UP Board Class 12 Biology 11. जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उत्तर
| क्र. सं. | पुनर्योगज प्रोटीन | उपचार के प्रयोग |
|---|---|---|
| 1. | इन्सुलिन (ह्यूमुलिन) | मधुमेह के उपचार में। |
| 2. | मानव वृद्धि हॉर्मोन (GH) | बौनेपन के उपचार में। |
| 3. | एण्टरफेरॉन | विषाणु संक्रमण व कैंसर रोगों के उपचार में। |
| 4. | फॉलिकिल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (FSH) | प्रजनन से जुड़े रोगों के उपचार में। |
| 5. | इण्टरल्यूसिन-2 | कैंसर के उपचार में। |
| 6. | फैक्टर VIII व IX | हीमोफीलिया के उपचार में। |
| 7. | टिशु प्लाज्मिनोजन एक्टिवेटर (TPA) | मायोकार्डियल इन्फार्कशन (हृदयाघात) में। |
| 8. | ऐल्फा गैलैक्टोसाइडेज | पेट रोगों के उपचार में एन्जाइम रिप्लेसमैन्ट थेरेपी। |
| 9. | टिशु ग्रोथ फैक्टर (TGF) | घाव भरने हेतु। |
| 10. | एरिथ्रोप्रोइटिन (EPO) | रुधिरहीनता (एनीमिया) के उपचार में। |
प्रतिबन्धन एन्जाइम इकोआर I (EcoRI) की क्रिया
चित्र: प्रतिबन्धन एन्जाइम इको आर I (EcoRI) की क्रिया का पुनर्योगज डीएनए के निर्माण के चरण।
व्याख्या: एन्जाइम EcoRI डीएनए अनुक्रम 5'-GAATTC-3' को पहचानता है और G तथा A क्षारकों के बीच दोनों रज्जुकों को काटता है। इससे 'चिपचिपे सिरे' (Sticky Ends) बनते हैं, जो पूरक क्षारक युग्मन द्वारा वेक्टर डीएनए से जुड़कर पुनर्योगज डीएनए (Recombinant DNA) का निर्माण करते हैं।
उत्तर: डी.एन.ए. एन्जाइमों (प्रोटीन) की तुलना में बहुत बड़े आण्विक आकार के जैव-वृहदाणु (Biological Macromolecules) होते हैं। एक डी.एन.ए. अणु में सैकड़ों या हजारों जीन्स होते हैं, जबकि प्रत्येक एन्जाइम सिर्फ एक जीन द्वारा कोडित होता है। इस प्रकार, एक डी.एन.ए. अणु में कई एन्जाइमों को कोड करने की सूचना समाहित होती है, जो इसके विशाल आकार को दर्शाता है।
उत्तर: मानव की एक द्विगुणित (Diploid) कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र में एक लम्बा डी.एन.ए. अणु होता है।
मोलर सान्द्रता की गणना करने पर, एक मानव कोशिका में डी.एन.ए. की अनुमानित मोलर सान्द्रता लगभग 2.79 x 10¹¹ मोल प्रति लीटर के क्रम में होती है। यह एक बहुत ही उच्च सान्द्रता है, जो कोशिका के अत्यधिक छोटे आयतन में डी.एन.ए. की विशाल मात्रा को दर्शाती है।
उत्तर: नहीं, सभी कोशिकाओं में प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज नहीं मिलते हैं। ये विशेष रूप से जीवाणुओं में पाए जाते हैं, जहाँ ये एक रक्षात्मक तंत्र के रूप में कार्य करते हैं। जब कोई जीवाणुभोजी (Bacteriophage) जीवाणु पर आक्रमण करता है, तो यह एन्जाइम आक्रमणकारी जीवाणुभोजी के डी.एन.ए. को काट देता है, जिससे जीवाणु की रक्षा होती है। जीवाणु अपने स्वयं के डी.एन.ए. की रक्षा के लिए उसे मिथाइलेट (Methylate) कर लेते हैं, जिससे एन्जाइम उसे नहीं काट पाता। सुकेन्द्रकी कोशिकाओं (जैसे मानव कोशिका) में यह एन्जाइम सामान्यतः नहीं पाया जाता।
उत्तर: स्टिर्ड टैंक बायोरिऐक्टर (Stirred-tank Bioreactor) की कम्पन फ्लास्क (Shake Flask) की तुलना में निम्नलिखित विशेषताएँ/लाभ हैं:
उत्तर: डी.एन.ए. में पैलिन्ड्रोमिक अनुक्रम (Palindromic Sequence) वह क्षारक अनुक्रम है जिसे 5' → 3' दिशा में दोनों रज्जुकों पर पढ़ने पर एक जैसा पढ़ा जाता है। ये प्रतिबन्धन एन्जाइमों के अभिज्ञान स्थल (Recognition Sites) होते हैं।
