UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board Class 12 Biology (6. वंशागति के आण्विक आधार) solution PDF

UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 12 Biology (6. वंशागति के आण्विक आधार) solution

UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 1
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 2
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 3
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 4
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 5
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 6
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 7
UP Board Solution Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Image 8

UP Board Solutions for Class 12 Biology

Chapter 6: वंशागति के आण्विक आधार
(Molecular Basis of Inheritance)

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. निम्न को नाइट्रोजनीकृत क्षार व न्यूक्लियोसाइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए-- एडीनीन, साइटीडीन, थाइमीन, ग्वानोसीन, यूरेसील व साइटोसीन।

उत्तर:
नाइट्रोजनीकृत क्षार (Nitrogenous Bases): एडीनीन (Adenine), थाइमीन (Thymine), यूरेसील (Uracil), साइटोसीन (Cytosine)
न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides): साइटीडीन (Cytidine), ग्वानोसीन (Guanosine)

प्रश्न 2. यदि एक द्विरज्जुक डी०एन०ए० में 20 प्रतिशत साइटोसीन है तो डी०एन०ए० में मिलने वाले एडेनीन के प्रतिशत की गणना कीजिए।

उत्तर:
चारगाफ के नियम के अनुसार, A = T तथा G = C होता है।
दिया है: साइटोसीन (C) = 20%
अतः ग्वानीन (G) भी = 20%
इस प्रकार, G + C = 20% + 20% = 40%
शेष प्रतिशत A + T का होगा: 100% - 40% = 60%
चूँकि A = T, इसलिए एडेनीन (A) = 60% / 2 = 30%

प्रश्न 3. यदि डी०एन०ए० के एक रज्जुक के अनुक्रम निम्नवत्‌ लिखे हैं--
5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3'
तो पूरक रज्जुक के अनुक्रम को 5'→3' दिशा में लिखें।

उत्तर:
दिए गए रज्जुक का पूरक रज्जुक (3'→5' दिशा में) होगा:
3'-TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-5'
इस पूरक रज्जुक का 5'→3' दिशा में अनुक्रम होगा:
5'-GCATGCATGCATGCATGCATGCATGCAT-3'

प्रश्न 4. यदि अनुलेखन इकाई में कूटलेखन रज्जुक के अनुक्रम को निम्नवत्‌ लिखा गया है--
5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3'
तो दूत आर०एन०ए० (mRNA) के अनुक्रम को लिखें।

उत्तर:
कूटलेखन रज्जुक (Coding Strand) का अनुक्रम: 5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3'
mRNA का संश्लेषण टेम्पलेट रज्जुक (Template Strand) से होता है, जो कूटलेखन रज्जुक का पूरक होता है।
टेम्पलेट रज्जुक (3'→5' दिशा में): 3'-TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-5'
इस टेम्पलेट पर संश्लेषित mRNA का अनुक्रम (5'→3' दिशा में, T के स्थान पर U के साथ) होगा:
5'-AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC-3'

प्रश्न 5. डी०एन०ए० द्विकुण्डली की कौन-सी विशेषता ने वाटसन व क्रिक को डी०एन०ए० प्रतिकृति के सेमी-कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया, इसकी व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
वाटसन और क्रिक द्वारा प्रस्तावित डी०एन०ए० की द्विकुण्डली संरचना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता पूरक क्षार युग्मन थी। दोनों पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे की पूरक होती हैं; एक श्रृंखला पर एडेनीन (A) हमेशा दूसरी पर थाइमीन (T) से तथा ग्वानीन (G) हमेशा साइटोसीन (C) से जुड़ता है।
इस पूरकता के कारण, प्रतिकृति के समय दोनों श्रृंखलाएँ अलग हो जाती हैं और प्रत्येक श्रृंखला नई पूरक श्रृंखला के संश्लेषण के लिए टेम्पलेट का कार्य करती है। परिणामस्वरूप, प्रत्येक नए डी०एन०ए० अणु में एक पुरानी (मातृ) श्रृंखला और एक नवसंश्लेषित श्रृंखला होती है। प्रतिकृति की यह विधि अर्ध-संरक्षी (Semi-Conservative) कहलाती है।

