UP Board Class 12 Biology 1. जीवों में जनन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
उत्तर: कोई भी जीव अमर नहीं होता। प्रत्येक जीव की एक निश्चित जीवन-अवधि होती है। जीव मरते हैं, लेकिन उनकी प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है। जनन ही प्रजाति की इस निरंतरता को सुनिश्चित करता है। यह मृत्यु के कारण हुई जीव-हानि की पूर्ति कर देता है।
दूसरा, जनन के दौरान उत्पन्न होने वाली विभिन्नताएँ जीव को बदलते हुए पर्यावरण में सफलतापूर्वक जीवित रहने के अवसर प्रदान करती हैं। ये विभिन्नताएँ ही जीवों के विकास का आधार बनती हैं।
उत्तर: जीवों में जनन मुख्यतः दो प्रकार से होता है:
इनमें से लैंगिक जनन को एक बेहतर विधि माना जाता है। इस विधि में दो विपरीत लिंग वाले जनक (नर एवं मादा) भाग लेते हैं। इनमें नर तथा मादा युग्मकों का संयुग्मन होता है, जिससे युग्मनज बनता है और फिर नए जीव का विकास होता है।
युग्मक निर्माण के समय होने वाले अर्धसूत्री विभाजन के कारण संतति में आनुवंशिक विभिन्नताएँ आ जाती हैं। ये विभिन्नताएँ जीव को पर्यावरण के अनुकूल ढलने, रोगों से लड़ने और जैव विकास में सहायक होती हैं। इसीलिए लैंगिक जनन को अच्छी विधि माना गया है।
उत्तर: अलैंगिक जनन में केवल समसूत्री विभाजन शामिल होता है। इस कारण इस विधि से उत्पन्न सभी संततियाँ आपस में तथा अपने एकल जनक के आकारिकीय (Morphological) एवं आनुवंशिक (Genetic) रूप से पूर्णतः समान होती हैं। आनुवंशिक रूप से समान जीवों के समूह को क्लोन कहते हैं। इसीलिए अलैंगिक जनन से बनी संतति को क्लोन कहा जाता है।
उत्तर: लैंगिक जनन से उत्पन्न संतति में आनुवंशिक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। ये विभिन्नताएँ युग्मक निर्माण के समय होने वाले जीन विनिमय (Crossing Over), गुणसूत्रों के पृथक्करण तथा युग्मकों के यादृच्छिक संलयन के कारण उत्पन्न होती हैं।
ये विभिन्नताएँ जीव को बदलते पर्यावरण में स्वयं को ढालने, नई चुनौतियों का सामना करने और सफलतापूर्वक जीवित रहने के अवसर प्रदान करती हैं। हालाँकि, यह कथन हमेशा सही नहीं होता। कभी-कभी हानिकारक विभिन्नताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, जो जीव के लिए प्रतिकूल साबित हो सकती हैं। परंतु, समष्टि के स्तर पर देखें तो लैंगिक जनन से उत्पन्न विविधता ही प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व की कुंजी है।
उत्तर: अलैंगिक एवं लैंगिक जनन से बनी संतति में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:
उत्तर: अलैंगिक तथा लैंगिक जनन में अंतर
| क्र. सं. | अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|---|
| 1. | इसमें केवल एक जनक भाग लेता है। | इसमें दो विपरीत लिंग वाले जनक भाग लेते हैं। |
| 2. | जनन इकाई कलिका, शरीर खंड, बीजाणु आदि होती है। | जनन इकाई युग्मक (शुक्राणु, अंडाणु) होते हैं। |
| 3. | युग्मक निर्माण व संलयन नहीं होता। | युग्मक निर्माण व उनका संलयन (निषेचन) होता है। |
| 4. | संतति जनक के समरूप (क्लोन) होती है। | संतति जनकों से भिन्न होती है। |
| 5. | यह जैव विकास में सहायक नहीं है। | यह आनुवंशिक विभिन्नता उत्पन्न कर जैव विकास में सहायक है। |
कायिक जनन को अलैंगिक जनन क्यों माना गया?
