UP Board Class 12 Physics 2. स्थिर वैधुत विभव तथा धारिता is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
5 × 10⁻⁷ C और -3 × 10⁻⁷ C के दो आवेश 16 cm दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिंदु पर वैद्युत विभव शून्य होता है? अनंत पर विभव शून्य लीजिए।
हल:
माना आवेश q₁ = 5 × 10⁻⁷ C और q₂ = -3 × 10⁻⁷ C हैं।
उनके बीच की दूरी r = 16 cm = 0.16 m है।
माना आवेशों को मिलाने वाली रेखा पर बिंदु P है, जहाँ विभव शून्य है।
यदि q₁ से P की दूरी x है, तो q₂ से P की दूरी (0.16 - x) होगी।
P पर कुल विभव V = V₁ + V₂ = 0 होना चाहिए।
अतः,
\(\frac{1}{4\pi\epsilon_0} \left( \frac{q_1}{x} + \frac{q_2}{0.16 - x} \right) = 0\)
इससे हल करने पर x = 0.10 m = 10 cm प्राप्त होता है।
अतः आवेशों को मिलाने वाली रेखा पर, धनावेश से 10 cm दूर विभव शून्य है।
उत्तर: 10 cm (धनावेश की ओर)।
10 cm भुजा वाले एक समषट्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर 5 µC का आवेश है। षट्भुज के केंद्र पर विभव परिकलित कीजिए।
हल:
समषट्भुज के सभी शीर्ष केंद्र से समान दूरी पर होते हैं।
यहाँ, प्रत्येक शीर्ष पर आवेश q = 5 µC = 5 × 10⁻⁶ C है।
केंद्र से प्रत्येक शीर्ष की दूरी r = भुजा = 10 cm = 0.10 m है।
केंद्र पर कुल विभव छह आवेशों के कारण विभवों का योग होगा:
\(V = 6 \times \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r}\)
मान रखने पर,
\(V = 6 \times 9 \times 10^9 \times \frac{5 \times 10^{-6}}{0.10} = 2.7 \times 10^6 \, \text{V}\)
अतः केंद्र पर विभव 2.7 × 10⁶ V है।
उत्तर: 2.7 × 10⁶ V
6 cm की दूरी पर अवस्थित दो बिंदुओं A एवं B पर दो आवेश 2 µC तथा -2 µC रखे हैं।
(a) निकाय के समविभव पृष्ठ की पहचान कीजिए।
(b) इस पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा क्या है?
हल:
(a) दो बराबर एवं विपरीत आवेशों के निकाय का समविभव पृष्ठ, आवेशों को मिलाने वाली रेखा के लंबवत तल होता है जो रेखा के मध्य-बिंदु से गुजरता है। यहाँ, मध्य-बिंदु पर विभव शून्य है।
(b) विद्युत क्षेत्र सदैव धनावेश से ऋणावेश की ओर होता है। अतः समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र तल के लंबवत, धनावेश से ऋणावेश की ओर होगा।
उत्तर:
(a) आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य-बिंदु से गुजरने वाला लंबवत तल।
(b) तल के लंबवत, धनावेश से ऋणावेश की ओर।
12 cm त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक के पृष्ठ पर 1.6 × 10⁻⁷ C का आवेश एकसमान रूप से वितरित है:
(a) गोले के अंदर,
(b) गोले के ठीक बाहर,
(c) गोले के केंद्र से 18 cm पर अवस्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
हल:
गोलीय चालक के लिए:
(a) गोले के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
(b) गोले के ठीक बाहर विद्युत क्षेत्र:
\(E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2}\)
यहाँ q = 1.6 × 10⁻⁷ C, r = 12 cm = 0.12 m
\(E = 9 \times 10^9 \times \frac{1.6 \times 10^{-7}}{(0.12)^2} = 10^5 \, \text{N/C}\)
(c) गोले के केंद्र से 18 cm (0.18 m) पर विद्युत क्षेत्र:
\(E = 9 \times 10^9 \times \frac{1.6 \times 10^{-7}}{(0.18)^2} \approx 4.44 \times 10^4 \, \text{N/C}\)
उत्तर:
(a) शून्य
(b) 10⁵ N/C
(c) 4.44 × 10⁴ N/C
एक समांतर पट्टिका संधारित्र, जिसकी पट्टिकाओं के बीच वायु है, की धारिता 8 pF है। यदि पट्टिकाओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए और इनके बीच के स्थान में 6 परावैद्युतांक का एक पदार्थ भर दिया जाए, तो इसकी धारिता क्या होगी?
