UP Board Solutions for Class 11 Political Science
भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार
अध्याय 2: भारतीय संविधान में अधिकार
मुख्य बिंदु
- 1928 में ही 'मोतीलाल नेहरू समिति' ने अधिकारों के एक घोषणापत्र की माँग उठाई थी।
- वर्ष 1976 में संविधान का 42वाँ संशोधन किया गया।
- वर्ष 2000 में सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया।
- 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने 44वें संविधान संशोधन के द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से निकाल दिया और संविधान के अनुच्छेद 300 (क) के अंतर्गत उसे एक सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया।
- दक्षिण अफ्रीका का संविधान दिसंबर 1996 में लागू हुआ। इसे तब बनाया और लागू किया गया जब रंगभेद वाली सरकार के हटने के बाद दक्षिण अफ्रीका गृहयुद्ध के खतरे से जूझ रहा था।
- अनुच्छेद 16 (4): इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग के पक्ष में, जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, नियुक्तियों या पदों के आरक्षण का प्रावधान करने से नहीं रोकेगी।
- अनुच्छेद 21: जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण - "किसी व्यक्ति को, उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जायेगा, अन्यथा नहीं।"
- स्वतंत्रता के सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकारों में 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार' है। किसी भी नागरिक को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किये बिना उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।
- प्रत्यक्ष रूप से, निवारक नज़रबंदी सरकार के हाथ में असामाजिक तत्वों और राष्ट्रविद्रोही तत्वों से निपटने का एक हथियार है।
- हमारा संविधान इसका भी प्रावधान करता है कि जिन लोगों पर विभिन्न अपराधों के आरोप हैं, उन्हें भी पर्याप्त सुरक्षा मिले।
- संविधान के अनुसार, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी कारखाने, खदान या अन्य किसी खतरनाक काम में नौकरी नहीं दी जा सकती।
अभ्यास प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रत्येक कथन के बारे में बताएँ कि वह सही है या गलत:
(क) अधिकार-पत्र में किसी देश की जनता को हासिल अधिकारों का वर्णन रहता है।
उत्तर: सही
(ख) अधिकार-पत्र व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
उत्तर: सही
(ग) विश्व के हर देश में अधिकार-पत्र होता है।
उत्तर: गलत
प्रश्न 2. निम्नलिखित में कौन मौलिक अधिकारों का सबसे सटीक वर्णन है?
(क) किसी व्यक्ति को प्राप्त समस्त अधिकार
(ख) कानून द्वारा नागरिक को प्रदत्त समस्त अधिकार
(ग) संविधान द्वारा प्रदत्त और सुरक्षित समस्त अधिकार
(घ) संविधान द्वारा प्रदत्त वे अधिकार जिन पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
उत्तर: (ग) संविधान द्वारा प्रदत्त और सुरक्षित समस्त अधिकार
प्रश्न 3. निम्नलिखित स्थितियों को पढ़ें। प्रत्येक स्थिति के बारे में बताएँ कि किस मौलिक अधिकार का उपयोग या उल्लंघन हो रहा है और कैसे?
(क) राष्ट्रीय एयरलाइन के चालक-परिचालक दल के ऐसे पुरुषों को जिनका वजन ज्यादा है - नौकरी में तरक्की दी गई लेकिन उनकी ऐसी महिला सहकर्मियों को, दंडित किया गया जिनका वजन बढ़ गया था।
उत्तर: इसमें महिलाओं के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14 व 15) का उल्लंघन है। समान परिस्थिति में पुरुषों को तरक्की दी गई जबकि महिलाओं को दंडित किया गया, जो लैंगिक भेदभाव है।
(ख) एक निर्देशक एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाता है जिसमें सरकारी नीतियों की आलोचना है।
उत्तर: इस घटना में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) का उपयोग हो रहा है।
(ग) एक बड़े बाँध के कारण विस्थापित हुए लोग अपने पुनर्वास की माँग करते हुए रैली निकालते हैं।
उत्तर: इस घटना में शांतिपूर्वक सम्मेलन करने और संगठन बनाने के अधिकार (अनुच्छेद 19) का उपयोग हो रहा है।
(घ) आंध्र सोसायटी आंध्र प्रदेश के बाहर तेलुगु माध्यम के विद्यालय चलाती है।
उत्तर: इसमें अल्पसंख्यकों के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अधिकार (अनुच्छेद 29 व 30) का उपयोग हो रहा है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में कौन सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या है?
(क) शैक्षिक-संस्था खोलने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के ही बच्चे उस संस्थान में पढ़ाई कर सकते हैं।
(ख) सरकारी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अल्पसंख्यक-वर्ग के बच्चों को उनकी संस्कृति और धर्म-विश्वासों से परिचित कराया जाए।
(ग) भाषाई और धार्मिक-अल्पसंख्यक अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोल सकते हैं और उनके लिए इन विद्यालयों को आरक्षित कर सकते हैं।
(घ) भाषाई और धार्मिक-अल्पसंख्यक यह माँग कर सकते हैं कि उनके बच्चे उनके द्वारा संचालित शैक्षणिक-संस्थाओं के अतिरिक्त किसी अन्य संस्थान में नहीं पढ़ेंगे।
उत्तर: (ग)
प्रश्न 5. इनमें कौन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और क्यों?
