह एक दीर्घ प्रदीप्तकाली पौधा है।
इस प्रकार, दोनों अलग-अलग श्रेणी के पौधे एक ही 14 घंटे के दिन की लंबाई पर साथ-साथ फूल सकते हैं।

प्रश्न 9. अगर आपको ऐसा करने को कहा जाए तो एक पादप वृद्धि नियामक का नाम दें-

उत्तर:

  1. (क) किसी टहनी में जड़ पैदा करने हेतु: ऑक्सिन (जैसे IBA, NAA)
  2. (ख) फल को जल्दी पकाने हेतु: एथिलीन (या इथेफोन)
  3. (ग) पत्तियों की जरावस्था को रोकने हेतु: साइटोकाइनिन
  4. (घ) कक्षस्थ कलिकाओं में वृद्धि कराने हेतु: साइटोकाइनिन (शीर्ष प्रभाविता हटाने के लिए ऑक्सिन भी महत्वपूर्ण है)
  5. (ड) एक रोजेट पौधे में 'बोल्ट' हेतु: जिबरेलिन (तना लंबा करने के लिए)
  6. (च) पत्तियों के रन्ध्र को तुरन्त बन्द करने हेतु: एब्सिसिक अम्ल (ABA)

प्रश्न 10. क्या एक पर्णरहित पादप दीप्तिकालिता के चक्र से अनुक्रिया कर सकता है? हाँ या नहीं। क्यों?

उत्तर: नहीं, एक पर्णरहित (बिना पत्तियों वाला) पौधा सामान्य रूप से दीप्तिकालिता की अनुक्रिया नहीं कर सकता। कारण: दीप्तिकाल (दिन-रात की लंबाई) का अनुभव पौधे की पत्तियों द्वारा किया जाता है। पत्तियों में ही प्रकाश ग्राही वर्णक (फाइटोक्रोम) होते हैं जो प्रकाश अवधि को पहचानते हैं। अनुकूल दीप्तिकाल मिलने पर पत्तियाँ एक फ्लोरिजन (पुष्पन हॉर्मोन) जैसा पदार्थ संश्लेषित करती हैं, जो शीर्षस्थ कलिका तक पहुँचकर पुष्पन को प्रेरित करता है। यदि पत्तियाँ ही नहीं हैं, तो प्रकाश अवधि का पता लगाने और फ्लोरिजन बन

Get UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Solution in Hindi Medium

UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 11 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 11 Biology 15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board class 11 textSolutions

There are various features of UP Board class 11 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board class 11 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of class 11 Biology
1. जीव जगत
2. जीव जगत का वर्गीकरण
3. वनस्पति जगत
4. प्राणि जगत
5. पुष्पी पादपों की आकारिकी
6. पुष्पी पादपों का शारीर
7. प्राणियों में संरचनात्मक संगठन
8. कोशिका जीवन की इकाई
9. जैव अणु
10. कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन
11. पौधों में परिवहन
12. खनिज पोषण
13. उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण
14. पादप में स्वशन
15. पादप वृद्धि एवं परिवर्धन
16. पाचन एवं अवशोषण
17. श्वसन और गैसों का विनिमय
18. शरीर द्रव तथा परिसंचरण
19. उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन
20. गमन एवं संचलन
21. तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय
22. रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण
;