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UP Board Class 12 Biology (5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत) solution PDF

UP Board Class 12 Biology 5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 12 Biology (5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत) solution

UP Board Class 12 Biology 5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board जीव विज्ञान - कक्षा 12

अध्याय 5: वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. मेण्डल द्वारा प्रयोगों के लिए मटर के पौधे चुनने से क्या लाभ हुए?

उत्तर: ग्रेगर जोहन मेण्डल ने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर आठ वर्षों तक प्रयोग करके सन्‌ 1865 में आनुवंशिकता के सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया। मटर के पौधों को चुनने से निम्नलिखित लाभ हुए--

  1. मटर का पौधा वार्षिक होता है। इसे पूरे वर्ष उगाया जा सकता है। अत: इसकी अनेक पीढ़ियों का अध्ययन सुगमता से किया जा सकता है।
  2. इसके पुष्प उभयलिंगी (Bisexual) होते हैं। पुष्प की संरचना इस प्रकार की होती है कि इसमें प्राकृतिक रूप से स्वपरागण होता है लेकिन आसानी से कृत्रिम परपरागण कराया जा सकता है।
  3. समयुग्मजी पौधों में शुद्ध लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी बने रहते हैं।
  4. कृत्रिम परपरागण द्वारा बड़ी संख्या में बने संकर (Hybrid) पौधे जननक्षम (Fertile) होते हैं।
  5. मटर में अनेक लक्षणों के वैकल्पिक विपर्यासी रूप (Contrasting Traits) उपस्थित थे। जैसे फूल का रंग—बैंगनी या सफेद, पौधे की लम्बाई—लम्बा पौधा या बौना पौधा।

प्रश्न 2. निम्न में भेद करो--
(क) प्रभाविता और अप्रभाविता
(ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी
(ग) एकसंकर और द्विसंकर

उत्तर:

(क) प्रभाविता और अप्रभाविता (Dominance & Recessiveness)

प्रभाविता अप्रभाविता
वह लक्षण (विभेदक) या ऐलील जो विषमयुग्मजी अवस्था में अभिव्यक्त हो जाते हैं, प्रभावी विभेदक कहलाते हैं और यह घटना प्रभाविता कहलाती है। इसका कारण इसके ऐलील द्वारा पूर्ण कार्यशील एन्जाइम का उत्पादन है। वह विभेदक या ऐलील जो विषमयुग्मजी अवस्था में अभिव्यक्त नहीं होते, अप्रभावी विशेषक कहलाते हैं। यह घटना अप्रभाविता कहलाती है। ऐलील में हुए उत्परिवर्तन से अकार्यशील एन्जाइम बनता है या एन्जाइम बनता ही नहीं।

(ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी (Homozygous and Heterozygous)

समयुग्मजी विषमयुग्मजी
जब किसी पौधे के इकाई लक्षण के लिए कारकों के युग्म (Factor Pair) या जीन्स (Genes) समान होते हैं, तो यह पौधा उस लक्षण के लिए समयुग्मजी (Homozygous) कहलाता है। ऐसे पौधों के सभी युग्मक एकसमान होते हैं; जैसे—TT, tt। यह किसी लक्षण के लिए शुद्ध होते हैं। जब इकाई लक्षण का कारक युग्म या जीन्स विपरीत प्रभाव वाले होते हैं, तो यह पौधा उस लक्षण के लिए विषमयुग्मजी (Heterozygous) कहलाता है। ऐसे पौधों से दो प्रकार के युग्मक बनते हैं। जैसे Tt। यह किसी लक्षण के लिए शुद्ध नहीं होते (संकर)।

(ग) एकसंकर और द्विसंकर (Monohybrid and Dihybrid)