हल:
वायु के लिए धारिता \(C_0 = \frac{\epsilon_0 A}{d} = 8 \, \text{pF}\)
यदि दूरी आधी कर दी जाए (d' = d/2) और परावैद्युतांक K = 6 का पदार्थ भर दिया जाए, तो नई धारिता:
\(C = K \frac{\epsilon_0 A}{d'} = 6 \times \frac{\epsilon_0 A}{d/2} = 12 \times \frac{\epsilon_0 A}{d} = 12 \times C_0 = 12 \times 8 = 96 \, \text{pF}\)
उत्तर: 96 pF
9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है:
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 120 V के संभरण (सप्लाई) से जोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवांतर होगा?
हल:
(a) श्रेणीक्रम में तीन समान धारिताओं C₁ = C₂ = C₃ = 9 pF के लिए कुल धारिता:
\(\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} = \frac{3}{9 \times 10^{-12}}\)
\(C_s = 3 \, \text{pF}\)
(b) श्रेणीक्रम में प्रत्येक संधारित्र पर आवेश समान होता है।
कुल आवेश \(q = C_s \times V = 3 \times 10^{-12} \times 120 = 360 \times 10^{-12} \, \text{C}\)
प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर \(V_i = \frac{q}{C_i} = \frac{360 \times 10^{-12}}{9 \times 10^{-12}} = 40 \, \text{V}\)
उत्तर:
(a) 3 pF
(b) 40 V
2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 100 V के संभरण से जोड़ दें, तो प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।
हल:
(a) पार्श्वक्रम में कुल धारिता:
\(C_p = C_1 + C_2 + C_3 = 2 + 3 + 4 = 9 \, \text{pF}\)
(b) पार्श्वक्रम में प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर समान (100 V) होता है।
आवेश: \(q_1 = C_1 V = 2 \times 10^{-12} \times 100 = 2 \times 10^{-10} \, \text{C}\)
\(q_2 = C_2 V = 3 \times 10^{-12} \times 100 = 3 \times 10^{-10} \, \text{C}\)
\(q_3 = C_3 V = 4 \times 10^{-12} \times 100 = 4 \times 10^{-10} \, \text{C}\)
उत्तर:
(a) 9 pF
(b) 2 × 10⁻¹⁰ C, 3 × 10⁻¹⁰ C, 4 × 10⁻¹⁰ C
पट्टिकाओं के बीच वायु वाले एक समांतर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 6 × 10⁻³ m² तथा उनके बीच की दूरी 3 mm है। संधारित्र की धारिता को परिकलित कीजिए। यदि इस संधारित्र को 100 V के संभरण से जोड़ दिया जाए, तो संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर कितना आवेश होगा?