प्रश्न 6. टेम्प्लेट (डी०एन०ए० या आर०एन०ए०) की रासायनिक प्रकृति व इससे संश्लेषित न्यूक्लिक अम्लों की प्रकृति के आधार पर न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज के विभिन्न प्रकार की सूची बनाइए।

उत्तर:
न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज के प्रकार:

  1. डी०एन०ए० निर्भर डी०एन०ए० पॉलिमरेज (DNA-dependent DNA polymerase): यह डी०एन०ए० प्रतिकृति के लिए उत्तरदायी है। प्रोकेरियोट्स और यूकेरियोट्स दोनों में पाया जाता है।
  2. डी०एन०ए० निर्भर आर०एन०ए० पॉलिमरेज (DNA-dependent RNA polymerase): यह डी०एन०ए० से आर०एन०ए० के अनुलेखन (Transcription) के लिए उत्तरदायी है।
    • प्रोकेरियोट्स में एक ही प्रकार का RNA पॉलिमरेज सभी RNA का संश्लेषण करता है।
    • यूकेरियोट्स में तीन प्रकार के RNA पॉलिमरेज पाए जाते हैं:
      1. RNA पॉलिमरेज I: राइबोसोमल RNA (rRNA) का अनुलेखन करता है।
      2. RNA पॉलिमरेज II: संदेशवाहक RNA (mRNA) के पूर्ववर्ती (hnRNA) का अनुलेखन करता है।
      3. RNA पॉलिमरेज III: स्थानान्तरण RNA (tRNA) तथा 5S rRNA आदि छोटे RNA के अनुलेखन के लिए उत्तरदायी है।
  3. आर०एन०ए० निर्भर आर०एन०ए० पॉलिमरेज (RNA-dependent RNA polymerase): यह कुछ RNA विषाणुओं में RNA प्रतिकृति के लिए पाया जाता है।
  4. आर०एन०ए० निर्भर डी०एन०ए० पॉलिमरेज (RNA-dependent DNA polymerase): इसे रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज भी कहते हैं। यह रेट्रोवाइरस (जैसे HIV) में पाया जाता है और RNA टेम्पलेट से DNA का संश्लेषण करता है।

प्रश्न 7. डी०एन०ए० आनुवंशिक पदार्थ है, इसे सिद्ध करने हेतु अपने प्रयोग के दौरान हर्षे व चेस ने डी०एन०ए० व प्रोटीन के बीच कैसे अन्तर स्थापित किया?

उत्तर:
हर्षे और चेस (1952) ने डी०एन०ए० और प्रोटीन के रासायनिक अंतर का उपयोग करते हुए एक प्रयोग किया।

  • प्रोटीन में सल्फर पाया जाता है लेकिन फॉस्फोरस नहीं।
  • डी०एन०ए० में फॉस्फोरस पाया जाता है लेकिन सल्फर नहीं।
उन्होंने दो अलग-अलग माध्यमों में जीवाणुभोजी (बैक्टीरियोफेज) विकसित किए:
  1. रेडियोऐक्टिव सल्फर (35S) वाले माध्यम में: इससे विकसित फेज के प्रोटीन आवरण में रेडियोऐक्टिविटी थी, क्योंकि प्रोटीन में सल्फर होता है।
  2. रेडियोऐक्टिव फॉस्फोरस (32P) वाले माध्यम में: इससे विकसित फेज के डी०एन०ए० में रेडियोऐक्टिविटी थी, क्योंकि डी०एन०ए० में फॉस्फोरस होता है।
इन रेडियोऐक्टिव फेजों द्वारा सामान्य जीवाणुओं को संक्रमित करने पर पाया गया कि केवल 32P वाले फेज से संक्रमित जीवाणुओं के अंदर रेडियोऐक्टिविटी पहुँची, जबकि 35S वाले फेज से संक्रमित जीवाणुओं के अंदर नहीं। इससे सिद्ध हुआ कि संक्रमण के दौरान डी०एन०ए० ही जीवाणु कोशिका में प्रवेश करता है और आनुवंशिक पदार्थ का कार्य करता है, प्रोटीन नहीं।