एकसंकर क्रॉस द्विसंकर क्रॉस
जब एक लक्षण के विपर्यासी रूपों के शुद्ध जनकों में संकरण (Cross) कराया जाता है, तो इसे एकसंकर क्रॉस कहते हैं। प्रथम पीढ़ी (F1) प्रभावी लक्षण को प्रदर्शित करती है। F1 पीढ़ी में स्वपरागण कराने पर द्वितीय या F2 पीढ़ी में पौधे 3:1 के फीनोटिपिक अनुपात (Phenotypic Ratio) में प्राप्त होते हैं। एक ही जीन के कारण सहलग्नता नहीं पायी जाती। जब दो तुलनात्मक लक्षणों के विपर्यासी रूपों के शुद्ध जनकों में संकरण कराया जाता है, तो इसे द्विसंकर क्रॉस (Dihybrid Cross) कहते हैं। F1 पीढ़ी के सभी पौधे प्रभावी लक्षणों को प्रदर्शित करते हैं। F1 पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण कराने पर F2 पीढ़ी में पौधे 9:3:3:1 के फीनोटिपिक अनुपात में प्राप्त होते हैं। यह सहलग्नता प्रदर्शित कर सकते हैं।

प्रश्न 3. कोई द्विगुणित जीन 6 स्थलों के लिए विषमयुग्मजी है, कितने प्रकार के युग्मकों का उत्पादन सम्भव है?

उत्तर: 6 स्थलों के लिए विषमयुग्मजी जीन में 3 विभिन्न लक्षणों के 6 वैकल्पिक रूपों के ऐलील होंगे। इसका जीनोटाइप AaBbCc होगा। अतः 23 = 8 प्रकार के युग्मक बनेंगे।
युग्मक: ABC, ABc, AbC, Abc, aBC, aBc, abC, abc.

प्रश्न 4. एकसंकर क्रॉस का प्रयोग करते हुए प्रभाविता नियम की व्याख्या करो।

उत्तर: एकसंकर क्रॉस (Monohybrid Cross) मेण्डल द्वारा एक समय पर एक तुलनात्मक लक्षण को ध्यान में रखकर किए गए प्रयोग को कहते हैं। इसमें एक जीन के दो वैकल्पिक रूपों की वंशागति का अध्ययन किया जाता है।

  1. मेण्डल ने मटर के शुद्ध लम्बे (TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधों का चयन किया। इनको पैतृक या P पीढ़ी (Parental Generation) कहते हैं।
  2. संकरण (Hybridisation) द्वारा F1 बने बीजों के अंकुरित होने पर संकर लम्बे (Tt) पौधे प्राप्त होते हैं। इसे F1 पीढ़ी या प्रथम सन्तानीय पीढ़ी कहते हैं।
  3. मेण्डल ने F1 पीढ़ी के संकर लम्बे पौधों में स्वपरागण कराया। इसके फलस्वरूप बने बीजों को बोने पर F2 पीढ़ी या द्वितीय सन्तानीय पीढ़ी में लम्बे और बौने प्रकार के पौधे 3:1 के अनुपात में प्राप्त होते हैं।
एकसंकर क्रॉस आरेख

चित्र: शुद्ध लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों के मध्य एकसंकर क्रॉस का प्रदर्शन। फीनोटाइपिक अनुपात 3:1 तथा जीनोटाइपिक अनुपात 1:2:1 होता है।

प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): जब विरोधी (तुलनात्मक) लक्षणों वाले दो पौधों के मध्य संकरण कराने पर F1 पीढ़ी में केवल एक लक्षण प्रदर्शित होता है, तो उस लक्षण को प्रभावी लक्षण (Dominant Trait) कहते हैं। यही प्रभाविता का नियम है।