हल:
धारिता: \(C = \frac{\epsilon_0 A}{d}\)
यहाँ \(\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \, \text{C}^2/\text{N·m}^2\), A = 6 × 10⁻³ m², d = 3 × 10⁻³ m
\(C = \frac{8.854 \times 10^{-12} \times 6 \times 10^{-3}}{3 \times 10^{-3}} \approx 17.7 \times 10^{-12} \, \text{F} = 17.7 \, \text{pF}\)
आवेश: \(q = C V = 17.7 \times 10^{-12} \times 100 = 1.77 \times 10^{-9} \, \text{C} \approx 1.8 \times 10^{-9} \, \text{C}\)
उत्तर: धारिता ≈ 18 pF, आवेश ≈ 1.8 × 10⁻⁹ C
प्रश्न 2.8 में दिए गए संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच यदि 3 mm मोटी अभ्रक की एक शीट (परावैद्युतांक = 6) रख दी जाती है, तो स्पष्ट कीजिए कि क्या होगा, जब:
(a) विभव संभरण जुड़ा ही रहेगा।
(b) संभरण को हटा लिया जाएगा।
हल:
(a) यदि संभरण जुड़ा रहे, तो विभवांतर (V) स्थिर रहता है। परावैद्युत डालने पर धारिता बढ़कर \(C = K C_0 = 6 \times 18 = 108 \, \text{pF}\) हो जाती है। आवेश \(q = C V\) भी बढ़कर \(108 \times 10^{-12} \times 100 = 1.08 \times 10^{-8} \, \text{C}\) हो जाता है।
(b) यदि संभरण हटा लिया जाए, तो आवेश (q) स्थिर रहता है। परावैद्युत डालने पर धारिता बढ़कर 108 pF हो जाती है, इसलिए विभवांतर \(V = q/C\) घटकर लगभग 16.7 V हो जाता है।
उत्तर:
(a) धारिता और आवेश दोनों बढ़ जाते हैं।
(b) धारिता बढ़ती है, विभवांतर घटता है।
12 pF का एक संधारित्र 50 V की बैटरी से जुड़ा है। संधारित्र में कितनी स्थिरवैद्युत ऊर्जा संचित होगी?
हल:
संचित ऊर्जा: \(U = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{1}{2} \times 12 \times 10^{-12} \times (50)^2 = 1.5 \times 10^{-8} \, \text{J}\)
उत्तर: 1.5 × 10⁻⁸ J
200 V संभरण से एक 600 pF के संधारित्र को आवेशित किया जाता है। फिर इसको संभरण से वियोजित कर देते हैं तथा एक अन्य 600 pF के अनावेशित संधारित्र से जोड़ देते हैं। इस प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा का हास होता है?
हल:
प्रारंभिक ऊर्जा: \(U_i = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{1}{2} \times 600 \times 10^{-12} \times (200)^2 = 12 \times 10^{-6} \, \text{J}\)
जब दो समान संधारित्र समांतर क्रम में जुड़ते हैं, तो कुल धारिता दोगुनी हो जाती है और आवेश बराबर बंट जाता है। अंतिम विभव:
\(V_f = \frac{q}{2C} = \frac{CV}{2C} = \frac{V}{2} = 100 \, \text{V}\)
अंतिम ऊर्जा: \(U_f = \frac{1}{2} (2C) V_f^2 = \frac{1}{2} \times 1200 \times 10^{-12} \times (100)^2 = 6 \times 10^{-6} \, \text{J}\)
ऊर्जा हास: \(U_i - U_f = 6 \times 10^{-6} \, \text{J}\)
उत्तर: 6 × 10⁻⁶ J
मूल बिंदु पर एक 8 mC का आवेश अवस्थित है। -2 × 10⁻⁹ C के एक छोटे से आवेश को बिंदु P(0, 0, 3 cm) से, बिंदु R(0, 6 cm, 9 cm) से होकर, बिंदु Q(0, 4 cm, 0) तक ले जाने में किया गया कार्य परिकलित कीजिए।
