UP Board Class 12 Physics 9. किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
2.5 सेमी साइज़ की कोई छोटी मोमबत्ती 36 सेमी वक्रता त्रिज्या के किसी अवतल दर्पण से 27 सेमी दूरी पर रखी है। दर्पण से किसी परदे को कितनी दूरी पर रखा जाए कि उसका सुस्पष्ट प्रतिबिम्ब परदे पर बने? प्रतिबिम्ब की प्रकृति और साइज़ का वर्णन कीजिए। यदि मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जाएँ, तो परदे को किस ओर हटाना पड़ेगा?
हल: दिया है,
वस्तु का आकार, O = 2.5 सेमी
वक्रता त्रिज्या, R = 36 सेमी
अतः फोकस दूरी, f = R/2 = -18 सेमी (अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक)
वस्तु दूरी, u = -27 सेमी
दर्पण सूत्र से:
1/v + 1/u = 1/f
1/v = 1/f - 1/u
1/v = 1/(-18) - 1/(-27)
1/v = -1/18 + 1/27 = (-3+2)/54 = -1/54
v = -54 सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने दर्पण से 54 सेमी की दूरी पर बनेगा। अतः पर्दा दर्पण के सामने 54 सेमी की दूरी पर रखना होगा।
प्रतिबिम्ब का आकार, I = -(v/u) × O = -(-54)/(-27) × 2.5 = -5 सेमी
अतः प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा तथा 5 सेमी ऊँचा है।
यदि मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जायें, तो पर्दे को दर्पण से दूर ले जाना होगा। यदि मोमबत्ती को 18 सेमी से कम दूरी तक खिसकायें, तो प्रतिबिम्ब आभासी बनेगा तथा पर्दे पर प्राप्त नहीं होगा।
4.5 सेमी साइज़ की कोई सुई 15 सेमी फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से 12 सेमी दूर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा आवर्धन लिखिए। क्या होता है जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं?
हल: यहाँ सुई का आकार O = 4.5 सेमी; उत्तल दर्पण की फोकस दूरी f = +15 सेमी। दर्पण से वस्तु (सुई) की दूरी u = -12 सेमी
दर्पण के सूत्र से:
1/v + 1/u = 1/f
1/v = 1/f - 1/u = 1/15 - 1/(-12) = 1/15 + 1/12 = (4+5)/60 = 9/60 = 3/20
v = +20/3 सेमी ≈ 6.67 सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे दर्पण से 6.67 सेमी दूरी पर बनेगा।
दर्पण का आवर्धन m = -v/u = -(20/3)/(-12) = 20/36 = 5/9 ≈ 0.556
प्रतिबिम्ब का आकार I = m × O = (5/9) × 4.5 = 2.5 सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब सीधा (आभासी) तथा 2.5 सेमी लम्बा (ऊँचा) बनेगा।
जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं तो इसका प्रतिबिम्ब दर्पण से दूर फोकस की ओर खिसकेगा तथा इसका आकार घटता जायेगा।
कोई टैंक 12.5 सेमी ऊँचाई तक जल से भरा है। किसी सूक्ष्मदर्शी द्वारा बीकर की तली पर पड़ी किसी सुई की आभासी गहराई 9.4 सेमी मापी जाती है। जल का अपवर्तनांक क्या है? बीकर में उसी ऊँचाई तक जल के स्थान पर किसी 1.63 अपवर्तनांक के अन्य द्रव से प्रतिस्थापन करने पर सुई को पुनः फोकसित करने के लिए सूक्ष्मदर्शी को कितना ऊपर/नीचे ले जाना होगा?