प्रश्न 5. परीक्षार्थ संकरण की परिभाषा लिखो और चित्र बनाओ।

उत्तर: परीक्षार्थ संकरण (Test Cross) — फीनोटाइप को देखकर जीनोटाइप संरचना का ज्ञान सम्भव नहीं है। जैसे कि F1 या F2 के लम्बे पौधों का जीनोटाइप TT है या Tt है, बाहर से देखकर ज्ञात नहीं हो सकता। जब किसी जीव के किसी लक्षण का जीनोटाइप ज्ञात करना होता है, तब उस जीव का संकरण अप्रभावी लक्षण वाले शुद्ध जनक (Homozygous Recessive) से कराया जाता है। ऐसे संकरण (क्रॉस) को परीक्षार्थ या परीक्षण संकरण (Test Cross) कहते हैं।

परीक्षार्थ संकरण के पश्चात्‌ प्राप्त सन्तति की दो अवस्थाएँ प्राप्त होती हैं--

  1. सभी सन्तति प्रभावी लक्षण को प्रदर्शित करते हों, या
  2. 50% सन्तति प्रभावी लक्षण तथा 50% सन्तति अप्रभावी लक्षण को प्रदर्शित करते हों।
परीक्षार्थ संकरण आरेख

चित्र: परीक्षार्थ संकरण का आरेखी प्रतिरूपण।

निष्कर्ष:

  • यदि सभी F1 सदस्य प्रभावी लक्षण वाले प्राप्त होते हैं, तो अज्ञात जीनोटाइप समयुग्मकी प्रभावी (Homozygous Dominant) था।
  • यदि F1 पीढ़ी के 50% सदस्य प्रभावी तथा 50% अप्रभावी लक्षण वाले हों, तो अज्ञात जीनोटाइप विषमयुग्मकी प्रभावी (Heterozygous Dominant) था।

प्रश्न 6. एक ही जीन स्थल वाले समयुग्मजी मादा और विषमयुग्मजी नर के संकरण से प्राप्त प्रथम सन्तति पीढ़ी के फीनोटाइप वितरण का पुन्नेट वर्ग बनाकर प्रदर्शन करो।

उत्तर: एक ही जीन स्थल वाले समयुग्मजी मादा (जैसे शुद्ध बौना पौधा, tt) और विषमयुग्मजी नर (जैसे संकर लम्बा पौधा, Tt) के मध्य संकरण कराने पर प्राप्त प्रथम पुत्रीय सन्तति (F1) सदस्यों में 50% प्रभावी लक्षण वाले विषमयुग्मजी (Tt) और 50% अप्रभावी लक्षण वाले समयुग्मजी (tt) होते हैं।

पुन्नेट वर्ग:

मादा युग्मक →
नर युग्मक ↓
t t
T Tt (संकर लम्बा) Tt (संकर लम्बा)
t tt (शुद्ध बौना) tt (शुद्ध बौना)

फीनोटाइपिक अनुपात: लम्बा : बौना = 1 : 1
जीनोटाइपिक अनुपात: Tt : tt = 1 : 1

प्रश्न 7. पीले बीज वाले लम्बे पौधों (YyTt) का संकरण हरे बीज वाले लम्बे (yyTt) पौधे से करने पर निम्न में से किस प्रकार के फीनोटाइप सन्तति की आशा की जा सकती है-- (क) लम्बे हरे (ख) बौने हरे।

उत्तर: YyTt (पीला, लम्बा) तथा yyTt (हरा, लम्बा) पौधों के संकरण से प्राप्त फीनोटाइपिक अनुपात निम्नलिखित पुन्नेट वर्ग द्वारा ज्ञात किया जा सकता है:

युग्मक: YyTt → YT, Yt, yT, yt    |    yyTt → yT, yt

YT Yt yT yt
yT YyTT (पीला, लम्बा) YyTt (पीला, लम्बा) yyTT (हरा, लम्बा) yyTt (हरा, लम्बा)
yt YyTt (पीला, लम्बा) Yytt (पीला, बौना) yyTt (हरा, लम्बा) yytt (हरा, बौना)

फीनोटाइपिक अनुपात:
पीला लम्बा : पीला बौना : हरा लम्बा : हरा बौना = 6 : 2 : 6 : 2 या 3 : 1 : 3 : 1

अतः:

  1. (क) लम्बे हरे: अनुपात में 6 (या 3)
  2. (ख) बौने हरे: अनुपात में 2 (या 1)

प्रश्न 8. दो विषमयुग्मजी जनकों का क्रॉस A और B किया गया। मान लें दो स्थल (लोकस) सहलग्न हैं, तो द्विसंकर क्रॉस में F1 पीढ़ी के फीनोटाइप के लक्षणों का वितरण क्या होगा?

