UP Board Class 12 Physics 8. वैधुत चुंबकीय तरंग is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
चित्र में एक संधारित्र दर्शाया गया है जो 12 सेमी त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों को 5.0 सेमी की दूरी पर रखकर बनाया गया है। संधारित्र को एक बाह्य स्रोत द्वारा आवेशित किया जा रहा है। आवेशकारी धारा नियत है और इसका मान 0.15 A है।
(a) प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर का परिकलन कीजिए।
(b) प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।
(c) क्या किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है? स्पष्ट कीजिए।
प्लेट की त्रिज्या, r = 12 सेमी = 12 × 10⁻² m
प्लेटों के बीच की दूरी, d = 5.0 सेमी = 5.0 × 10⁻² m
धारा, I = 0.15 A
(a) संधारित्र की धारिता, C = ε₀A / d
जहाँ A प्लेटों का क्षेत्रफल = πr²
C = (8.854 × 10⁻¹² × 3.14 × (12 × 10⁻²)²) / (5 × 10⁻²)
C ≈ 8.01 × 10⁻¹² F = 8.01 pF
संधारित्र पर आवेश q = CV
अतः, I = dq/dt = C (dV/dt)
इसलिए, dV/dt = I / C = 0.15 / (8.01 × 10⁻¹²) ≈ 1.87 × 10¹⁰ V/s
अतः विभव परिवर्तन की दर 1.87 × 10¹⁰ V/s है।
(b) विस्थापन धारा, Id = चालन धारा I के बराबर होती है।
अतः Id = 0.15 A
(c) हाँ, किरचॉफ का प्रथम नियम लागू होता है क्योंकि संधारित्र के लिए संयुक्त धारा (चालन धारा + विस्थापन धारा) नियत रहती है।
एक समान्तर प्लेट संधारित्र 6.0 सेमी त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों से बना है और इसकी धारिता 100 pF है। संधारित्र को 230 V, 300 rad/s की कोणीय आवृत्ति के किसी स्रोत से जोड़ा गया है।
(a) चालन धारा का rms मान क्या है?
(b) क्या चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर है?
(c) प्लेटों के बीच, अक्ष से 3.0 सेमी की दूरी पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र B का आयाम ज्ञात कीजिए।
प्लेटों की त्रिज्या, R = 6 सेमी = 6 × 10⁻² m
धारिता, C = 100 pF = 100 × 10⁻¹² F = 10⁻¹⁰ F
वोल्टेज, V = 230 V
कोणीय आवृत्ति, ω = 300 rad/s
(a) धारा का rms मान, Irms = Vrms × ωC
Irms = 230 × 300 × 10⁻¹⁰ = 6.9 × 10⁻⁶ A = 6.9 µA
अतः चालन धारा का rms मान 6.9 µA है।
(b) हाँ, विस्थापन धारा चालन धारा के बराबर होती है।
(c) प्लेटों के बीच अक्ष से दूरी r = 3 सेमी = 3 × 10⁻² m
चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम, B = (µ₀ Imax r) / (2πR²)
Imax = √2 × Irms = √2 × 6.9 × 10⁻⁶ A
B = (4π × 10⁻⁷ × 3 × 10⁻² × √2 × 6.9 × 10⁻⁶) / (2π × (6 × 10⁻²)²)
B ≈ 1.63 × 10⁻¹¹ T
अतः चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम 1.63 × 10⁻¹¹ T है।
10⁻¹⁰ m तरंगदैर्ध्य की X-किरणों, 6800 Å तरंगदैर्ध्य के प्रकाश, तथा 500 m की रेडियो तरंगों के लिए किस भौतिक राशि का मान समान है?
सभी तरंगें वैद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं। सभी वैद्युत चुम्बकीय तरंगें निर्वात में प्रकाश की चाल c = 3 × 10⁸ m/s से गति करती हैं।
अतः तीनों की चाल समान है।
एक समतल वैद्युत चुम्बकीय तरंग निर्वात में Z-अक्ष के अनुदिश चल रही है। इसके विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के सदिश की दिशा के बारे में आप क्या कहेंगे? यदि तरंग की आवृत्ति 30 MHz हो तो उसकी तरंगदैर्ध्य कितनी होगी?