हल: सुई की वास्तविक गहराई h = 12.5 सेमी
आभासी गहराई h' = 9.4 सेमी
जल का अपवर्तनांक n = वास्तविक गहराई / आभासी गहराई = h / h' = 12.5 / 9.4 ≈ 1.33
दूसरे द्रव के लिए अपवर्तनांक n₂ = 1.63
आभासी गहराई h₂' = h / n₂ = 12.5 / 1.63 ≈ 7.67 सेमी
पहले सूक्ष्मदर्शी 9.4 सेमी पर फोकस था अतः इसका नीचे की ओर विस्थापन = (9.4 - 7.67) सेमी = 1.73 सेमी ≈ 1.7 सेमी
चित्र 9.1 (a) तथा (b) में किसी आपतित किरण का अपवर्तन दर्शाया गया है जो वायु में क्रमश: काँच-वायु तथा जल-वायु अन्तरापृष्ठ के अभिलम्ब से 60° का कोण बनाती है। उस आपतित किरण का अपवर्तन कोण ज्ञात कीजिए, जो जल में जल-काँच अन्तरापृष्ठ के अभिलम्ब से 45° का कोण बनाती है [चित्र 9.1(c)]।
हल: स्नेल के नियम n₁ sin i = n₂ sin r का प्रयोग करते हुए,
चित्र 9.1 (a) से, n_काँच / n_वायु = sin 60° / sin 35° ≈ 0.8660 / 0.5736 ≈ 1.51
चित्र 9.1 (b) से, n_जल / n_वायु = sin 60° / sin 41° ≈ 0.8660 / 0.6561 ≈ 1.32
अतः n_काँच / n_जल = 1.51 / 1.32 ≈ 1.144
चित्र 9.1 (c) के लिए, जल से काँच में अपवर्तन:
n_जल sin 45° = n_काँच sin r
sin r = (n_जल / n_काँच) × sin 45° = (1/1.144) × 0.7071 ≈ 0.6181
r = sin⁻¹(0.6181) ≈ 38°
जल से भरे 80 सेमी गहराई के किसी टैंक की तली पर कोई छोटा बल्ब रखा गया है। जल के पृष्ठ का वह क्षेत्र ज्ञात कीजिए जिससे बल्ब का प्रकाश निर्गत हो सकता है। जल का अपवर्तनांक 1.33 है। (बल्ब को बिन्दु प्रकाश स्रोत मानिए)
हल: टैंक की तली में रखे बल्ब से निकलने वाली प्रकाश किरणें जल के पृष्ठ से तभी निर्गत होंगी, जबकि आपतन कोण जल-वायु अन्तरापृष्ठ के लिए क्रान्तिक कोण C से कम अथवा उसके बराबर हो।
sin C = 1 / n = 1 / 1.33 ≈ 0.7519
C ≈ 48.75°
tan C = sin C / √(1 - sin²C) = 0.7519 / √(1 - 0.5655) = 0.7519 / 0.659 ≈ 1.141
माना पृष्ठ के उस क्षेत्र की त्रिज्या r है जिससे बल्ब का प्रकाश निकल रहा है, तथा बल्ब की जल के तल से गहराई h = 80 सेमी है।
tan C = r / h
r = h × tan C = 80 × 1.141 ≈ 91.28 सेमी ≈ 0.9128 मी
क्षेत्रफल A = πr² ≈ 3.14 × (0.9128)² ≈ 2.62 मी² ≈ 2.6 मी²
कोई प्रिज्म अज्ञात अपवर्तनांक के काँच का बना है। कोई समान्तर प्रकाश-पुंज इस प्रिज्म के किसी फलक पर आपतित होता है। प्रिज्म का न्यूनतम विचलन कोण 40° मापा गया। प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक क्या है? प्रिज्म का अपवर्तन कोण 60° है। यदि प्रिज्म को जल (अपवर्तनांक 1.33) में रख दिया जाए तो प्रकाश के समान्तर पुंज के लिए नए न्यूनतम विचलन कोण का परिकलन कीजिए।
हल: दिया है, प्रिज्म के लिए A = 60°, वायु में δm = 40°
वायु के सापेक्ष प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक:
n = sin[(A + δm)/2] / sin(A/2) = sin(50°) / sin(30°) = 0.7660 / 0.5 = 1.532
वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक n_w = 1.33
अतः जल के सापेक्ष प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक n' = n / n_w = 1.532 / 1.33 ≈ 1.152
यदि जल में डुबाने पर न्यूनतम विचलन कोण δm' है तो:
n' = sin[(A + δm')/2] / sin(A/2)
1.152 = sin[(60° + δm')/2] / sin 30°
sin[(60° + δm')/2] = 1.152 × 0.5 = 0.576
(60° + δm')/2 = sin⁻¹(0.576) ≈ 35.2°
60° + δm' = 70.4°
δm' = 10.4° ≈ 10°
अपवर्तनांक 1.55 के काँच से दोनों फलकों की समान वक्रता त्रिज्या के उभयोत्तल लेन्स निर्मित करने हैं। यदि 20 सेमी फोकस दूरी के लेन्स निर्मित करने हैं तो अपेक्षित वक्रता त्रिज्या क्या होगी?