उत्तर: यदि दो जीन स्थल (A और B) सहलग्न (Linked) हैं, तो दो विषमयुग्मजी जनकों (AaBb) के मध्य क्रॉस कराने पर, F1 पीढ़ी में जीन के पूर्ण सहलग्नता के कारण केवल दो प्रकार के युग्मक (AB और ab) बनेंगे। इससे F2 पीढ़ी में फीनोटाइपिक अनुपात प्रभावी-प्रभावी : अप्रभावी-अप्रभावी = 3:1 होगा, न कि सामान्य द्विसंकर अनुपात 9:3:3:1।
उदाहरण: मटर में नीला फूल (B) लाल (b) पर प्रभावी है और लम्बा परागकण (L) गोल (l) पर प्रभावी है। यदि B और L सहलग्न हैं, तो F1 (BbLl) केवल BL और bl युग्मक बनाएगा, जिससे F2 में 3 (नीला, लम्बा) : 1 (लाल, गोल) का अनुपात प्राप्त होगा।

प्रश्न 9. आनुवंशिकी में टी० एच० मोर्गन के योगदान का संक्षेप में उल्लेख करें।

उत्तर: टी० एच० मोर्गन (T.H. Morgan) ने फ्रूट-फ्लाई (ड्रोसोफिला मेलानोगेस्टर) पर प्रयोग करके वंशागति के क्रोमोसोम सिद्धान्त (Chromosomal Theory of Inheritance) को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रमुख योगदान हैं:

  1. ड्रोसोफिला में सहलग्नता समूहों (Linkage Groups) की खोज की।
  2. सफेद आँख वाली मक्खी की खोज की, जो लिंग-सहलग्न वंशागति का एक क्लासिक उदाहरण बनी।
  3. ड्रोसोफिला पर अनेक एकसंकर व द्विसंकर परीक्षण किए।
  4. लिंग सहलग्न वंशागति की अवधारणा को विकसित किया।
  5. जीन मैपिंग (Gene Mapping) के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।
  6. आनुवंशिकी में क्रोमोसोम की भूमिका पर शोध के लिए सन्‌ 1933 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

प्रश्न 10. वंशावली विश्लेषण क्या है? यह विश्लेषण किस प्रकार उपयोगी है?

उत्तर: वंशावली विश्लेषण (Pedigree Analysis) वंश आरेख या वंशवृक्ष के रूप में कुछ आनुवंशिक विशेषकों (Traits) का दो या अधिक पीढ़ियों का अभिलेख है। इन अभिलेखों का अध्ययन ही वंशावली विश्लेषण है। इन लक्षणों का सम्बन्ध मानव रोगों से हो सकता है।

उपयोगिता/महत्त्व:

  1. चूँकि मनुष्य में नियन्त्रित संकरण सम्भव नहीं है, अतः आनुवंशिक विकारों का अध्ययन वंशावली विश्लेषण द्वारा ही किया जाता है।
  2. इससे किसी दम्पति को उनकी सन्तान में होने वाली सम्भावित आनुवंशिक असामान्यताओं के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
  3. यह लिंग-सहलग्न रोगों (जैसे हीमोफिलिया, वर्णान्धता) को समझने में सहायक है।
  4. मानव आनुवंशिकी में यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग विशेष लक्षण या असामान्यता (Abnormality) के वंशागति प्रारूप का पता लगाने में किया जाता है।