हर्षे-चेस प्रयोग का चित्र

चित्र: हर्षे-चेस प्रयोग का सचित्र निरूपण

प्रश्न 8. निम्न के बीच अन्तर बताइए--
(क) पुनरावृत्ति डी०एन०ए० एवं अनुषंगी डी०एन०ए०
(ख) एम-आर०एन०ए० और टी-आर०एन०ए०
(ग) टेम्पलेट रज्जु और कोडिंग रज्जु।

उत्तर:
(क) पुनरावृत्ति डी०एन०ए० एवं अनुषंगी डी०एन०ए० में अन्तर

पुनरावृत्ति डी०एन०ए०अनुषंगी डी०एन०ए०
यह डी०एन०ए० के वे अनुक्रम हैं जो जीनोम में बार-बार दोहराए जाते हैं। यह पुनरावृत्ति डी०एन०ए० का ही एक विशेष प्रकार है।
यह जीनोम का एक बड़ा भाग बनाता है। प्रवणता अपकेंद्रीकरण (Gradient Centrifugation) करने पर मुख्य डी०एन०ए० बैंड के साथ छोटे-छोटे अतिरिक्त बैंड (शिखर) के रूप में दिखाई देता है, इसलिए इसे 'सैटेलाइट' कहते हैं।
इसमें ट्रांसपोजॉन, एलू अनुक्रम आदि शामिल हैं। इसमें उच्च बहुरूपता पाई जाती है और यह डी०एन०ए० फिंगरप्रिंटिंग का आधार है।
(ख) एम-आर०एन०ए० (mRNA) और टी-आर०एन०ए० (tRNA) में अन्तर
संदेशवाहक आर०एन०ए० (mRNA)स्थानान्तरण आर०एन०ए० (tRNA)
यह डी०एन०ए० से प्राप्त आनुवंशिक सूचना को राइबोसोम तक ले जाता है। यह कोशिकाद्रव्य में मौजूद ऐमीनो अम्लों को राइबोसोम तक पहुँचाता है।
यह रैखिक (Linear) संरचना का होता है। यह क्लोवर-लीफ (Clover-leaf) की तरह त्रिआयामी संरचना बनाता है।
इस पर प्रोटीन संश्लेषण के लिए कोडॉन (तीन-तीन क्षारकों के समूह) पाए जाते हैं। इस पर एंटीकोडॉन पाया जाता है, जो mRNA के कोडॉन से पूरकता के आधार पर जुड़ता है।
यह कोशिका के कुल RNA का केवल 3-5% होता है और अस्थायी प्रकृति का होता है। यह कोशिका के कुल RNA का लगभग 15-20% होता है और अपना कार्य बार-बार कर सकता है।
(ग) टेम्पलेट रज्जु और कोडिंग रज्जु में अन्तर
टेम्पलेट रज्जु (Template Strand)कोडिंग रज्जु (Coding Strand)
इसका ध्रुवत्व 3' → 5' दिशा में होता है। इसका ध्रुवत्व 5' → 3' दिशा में होता है।
अनुलेखन (Transcription) के दौरान RNA पॉलिमरेज इसी रज्जु से जुड़कर mRNA का संश्लेषण करता है। अनुलेखन में यह रज्जु सीधे भाग नहीं लेता।
इस पर बनने वाले mRNA का अनुक्रम इसका पूरक होता है (T के स्थान पर U आता है)। इस पर बनने वाले mRNA का अनुक्रम इसके समान होता है (केवल T के स्थान पर U आता है)।
इसे ऐन्टीसेन्स रज्जु भी कहते हैं। इसे सेन्स रज्जु भी कहते हैं। प्रोमोटर, टर्मिनेटर जैसे नियंत्रक तत्व इसी के आधार पर परिभाषित होते हैं।

प्रश्न 9. स्थानान्तरण (Translation) के दौरान राइबोसोम की दो मुख्य भूमिकाओं की सूची बनाइए।

उत्तर:
स्थानान्तरण (प्रोटीन संश्लेषण) में राइबोसोम की दो प्रमुख भूमिकाएँ हैं:

  1. साइट उपलब्ध कराना: राइबोसोम mRNA को बाँधने के लिए स्थान उपलब्ध कराता है। इसके P (पेप्टाइडाइल) और A (ऐमीनोऐसिल) स्थल tRNA-ऐमीनो अम्ल जटिलों को पास-पास लाकर पेप्टाइड बंध बनाने में सहायता करते हैं।
  2. उत्प्रेरकीय कार्य: राइबोसोम स्वयं एक राइबोजाइम (Ribozyme) के रूप में कार्य करता है। इसका 23S rRNA (प्रोकेरियोट्स में) घटक पेप्टिडिल ट्रांसफरेज एंजाइम की गतिविधि दर्शाता है, जो पेप्टाइड बंध के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 10. उस संवर्धन में जहाँ ई० कोलाई वृद्धि कर रहा था, लैक्टोज डालने पर लैक-ओपेरॉन उत्प्रेरित हो गया। लेकिन लैक्टोज डालने के कुछ देर बाद यह लैक ओपेरॉन बन्द हो जाता है। व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
लैक ओपेरॉन ई० कोलाई में लैक्टोज के उपापचय के लिए आवश्यक एंजाइमों के जीनों का समूह है।

  • लैक्टोज की अनुपस्थिति में: रेगुलेटर जीन से बना दमनकारी प्रोटीन (Repressor) ओपरेटर क्षेत्र से जुड़ जाता है। इससे RNA पॉलिमरेज प्रोमोटर से जुड़ नहीं पाता और एंजाइमों के जीनों का अनुलेखन बंद रहता है। ओपेरॉन बन्द (Repressed) अवस्था में रहता है।
  • लैक्टोज की उपस्थिति में: लैक्टोज (प्रेरक, Inducer) दमनकारी प्रोटीन से जुड़कर उसे निष्क्रिय कर देता है। अब दमनकारी प्रोटीन ओपरेटर से नहीं जुड़ पाता। RNA पॉलिमरेज प्रोमोटर से जुड़कर एंजाइम जीनों का अनुलेखन शुरू कर देता है। इससे लैक्टोज उपापचयी एंजाइम (जैसे β-गैलेक्टोसिडेज) बनते हैं और ओपेरॉन चालू (Induced) हो जाता है।
  • कुछ समय बाद बंद होने का कारण: जब सारा लैक्टोज उपयोग हो जाता है, तो प्रेरक (लैक्टोज) अनुपस्थित हो जाता है। अब दमनकारी प्रोटीन पुनः सक्रिय होकर ओपरेटर से जुड़ जाता है और अनुलेखन रुक जाता है। यह एक ऋणात्मक प्रतिपुष्टि नियंत्रण का उदाहरण है, जो कोशिका को ऊर्जा बर्बाद होने से बचाता है।

लैक ओपेरॉन का चित्र

चित्र: लैक ओपेरॉन का निरूपण (प्रेरक की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति में)

प्रश्न 11. निम्न के कार्यों का वर्णन (एक या दो पंक्तियों से) करो--
(क) उन्नायक (प्रमोटर), (ख) अन्तरण आर०एन०ए० (t-RNA), (ग) एक्सॉन (Exon)।

उत्तर:
(क) उन्नायक (प्रमोटर): यह डी०एन०ए० का एक विशिष्ट अनुक्रम है जो संरचनात्मक जीन के ऊपर (5' छोर पर) स्थित होता है। RNA पॉलिमरेज एंजाइम इससे जुड़ता है और अनुलेखन की शुरुआत करता है।

(ख) अन्तरण आर०एन०ए० (tRNA): यह प्रोटीन संश्लेषण के दौरान ऐमीनो अम्लों को राइबोसोम तक पहुँचाने का कार्य करता है। इसके एक सिरे पर विशिष्ट ऐमीनो अम्ल जुड़ा होता है और दूसरे सिरे पर एंटीकोडॉन होता है जो mRNA के कोडॉन से पूरकता के आधार पर जुड़ता है।

(ग) एक्सॉन (Exon): यूकेरियोटिक जीन खंडित (Split) होते हैं। एक्सॉन जीन के वे कोडिंग खंड हैं जिनमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक सूचना निहित होती है। परिपक्व mRNA बनने की प्रक्रिया में एक्सॉन आपस में जुड़ जाते हैं जबकि गैर-कोडिंग खंड (इंट्रॉन) काट दिए जाते हैं।

प्रश्न 12. मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों कहा गया?