हल: दिया है, n = 1.55, f = +20 सेमी
माना अभीष्ट वक्रता त्रिज्या R है।
तब उत्तल लेन्स हेतु R₁ = +R, R₂ = -R
लेन्स निर्माता सूत्र से:
1/f = (n - 1)(1/R₁ - 1/R₂)
1/20 = (1.55 - 1)(1/R - 1/(-R)) = 0.55 × (2/R)
1/20 = 1.1 / R
R = 1.1 × 20 = 22 सेमी
अतः प्रत्येक पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या 22 सेमी होनी चाहिए।
कोई प्रकाश-पुंज किसी बिन्दु P पर अभिसरित होता है। कोई लेन्स इस अभिसारी पुंज के पथ में बिन्दु P से 12 सेमी दूर रखा जाता है। यदि यह (a) 20 सेमी फोकस दूरी का उत्तल लेन्स है, (b) 16 सेमी फोकस दूरी का अवतल लेन्स है तो प्रकाश-पुंज किस बिन्दु पर अभिसरित होगा?
हल: (a) उत्तल लेन्स के लिए f = +20 सेमी, u = +12 सेमी (आभासी वस्तु)
1/v - 1/u = 1/f
1/v = 1/f + 1/u = 1/20 + 1/12 = (3+5)/60 = 8/60 = 2/15
v = +7.5 सेमी
अतः प्रकाश पुंज लेन्स के पीछे (दाहिनी ओर) लेन्स से 7.5 सेमी दूरी पर अभिसरित होगा।
(b) अवतल लेन्स के लिए f = -16 सेमी, u = +12 सेमी
1/v - 1/u = 1/f
1/v = 1/f + 1/u = -1/16 + 1/12 = (-3+4)/48 = 1/48
v = +48 सेमी
अतः प्रकाश पुंज लेन्स के दाहिनी ओर लेन्स से 48 सेमी दूरी पर अभिसरित होगा।
3.0 सेमी ऊँची कोई बिम्ब 21 सेमी फोकस दूरी के अवतल लेन्स के सामने 14 सेमी दूरी पर रखी है। लेन्स द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब का वर्णन कीजिए। क्या होता है जब बिम्ब लेन्स से दूर हटती जाती है?
हल: दिया है, u = -14 सेमी, f = -21 सेमी, h = 3.0 सेमी
लेन्स के सूत्र से: 1/v - 1/u = 1/f
1/v = 1/f + 1/u = -1/21 - 1/14 = (-2-3)/42 = -5/42
v = -42/5 = -8.4 सेमी
आवर्धन m = v/u = (-8.4)/(-14) = 0.6
प्रतिबिम्ब का आकार h' = m × h = 0.6 × 3.0 = 1.8 सेमी
अतः प्रतिबिम्ब 1.8 सेमी लम्बा, आभासी तथा सीधा होगा, जो लेन्स के बायीं ओर उससे 8.4 सेमी की दूरी पर बनेगा।
जैसे-जैसे बिम्ब लेन्स से दूर हटती है (u → ∞), वैसे-वैसे प्रतिबिम्ब फोकस के समीप खिसकता जाता है (v → f)।
किसी 30 सेमी फोकस दूरी के उत्तल लेन्स के सम्पर्क में रखे 20 सेमी फोकस दूरी के अवतल लेन्स के संयोजन से बने संयुक्त लेन्स (निकाय) की फोकस दूरी क्या है? यह तन्त्र अभिसारी लेन्स है अथवा अपसारी?
