UP Board class 11 Political Science 10. संविधान का राजनीतिक दर्शन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) पुत्र और पुत्री दोनों का परिवार की संपत्ति में हिस्सा होगा।
उत्तर: इस कानून में समानता का मूल्य निहित है क्योंकि यह पारिवारिक संपत्ति में पुत्र और पुत्री के बीच समान अधिकार सुनिश्चित करता है।
(ख) अलग-अलग उपभोक्ता वस्तुओं के बिक्री-कर का सीमांकन अलग-अलग होगा।
उत्तर: इस कानून का संबंध किसी विशेष नैतिक या सामाजिक मूल्य से नहीं है। यह एक आर्थिक नीति है जो राजस्व संग्रह और वस्तुओं की प्रकृति पर आधारित है।
(ग) किसी भी सरकारी विद्यालय में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।
उत्तर: इस कानून में धर्मनिरपेक्षता का मूल्य निहित है। यह राज्य और धर्म को अलग रखने तथा सभी धर्मों के प्रति तटस्थता बनाए रखने के सिद्धांत को दर्शाता है।
(घ) बंधुआ मजदूरी नहीं कराई जा सकती।
उत्तर: इस कानून में मानवीय गरिमा और स्वतंत्रता का मूल्य निहित है। यह किसी व्यक्ति के शोषण को रोककर उसके मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
(क) सरकार की शक्तियों पर अंकुश रखने के लिए होती है।
(ख) अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से सुरक्षा देने के लिए होती है।
(ग) औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए होती है।
(घ) यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि क्षणिक आवेग में दूरगामी लक्ष्यों से कहीं विचलित न हो जाएँ।
(ङ) शांतिपूर्ण ढंग से सामाजिक बदलाव लाने के लिए होती है।
उत्तर: विकल्प (ग) औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए होती है। संविधान की आवश्यकता का सही कारण नहीं है। संविधान स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के शासन के लिए एक मूलभूत ढाँचा तैयार करता है, स्वतंत्रता प्राप्त करने का साधन नहीं है।
(क) आम जनता अपनी जीविका कमाने और जीवन की विभिन्न परेशानियों के निपटारे में व्यस्त होती है। आम जनता इन बहसों की कानूनी भाषा को नहीं समझ सकती।
(ख) आज की स्थितियाँ और चुनौतियाँ संविधान बनाने के वक्त की चुनौतियों और स्थितियों से अलग हैं। संविधान निर्माताओं के विचारों को पढ़ना और अपने नए जमाने में इस्तेमाल करना दरअसल अतीत को वर्तमान में खींच लाना है।
(ग) संसार और मौजूदा चुनौतियों को समझने की हमारी दृष्टि पूर्णतया नहीं बदली है। संविधान सभा की बहसों से हमें यह समझने के तर्क मिल सकते हैं कि कुछ संवैधानिक व्यवहार क्यों महत्त्वपूर्ण हैं। एक ऐसे समय में जब संवैधानिक व्यवहारों को चुनौती दी जा रही है, इन तर्कों को न जानना संवैधानिक-व्यवहारों को नष्ट कर सकता है।
उत्तर:
(अ)
(क) धर्मनिरपेक्षता की समझ
उत्तर: पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका) में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है 'राज्य और धर्म का पूर्ण पृथक्करण'। राज्य किसी भी धर्म को मान्यता या सहायता नहीं देता। वहीं, भारतीय धर्मनिरपेक्षता का मॉडल 'सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और तटस्थता' पर आधारित है। भारत राज्य धर्म के मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है, जैसे धार्मिक प्रथाओं में सुधार लाना या सभी धर्मों के शैक्षणिक संस्थानों को सहायता देना। यहाँ धार्मिक स्वतंत्रता व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर मान्य है।
(ख) अनुच्छेद 370 और 371
उत्तर: पश्चिमी संघीय व्यवस्थाएँ (जैसे अमेरिका) अक्सर सभी राज्यों के साथ एक समान संबंध रखती हैं। भारतीय संविधान ने 'असममित संघवाद' को अपनाया है। अनुच्छेद 370 (अब निरस्त) के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता दी गई थी। इसी तरह, अनुच्छेद 371 श्रृंखला के तहत पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे नगालैंड, मिजोरम आदि को विशेष प्रावधान दिए गए हैं ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा की जा सके। यह भारत की विविधता को मान्यता देने वाली अनूठी व्यवस्था है।
(ग) सकारात्मक कार्य-योजना या अफर्मेटिव एक्शन
उत्तर: अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में अफर्मेटिव एक्शन मुख्य रूप से नस्लीय भेदभाव को दूर करने के लिए 1960 के दशक के बाद शुरू हुआ। भारत में, संविधान ने शुरू से ही (1950 में) जाति-आधारित ऐतिहासिक और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए आरक्षण और अन्य सकारात्मक कार्यक्रमों का प्रावधान किया। भारत का दृष्टिकोण केवल अवसर की समानता प्रदान करने से आगे बढ़कर परिणामों की समानता सुनिश्चित करने का है।
(घ) सार्वभौम वयस्क मताधिकार
