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UP Board class 11 Political Science (5. विधायिका) solution PDF

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UP Board class 11 Political Science (5. विधायिका) solution

UP Board class 11 Political Science 5. विधायिका Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 11 Political Science
भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार
अध्याय 5: विधायिका

मुख्य बिंदु

  • सरकार के प्रधान और उनके मंत्रियों को राजनीतिक कार्यपालिका कहते हैं और वे सरकार की सभी नीतियों के लिए उत्तरदायी होते हैं।
  • अध्यक्षात्मक व्यवस्था में राष्ट्रपति राज्य और सरकार दोनों का ही प्रधान होता है।
  • जापान में संसदीय व्यवस्था है जिसमें राजा देश का और प्रधानमंत्री सरकार का प्रधान होता है।
  • इटली में एक संसदीय व्यवस्था है जिसमें राष्ट्रपति देश का और प्रधानमंत्री सरकार का प्रधान होता है।
  • रूस में एक अर्द्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था है जिसमें राष्ट्रपति देश का प्रधान और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रधानमंत्री सरकार का प्रधान है।
  • जर्मनी में एक संसदीय व्यवस्था है जिसमें राष्ट्रपति देश का नाममात्र का प्रधान और चांसलर सरकार का प्रधान है।
  • संसदीय व्यवस्था में प्रधानमन्त्री सरकार का प्रधान होता है।
  • 1978 में श्रीलंका के संविधान का संशोधन करके अध्यक्षात्मक कार्यपालिका लागू की गई।
  • राष्ट्रपति 5 वर्ष के लिए चुना जाता है। राष्ट्रपति पद के लिए सीधे जनता के द्वारा निर्वाचन नहीं होता। राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। राष्ट्रपति का निर्वाचन आम नागरिक नहीं बल्कि निर्वाचित विधायक और सांसद करते हैं।
  • अनुच्छेद 74 (1) - राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रधान, प्रधानमन्त्री होगा। प्रधानमन्त्री का यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्रपति द्वारा माँगी गई सभी सूचनाएँ उसे दे।
  • 1986 में संसद ने भारतीय पोस्ट ऑफिस (संशोधन) विधेयक पारित किया।
  • संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम (2003) के पहले, मंत्रिपरिषद का आकार समय की माँग और परिस्थितियों के अनुरूप तय किया जाता था।
  • भारत में, प्रधानमन्त्री का सरकार में स्थान सर्वोपरि है। बिना प्रधानमन्त्री के मंत्रिपरिषद् का कोई अस्तित्व नहीं है। मंत्रिपरिषद् तभी अस्तित्व में आती है जब प्रधानमन्त्री अपने पद का शपथ ग्रहण कर लेता है।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तथा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए उम्मीदवारों का चयन संघ लोक सेवा आयोग करता है।
  • राज्यों के स्तर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद् मिलकर कार्यपालिका बनाते हैं।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं और वे केंद्र सरकार की सेवा में वापस जा सकते हैं।

अभ्यास प्रश्नावली

1. संसदीय कार्यपालिका का अर्थ होता है -

(क) जहाँ संसद हो वहाँ कार्यपालिका का होना
(ख) संसद द्वारा निर्वाचित कार्यपालिका
(ग) जहाँ संसद कार्यपालिका के रूप में काम करती है
(घ) ऐसी कार्यपालिका जो संसद के बहुमत के समर्थन पर निर्भर हो

उत्तर: (घ) ऐसी कार्यपालिका जो संसद के बहुमत के समर्थन पर निर्भर हो

2. निम्नलिखित संवाद पढ़ें। आप किस तरफ से सहमत हैं और क्यों?

अमित - संविधान के प्रावधानों को देखने से लगता है कि राष्ट्रपति का काम सिर्फ ठप्पा मारना है।
शमा - राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है। इस कारण उसे प्रधानमंत्री को हटाने का भी अधिकार होना चाहिए।
राजेश - हमें राष्ट्रपति की ज़रूरत नहीं। चुनाव के बाद, संसद बैठक बुलाकर एक नेता चुन सकती है जो प्रधानमंत्री बने।

उत्तर: शमा की बात से हम सहमत हैं क्योंकि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, इसलिए उसे हटाने का अधिकार भी होना चाहिए। सिद्धांत यह है कि राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री को औपचारिक रूप से नियुक्त करता है। संविधान के अनुच्छेद 78 के अनुरूप यदि प्रधानमंत्री अपना कार्य न करें तो राष्ट्रपति के पास कुछ विकल्प होते हैं, जैसा कि राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी के संबंधों में देखा गया था।