हल: दिया है, f₁ = +30 सेमी, f₂ = -20 सेमी
संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी F के लिए:
1/F = 1/f₁ + 1/f₂ = 1/30 - 1/20 = (2-3)/60 = -1/60
F = -60 सेमी
ऋणात्मक फोकस दूरी दर्शाती है कि निकाय अपसारी है।
किसी संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में 2.0 सेमी फोकस दूरी का अभिदृश्यक लेन्स तथा 6.25 सेमी फोकस दूरी का नेत्रिका लेन्स एक-दूसरे से 15 सेमी दूरी पर लगे हैं। किसी बिम्ब को अभिदृश्यक से कितनी दूरी पर रखा जाए कि अन्तिम प्रतिबिम्ब (a) स्पष्ट दृष्टि की अल्पतम दूरी (25 सेमी), तथा (b) अनन्त पर बने? दोनों स्थितियों में सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल: दिया है, f₀ = 2.0 सेमी, fₑ = 6.25 सेमी, L = 15 सेमी, D = 25 सेमी
(a) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब निकट बिन्दु पर है (vₑ = -25 सेमी):
नेत्रिका के लिए: 1/vₑ - 1/uₑ = 1/fₑ
1/uₑ = 1/vₑ - 1/fₑ = -1/25 - 1/6.25 = -1/25 - 4/25 = -5/25 = -1/5
uₑ = -5 सेमी
अब, L = v₀ + |uₑ|
15 = v₀ + 5 ⇒ v₀ = 10 सेमी
अभिदृश्यक के लिए: 1/v₀ - 1/u₀ = 1/f₀
1/u₀ = 1/v₀ - 1/f₀ = 1/10 - 1/2 = (1-5)/10 = -4/10 = -2/5
u₀ = -2.5 सेमी
आवर्धन क्षमता M = -(v₀/u₀)(1 + D/fₑ) = -(10/2.5)(1 + 25/6.25) = -4 × (1 + 4) = -20
(b) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्त पर है (vₑ = ∞):
नेत्रिका के लिए: 1/∞ - 1/uₑ = 1/fₑ ⇒ uₑ = -fₑ = -6.25 सेमी
L = v₀ + |uₑ| ⇒ 15 = v₀ + 6.25 ⇒ v₀ = 8.75 सेमी
अभिदृश्यक के लिए: 1/v₀ - 1/u₀ = 1/f₀
1/u₀ = 1/v₀ - 1/f₀ = 1/8.75 - 1/2 = (2 - 8.75)/(17.5) ≈ -6.75/17.5 ≈ -0.3857
u₀ ≈ -2.59 सेमी
आवर्धन क्षमता M = -(v₀/u₀)(D/fₑ) = -(8.75/2.59)(25/6.25) ≈ -3.38 × 4 ≈ -13.52
25 सेमी के सामान्य निकट बिन्दु का कोई व्यक्ति ऐसे संयुक्त सूक्ष्मदर्शी जिसका अभिदृश्यक 8.0 मिमी फोकस दूरी तथा नेत्रिका 2.5 सेमी फोकस दूरी की है, का उपयोग करके अभिदृश्यक से 9.0 मिमी दूरी पर रखे बिम्ब को सुस्पष्ट फोकसित कर लेता है। दोनों लेन्सों के बीच पृथक्कन दूरी क्या है? सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता क्या है?
हल: यहाँ f₀ = 8 मिमी = 0.8 सेमी, fₑ = 2.5 सेमी, u₀ = -9 मिमी = -0.9 सेमी, D = 25 सेमी
अभिदृश्यक के लिए: 1/v₀ - 1/u₀ = 1/f₀
1/v₀ = 1/f₀ + 1/u₀ = 1/0.8 - 1/0.9 = 1.25 - 1.111 ≈ 0.139
v₀ ≈ 7.2 सेमी
नेत्रिका के लिए जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की दूरी पर बन रहा हो (vₑ = -25 सेमी):
1/vₑ - 1/uₑ = 1/fₑ
1/uₑ = 1/vₑ - 1/fₑ = -1/25 - 1/2.5 = -0.04 - 0.4 = -0.44
uₑ ≈ -2.27 सेमी
दोनों लेन्सों के बीच पृथक्कन दूरी L = |v₀| + |uₑ| = 7.2 सेमी + 2.27 सेमी = 9.47 सेमी
आवर्धन क्षमता M = -(v₀/u₀)(1 + D/fₑ) = -(7.2/0.9)(1 + 25/2.5) = -8 × (1 + 10) = -88
किसी छोटी दूरबीन के अभिदृश्यक की फोकस दूरी 144 सेमी तथा नेत्रिका की फोकस दूरी 6.0 सेमी है। दूरबीन की आवर्धन क्षमता कितनी है? अभिदृश्यक तथा नेत्रिका के बीच पृथक्कन दूरी क्या है?