पाँच उदाहरण:
उत्तर: अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान, प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन की पैकीटीन (Pachytene) उपअवस्था में पुनर्योगज डी.एन.ए. का निर्माण होता है। इस अवस्था में समजात गुणसूत्रों (Homologous Chromosomes) के बीच क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over) की घटना घटित होती है। इस प्रक्रिया में समजात गुणसूत्रों के गैर-सहोदर क्रोमैटिड्स के बीच डी.एन.ए. खण्डों का आदान-प्रदान होता है, जिसके परिणामस्वरूप नए पुनर्योगज डी.एन.ए. (Recombinant DNA) बनते हैं। यह आनुवंशिक विविधता का एक प्रमुख स्रोत है।
उत्तर: बीटा-गैलेक्टोसाइडेज (β-galactosidase) एन्जाइम को कोड करने वाली जीन (lacZ जीन) का उपयोग एक प्रतिवेदक जीन (Reporter Gene) के रूप में किया जाता है। इसे ब्लू-व्हाइट स्क्रीनिंग (Blue-White Screening) कहते हैं।
उत्तर:
(क) प्रतिकृतीयन का उद्भव (Origin of Replication - ori): यह डी.एन.ए. का एक विशिष्ट अनुक्रम है जहाँ से प्रतिकृतीयन (Replication) प्रारम्भ होता है। यह वाहक (Vector) का एक आवश्यक भाग है। यह सुनिश्चित करता है कि वाहक परपोषी कोशिका के अंदर स्वयं की प्रतिकृति बना सके। एक शक्तिशाली 'ori' वाहक को कोशिका के अंदर बहुत अधिक संख्या में प्रतिकृतियाँ (प्रतिरूप) बनाने में सहायता करता है, जिससे लक्ष्य जीन की अधिक प्रतियाँ प्राप्त होती हैं।
(ख) बायोरिऐक्टर (Bioreactor): यह एक बड़ा पात्र (स्टेनलेस स्टील का बना) है जिसमें सूक्ष्मजीवों, पादप या जन्तु कोशिकाओं का उपयोग करके कच्चे माल को जैविक रूप से वांछित उत्पाद (जैसे एंजाइम, प्रोटीन, एंटीबायोटिक) में परिवर्तित किया जाता है। यह तापमान, pH, ऑक्सीजन, क्रियाधार आदि के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ प्रदान करता है। स्टिर्ड टैंक बायोरिऐक्टर सबसे आम प्रकार है, जिसमें विलोडक (Stirrer), वातन प्रणाली, फोम नियंत्रक और प्रतिदर्श निकासी पोर्ट जैसे घटक होते हैं।
(ग) अनुप्रवाह संसाधन (Downstream Processing): बायोरिऐक्टर में उत्पाद के संश्लेषण के बाद, उसे शुद्ध, सुरक्षित और विपणन योग्य बनाने के लिए जिन प्रक्रमों से गुजारा जाता है, उन्हें सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं। इसमें उत्पाद का पृथक्करण (Separation), शोधन (Purification), गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण (Quality Control Testing) और उचित परिरक्षकों के साथ संरूपण (Formulation) शामिल हैं। औषधियों के मामले में, चिकित्सीय परीक्षण (Clinical Trials) भी इसी चरण का हिस्सा हैं।
उत्तर:
(क) पी.सी.आर. (पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया - Polymerase Chain Reaction): यह एक प्रयोगशाला तकनीक है जिसके द्वारा डी.एन.ए. के एक विशिष्ट खण्ड (जीन) की अरबों गुना तक प्रवर्धन (Amplification) किया जा सकता है, भले ही उसकी प्रारंभिक मात्रा बहुत कम हो। इसमें ताप-सहिष्णु टैक पॉलिमरेज (Taq Polymerase) एन्जाइम, प्राइमर्स (Primers) और न्यूक्लियोटाइड्स का उपयोग करते हुए तापचक्रण (Thermal Cycling) किया जाता है। प्रत्येक चक्र में डी.एन.ए. का विकृतीकरण (Denaturation), प्राइमर का एनीलिंग (Annealing) और नए डी.एन.ए. का विस्तार (Extension) होता है।