हल:
स्थिरवैद्युत क्षेत्र में किया गया कार्य पथ से स्वतंत्र होता है।
प्रारंभिक दूरी \(r_i = 3 \, \text{cm} = 0.03 \, \text{m}\)
अंतिम दूरी \(r_f = 4 \, \text{cm} = 0.04 \, \text{m}\)
कार्य: \(W = q_0 (V_f - V_i) = q_0 \cdot \frac{1}{4\pi\epsilon_0} Q \left( \frac{1}{r_f} - \frac{1}{r_i} \right)\)
मान रखने पर:
\(W = (-2 \times 10^{-9}) \times 9 \times 10^9 \times 8 \times 10^{-3} \left( \frac{1}{0.04} - \frac{1}{0.03} \right)\)
गणना करने पर \(W \approx -1.2 \, \text{J}\) (ऋणात्मक चिह्न बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य को दर्शाता है)।
उत्तर: 1.2 J (बाह्य बल द्वारा किया गया कार्य)।
b भुजा वाले एक घन के प्रत्येक शीर्ष पर q आवेश है। इस आवेश विन्यास के कारण घन के केंद्र पर विद्युत-विभव तथा विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
हल:
घन के केंद्र से प्रत्येक शीर्ष की दूरी \(r = \frac{\sqrt{3}}{2} b\) होती है।
केंद्र पर विभव आठ आवेशों के कारण विभव का योग है:
\(V = 8 \times \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r} = \frac{8q}{4\pi\epsilon_0} \times \frac{2}{\sqrt{3} b} = \frac{4q}{\sqrt{3} \pi \epsilon_0 b}\)
सममिति के कारण केंद्र पर कुल विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
उत्तर: विभव \(= \frac{4q}{\sqrt{3} \pi \epsilon_0 b}\), विद्युत क्षेत्र = 0
1.5 µC और 2.5 µC आवेश वाले दो सूक्ष्म गोले 30 cm दूर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिंदु पर, और
(b) मध्य बिंदु से होकर जाने वाली रेखा के अभिलंब तल में मध्य बिंदु से 10 cm दूर स्थित किसी बिंदु पर विभव और विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
हल:
(a) मध्य बिंदु पर विभव:
\(V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \left( \frac{q_1}{r/2} + \frac{q_2}{r/2} \right) = \frac{9 \times 10^9 \times (1.5 + 2.5) \times 10^{-6}}{0.15} = 2.4 \times 10^5 \, \text{V}\)
विद्युत क्षेत्र दोनों आवेशों के क्षेत्रों के सदिश योग से प्राप्त होता है, जो 2.5 µC आवेश की ओर \(4.0 \times 10^5 \, \text{N/C}\) है।
(b) दिए गए बिंदु पर विभव और क्षेत्र की गणना सदिश योग द्वारा की जाती है, जो लगभग \(2.0 \times 10^5 \, \text{V}\) और \(6.6 \times 10^5 \, \text{N/C}\) प्राप्त होते हैं।
उत्तर:
(a) विभव = 2.4 × 10⁵ V, क्षेत्र = 4.0 × 10⁵ N/C (2.5 µC की ओर)
(b) विभव ≈ 2.0 × 10⁵ V, क्षेत्र ≈ 6.6 × 10⁵ N/C
आंतरिक त्रिज्या r₁ तथा बाह्य त्रिज्या r₂ वाले एक गोलीय चालक कोश (खोल) पर Q आवेश है।
(a) खोल के केंद्र पर एक आवेश q रखा जाता है। खोल के भीतरी और बाहरी पृष्ठों पर पृष्ठ आवेश घनत्व क्या है?
