UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर
उत्तर:
नाइट्रोजनीकृत क्षार (Nitrogenous Bases): एडीनीन (Adenine), थाइमीन (Thymine), यूरेसील (Uracil), साइटोसीन (Cytosine)
न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides): साइटीडीन (Cytidine), ग्वानोसीन (Guanosine)
उत्तर:
चारगाफ के नियम के अनुसार, A = T तथा G = C होता है।
दिया है: साइटोसीन (C) = 20%
अतः ग्वानीन (G) भी = 20%
इस प्रकार, G + C = 20% + 20% = 40%
शेष प्रतिशत A + T का होगा: 100% - 40% = 60%
चूँकि A = T, इसलिए एडेनीन (A) = 60% / 2 = 30%
उत्तर:
दिए गए रज्जुक का पूरक रज्जुक (3'→5' दिशा में) होगा:
3'-TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-5'
इस पूरक रज्जुक का 5'→3' दिशा में अनुक्रम होगा:
5'-GCATGCATGCATGCATGCATGCATGCAT-3'
उत्तर:
कूटलेखन रज्जुक (Coding Strand) का अनुक्रम: 5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3'
mRNA का संश्लेषण टेम्पलेट रज्जुक (Template Strand) से होता है, जो कूटलेखन रज्जुक का पूरक होता है।
टेम्पलेट रज्जुक (3'→5' दिशा में): 3'-TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-5'
इस टेम्पलेट पर संश्लेषित mRNA का अनुक्रम (5'→3' दिशा में, T के स्थान पर U के साथ) होगा:
5'-AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC-3'
उत्तर:
वाटसन और क्रिक द्वारा प्रस्तावित डी०एन०ए० की द्विकुण्डली संरचना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता पूरक क्षार युग्मन थी। दोनों पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे की पूरक होती हैं; एक श्रृंखला पर एडेनीन (A) हमेशा दूसरी पर थाइमीन (T) से तथा ग्वानीन (G) हमेशा साइटोसीन (C) से जुड़ता है।
इस पूरकता के कारण, प्रतिकृति के समय दोनों श्रृंखलाएँ अलग हो जाती हैं और प्रत्येक श्रृंखला नई पूरक श्रृंखला के संश्लेषण के लिए टेम्पलेट का कार्य करती है। परिणामस्वरूप, प्रत्येक नए डी०एन०ए० अणु में एक पुरानी (मातृ) श्रृंखला और एक नवसंश्लेषित श्रृंखला होती है। प्रतिकृति की यह विधि अर्ध-संरक्षी (Semi-Conservative) कहलाती है।
उत्तर:
न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज के प्रकार:
उत्तर:
हर्षे और चेस (1952) ने डी०एन०ए० और प्रोटीन के रासायनिक अंतर का उपयोग करते हुए एक प्रयोग किया।
चित्र: हर्षे-चेस प्रयोग का सचित्र निरूपण
उत्तर:
(क) पुनरावृत्ति डी०एन०ए० एवं अनुषंगी डी०एन०ए० में अन्तर
| पुनरावृत्ति डी०एन०ए० | अनुषंगी डी०एन०ए० |
|---|---|
| यह डी०एन०ए० के वे अनुक्रम हैं जो जीनोम में बार-बार दोहराए जाते हैं। | यह पुनरावृत्ति डी०एन०ए० का ही एक विशेष प्रकार है। |
| यह जीनोम का एक बड़ा भाग बनाता है। | प्रवणता अपकेंद्रीकरण (Gradient Centrifugation) करने पर मुख्य डी०एन०ए० बैंड के साथ छोटे-छोटे अतिरिक्त बैंड (शिखर) के रूप में दिखाई देता है, इसलिए इसे 'सैटेलाइट' कहते हैं। |
| इसमें ट्रांसपोजॉन, एलू अनुक्रम आदि शामिल हैं। | इसमें उच्च बहुरूपता पाई जाती है और यह डी०एन०ए० फिंगरप्रिंटिंग का आधार है। |
| संदेशवाहक आर०एन०ए० (mRNA) | स्थानान्तरण आर०एन०ए० (tRNA) |
|---|---|
| यह डी०एन०ए० से प्राप्त आनुवंशिक सूचना को राइबोसोम तक ले जाता है। | यह कोशिकाद्रव्य में मौजूद ऐमीनो अम्लों को राइबोसोम तक पहुँचाता है। |