वैद्युत चुम्बकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र E और चुम्बकीय क्षेत्र B एक-दूसरे के लम्बवत् होते हैं तथा दोनों तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं। चूँकि तरंग Z-अक्ष के अनुदिश गतिमान है, अतः E और B, X-Y तल में होंगे तथा परस्पर लम्बवत होंगे।
आवृत्ति, f = 30 MHz = 30 × 10⁶ Hz
चाल, c = 3 × 10⁸ m/s
तरंगदैर्ध्य, λ = c / f = (3 × 10⁸) / (30 × 10⁶) = 10 m
अतः तरंगदैर्ध्य 10 m है।
एक रेडियो 7.5 MHz से 12 MHz बैंड के किसी स्टेशन से समस्वरित हो सकता है। संगत तरंगदैर्ध्य बैंड क्या होगा?
निम्न आवृत्ति, f₁ = 7.5 MHz = 7.5 × 10⁶ Hz
उच्च आवृत्ति, f₂ = 12 MHz = 12 × 10⁶ Hz
चाल, c = 3 × 10⁸ m/s
λ₁ = c / f₁ = (3 × 10⁸) / (7.5 × 10⁶) = 40 m
λ₂ = c / f₂ = (3 × 10⁸) / (12 × 10⁶) = 25 m
अतः संगत तरंगदैर्ध्य बैंड 25 m से 40 m तक है।
एक आवेशित कण अपनी माध्य साम्यावस्था के दोनों ओर 10⁹ Hz आवृत्ति से दोलन करता है। दोलक द्वारा जनित वैद्युत चुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति कितनी है?
दोलक द्वारा उत्पन्न वैद्युत चुम्बकीय तरंग की आवृत्ति, आवेशित कण के दोलन की आवृत्ति के बराबर होती है।
अतः आवृत्ति = 10⁹ Hz है।
निर्वात में एक आवर्त वैद्युत चुम्बकीय तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र वाले भाग का आयाम B₀ = 510 nT है। तरंग के वैद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम क्या है?
B₀ = 510 nT = 510 × 10⁻⁹ T
c = 3 × 10⁸ m/s
संबंध E₀ = c B₀ का उपयोग करने पर:
E₀ = (3 × 10⁸) × (510 × 10⁻⁹) = 153 N/C
अतः वैद्युत क्षेत्र का आयाम 153 N/C है।
कल्पना कीजिए कि एक वैद्युत चुम्बकीय तरंग के विद्युत क्षेत्र का आयाम E₀ = 120 N/C है तथा इसकी आवृत्ति ν = 50 MHz है।
(a) B₀, ω, k तथा λ ज्ञात कीजिए।
(b) E तथा B के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
E₀ = 120 N/C, ν = 50 MHz = 50 × 10⁶ Hz
(a) c = 3 × 10⁸ m/s
B₀ = E₀ / c = 120 / (3 × 10⁸) = 4 × 10⁻⁷ T = 400 nT
ω = 2πν = 2 × 3.14 × 50 × 10⁶ ≈ 3.14 × 10⁸ rad/s
k = ω / c = (3.14 × 10⁸) / (3 × 10⁸) ≈ 1.05 rad/m
λ = c / ν = (3 × 10⁸) / (50 × 10⁶) = 6 m
(b) मानक रूप में:
E = E₀ sin(kx - ωt) = 120 sin(1.05x - 3.14 × 10⁸ t) N/C
B = B₀ sin(kx - ωt) = 4 × 10⁻⁷ sin(1.05x - 3.14 × 10⁸ t) T
वैद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों के लिए फोटॉन की ऊर्जा eV में ज्ञात कीजिए तथा बताइए कि ये वैद्युत चुम्बकीय विकिरण के स्रोतों से किस प्रकार सम्बन्धित हैं?
फोटॉन ऊर्जा E = hν, जहाँ h = 6.6 × 10⁻³⁴ Js
| विकिरण का प्रकार | आवृत्ति (Hz) का परास | फोटॉन ऊर्जा (eV) का परास | स्रोत |
|---|---|---|---|
| गामा किरणें | ~10²⁰ | ~10⁵ | नाभिकीय संक्रमण |
| X-किरणें | ~10¹⁸ | ~10⁴ | उच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉन संक्रमण |
| पराबैंगनी | ~10¹⁵ | ~10 | परमाण्विक उत्तेजन |
| दृश्य प्रकाश | ~10¹⁴ | ~1-3 | वाह्य इलेक्ट्रॉन संक्रमण |
| अवरक्त | ~10¹³ | ~10⁻² | आण्विक कंपन |
| सूक्ष्म तरंगें | ~10¹⁰ | ~10⁻⁵ | दोलित धारा |
| रेडियो तरंगें | ~10⁸ | ~10⁻⁷ | दोलित धारा |
एक समतल वैद्युत चुम्बकीय तरंग निर्वात में 2.0 × 10¹⁰ Hz आवृत्ति तथा 48 V/m आयाम से ज्यावक्रीय रूप से दोलन करता है।
(a) तरंग की तरंगदैर्ध्य क्या है?