(b) क्या किसी कोटर (जो आवेश विहीन है) में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, चाहे खोल गोलीय न होकर किसी भी अनियमित आकार का हो? स्पष्ट कीजिए।
हल:
(a) केंद्र पर आवेश q के कारण, खोल के भीतरी पृष्ठ पर -q आवेश प्रेरित होता है और बाहरी पृष्ठ पर +q आवेश प्रेरित होता है। खोल पर पहले से Q आवेश है, जो बाहरी पृष्ठ पर रहता है। अतः भीतरी पृष्ठ पर आवेश घनत्व \(\sigma_i = -\frac{q}{4\pi r_1^2}\), बाहरी पृष्ठ पर \(\sigma_o = \frac{Q+q}{4\pi r_2^2}\)
(b) हाँ, चालक के भीतर कोटर में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, चाहे उसकी आकृति कुछ भी हो। यह गाउस के नियम से सिद्ध होता है।
उत्तर:
(a) भीतरी पृष्ठ: \(\sigma_i = -\frac{q}{4\pi r_1^2}\), बाहरी पृष्ठ: \(\sigma_o = \frac{Q+q}{4\pi r_2^2}\)
(b) हाँ, शून्य होता है।
(a) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिरवैद्युत क्षेत्र के अभिलंब घटक में असांतत्य होता है, जिसे \((E_2 - E_1) \cdot \hat{n} = \frac{\sigma}{\epsilon_0}\) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ \(\hat{n}\) पृष्ठ के अभिलंब एकांक सदिश है तथा σ उस बिंदु पर पृष्ठ आवेश घनत्व है।
अतः दर्शाइए कि चालक के ठीक बाहर विद्युत क्षेत्र \(\sigma \hat{n}/\epsilon_0\) है।
(b) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिरवैद्युत क्षेत्र का स्पर्शीय घटक संतत है।
हल:
(a) गाउस के नियम का उपयोग करते हुए, एक लघु बेलनाकार पृष्ठ लेने पर अभिलंब घटक में परिवर्तन \(\Delta E_\perp = \sigma/\epsilon_0\) प्राप्त होता है। चालक के भीतर क्षेत्र शून्य होता है, अतः बाहर क्षेत्र \(E = \sigma/\epsilon_0\) होता है।
(b) स्थिरवैद्युत क्षेत्र संरक्षी होता है, अतः किसी बंद लूप पर रेखा समाकलन शून्य होता है। इससे स्पर्शीय घटक के संतत होने का पता चलता है।
उत्तर: उपरोक्त व्युत्पत्ति द्वारा सिद्ध।
रैखिक आवेश घनत्व λ वाला एक लंबा आवेशित बेलन एक खोखले समाक्षीय चालक बेलन द्वारा घिरा है। दोनों बेलनों के बीच के स्थान में विद्युत क्षेत्र कितना है?
हल:
गाउस के नियम से, त्रिज्या r पर विद्युत क्षेत्र:
\(E = \frac{\lambda}{2\pi\epsilon_0 r}\)
यह क्षेत्र त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर (यदि λ धनात्मक है) होता है।
उत्तर: \(E = \frac{\lambda}{2\pi\epsilon_0 r}\)
एक हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन लगभग 0.53 Å दूरी पर परिबद्ध हैं:
(a) निकाय की स्थितिज ऊर्जा का eV में परिकलन कीजिए, जबकि प्रोटॉन से इलेक्ट्रॉन के मध्य की अनंत दूरी पर स्थितिज ऊर्जा को शून्य माना गया है।
(b) इलेक्ट्रॉन को स्वतंत्र करने में कितना न्यूनतम कार्य करना पड़ेगा, यदि यह दिया गया है कि इसकी कक्षा में गतिज ऊर्जा (a) में प्राप्त स्थितिज ऊर्जा के परिमाण की आधी है?
(c) यदि स्थितिज ऊर्जा को 1.06 Å पृथक्करण पर शून्य ले लिया जाए, तो उपर्युक्त (a) और (b) के उत्तर क्या होंगे?
हल:
(a) स्थितिज ऊर्जा: \(U = -\frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{e^2}{r}\)
\(r = 0.53 \times 10^{-10} \, \text{m}\)
\(U = -\frac{9 \times 10^9 \times (1.6 \times 10^{-19})^2}{0.53 \times 10^{-10}} \approx -4.35 \times 10^{-18} \, \text{J} = -27.2 \, \text{eV}\)
(b) गतिज ऊर्जा \(K = |U|/2 = 13.6 \, \text{eV}\)
इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए आवश्यक न्यूनतम कार्य = कुल ऊर्जा का परिमाण = 13.6 eV
(c) यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य बदल दिया जाए, तो निरपेक्ष मान नहीं बदलते, केवल संदर्भ बिंदु बदलता है। अतः उत्तर वही रहेंगे।
उत्तर:
(a) -27.2 eV
(b) 13.6 eV
(c) उत्तर वही र
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