3. निम्नलिखित को सुमेलित करें -

(क) भारतीय विदेश सेवा - भारत के लिए विदेशों में कार्यरत।
(ख) प्रादेशिक लोक सेवा - जिस प्रदेश में बहाली हो, उसी प्रदेश में काम करती है।
(ग) अखिल भारतीय सेवाएँ - जिस प्रदेश में भेजा जाए उसमें काम करती है, इसमें प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में भी भेजा जा सकता है।
(घ) केन्द्रीय सेवाएँ - केन्द्रीय सरकार के दफ्तरों में काम करती है जो या तो देश की राजधानी में होते हैं या देश में कहीं और।

4. उस मंत्रालय की पहचान करें जिसने निम्नलिखित समाचार को जारी किया होगा। यह मंत्रालय प्रदेश की सरकार का है या केंद्र सरकार का और क्यों?

(क) एक सरकारी आदेश के अनुसार सन् 2004-05 में तमिलनाडु पाठ्यपुस्तक निगम कक्षा 7, 10 और 11 की नई पुस्तके जारी करेगा।
उत्तर: यह समाचार तमिलनाडु सरकार के शिक्षा मंत्रालय का है क्योंकि राज्य शिक्षा मंत्रालय ही कक्षा 7, 10, व 11 की शिक्षा के विषयों से संबंधित है।

(ख) भीड़ भरे तिरूवल्लुर-चेन्नई खंड में लौह-अयस्क निर्यातकों की सुविधा के लिए एक नई रेल लूप लाइन बिछाई जाएगी। नई लाइन लगभग 80 कि.मी. की होगी। यह लाइन पुट्टुर से शुरु होगी और बंदरगाह के निकट अतिपदट्टू तक जाएगी।
उत्तर: यह समाचार रेलवे मंत्रालय का है जो कि केंद्र सरकार का विषय है। यह विषय निर्यात से भी जुड़ा है, जो केंद्र सरकार के अधीन आता है।

(ग) रमयमपेट मंडल में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं की पुष्टि के लिए गठित तीन सदस्यीय उप-विभागीय समिति ने पाया कि इस माह आत्महत्या करने वाले दो किसान फसल के मारे जाने से आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे थे।
उत्तर: यह समाचार कृषि मंत्रालय का है, जिसमें किसानों की आत्महत्या के कारणों की समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। यह राज्य सरकार का मंत्रालय होगा।

5. प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करने में राष्ट्रपति -

(क) लोकसभा के सबसे बड़े दल के नेता को चुनता है।
(ख) लोकसभा में बहुमत अर्जित करने वाले गठबंधन के दलों में सबसे बड़े दल के नेता को चुनता है।
(ग) राज्यसभा के सबसे बड़े दल के नेता को चुनता है।
(घ) गठबंधन अथवा उस दल के नेता को चुनता है जिसे लोकसभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।

उत्तर: (घ) गठबंधन अथवा उस दल के नेता को चुनता है जिसे लोकसभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।

6. इस चर्चा को पढ़कर बताएँ कि कौन-सा कथन भारत पर सबसे ज्यादा लागू होता है-

आलोक - प्रधानमंत्री राजा के समान है। वह हमारे देश में हर बात का फैसला करता है।
शेखर - प्रधानमंत्री सिर्फ 'समान हैसियत के सदस्यों में प्रथम' है। उसे कोई विशेष अधिकार प्राप्त नहीं। सभी मंत्रियों और प्रधानमंत्री के अधिकार बराबर हैं।
बॉबी - प्रधानमंत्री को दल के सदस्यों तथा सरकार को समर्थन देने वाले सदस्यों का ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन कुल मिलाकर देखें तो नीति-निर्माण तथा मंत्रियों के चयन में प्रधानमंत्री की बहुत ज्यादा चलती है।

उत्तर: बॉबी का कथन भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री की स्थिति को सही ढंग से व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री के पास निश्चित रूप से अत्यधिक शक्तियाँ हैं, परन्तु उसके निर्णयों को राजनीतिक दल के सदस्य, सहयोगी दल व तत्कालीन परिस्थितियाँ भी प्रभावित करती हैं।

7. क्या मंत्रिमंडल की सलाह राष्ट्रपति को हर हाल में माननी पड़ती है? आप क्या सोचते हैं अपना उत्तर अधिकतम 100 शब्दों में लिखें।