उत्तर:
मानव जीनोम परियोजना (1990-2003) को एक महापरियोजना (Mega Project) निम्नलिखित कारणों से कहा गया:

  1. विशाल लक्ष्य: मानव जीनोम के लगभग 3.2 बिलियन (320 करोड़) क्षारक युग्मों का अनुक्रमण करना एक अत्यंत जटिल और बड़ा कार्य था।
  2. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: यह अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, चीन सहित कई देशों के वैज्ञानिकों का संयुक्त प्रयास था।
  3. अत्यधिक लागत: इस परियोजना पर लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यय हुआ।
  4. दीर्घ अवधि: इसे पूरा होने में 13 वर्ष लगे।
  5. डेटा प्रबंधन की चुनौती: उत्पन्न हुए विशाल आनुवंशिक आँकड़ों के संग्रहण, विश्लेषण और प्रबंधन के लिए उन्नत कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी की आवश्यकता थी, जिसने जैव सूचना विज्ञान (Bioinformatics) के क्षेत्र को बढ़ावा दिया।
  6. महत्व: इससे प्राप्त ज्ञान ने आनुवंशिक रोगों की समझ, निदान और उपचार में क्रांति ला दी।

प्रश्न 13. डी०एन०ए० अंगुलिछापी (DNA Fingerprinting) क्या है? इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:
डी०एन०ए० अंगुलिछापी (DNA Fingerprinting) एक ऐसी तकनीक है जिसकी सहायता से किसी व्यक्ति के डी०एन०ए० के विशिष्ट प्रारूप (बैंड्स के रूप में) का विश्लेषण करके उसकी पहचान की जा सकती है।

सिद्धांत: इसका आधार डी०एन०ए० में पाए जाने वाले उच्च बहुरूपता वाले पुनरावृत्ति अनुक्रम (जैसे VNTRs - Variable Number Tandem Repeats) हैं। ये अनुक्रम प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग लंबाई और संख्या में पाए जाते हैं (समरूप जुड़वाँ को छोड़कर)।

उपयोगिता:

  • फॉरेंसिक विज्ञान: अपराध स्थल से प्राप्त बाल, लार, रक्त, वीर्य आदि के नमूनों से अपराधी की पहचान करने में।
  • पितृत्व निर्धारण: बच्चे के डी०एन०ए० प्रारूप की तुलना संभावित माता-पिता से करके पारिवारिक संबंध स्थापित करने में।
  • वंशावली अध्ययन: प्रवासन के इतिहास और विभिन्न जनसंख्या समूहों के बीच संबंध जानने में।
  • जैव विविधता संरक्षण: लुप्तप्राय जीवों की आनुवंशिक विविधता का अध्ययन करने में।
  • चिकित्सा: आनुवंशिक रोगों के निदान और अंग प्रत्यारोपण में दाता-ग्राही की अनुकूलता जाँचने में।

प्रश्न 14. निम्न का संक्षिप्त वर्णन कीजिए---
(क) अनुलेखन, (ख) बहुरूपता, (ग) स्थानान्तरण, (घ) जैव सूचना विज्ञान

उत्तर:
(क) अनुलेखन (Transcription): यह कोशिका के केन्द्रक में होने वाली वह प्रक्रिया है जिसमें डी०एन०ए० के एक रज्जु (टेम्पलेट रज्जु) पर RNA पॉलिमरेज एंजाइम की सहायता से पूरक आर०एन०ए० (mRNA, tRNA, rRNA) का संश्लेषण होता है। य

Get UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Solution in Hindi Medium

UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 12 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 12 Biology 6. वंशागति के आण्विक आधार :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board Class 12 textSolutions

There are various features of UP Board Class 12 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board Class 12 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of Class 12 Biology
1. जीवों में जनन
2. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन
3. मानव जनन
4. जनन स्वास्थ्य
5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत
6. वंशागति के आण्विक आधार
7. विकास
8. मानव स्वास्थ्य तथा रोग
9. खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति
10. मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव
11. जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम
12. जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग
13. जीव और समष्टियाँ
14. पारितंत्र
15. जैव विविधता एवं संरक्षण
16. पर्यावरणीय मुद्दे
17. प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट कार्य
;