उत्तर: पश्चिमी देशों में सार्वभौम वयस्क मताधिकार धीरे-धीरे विकसित हुआ; शुरू में केवल संपत्ति रखने वाले पुरुषों को ही यह अधिकार था, महिलाओं को बहुत बाद में मताधिकार मिला। भारत ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही, 1950 के संविधान के माध्यम से, बिना किसी लिंग, जाति, धर्म या शैक्षणिक योग्यता के भेद के, 21 वर्ष (अब 18 वर्ष) की आयु प्राप्त हर नागरिक को मताधिकार प्रदान किया। यह एक साहसिक और समावेशी कदम था जो भारत के गहन लोकतांत्रिक विश्वास को दर्शाता है।
(क) राज्य का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
(ख) राज्य का धर्म से नजदीकी रिश्ता है।
(ग) राज्य धर्मों के बीच भेदभाव कर सकता है।
(घ) राज्य धार्मिक समूहों के अधिकार को मान्यता देगा।
(ङ) राज्य को धर्म के मामलों में हस्तक्षेप करने की सीमित शक्ति होगी।
उत्तर: भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का एक संयोजन अपनाया गया है। सबसे उपयुक्त विकल्प (घ) राज्य धार्मिक समूहों के अधिकार को मान्यता देगा और (ङ) राज्य को धर्म के मामलों में हस्तक्षेप करने की सीमित शक्ति होगी हैं। भारत का मॉडल पूर्ण पृथक्करण नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के प्रति सम्मान और आवश्यकता पड़ने पर सुधारात्मक हस्तक्षेप का है।
| कथन | संकल्पना |
|---|---|
| (क) विधवाओं के साथ किए जाने वाले बरताव की आलोचना की आज़ादी। | सामाजिक सुधार |
| (ख) संविधान-सभा में फैसलों का स्वार्थ के आधार पर नहीं बल्कि तर्क के आधार पर लिया जाना। | प्रक्रियागत उपलब्धि |
| (ग) व्यक्ति के जीवन में समुदाय के महत्त्व को कम स्वीकार करना। | उदारवादी व्यक्तिवाद |
| (घ) अनुच्छेद 370 और 371 | क्षेत्रीय विविधता के प्रति संवेदनशीलता |
| (ङ) महिलाओं और बच्चों को परिवार की संपत्ति में असमान अधिकार। | लैंगिक न्याय की उपेक्षा |
जयेश - मैं अब भी मानता हूँ कि हमारा संविधान एक उधार का दस्तावेज है।
सबा - क्या तुम यह कहना चाहते हो कि इसमें भारतीय कहने जैसा कुछ है ही नहीं? क्या मूल्यों और विचारों पर हम "भारतीय" अथवा "पश्चिमी" जैसा लेबल चिपका सकते हैं?...
जयेश - मेरे कहने का मतलब यह है कि अंग्रेजों से आज़ादी की लड़ाई लड़ने के बाद क्या हमने उनकी संसदीय-शासन की व्यवस्था नहीं अपनाई?
नेहा - तुम यह भूल जाते हो कि जब हम अंग्रेजों से लड़ रहे थे तो हम सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ थे। अब इस बात का, शासन की जो व्यवस्था हम चाहते थे उसको अपनाने से कोई लेना-देना नहीं, चाहे यह जहाँ से भी आई हो।
उत्तर: हम नेहा और सबा के तर्कों से अधिक सहमत हैं। जयेश का यह कहना सही है कि भारतीय संविधान ने दुनिया के अन्य संविधानों (जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, आयरलैंड, कनाडा) से कई विचार और संस्थाएँ उधार ली हैं। लेकिन, इन्हें केवल 'उधार' कहना अपूर्ण होगा। संविधान सभा ने इन विदेशी तत्वों को भारत की विशिष्ट सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढाला और संशोधित किया। उदाहरण के लिए, संसदीय प्रणाली को अपनाया गया, लेकिन उसमें एक मजबूत न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों का समावेश किया गया। साथ ही, संविधान में गांधीवादी विचार, नेहरू रिपोर्ट, भारत सरकार अधिनियम 1935 और हमारी सदियों पुरानी सामुदायिक जीवन की परंपराओं का गहरा प्रभाव है। इसलिए, भारतीय संविधान एक स्वतंत्र, मौलिक और समग्र दस्तावेज है जो वैश्विक ज्ञान और राष्ट्रीय अनुभव का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
उत्तर: यह सच है कि संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं, बल्कि 1946 में गठित प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा किया गया था। उस समय व्यस्क मताधिकार भी नहीं था। इस आधार पर कुछ लोग इसे पूर्ण रूप से प्रतिनिधिमूलक नहीं मानते।
लेकिन, इसके बावजूद भारतीय संविधान को प्रतिनिध्यात्मक माना जा सकता है, क्योंकि:
उत्तर:
पुष्टि में प्रमाण:
उत्तर: हाँ, यह कथन एक वैध प्रश्न उठाता है, लेकिन संविधान निर्माताओं के निर्णय के पीछे कुछ स्पष्ट और व्यावहारिक कारण थे:
सामाजिक-आर्थिक अधिकारों (जैसे काम का अधिकार, जीवन-स्तर का अधिकार) को नीति-निर्देशक तत्वों (अनुच्छेद 36-51) में रखने के कारण:
UP Board class 11 Political Science 10. संविधान का राजनीतिक दर्शन Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 11 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board class 11 Political Science 10. संविधान का राजनीतिक दर्शन textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 11 Political Science 10. संविधान का राजनीतिक दर्शन :
There are various features of UP Board class 11 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.