UP Board कक्षा 11 - राजनीति विज्ञान (राजनीतिक सिद्धांत)
पाठ 7: राष्ट्रवाद - प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: राष्ट्र किस प्रकार से बाकी सामूहिक संबद्धताओं से अलग है?
उत्तर: राष्ट्र अन्य सामूहिक संबद्धताओं से पूर्णतः भिन्न है। इसे एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझा जा सकता है:
- राष्ट्र नागरिकों का कोई आकस्मिक समूह नहीं है। यह परिवार से भी अलग है, क्योंकि परिवार प्रत्यक्ष संबंधों पर आधारित होता है। राष्ट्र का क्षेत्र व्यापक होता है जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में अनेक समुदायों, जातियों, परिवारों और धर्मानुयायियों का समूह है। इसकी अपनी सरकार, प्रभुसत्ता होती है तथा इसमें रहने वाले लोगों के बीच साझा विश्वास और ऐतिहासिक पहचान होती है।
- राष्ट्र जनजातीय या जातीय समूहों से भी भिन्न है। इन समूहों में सदस्यता अक्सर वंश परंपरा से जुड़ी होती है। राष्ट्र के सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी एक साझी पहचान और निष्ठा से बंधे होते हैं।
- आम धारणा के विपरीत, कोई एक निश्चित गुण (जैसे भाषा, धर्म, नस्ल) सभी राष्ट्रों में समान नहीं होता। कई राष्ट्रों की कोई एक सामान्य भाषा या धर्म नहीं होता। राष्ट्र का निर्माण साझे विश्वास, साझे राजनीतिक दर्शन, साझी ऐतिहासिक पहचान, एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र और साझी राजनीतिक पहचान जैसे तत्वों से होता है।
प्रश्न 2: राष्ट्रीय आत्म-निर्णय के अधिकार से आप क्या समझते हैं? किस प्रकार यह विचार राष्ट्र-राज्यों के निर्माण और उनको मिल रही चुनौती में परिणत होता है?
उत्तर: राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अधिकार एक समूह (जो नस्ल, भाषा, संस्कृति आदि के आधार अलग पहचान रखता है) की यह मांग है कि उसे अपना भविष्य तय करने, अपना शासन चलाने और एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता पाने का अधिकार हो।
यह विचार राष्ट्र-राज्यों के निर्माण और चुनौतियों का कारण बना:
- निर्माण: प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 'एक संस्कृति-एक राज्य' के सिद्धांत पर कई नए स्वतंत्र राज्यों (जैसे वर्साय संधि के बाद) का गठन हुआ।
- चुनौतियाँ: सभी आत्मनिर्णय की मांगों को पूरा करना असंभव था। नई सीमाएँ खींचने से बड़े पैमाने पर विस्थापन, सांप्रदायिक दंगे और मानवीय संकट पैदा हुए। अधिकांश नवगठित राज्यों में भी एक से अधिक नस्ल या संस्कृति के लोग रहते थे, जिससे अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई।
प्रश्न 3: राष्ट्रवाद लोगों को जोड़ भी सकता है और तोड़ भी सकता है। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: राष्ट्रवाद एक शक्तिशाली ताकत है जिसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव देखे गए हैं:
जोड़ने वाला और मुक्त करने वाला:
- 19वीं सदी के यूरोप में राष्ट्रवाद ने छोटी-छोटी रियासतों के एकीकरण से जर्मनी और इटली जैसे बड़े राष्ट्र-राज्यों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
- लातिनी अमेरिका में नए राज्यों की स्थापना हुई और लोगों ने एक नई राष्ट्रीय पहचान अर्जित की।
तोड़ने वाला और संघर्ष पैदा करने वाला:
- 20वीं सदी में राष्ट्रवाद ने ऑस्ट्रिया-हंगरी, रूसी, ब्रिटिश, फ्रांसीसी आदि बड़े साम्राज्यों के विघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- भारत सहित कई उपनिवेशों के स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रवादी संघर्ष थे, जिनमें कटुता और बलिदान शामिल थे।