हल: दिया है, f₀ = 144 सेमी, fₑ = 6.0 सेमी
दूरबीन की आवर्धन क्षमता M = -f₀/fₑ = -144/6 = -24
ऋणात्मक चिह्न यह प्रकट करता है कि अन्तिम प्रतिबिम्ब उल्टा है।
अभिदृश्यक तथा नेत्रिका के बीच दूरी d = f₀ + fₑ = 144 + 6.0 = 150 सेमी
(a) किसी वेधशाला की विशाल दूरबीन के अभिदृश्यक की फोकस दूरी 15 मी है। यदि 1.0 सेमी फोकस दूरी की नेत्रिका प्रयुक्त की गयी है तो दूरबीन का कोणीय आवर्धन क्या है?
(b) यदि इस दूरबीन का उपयोग चन्द्रमा का अवलोकन करने में किया जाए तो अभिदृश्यक लेन्स द्वारा निर्मित चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब का व्यास क्या है? चन्द्रमा का व्यास 3.48 × 10⁶ मी तथा चन्द्रमा की कक्षा की त्रिज्या 3.8 × 10⁸ मी है।
हल: (a) f₀ = 15 मी = 1500 सेमी, fₑ = 1.0 सेमी
कोणीय आवर्धन M = -f₀/fₑ = -1500/1 = -1500
(b) चन्द्रमा का व्यास = 3.48 × 10⁶ मी, दूरी = 3.8 × 10⁸ मी
चन्द्रमा द्वारा बना कोण α = व्यास / दूरी = (3.48 × 10⁶) / (3.8 × 10⁸) ≈ 9.16 × 10⁻³ रेडियन
अभिदृश्यक द्वारा बने प्रतिबिम्ब का व्यास d = f₀ × α = 15 × 9.16 × 10⁻³ ≈ 0.1374 मी ≈ 13.74 सेमी
दर्पण-सूत्र का उपयोग यह व्युत्पन्न करने के लिए कीजिए कि
(a) किसी अवतल दर्पण के f तथा 2f के बीच रखे बिम्ब का वास्तविक प्रतिबिम्ब 2f से दूर बनता है।
(b) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आभासी प्रतिबिम्ब बनता है जो बिम्ब की स्थिति पर निर्भर नहीं करता।
(c) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आकार में छोटा प्रतिबिम्ब, दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच बनता है।
(d) अवतल दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच रखे बिम्ब का आभासी तथा बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है।
हल: दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f तथा आवर्धन m = -v/u
(a) अवतल दर्पण के लिए f ऋणात्मक, u ऋणात्मक। f < u < 2f के लिए गणना से v का मान ऋणात्मक आता है अर्थात प्रतिबिम्ब वास्तविक है तथा |v| > 2|f| होता है।
(b) उत्तल दर्पण के लिए f धनात्मक, u ऋणात्मक। सूत्र से v सदैव धनात्मक आता है अर्थात प्रतिबिम्ब आभासी है तथा यह बिम्ब की स्थिति पर निर्भर नहीं करता।
(c) उत्तल दर्पण के लिए m = -v/u सदैव धनात्मक तथा 1 से कम होता है, अतः प्रतिबिम्ब सीधा तथा छोटा बनता है। गणना से v सदैव f से कम होता है, अतः प्रतिबिम्ब ध्रुव व फोकस के बीच बनता है।
(d) अवतल दर्पण के लिए यदि u, f से कम है (अर्थात ध्रुव व फोकस के बीच), तो v धनात्मक आता है तथा m > 1 होता है, अतः प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बड़ा बनता है।
किसी मेज के ऊपरी पृष्ठ पर जड़ी एक छोटी पिन को 80 सेमी ऊँचाई से देखा जाता है। 15 सेमी मोटे आयताकार काँच के गुटके को मेज के पृष्ठ के समान्तर पिन व नेत्र के बीच रखकर उसी बिन्दु से देखने पर पिन नेत्र से कितनी दूर दिखाई देगी? काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। क्या उत्तर गुटके की अवस्थिति पर निर्भर करता है?
हल: काँच का अपवर्तनांक n = वास्तविक मोटाई / आभासी मोटाई
आभासी
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