उत्तर: भारत के संविधान के अनुच्छेद 74 में लिखा है कि राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिमंडल होगा। 42वें संविधान संशोधन के अनुसार यह निश्चित किया गया था कि राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह अनिवार्य रूप से माननी होगी। लेकिन संविधान के 44वें संशोधन में फिर यह निश्चित किया गया कि राष्ट्रपति प्रथम बार में मंत्रिमंडल की सलाह को मानने के लिए बाध्य नहीं है और वह उस सलाह को दोबारा विचार-विमर्श के लिए वापस भेज सकता है। लेकिन दोबारा विचार-विमर्श करने के बाद दी गयी सलाह को उसे अनिवार्य रूप से मानना होगा।

8. संसदीय-व्यवस्था ने कार्यपालिका को नियंत्रण में रखने के लिए विधायिका को बहुत-से अधिकार दिए हैं। कार्यपालिका को नियंत्रित करना इतना ज़रूरी क्यों है? आप क्या सोचते हैं?

उत्तर: संसदीय सरकार की यह प्रमुख विशेषता व गुण है कि यह एक जिम्मेवार व उत्तरदायी सरकार है। इसमें कार्यपालिका संसद के प्रति जिम्मेवार होती है। विभिन्न संसदीय तरीकों से व्यवस्थापिका कार्यपालिका पर लगातार अपना नियन्त्रण बनाए रखती है, जो आवश्यक भी है। इससे सरकार की मनमानी पर रोक लगती है और अच्छे व जनहित के निर्णय लिए जाते हैं। व्यवस्थापिका प्रश्नकाल, काम रोको प्रस्ताव से व सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार पर नियन्त्रण करती है, जो स्वच्छ प्रशासन व जनहित के लिए आवश्यक है।

9. कहा जाता है कि प्रशासनिक-तंत्र के कामकाज में बहुत ज्यादा राजनीतिक हस्तक्षेप होता है। सुझाव के तौर पर कहा जाता है कि ज्यादा से ज्यादा स्वायत्त एजेंसियाँ बननी चाहिए जिन्हें मंत्रियों को जवाब न देना पड़े।

(क) क्या आप मानते हैं कि इससे प्रशासन ज्यादा जन-हितैषी होगा?
(ख) क्या इससे प्रशासन की कार्य कुशलता बढ़ेगी?
(ग) क्या लोकतंत्र का अर्थ यह होता है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रशासन पर पूर्ण नियंत्रण हो?

उत्तर: हमारे यहाँ दो प्रकार की कार्यपालिका है - एक राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) जो अस्थाई होती है और दूसरी स्थाई कार्यपालिका (सरकारी कर्मचारी) जो अनुभवी विशेषज्ञ होते हैं।
(क) पूर्ण स्वायत्तता से प्रशासन जनहित से दूर हो सकता है, क्योंकि जवाबदेही का अभाव होगा।
(ख) विशेषज्ञता के आधार पर कुछ क्षेत्रों में कार्यकुशलता बढ़ सकती है, परन्तु समन्वय की कमी हो सकती है।
(ग) लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रशासन पर नियंत्रण आवश्यक है, क्योंकि वे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं और जनहित सुनिश्चित करते हैं। पूर्ण नियंत्रण के साथ-साथ प्रशासनिक स्वतंत्रता का संतुलन जरूरी है।

10. नियुक्ति आधारित प्रशासन की जगह निर्वाचन आधारित प्रशासन होना चाहिए - इस विषय पर 200 शब्दों में एक लेख लिखो।

उत्तर: आज भारत में दो प्रकार की कार्यपालिका है - एक चुनी हुई राजनीतिक (अस्थाई) कार्यपालिका और दूसरी नियुक्त स्थाई कार्यपालिका (नौकरशाही)। राजनीतिक कार्यपालिका के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा होता है और उनकी एक निश्चित राजनीतिक सोच होती है जिसके आधार पर वे नीति निर्माण करते हैं। दूसरी ओर, स्थाई कार्यपालिका के सदस्यों की नियुक्ति योग्यता, अनुभव और निष्पक्ष परीक्षा (UPSC द्वारा) के आधार पर की जाती है। ये अराजनीतिक रूप से निश्चित नियमों व मापदंडों के आधार पर कार्य करते हैं।

प्रशासनिक पदों के लिए निर्वाचन की व्यवस्था उचित नहीं होगी, क्योंकि सरकारी पदों पर कार्य करने के लिए निश्चित शैक्षणिक, तकनीकी योग्यताओं और अनुभव की आवश्यकता होती है, जिसकी जाँच एक चुनाव प्रक्रिया द्वारा संभव नहीं है। नियुक्ति आधारित प्रणाली विशेषज्ञता, निष्पक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है, जबकि निर्वाचन आधारित प्रणाली लोकलुभावन नीतियों और राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। इसलिए, प्रशासनिक दक्षता और निष्पक्षता के लिए नियुक्ति आधारित प्रणाली ही बेहतर है।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

1. कार्यपालिका क्या है ?