| यह रैखिक (Linear) संरचना का होता है। | यह क्लोवर-लीफ (Clover-leaf) की तरह त्रिआयामी संरचना बनाता है। |
| इस पर प्रोटीन संश्लेषण के लिए कोडॉन (तीन-तीन क्षारकों के समूह) पाए जाते हैं। | इस पर एंटीकोडॉन पाया जाता है, जो mRNA के कोडॉन से पूरकता के आधार पर जुड़ता है। |
| यह कोशिका के कुल RNA का केवल 3-5% होता है और अस्थायी प्रकृति का होता है। | यह कोशिका के कुल RNA का लगभग 15-20% होता है और अपना कार्य बार-बार कर सकता है। |
| टेम्पलेट रज्जु (Template Strand) | कोडिंग रज्जु (Coding Strand) |
|---|---|
| इसका ध्रुवत्व 3' → 5' दिशा में होता है। | इसका ध्रुवत्व 5' → 3' दिशा में होता है। |
| अनुलेखन (Transcription) के दौरान RNA पॉलिमरेज इसी रज्जु से जुड़कर mRNA का संश्लेषण करता है। | अनुलेखन में यह रज्जु सीधे भाग नहीं लेता। |
| इस पर बनने वाले mRNA का अनुक्रम इसका पूरक होता है (T के स्थान पर U आता है)। | इस पर बनने वाले mRNA का अनुक्रम इसके समान होता है (केवल T के स्थान पर U आता है)। |
| इसे ऐन्टीसेन्स रज्जु भी कहते हैं। | इसे सेन्स रज्जु भी कहते हैं। प्रोमोटर, टर्मिनेटर जैसे नियंत्रक तत्व इसी के आधार पर परिभाषित होते हैं। |
उत्तर:
स्थानान्तरण (प्रोटीन संश्लेषण) में राइबोसोम की दो प्रमुख भूमिकाएँ हैं:
उत्तर:
लैक ओपेरॉन ई० कोलाई में लैक्टोज के उपापचय के लिए आवश्यक एंजाइमों के जीनों का समूह है।
चित्र: लैक ओपेरॉन का निरूपण (प्रेरक की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति में)
उत्तर:
(क) उन्नायक (प्रमोटर): यह डी०एन०ए० का एक विशिष्ट अनुक्रम है जो संरचनात्मक जीन के ऊपर (5' छोर पर) स्थित होता है। RNA पॉलिमरेज एंजाइम इससे जुड़ता है और अनुलेखन की शुरुआत करता है।
(ख) अन्तरण आर०एन०ए० (tRNA): यह प्रोटीन संश्लेषण के दौरान ऐमीनो अम्लों को राइबोसोम तक पहुँचाने का कार्य करता है। इसके एक सिरे पर विशिष्ट ऐमीनो अम्ल जुड़ा होता है और दूसरे सिरे पर एंटीकोडॉन होता है जो mRNA के कोडॉन से पूरकता के आधार पर जुड़ता है।
(ग) एक्सॉन (Exon): यूकेरियोटिक जीन खंडित (Split) होते हैं। एक्सॉन जीन के वे कोडिंग खंड हैं जिनमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक सूचना निहित होती है। परिपक्व mRNA बनने की प्रक्रिया में एक्सॉन आपस में जुड़ जाते हैं जबकि गैर-कोडिंग खंड (इंट्रॉन) काट दिए जाते हैं।
उत्तर:
मानव जीनोम परियोजना (1990-2003) को एक महापरियोजना (Mega Project) निम्नलिखित कारणों से कहा गया:
उत्तर:
डी०एन०ए० अंगुलिछापी (DNA Fingerprinting) एक ऐसी तकनीक है जिसकी सहायता से किसी व्यक्ति के डी०एन०ए० के विशिष्ट प्रारूप (बैंड्स के रूप में) का विश्लेषण करके उसकी पहचान की जा सकती है।
सिद्धांत: इसका आधार डी०एन०ए० में पाए जाने वाले उच्च बहुरूपता वाले पुनरावृत्ति अनुक्रम (जैसे VNTRs - Variable Number Tandem Repeats) हैं। ये अनुक्रम प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग लंबाई और संख्या में पाए जाते हैं (समरूप जुड़वाँ को छोड़कर)।
उपयोगिता:
उत्तर:
(क) अनुलेखन (Transcription): यह कोशिका के केन्द्रक में होने वाली वह प्रक्रिया है जिसमें डी०एन०ए० के एक रज्जु (टेम्पलेट रज्जु) पर RNA पॉलिमरेज एंजाइम की सहायता से पूरक आर०एन०ए० (mRNA, tRNA, rRNA) का संश्लेषण होता है। य
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