UP Board class 11 Biology 7. प्राणियों में संरचनात्मक संगठन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(यहाँ केंचुए के जननांगों का एक नामांकित चित्र होना चाहिए।)
चित्र में निम्नलिखित संरचनाएँ दर्शाई जाती हैं:
SPERMATHECAE, TESTIS, TESTIS SACS, SEMINAL VESICLES, OVARY, OVIDUCAL FUNNEL, OVIDUCT, VAS DEFERENS, CLITELLUM, COMMON PROSTATIC AND SPERMATIC DUCTS, PROSTATE GLAND, ACCESSORY GLAND.
चित्र-केंचुआ: जननांगों का पृष्ठ दृश्य।
(यहाँ तिलचट्टे की आहारनाल का एक नामांकित चित्र होना चाहिए।)
चित्र में निम्नलिखित संरचनाएँ दर्शाई जाती हैं:
मुख, ग्रसनी, ग्रासनाल, फसल, पेषणी, आमाशय, मध्यांत्र, मैल्पीघी नलिकाएँ, पश्चांत्र, गुदा।
चित्र-तिलचट्टे की आहारनाल।
(अ) पुरोमुख एवं परितुंड में अन्तर
| क्र.सं. | पुरोमुख (Prostomium) | परितुंड (Peristomium) |
|---|---|---|
| 1. | केंचुए के प्रथम खण्ड (परितुंड) से आगे लटका एक मांसल पिण्ड होता है। | केंचुए के अग्र छोर पर स्थित प्रथम खण्ड को परितुंड कहते हैं। |
| 2. | यह एक संवेदी अंग है जो प्रकाश व अन्धकार का आभास कराता है। | इसके अधर तल पर मुख स्थित होता है। |
| 3. | यह मिट्टी में सुरंग बनाने में सहायता करता है। | यह भोजन ग्रहण करने एवं प्रचलन में सहायक होता है। |
(ब) पटीय एवं ग्रसनीय वृक्कक में अन्तर
| क्र.सं. | पटीय वृक्कक (Septal Nephridia) | ग्रसनीय वृक्कक (Pharyngeal Nephridia) |
|---|---|---|
| 1. | 15/16वें खण्ड से अन्तिम खण्ड तक की अन्तराखण्डीय पटों पर पाए जाते हैं। | 4वें, 5वें तथा 6वें खण्डों में ग्रसनी व ग्रासनाल के पार्श्वों में समूह में स्थित होते हैं। |
| 2. | इनमें वृक्कक मुखिका, ग्रीवा, काय तथा अन्तस्थ नलिका होती है। | इनमें वृक्कक मुखिका एवं ग्रीवा नहीं होती। केवल वृक्कक काय तथा अन्तस्थ नलिका होती है। |
| 3. | वृक्कक काय की कुण्डलित लूप की लम्बाई सीधी पालि से लगभग दुगनी होती है। | वृक्कक काय की सीधी पालि तथा कुण्डलित लूप की लम्बाई बराबर होती है। |
| 4. | अन्तस्थ नलिका आंत्र में खुलती है। | अन्तस्थ नलिका ग्रसनी एवं ग्रासनाल में खुलती है। |
रुधिर हल्के पीले रंग का, गाढ़ा, हल्का क्षारीय (pH 7.3-7.4) द्रव होता है। स्वस्थ मनुष्य में रुधिर उसके कुल भार का 7% से 8% होता है। इसके दो मुख्य घटक होते हैं--
रुधिर कणिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं--
(क) लाल रुधिर कणिकाएँ (RBCs):
(ख) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (WBCs):
(ग) रुधिर प्लेटलेट्स (Platelets):
(यहाँ स्तनी की विभिन्न रुधिर कणिकाओं का नामांकित चित्र होना चाहिए।)
संरचना तथा कार्यों के आधार पर उपकला ऊतक को दो मुख्य समूहों में बाँटा जाता है:
(क) आवरण उपकला: यह अंगों तथा शरीर की सतह को ढके रखता है। यह दो प्रकार की होती है:
1. सरल उपकला (Simple Epithelium): एक ही स्तर की कोशिकाओं से बनी होती है। यह पाँच प्रकार की होती है:
(यहाँ सरल शल्की, स्तम्भी व घनाकार उपकला का चित्र होना चाहिए।)
2. संयुक्त या स्तरित उपकला (Compound or Stratified Epithelium): दो या अधिक स्तरों की कोशिकाओं से बनी होती है। मुख्य कार्य सुरक्षा प्रदान करना है।
(यहाँ स्तरित शल्की, अन्तवर्ती व तन्त्रिका संवेदी उपकला का चित्र होना चाहिए।)
(ख) ग्रन्थिल उपकला: स्राव के कार्य के लिए विशिष्टीकृत उपकला।
(यहाँ विभिन्न प्रकार की सरल बहुकोशिकीय ग्रन्थियों का चित्र होना चाहिए।)
(अ) सरल उपकला तथा संयुक्त उपकला ऊतक में अन्तर
| क्र.सं. | सरल उपकला | संयुक्त उपकला |
|---|---|---|
| 1. | एक ही स्तर की कोशिकाओं से बनी होती है। | दो या अधिक स्तरों की कोशिकाओं से बनी होती है। |
| 2. | मुख्य कार्य स्रावण, अवशोषण, उत्सर्जन आदि हैं। | मुख्य कार्य यान्त्रिक सुरक्षा प्रदान करना है। |
| 3. | वाहिनियों, नलिकाओं, वायु कूपिकाओं आदि का भीतरी स्तर बनाती है। | त्वचा की बाह्य सतह, मुखगुहा, ग्रासनाल आदि को ढकती है। |
(ब) हृद पेशी तथा रेखित पेशी में अन्तर
| क्र.सं. | हृद पेशी | रेखित पेशी |
|---|---|---|
| 1. | केवल हृदय की भित्ति में पाई जाती है। | कंकाल से जुड़ी होती है; भुजाओं, टाँगों, जीभ आदि में पाई जाती है। |
| 2. | शाखान्वित होती है तथा कोशिकाएँ परस्पर जुड़कर जाल बनाती हैं। | लम्बी, बेलनाकार व अशाखित होती हैं। |
| 3. | अनैच्छिक पेशी है; इच्छा से नियन्त्रित नहीं होती। | ऐच्छिक पेशी है; इच्छा से नियन्त्रित होती है। |
| 4. | प्रायः एक केन्द्रकीय होती है। | बहुकेन्द्रकीय होती है। |
| 5. | इसमें विशिष्ट अन्तर्विष्ट कण्डलाएँ (Intercalated discs) होती हैं। | अन्तर्विष्ट कण्डलाएँ नहीं होतीं। |
(स) सघन नियमित तथा सघन अनियमित संयोजी ऊतक में अन्तर
| क्र.सं. | सघन नियमित संयोजी ऊतक | सघन अनियमित संयोजी ऊतक |
|---|---|---|
| 1. | इसमें कोलेजन तन्तु समान्तर बंडलों में व्यवस्थित रहते हैं। | इसमें कोलेजन तन्तु अनियमित रूप से बिखरे रहते हैं। |
| 2. | यह तनाव को एक ही दिशा में सहन करता है। | यह तनाव को कई दिशाओं से सहन करता है। |
| 3. | उदाहरण: कंडरा (टेंडन), स्नायु (लिगामेंट)। | उदाहरण: त्वचा की डर्मिस परत। |
(द) वसामय तथा रुधिर ऊतक में अन्तर
| क्र.सं. | वसामय ऊतक | रुधिर ऊतक |
|---|---|---|
| 1. | यह ढीला संयोजी ऊतक है जिसमें वसा संचय करने वाली कोशिकाएँ (एडिपोसाइट्स) होती हैं। | यह एक द्रव संयोजी ऊतक है जिसमें प्लाज्मा
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