(b) दोलनकारी चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम क्या है?
(c) सिद्ध कीजिए कि वैद्युत क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व, चुम्बकीय क्षेत्र के औसत ऊर्जा घनत्व के बराबर होता है।
ν = 2.0 × 10¹⁰ Hz, E₀ = 48 V/m, c = 3 × 10⁸ m/s
(a) λ = c / ν = (3 × 10⁸) / (2 × 10¹⁰) = 1.5 × 10⁻² m = 1.5 cm
(b) B₀ = E₀ / c = 48 / (3 × 10⁸) = 1.6 × 10⁻⁷ T
(c) वैद्युत क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व, uE = (1/2) ε₀ E²rms
चुम्बकीय क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व, uB = (1/2) (B²rms / μ₀)
Erms = E₀/√2, Brms = B₀/√2
तथा E₀ = c B₀ एवं c = 1/√(μ₀ε₀) संबंधों का उपयोग करने पर,
uE = uB सिद्ध होता है।
कल्पना कीजिए कि निर्वात में एक वैद्युत चुम्बकीय तरंग का विद्युत क्षेत्र
E = { (3.1 N/C) cos [ (1.8 rad/m) y + (5.4 × 10⁸ rad/s) t ] } î है।
(a) तरंग संचरण की दिशा क्या है?
(b) तरंगदैर्ध्य λ कितनी है?
(c) आवृत्ति ν कितनी है?
(d) तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र सदिश का आयाम कितना है?
(e) तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक लिखिए।
दिया गया समीकरण: E = 3.1 cos(1.8 y + 5.4 × 10⁸ t) î
(a) तरंग ऋणात्मक Y-दिशा में गतिमान है (क्योंकि समीकरण (ky + ωt) के रूप में है)।
(b) तरंग संख्या k = 1.8 rad/m
λ = 2π / k = 2 × 3.14 / 1.8 ≈ 3.5 m
(c) ω = 5.4 × 10⁸ rad/s
ν = ω / (2π) = (5.4 × 10⁸) / (2 × 3.14) ≈ 8.6 × 10⁷ Hz = 86 MHz
(d) E₀ = 3.1 N/c, c = 3 × 10⁸ m/s
B₀ = E₀ / c = 3.1 / (3 × 10⁸) ≈ 1.03 × 10⁻⁸ T
(e) चूँकि तरंग -Y दिशा में गतिमान है और E, X-दिशा में है, अतः B, Z-दिशा में होगा।
B = B₀ cos(ky + ωt) k̂ = 1.03 × 10⁻⁸ cos(1.8 y + 5.4 × 10⁸ t) k̂ T
100 W विद्युत बल्ब की शक्ति का लगभग 5% दृश्य विकिरण में बदल जाता है।
(a) बल्ब से 1 m की दूरी पर
(b) 10 m की दूरी पर
दृश्य विकिरण की औसत तीव्रता कितनी है? यह मानिए कि विकिरण समदैशिकतः उत्सर्जित होती है और परावर्तन की उपेक्षा कीजिए।
कुल शक्ति = 100 W
दृश्य विकिरण शक्ति, P = 100 का 5% = 5 W
(a) 1 m दूरी पर, तीव्रता I = P / (4πr²) = 5 / (4 × 3.14 × 1²) ≈ 0.4 W/m²
(b) 10 m दूरी पर, I = 5 / (4 × 3.14 × 10²) ≈ 0.004 W/m² = 4 × 10⁻³ W/m²
विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के विभिन्न भागों के लिए लाक्षणिक ताप परिसरों को ज्ञात करने के लिए λm T = 0.29 cm-K सूत्र का उपयोग कीजिए। जो संख्याएँ आपको मिलती हैं वे क्या बतलाती हैं?