(ख) प्रतिबन्धन एन्जाइम और डी.एन.ए. (Restriction Enzyme and DNA): प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज (Restriction Endonuclease) जीवाणुओं में पाए जाने वाले विशेष एंजाइम हैं जो डी.एन.ए. को विशिष्ट पैलिन्ड्रोमिक अनुक्रमों (अभिज्ञान स्थलों) पर काटते हैं। इन्हें 'आण्विक कैंची' कहा जाता है। ये जीवाणु को जीवाणुभोजी के डी.एन.ए. से बचाते हैं। जैव प्रौद्योगिकी में, इन एंजाइमों का उपयोग वाहक और लक्ष्य डी.एन.ए. को एक ही स्थल पर काटकर पुनर्योगज डी.एन.ए. बनाने के लिए किया जाता है।
(ग) काइटिनेज (Chitinase): यह एक एंजाइम है जो काइटिन (Chitin) नामक पॉलिसैकेराइड को तोड़ता है। काइटिन कवकों (Fungi) की कोशिका भित्ति का एक प्रमुख घटक है। जब हमें कवक कोशिकाओं से उनका डी.एन.ए. अलग करना होता है, तो सबसे पहले काइटिनेज एंजाइम का उपयोग करके कवक की कठोर कोशिका भित्ति को तोड़ा जाता है। इसके बाद ही कोशिका से डी.एन.ए. को मुक्त किया जा सकता है और अन्य एंजाइमों (जैसे प्रोटिएज, RNAase) की सहायता से शुद्ध किया जा सकता है।
उत्तर:
(क) प्लाज्मिड डी.एन.ए. और गुणसूत्रीय डी.एन.ए. में अन्तर
| आधार | प्लाज्मिड डी.एन.ए. | गुणसूत्रीय डी.एन.ए. (जीवाणु) |
|---|---|---|
| प्रकृति | छोटे, वृत्ताकार, द्विरज्जुक, गुणसूत्र के अतिरिक्त। | बड़ा, रैखिक/वृत्ताकार, द्विरज्जुक, कोशिका का मुख्य आनुवंशिक पदार्थ। |
| जीन संख्या | कम (आमतौर पर 30 से कम)। | अधिक (हजारों)। |
| आवश्यकता | जीवाणु के मूल जीवन के लिए आवश्यक नहीं, लेकिन विशेष लाभ (जैसे एंटीबायोटिक प्रतिरोध) दे सकता है। | जीवाणु के जीवन व प्रजनन के लिए अनिवार्य। |
| प्रतिकृतीयन | स्वायत्त (Autonomous) रूप से होता है। | कोशिका चक्र के साथ नियंत्रित होता है। |
| समयुग्मन | समयुग्मन (Conjugation) में भाग लेकर जीन स्थानान्तरित कर सकता है। | समयुग्मन में सीधे भाग नहीं लेता। |
(ख) आर.एन.ए. और डी.एन.ए. में अन्तर
| आधार | डी.एन.ए. (डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) | आर.एन.ए. (राइबोन्यूक्लिक अम्ल) |
|---|---|---|
| शर्करा | डिऑक्सीराइबोस (Deoxyribose) | राइबोस (Ribose) |
| क्षारक | एडीनीन (A), ग्वानीन (G), साइटोसीन (C), थाइमीन (T) | एडीनीन (A), ग्वानीन (G), साइटोसीन (C), यूरेसिल (U) |
| संरचना | प्रायः द्वि-रज्जुक (Double-stranded) | प्रायः एक-रज्जुक (Single-stranded) |
| स्थायित्व | अधिक स्थायी, लम्बे समय तक सूचना संग्रहण। | कम स्थायी, अल्पकालिक सूचना वाहक। |
| प्रमुख कार्य | आनुवंशिक सूचना का दीर्घकालिक भण्डारण। | डी.एन.ए. की सूचना को प्रोटीन संश्लेषण तक पहुँचाना (mRNA, tRNA, rRNA)। |
(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एण्डोन्यूक्लिएज में अन्तर
| आधार | एक्सोन्यूक्लिएज (Exonuclease) | एण्डोन्यूक्लिएज (Endonuclease) |
|---|---|---|
| क्रिया स्थल | डी.एन.ए. रज्जुक के सिरों से न्यूक्लियोटाइड्स को हटाता/काटता है। | डी.एन.ए. रज्जुक के भीतरी भाग में विशिष्ट स्थलों पर काटता है। |
| उदाहरण | डी.एन.ए. प्रतिकृतीयन में त्रुटि संशोधन में भूमिका। | प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज (जैसे EcoRI), जो जैव प्रौद्योगिकी में उपयोगी हैं। |
| विशिष्टता | सामान्यतः विशिष्ट अनुक्रम पर निर्भर नहीं। | विशिष्ट पैलिन्ड्रोमिक अनुक्रम को पहचानकर काटता है। |
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