(क) न्यूनतम देय मजदूरी नहीं देना।
(ख) किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना।
(ग) 9 बजे रात के बाद लाउड-स्पीकर बजाने पर रोक लगाना।
(घ) भाषण तैयार करना।
उत्तर: (ख) किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) का उल्लंघन है, बशर्ते कि पुस्तक कानून द्वारा निषिद्ध न हो।
प्रश्न 6. गरीबों के बीच काम कर रहे एक कार्यकर्ता का मानना है कि गरीबों को मौलिक अधिकारों की जरूरत नहीं है। उनके लिए जरूरी यह है कि नीति-निर्देशक सिद्धांतों को कानूनी तौर पर बाध्यकारी बना दिया जाए। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण बताएँ।
उत्तर: हम इस बात से सहमत नहीं हैं। मौलिक अधिकार गरीबों सहित सभी नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:
- ये अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं, जबकि नीति-निर्देशक तत्व नहीं।
- मौलिक अधिकार सरकार की मनमानी से व्यक्ति की रक्षा करते हैं, जिसकी गरीबों को सबसे अधिक आवश्यकता है।
- नीति-निर्देशक तत्वों को बाध्यकारी बनाना व्यावहारिक रूप से कठिन है क्योंकि देश के पास सभी को इनमें दी गई सुविधाएँ प्रदान करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हो सकते।
मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व दोनों ही महत्वपूर्ण हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं।
प्रश्न 7. अनेक रिपोर्टों से पता चलता है कि जो जातियाँ पहले झाड़ू देने के काम में लगी थीं उन्हें अब भी मजबूरन यही काम करना पड़ रहा है। जो लोग अधिकार-पदों पर बैठे हैं वे इन्हें कोई और काम नहीं देते। इनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करने पर हतोत्साहित किया जाता है। इस उदाहरण में किस मौलिक-अधिकार का उल्लंघन हो रहा है?
उत्तर: इस रिपोर्ट में निम्नलिखित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है:
- समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) और भेदभाव का निषेध (अनुच्छेद 15) - जाति के आधार पर काम थोपना।
- रोजगार में अवसर की समानता (अनुच्छेद 16) का अधिकार - अन्य काम न देना।
- छुआछूत का अंत (अनुच्छेद 17) - एक ही पेशे में बंधे रहने के लिए मजबूर करना।
- शोषण के विरुद्ध अधिकार - बच्चों की शिक्षा से वंचित करना।
प्रश्न 8. एक मानवाधिकार-समूह ने अपनी याचिका में अदालत का ध्यान देश में मौजूद भूखमरी की स्थिति की तरफ खींचा। भारतीय खाद्य-निगम के गोदामों में 5 करोड़ टन से ज्यादा अनाज भरा हुआ था। शोध से पता चलता है कि अधिकांश राशन-कार्डधारी यह नहीं जानते कि उचित-मूल्य की दुकानों से कितनी मात्रा में वे अनाज खरीद सकते हैं। मानवाधिकार समूह ने अपनी याचिका में अदालत से निवेदन किया कि वह सरकार को सार्वजनिक-वितरण-प्रणाली में सुधार करने का आदेश दे।
(क) इस मामले में कौन-कौन से अधिकार शामिल हैं? ये अधिकार आपस में किस तरह जुड़े हैं?
उत्तर: इस मामले में निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं:
- जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) - भूखमरी से मुक्ति इसी का हिस्सा है।
- समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) - सभी को भोजन का समान अधिकार।
- गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार - जो अनुच्छेद 21 से ही निकलता है।
ये सभी अधिकार आपस में जुड़े हुए हैं।
जीवन का अधिकार तब तक सार्थक नहीं है जब तक व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए बुनियादी आवश्यकताएँ जैसे भोजन न मिले। समानता का अधिकार यह सुनिश्चित करता है कि यह सुविधा सभी को बिना भेदभाव के मिले।
(ख) क्या ये अधिकार जीवन के अधिकार का एक अंग हैं?
उत्तर: हाँ। सर्वोच्च न्यायालय ने कई निर्णयों में यह माना है कि 'जीवन का अधिकार' केवल जीवित रहने का अधिकार नहीं है, बल्कि 'गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार' है। भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताएँ इसी अधिकार का अभिन्न अंग हैं।
प्रश्न 9. नीति निर्देशक तत्वों और मौलिक अधिकारों में संबंध को बताइए?