कायिक जनन में पौधे का कोई कायिक भाग (जैसे जड़, तना, पत्ती) अलग होकर नया पौधा बनाता है। इसमें दो जनक भाग नहीं लेते, युग्मक निर्माण व संलयन नहीं होता और बनी संतति जनक के आनुवंशिक रूप से समान (क्लोन) होती है। ये सभी लक्षण अलैंगिक जनन के हैं, इसीलिए कायिक जनन को अलैंगिक जनन का एक प्रकार माना गया है।
उत्तर: कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) अलैंगिक जनन का वह प्रकार है, जिसमें पौधे के कायिक भागों (जड़, तना, पत्ती) से नए पौधे उत्पन्न होते हैं।
उदाहरण:
चित्र: आलू का कंद एवं अदरक का प्रकन्द
उत्तर:
(क) किशोर चरण (Juvenile Phase): यह जीव के जीवन-चक्र की प्रारंभिक अवस्था है, जब जीव वृद्धि कर रहा होता है लेकिन लैंगिक रूप से परिपक्व नहीं होता। पौधों में इसे कायिक प्रावस्था कहते हैं। इस अवस्था में जीव प्रजनन नहीं कर सकता।
(ख) प्रजनक चरण (Reproductive Phase): किशोरावस्था के बाद जीव लैंगिक रूप से परिपक्व हो जाता है और प्रजनन करने योग्य हो जाता है। पौधों में यह फूल आने की अवस्था है, जबकि जंतुओं में यौवनारंभ के साथ शुरू होता है। यह प्रजाति की निरंतरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
(ग) जीर्णता चरण (Senescence Phase): यह जीवन-चक्र की अंतिम अवस्था है। इसे बुढ़ापा या जीर्णावस्था भी कहते हैं। इस चरण में प्रजनन क्षमता समाप्त हो जाती है, उपापचय क्रियाएँ मंद पड़ने लगती हैं, शारीरिक क्षमता घटती है और अंततः जीव की मृत्यु हो जाती है।
उत्तर: लैंगिक जनन एक जटिल, लंबी और अधिक ऊर्जा खपत वाली प्रक्रिया है, फिर भी बड़े एवं जटिल जीवों ने इसे अपनाया है। इसका मुख्य कारण यह है कि लैंगिक जनन आनुवंशिक विभिन्नता उत्पन्न करता है। यह विभिन्नता जीवों को निम्नलिखित लाभ प्रदान करती है:
यही कारण है कि दीर्घकालिक उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए बड़े जीवों ने लैंगिक जनन को अपनाया है।
उत्तर: लैंगिक जनन करने वाले अधिकांश जीव द्विगुणित (2n) होते हैं। इन जीवों में युग्मकजनन (Gametogenesis), यानी नर एवं मादा युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया, अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा ही होती है। अर्द्धसूत्री विभाजन के कारण गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है और अगुणित (n) युग्मक बनते हैं।
निषेचन के दौरान इन अगुणित युग्मकों के मिलने से पुनः द्विगुणित युग्मनज बनता है। इस प्रकार, युग्मक बनाने के लिए अर्द्धसूत्री विभाजन अनिवार्य है और यह प्रक्रिया प्रजाति में गुणसूत्रों की संख्या को स्थिर रखती है। इसीलिए कहा जाता है कि अर्द्धसूत्री विभाजन और युग्मकजनन आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
उत्तर:
उत्तर: बाह्य निषेचन (External Fertilization) वह प्रक्रिया है जिसमें नर एवं मादा युग्मकों का संलयन जीव के शरीर के बाहर, सामान्यतः जलीय वातावरण में होता है। उदाहरण: अधिकांश मछलियाँ, मेंढक, शैवाल।
बाह्य निषेचन के नुकसान:
उत्तर: जूस्पोर एवं युग्मनज में अंतर
| क्र. सं. | जूस्पोर (चलबीजाणु) | युग्मनज |
|---|---|---|
| 1. | यह अलैंगिक जनन की इकाई है। | यह लैंगिक जनन (निषेचन) का परिणाम है। |
| 2. | इसका निर्माण एक ही जनक से होता है। | इसका निर्माण दो जनकों (नर व मादा युग्मक) के संलयन से होता है। |
| 3. | यह चलनशील (Motile) होता है, इसमें कशाभिका पाई जाती है। | यह सामान्यतः अचल (Non-motile) होता है। |
| 4. | यह प्रायः अगुणित (n) होता है। | यह हमेशा द्विगुणित (2n) होता है। |
उत्तर: युग्मकजनन एवं भ्रूणोद्भव में अंतर
| क्र. सं. | युग्मकजनन (Gametogenesis) | भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) |
|---|---|---|
| 1. | यह युग्मकों (शुक्राणु, अंडाणु) के निर्माण की प्रक्रिया है। | यह युग्मनज से भ्रूण के विकसित होने की प्रक्रिया है। |
| 2. | इसमें अर्द्धसूत्री विभाजन शामिल होता है। | इसमें समसूत्री विभाजन शामिल होता है। |
| 3. | इसके परिणामस्वरूप बने युग्मक अगुणित (n) होते हैं। | इसके परिणामस्वरूप बना भ्रूण द्विगुणित (2n) होता है। |
| 4. | युग्मक एककोशिकीय होते हैं। | भ्रूण बहुकोशिकीय होता है। |
उत्तर: पुष्प में निषेचन के बाद निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं:
उत्तर: द्विलिंगी पुष्प (Bisexual Flower) वह पुष्प है जिसमें नर जननांग (पुंकेसर) और मादा जननांग (स्त्रीकेसर) दोनों ही उपस्थित हों।
पाँच द्विलिंगी पुष्पों के उदाहरण:
उत्तर: कुकुरबिटेसी कुल के पौधे (जैसे लौकी, कद्दू, खीरा, करेला) एकलिंगी पुष्प धारण करते हैं।
अन्य एकलिंगी पौधों के उदाहरण:
उत्तर: अण्डप्रजक (Oviparous) प्राणी (जैसे मछली, मेंढक, पक्षी, सरीसृप) अंडे देते हैं, जबकि सजीवप्रजक (Viviparous) प्राणी (जैसे मनुष्य, गाय, व्हेल) शिशु को जन
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