उत्तर: कार्यपालिका का अर्थ व्यक्तियों के उस समूह से है जो कानूनों को रोजाना लागू करते हैं और शासन का संचालन करते हैं।

2. कार्यपालिका के प्रमुख कार्य क्या हैं ?

उत्तर: कार्यपालिका के प्रमुख कार्य हैं:
(i) विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों और नीतियों को लागू करना।
(ii) नीति-निर्माण प्रक्रिया में भाग लेना।
(iii) पूरे प्रशासनिक ढाँचे (सिविल सेवा) के माध्यम से शासन चलाना।

3. राजनीतिक कार्यपालिका या स्थायी कार्यपालिका किसे कहते हैं ?

उत्तर: सरकार के प्रधान और उनके मंत्रियों को राजनीतिक कार्यपालिका कहते हैं। ये सरकार की सभी नीतियों के लिए उत्तरदायी होते हैं। जो लोग रोज़-रोज़ के प्रशासन के लिए उत्तरदायी होते हैं (सरकारी कर्मचारी), उन्हें स्थायी कार्यपालिका कहते हैं।

4. कार्यपालिका कितने प्रकार की होती है ?

उत्तर: कार्यपालिका मुख्यतः दो प्रकार की होती है:
1. संसदीय कार्यपालिका:
- सरकार का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है।
- वह विधायिका में बहुमत वाले दल का नेता होता है और विधायिका के प्रति जवाबदेह होता है।
- देश का प्रमुख (राजा/राष्ट्रपति) एक औपचारिक प्रधान होता है।
2. अध्यक्षात्मक कार्यपालिका:
- राष्ट्रपति देश और सरकार दोनों का प्रधान होता है।
- उसका चुनाव प्रायः प्रत्यक्ष मतदान से होता है।
- वह विधायिका के प्रति जवाबदेह नहीं होता।
3. अर्द्ध-अध्यक्षात्मक कार्यपालिका (जैसे फ्रांस, रूस) इन दोनों का मिश्रण है।

5. भारत में राष्ट्रपति के विशेषाधिकार का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत में राष्ट्रपति के प्रमुख विशेषाधिकार हैं:
(i) पुनर्विचार का अधिकार: राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह को लौटा सकता है और उसे पुनर्विचार के लिए कह सकता है।
(ii) वीटो शक्ति: संसद द्वारा पारित विधेयकों (धन विधेयक को छोड़कर) पर स्वीकृति देने में विलंब कर सकता है या मना कर सकता है।
(iii) प्रधानमंत्री की नियुक्ति: जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत न हो, तो राष्ट्रपति अपने विवेक से प्रधानमंत्री की नियुक्ति कर सकता है।

6. भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव किस प्रकार होता है तथा इनको किस प्रकार इनके पद से हटाया जा सकता है ?

उत्तर: उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य होते हैं (राज्य विधानसभाओं के सदस्य नहीं)। वह 5 वर्ष के लिए चुना जाता है। उसे हटाने के लिए राज्य सभा बहुमत से प्रस्ताव पारित करे और लोक सभा उस पर सहमति दे।

7. भारत में उपराष्ट्रपति एक कार्यवाहक के रूप में किस प्रकार कार्य करते हैं ?

उत्तर: उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन अध्यक्ष होता है। राष्ट्रपति की मृत्यु, त्यागपत्र, महाभियोग या अन्य कारण से पद रिक्त होने पर वह कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभालता है, जब तक कि नया राष्ट्रपति नहीं चुन लिया जाता। उदाहरण: राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद उपराष्ट्रपति बी. डी. जत्ती कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।

8. यू.पी.एस.सी. (संघ लोक सेवा आयोग) के क्या कार्य हैं ?

उत्तर: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का मुख्य कार्य अखिल भारतीय सेवाओं (आईएएस, आईपीएस आदि) और केन्द्रीय सेवाओं के लिए परीक्षाओं का आयोजन करना, उम्मीदवारों का चयन करना और सरकार को नियुक्ति के लिए सिफारिशें करना है।

9. निम्नलिखित शब्दों का पूरा नाम लिखिए: (आई ए एस) और (आई पी एस)

उत्तर:
(i) आई.ए.एस. - भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service)
(ii) आई.पी.एस. - भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service)

10. भारत में सिविल सेवा आयोग कितने प्रकार की होती है ?

उत्तर: भारत में सिविल सेवाएँ मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं:
1. अखिल भारतीय सेवाएँ: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS)।
2. केन्द्रीय सेव

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