उत्तर: नीति-निर्देशक तत्वों और मौलिक अधिकारों के बीच संबंध निम्नलिखित है:
- पूरकता: इन्हें एक-दूसरे का पूरक माना जा सकता है। मौलिक अधिकार सरकार पर नकारात्मक प्रतिबंध लगाते हैं (क्या नहीं करना है), जबकि नीति-निर्देशक तत्व सरकार को सकारात्मक दिशा देते हैं (क्या करना है)।
- लक्ष्य: मौलिक अधिकार व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करते हैं, जबकि नीति-निर्देशक तत्व पूरे समाज के कल्याण और हित की बात करते हैं।
- प्रवर्तनीयता: मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं, नीति-निर्देशक तत्व नहीं।
- संभावित टकराव: कभी-कभी जब सरकार नीति-निर्देशक तत्वों (जैसे सामाजिक न्याय) को लागू करने का प्रयास करती है, तो वह कुछ मौलिक अधिकारों (जैसे संपत्ति के अधिकार) से टकरा सकती है। ऐसे में सामाजिक हित को प्राथमिकता देते हुए संविधान में संशोधन भी किए गए हैं, जैसे जमींदारी उन्मूलन के मामले में।
प्रश्न 10. आपके अनुसार कौन-सा मौलिक अधिकार सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? इसके प्रावधानों को संक्षेप में लिखें और तर्क देकर बताएँ कि यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर: भारतीय संविधान में दिया गया संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32) सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।
प्रावधान: यह अधिकार प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि यदि उसके किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) जा सकता है। न्यायालय मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सरकार को आदेश, निर्देश या रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, अधिकार-पृच्छा, उत्प्रेषण) जारी कर सकते हैं।
महत्व के कारण:
- रक्षक अधिकार: यह वह अधिकार है जो अन्य सभी मौलिक अधिकारों को सार्थक और जीवंत बनाता है। बिना इसके, मौलिक अधिकार केवल कागजी घोषणाएँ बनकर रह जाएँगे।
- संविधान का हृदय: डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इसे 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा है, क्योंकि यह संविधान द्वारा दिए गए वादों को पूरा करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
- न्याय तक पहुँच: यह आम नागरिक को सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का अधिकार देता है, जो एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच है।
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 11. भारतीय संविधान में निहित ऐसे अधिकारों का वर्णन कीजिए जिनके लिए न्यायालय में दावा नहीं किया जा सकता है?
उत्तर: ये अधिकार नीति-निर्देशक तत्वों (अनुच्छेद 36-51) के अंतर्गत आते हैं और न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। इनमें शामिल हैं:
- पर्याप्त जीवन-यापन के साधनों का अधिकार।
- समान कार्य के लिए समान मजदूरी का अधिकार।
- आर्थिक शोषण के विरुद्ध अधिकार।
- काम का अधिकार।
- बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (अब इसे 86वें संशोधन द्वारा मौलिक अधिकार बना दिया गया है)।
- सार्वजनिक सहायता का अधिकार।
प्रश्न 12. भारतीय संविधान में लिखित राज्य के तीन नीति निर्देशक तत्व क्या हैं?
उत्तर: राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों की सूची में तीन प्रमुख श्रेणियाँ हैं:
- लक्ष्य एवं उद्देश्य: वे लक्ष्य जो एक समाज के रूप में हमें स्वीकार करने चाहिए, जैसे- सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय।
- अतिरिक्त अधिकार: वे अधिकार जो नागरिकों को मौलिक अधिकारों के अलावा मिलने चाहिए, जैसे- काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार।
- सरकारी नीतियाँ: वे नीतियाँ जिन्हें सरकार को स्वीकार करना चाहिए, जैसे- समान नागरिक संहिता, ग्राम पंचायतों को शक्ति प्रदान करना, पर्यावरण संरक्षण।
प्रश्न 13. भारतीय संविधान में नागरिकों को कौन से अधिकार दिये गए हैं?
उत्तर: भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित छह मौलिक अधिकार दिए गए हैं:
- समता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
- स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
- शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
- सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
प्रश्न 14. निवारक नज़रबंदी क्या हैं? सामान्यतः किसी व्यक्ति को अपराध करने पर गिरफ्तार किया जाता है। पर इसके अपवाद भी हैं। समझाईए कैसे?
उत्तर: निवारक नज़रबंदी सामान्य गिरफ्तारी का एक अपवाद है।
- सामान्य नियम: किसी व्यक्ति को तब गिरफ्तार किया जाता है जब वह कोई अपराध कर चुका होता है।
- अपवाद (निवारक नज़रबंदी): इसमें किसी व्यक्ति को इस आशंका पर गिरफ्तार किया जा सकता है कि वह भविष्य में कोई गैर-कानूनी कार्य कर सकता है जिससे देश की कानून-व्यवस्था, शांति या सुरक्षा को खतरा हो।
- सुरक्षा उपाय: ऐसी नज़रबंदी अधिकतम तीन महीने के लिए हो सकती है। इसके बाद मामला एक सलाहकार बोर्ड के समक्ष समीक्षा के लिए भेजा जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नज़रबंदी मनमानी नहीं है।
प्रश्न 15. न्यायालय में निष्पक्ष मुकदमे के लिए संविधान किन तीन अधिकारों की व्यवस्था करता है?
उत्तर: न्यायालय में निष्प