प्रश्न 4: वंश, भाषा, धर्म या नस्ल में से कोई भी पूरे विश्व में राष्ट्रवाद के लिए साझा कारण होने का दावा नहीं कर सकता। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: यह कथन पूर्णतः सही है। राष्ट्रवाद का आधार हमेशा कोई एक सांस्कृतिक या जैविक तत्व नहीं होता।
- भारत में अनेक भाषाएँ, नस्लें और धर्म एक साथ रहते हैं।
- कनाडा में अंग्रेजी और फ्रेंच भाषी लोग एक राष्ट्र का हिस्सा हैं।
- अमेरिका यूरोप सहित दुनिया भर के लोगों का मेल है।
- कई राष्ट्रों का कोई एक सामान्य धर्म भी नहीं है।
इस प्रकार, विविधताओं के बावजूद लोग एक राष्ट्र में बंधे होते हैं, जिसका आधार उपरोक्त में से कोई एक तत्व अकेला नहीं हो सकता।
प्रश्न 5: राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले कारकों पर सोदाहरण प्रकाश डालिए।
उत्तर: राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
- भौगोलिक एकता: एक निश्चित भू-क्षेत्र पर साथ रहने और उससे जुड़ी साझी यादें सामूहिक पहचान बनाती हैं। उदाहरण: यहूदियों ने लंबे समय तक विस्थापित रहने के बावजूद फिलिस्तीन को अपनी मातृभूमि माना।
- साझे राजनीतिक आदर्श: एक स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व बनाने की चाहत और लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता जैसे साझे मूल्य राष्ट्र को बांधते हैं। नागरिकों की आपसी जिम्मेदारी राष्ट्र को मजबूत करती है।
- साझी ऐतिहासिक पहचान: साझे संघर्ष और बलिदान राष्ट्रवाद को प्रेरित करते हैं। उदाहरण: भारत में 1857 का संग्राम और जलियाँवाला बाग हत्याकांड आज भी राष्ट्रभक्ति की भावना जगाते हैं।
- साझी सांस्कृतिक पहचान: समान भाषा, धर्म, त्योहार, प्रतीक और रीति-रिवाज लोगों को करीब लाते हैं और एकता की भावना पैदा करते हैं।
प्रश्न 6: संघर्षरत राष्ट्रवादी आकांक्षाओं के साथ बर्ताव करने में तानाशाही की अपेक्षा लोकतंत्र अधिक समर्थ होता है। कैसे?
उत्तर: लोकतंत्र, तानाशाही की तुलना में राष्ट्रवादी आकांक्षाओं को संभालने में अधिक सक्षम है क्योंकि:
- लोकतंत्र समावेशी होता है। यह विभिन्न सांस्कृतिक और नस्लीय पहचानों को समान नागरिक के रूप में सह-अस्तित्व में रहने का अवसर देता है।
- यह अल्पसंख्यक समूहों के अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करके उनकी निष्ठा हासिल करता है, जिससे राज्य मजबूत और एकताबद्ध बनता है।
- इसके विपरीत, तानाशाही व्यवस्था दमनकारी नीतियों पर चलती है, जहाँ असुरक्षा और भय का वातावरण रहता है। इससे संघर्षरत आकांक्षाएँ दब जाती हैं या और हिंसक रूप ले लेती हैं, स्थायी समाधान नहीं निकल पाता।
प्रश्न 7: आपकी राय में राष्ट्रवाद की सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर: राष्ट्रवाद की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
- अनंत विखंडन का खतरा: यदि हर छोटा समूह आत्मनिर्णय की मांग करने लगे और उसे मान लिया जाए, तो असंख्य छोटे-छोटे राज्य बन जाएंगे, जिससे विकास के बजाय अराजकता और पतन की स्थिति पैदा हो सकती है।
- संकीर्णता और तानाशाही की ओर प्रवृत्ति: राष्ट्रवाद कभी-कभी जातीय या भाषाई श्रेष्ठता की भावना पैदा कर सकता है, जिससे संकीर्ण दृष्टिकोण और तानाशाही प्रवृत्तियों को बल मिलता है।
- अहंकार और पूर्वाग्रह: अपनी संस्कृति को श्रेष्ठ और दूसरों की संस्कृति को तुच्छ मानने की भावना पैदा हो सकती है, जो अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव के लिए हानिकारक है।
- व्यक्तिवाद और क्षेत्रवाद: अत्यधिक व्यक्तिगत हितों की पूर्ति या प्रांतीयता/जातीयता की भावनाएँ राष्ट्रीय एकता और भावना को कमजोर कर सकती हैं।
--- पाठ समाप्त ---