UP Board Class 12 Biology 13. जीव और समष्टियाँ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उत्तर
उत्तर: शीत निष्क्रियता कम ताप से बचने के लिए कुछ जीवों द्वारा अपनायी जाने वाली निम्न उपापचयी दर की असक्रिय शीत निद्रा है। शीत निष्क्रियता द्वारा भालू, मेढक आदि जैसे पृष्ठवंशी प्राणी जीवित बने रहते हैं।
प्रतिकूल परिस्थिति (कम ताप या अधिक ताप/जल की कमी) जैसी समस्याओं से बचाव के लिए झील और तालाब के अनेक प्राणी प्लवक प्रजातियाँ तथा कुछ कीट (अपृष्ठवंशी) निलम्बित परिवर्द्धन की अवस्था में आ जाती हैं, इस स्थिति को उपरति कहते हैं। इसके द्वारा ये सूक्ष्म जन्तु प्रतिकूल परिस्थिति का सामना करते हैं।
उत्तर: समुद्री उपास्थि मछली की कोशिकाओं की परासरण सान्द्रता समुद्री जल की सान्द्रता के समान (आइसोटोनिक) होती है। जब समुद्री मछली को अलवणीय जल की जलजीवशाला में रखते हैं तो इन्हें परासरणी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कोशिकाएँ जलजीवशाला से अत्यधिक मात्रा में जल का अन्तःपरासरण करने लगती हैं। इसके कारण उनके शरीर द्रव्य तनु हो जाते हैं और उनकी आतंरिक पर्यावरण बनाए रखने की क्षमता समाप्त हो जाती है, अतः मछली मर जाती है। ये स्टेनोहेलाइन (सीमित लवणता सहने वाले) जीव हैं जो जलीय सान्द्रता के एक सीमित परास को ही सहन करने की क्षमता रखते हैं।
अस्थिल समुद्री मछलियाँ लगातार समुद्री जल पीकर उससे शरीर में अधिक मात्रा में पहुँचे लवणों को शरीर से निकालती रहती हैं। इस प्रकार की मछली पर भी स्वच्छ जल में रखने का घातक प्रभाव होगा। अतः समुद्री मछली अलवणीय जल में अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाएगी।
उत्तर: प्रेक्षणीय लक्षण लक्षणप्ररूपी (फीनोटाइपिक) लक्षण कहलाते हैं। अतः किसी जीव के वह आकारिकीय, शारीरिक, कार्यिकीय या व्यावहारिक लक्षण जो उसे किसी पर्यावरण विशेष में रहने व सफल प्रजनन में सक्षम बनाते हैं, लक्षणप्ररूपी अनुकूलन कहलाते हैं। उदाहरण: मछलियों का नौकाकार शरीर, पक्षियों के पंख।
उत्तर: तापमान एन्जाइम्स की क्रियाशीलता को प्रभावित करता है। सामान्यतः जीवधारी 45°C से अधिक तापमान सहन नहीं कर पाते क्योंकि एन्जाइम्स का विकृतीकरण हो जाता है। लेकिन कुछ जीव तापमानों के व्यापक परास (चरम) को सहन करने में समर्थ होते हैं। जैसे कुछ जीवाणु और शैवाल गर्म जल स्रोतों में जीवित रहते हैं, ऐसे जीवधारियों को पृथुतापी (Thermophiles) कहते हैं। इन जीवों में ऊष्मास्थिर एन्जाइम्स पाए जाते हैं जिन पर उच्च ताप का प्रभाव नहीं पड़ता। इनकी कोशिका कला के शाखित श्रृंखला लिपिड व कोशिका भित्ति भी अधिक ताप सहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
उत्तर: समष्टि में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो व्यष्टि में नहीं पाए जाते। ये हैं:
उत्तर: माना समष्टि का प्रारंभिक आकार N0 है। 3 वर्ष बाद यह दोगुनी हो जाती है, अर्थात Nt = 2N0।
चरघातांकी वृद्धि के समीकरण Nt = N0ert के अनुसार:
2N0 = N0er×3
2 = e3r
ln(2) = 3r
r = ln(2)/3 ≈ 0.693/3 ≈ 0.231 प्रति व्यष्टि प्रति वर्ष।
उत्तर: पौधे शाकाहारियों से अपनी रक्षा के लिए निम्नलिखित विधियाँ अपनाते हैं:
उत्तर: आर्किड तथा आम के वृक्ष के मध्य सम्बन्ध सहभोजिता (Commensalism) का है। इसमें आर्किड (अधिपादप) को आम के वृक्ष की शाखा पर सहारा मिलता है, जिससे उसे लाभ होता है। आम के वृक्ष को इस संबंध से न तो लाभ होता है और न ही हानि। आर्किड अपनी आर्द्रताग्राही जड़ों से वायुमंडल से सीधे नमी प्राप्त कर लेता है।
उत्तर: जैव नियंत्रण विधि परभक्षण या परजीविता के पारिस्थितिक सिद्धांत पर आधारित है। इसमें पीड़क की प्राकृतिक शत्रु (परभक्षी या परजीवी) की समष्टि को बढ़ाकर पीड़क समष्टि को नियंत्रित किया जाता है। उदाहरण:
उत्तर: (क) शीत निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता में अन्तर
| शीत निष्क्रियता (Hibernation) | ग्रीष्म निष्क्रियता (Aestivation) |
|---|---|
| शीत ऋतु के कुप्रभाव से बचने के लिए कुछ समय के लिए सुप्तावस्था में चले जाना। | गर्मी या शुष्कता के कुप्रभाव से बचने के लिए कुछ अवधि के लिए सुप्तावस्था में चले जाना। |
| उदाहरण: भालू, मेढक, छिपकली। | उदाहरण: कुछ मछलियाँ, मेढक (कीचड़ में दबकर)। |
| बाह्योष्मी (Ectothermic) | आन्तरोष्मी (Endothermic) |
|---|---|
| शरीर का ताप वातावरण के अनुसार बदलता रहता है। पर्यावरण से प्राप्त ऊष्मा पर निर्भर रहते हैं। | शरीर का ताप स्थिर रहता है। शरीर की उपापचय क्रियाओं द्वारा ऊष्मा उत्पन्न कर ताप नियंत्रित करते हैं। |
| ये प्रायः अनुकूलक (Conformers) होते हैं। | ये नियंत्रक (Regulators) होते हैं। |
| उदाहरण: मछली, उभयचर, सरीसृप। | उदाहरण: पक्षी, स्तनधारी। |
उत्तर:
(क) मरुस्थल पादपों और प्राणियों के अनुकूलन:
उत्तर: अजैवीय कारकों को तीन मुख्य समूहों में बाँटा जा सकता है:
उत्तर:
उत्तर:
उत्तर:
उत्तर: प्रकृति में संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए समष्टि की वृद्धि हमेशा चरघातांकी नहीं होती। जब वृद्धि सीमित संसाधनों द्वारा नियंत्रित होती है, तो उसे लॉजिस्टिक वृद्धि कहते हैं। इसका वक्र S-आकार (सिग्मॉइड) का होता है।
उत्तर: (घ) एक जीव को लाभ होता है, दूसरा प्रभावित होता है।
उत्तर: समष्टि की तीन महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
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