प्रश्न 11. मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर: मनुष्य में लिंग निर्धारण XY-विधि द्वारा होता है।

  • स्त्री के दोनों लैंगिक गुणसूत्र XX होते हैं। स्त्री समयुग्मकी (Homogametic) होती है क्योंकि वह केवल एक प्रकार (X) के अण्डाणु उत्पन्न करती है।
  • पुरुष के लैंगिक गुणसूत्र XY होते हैं। पुरुष विषमयुग्मकी (Heterogametic) होता है क्योंकि वह दो प्रकार के शुक्राणु (50% X तथा 50% Y वाले) उत्पन्न करता है।
  • निषेचन के समय:
    • यदि X-शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित करता है, तो युग्मनज XX होगा और पुत्री का जन्म होगा।
    • यदि Y-शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित करता है, तो युग्मनज XY होगा और पुत्र का जन्म होगा।
  • अतः सन्तान का लिंग पिता द्वारा निर्मित शुक्राणु के प्रकार पर निर्भर करता है और यह एक संयोग (Chance) की प्रक्रिया है।

प्रश्न 12. शिशु का रुधिर वर्ग O है। पिता का रुधिर वर्ग A और माता का B है। जनकों के जीनोटाइप मालूम करें और अन्य सन्तति में प्रत्याशित जीनोटाइपों की जानकारी प्राप्त करें।

उत्तर: रुधिर वर्ग की वंशागति बहुप्रभाविता (Multiple Allelism) का उदाहरण है।

  • शिशु का रुधिर वर्ग O है, अतः उसका जीनोटाइप केवल ii हो सकता है।
  • शिशु को एक i ऐलील पिता से और दूसरा i ऐलील माता से मिला है।
  • पिता का रुधिर वर्ग A है और माता का B है, लेकिन वे शिशु को i ऐलील दे सकें, इसके लिए उन्हें दोनों विषमयुग्मजी होना चाहिए।
  • अतः: पिता का जीनोटाइप = IAi (वर्ग A) और माता का जीनोटाइप = IBi (वर्ग B)।

संकरण: IAi (पिता) × IBi (माता)

माता युग्मक →
पिता युग्मक ↓
IB i
IA IAIB (रुधिर वर्ग AB) IAi (रुधिर वर्ग A)
i IBi (रुधिर वर्ग B) ii (रुधिर वर्ग O)

अतः इस दम्पति की अन्य सन्तति में निम्न रुधिर वर्गों की समान 25% प्रत्याशा है:

  1. रुधिर वर्ग A (IAi)
  2. रुधिर वर्ग B (IBi)
  3. रुधिर वर्ग AB (IAIB)
  4. रुधिर वर्ग O (ii)

प्रश्न 13. निम्न शब्दों को उदाहरण समेत समझाएँ-- (अ) सहप्रभाविता, (ब) अपूर्ण प्रभाविता।

उत्तर:

(अ) सहप्रभाविता (Co-dominance): वंशागति का वह प्रकार जिसमें विषमयुग्मजी (Heterozygous) अवस्था में दोनों ऐलील पूर्ण रूप से व समान रूप से अभिव्यक्त होते हैं, सहप्रभाविता कहलाता है।
उदाहरण: मनुष्य का AB रुधिर वर्ग। IA और IB ऐलील सहप्रभाव

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Other Chapters of Class 12 Biology
1. जीवों में जनन
2. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन
3. मानव जनन
4. जनन स्वास्थ्य
5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत
6. वंशागति के आण्विक आधार
7. विकास
8. मानव स्वास्थ्य तथा रोग
9. खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति
10. मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव
11. जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम
12. जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग
13. जीव और समष्टियाँ
14. पारितंत्र
15. जैव विविधता एवं संरक्षण
16. पर्यावरणीय मुद्दे
17. प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट कार्य
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