वीन का विस्थापन नियम: λm T = b = 0.29 cm-K
उदाहरण:
यदि λm = 100 µm = 0.01 cm, तो T = 0.29 / 0.01 = 29 K
यदि λm = 500 nm = 5 × 10⁻⁵ cm, तो T = 0.29 / (5 × 10⁻⁵) = 5800 K
यह संबंध हमें बताता है कि किसी निश्चित ताप T पर उत्सर्जित विकिरण की अधिकतम तीव्रता वाली तरंगदैर्ध्य λm क्या होगी। इससे विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के विभिन्न भागों के लिए ताप परिसर का पता चलता है।
वैद्युत चुम्बकीय विकिरण से सम्बन्धित नीचे कुछ प्रसिद्ध संख्याएँ दी गई हैं। स्पेक्ट्रम के उस भाग का उल्लेख कीजिए जिससे इनमें से प्रत्येक सम्बन्धित है।
(a) 21 cm (अन्तरातारकीय आकाश में परमाण्वीय हाइड्रोजन द्वारा उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य)
(b) 1057 MHz (हाइड्रोजन में दो समीपस्थ ऊर्जा स्तरों से उत्पन्न विकिरण की आवृत्ति)
(c) 2.7 K (सम्पूर्ण अन्तरिक्ष को भरने वाले समदैशिक विकिरण से सम्बन्धित ताप)
(d) 5890 Å – 5896 Å (सोडियम की द्विक रेखाएँ)
(e) 14.4 keV (⁵⁷Fe नाभिक के एक विशिष्ट संक्रमण की ऊर्जा)
(a) 21 cm → रेडियो तरंगें (विशेषकर H-रेखा)
(b) 1057 MHz → सूक्ष्म तरंगें / रेडियो तरंगें
(c) 2.7 K → λm = 0.29/2.7 ≈ 0.11 cm = 1.1 mm → सूक्ष्म तरंगें
(d) 5890–5896 Å → दृश्य प्रकाश (पीला)
(e) 14.4 keV → गामा किरणें (नाभिकीय संक्रमण)
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
(a) लम्बी दूरी के रेडियो प्रेषित्र लघु तरंग बैंड का उपयोग करते हैं। क्यों?
(b) लम्बी दूरी के TV प्रेषण के लिए उपग्रहों का उपयोग आवश्यक है। क्यों?
(c) प्रकाशीय तथा रेडियो दूरदर्शी पृथ्वी पर निर्मित किए जाते हैं किन्तु X-किरण खगोलविज्ञान का अध्ययन पृथ्वी का परिभ्रमण कर रहे उपग्रहों द्वारा ही सम्भव है। क्यों?
(d) 'समताप मण्डल' के ऊपरी छोर पर छोटी-सी ओजोन की परत मानव जीवन के लिए जीवनदायी है। क्यों?
(e) यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल नहीं होता, तो उसके धरातल का औसत ताप वर्तमान ताप से अधिक होता या कम?
(f) कुछ वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि पृथ्वी पर नाभिकीय विश्व युद्ध के बाद 'प्रचण्ड नाभिकीय शीतकाल' होगा। इस भविष्यवाणी का क्या आधार है?
(a) लघु तरंगें (SW) आयनमण्डल से परावर्तित होकर पृथ्वी के चारों ओर वक्रित हो जाती हैं, जिससे लंबी दूरी का संचरण संभव होता है।
(b) TV सिग्नलों की आवृत्ति अधिक (VHF/UHF) होती है जो आयनमण्डल से परावर्तित नहीं होती बल्कि उसे भेदकर निकल जाती हैं। अतः उपग्रहों द्वारा पुनः प्रेषण आवश्यक है।
(c) X-किरणें वायुमण्डल द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं और पृथ्वी तक नहीं पहुँच पातीं। अंतरिक्ष में स्थित उपग्रहों पर दूरदर्शी लगाकर ही इनका अध्ययन किया जा सकता है।
(d) ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित कर लेती है, जिससे जीवन की रक्षा होती है।
(e) वायुमण्डल के अभाव में ग्रीनहाउस प्रभाव नहीं होगा, जिससे पृथ्वी का औसत ताप कम हो जाएगा।
(f) नाभिकीय युद्ध के बाद बड़ी मात्रा में धूल और कालिख वायुमण्डल में फैल जाएगी, जो सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध कर देगी। इससे पृथ्वी का तापमान गिर जाएगा और एक 'नाभिकीय शीतकाल' की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
UP Board Class 12 Physics 8. वैधुत चुंबकीय तरंग Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 12 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board Class 12 Physics 8. वैधुत चुंबकीय तरंग textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 12 Physics 8. वैधुत चुंबकीय तरंग :
There are various features of UP Board Class 12 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.