UP Board Class 12 Physics 7. प्रत्यावर्ती धारा is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
एक 100 Ω का प्रतिरोधक 220 V, 50 Hz आपूर्ति से संयोजित है।
(क) परिपथ में धारा का rms मान कितना है?
(ख) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है?
हल:
दिया है: प्रतिरोध R = 100 Ω, Vrms = 220 V, आवृत्ति f = 50 Hz
(क) परिपथ में धारा का rms मान:
Irms = Vrms / R = 220 / 100 = 2.2 A
(ख) पूर्ण चक्र में शक्ति व्यय:
P = Vrms × Irms = 220 × 2.2 = 484 W
(क) AC आपूर्ति का शिखर मान 300 V है। rms वोल्टता कितनी है?
(ख) AC परिपथ में धारा का rms मान 10 A है। शिखर धारा कितनी है?
हल:
(क) दिया है: वोल्टेज का शिखर मान Vm = 300 V
वोल्टेज का rms मान Vrms = Vm / √2 = 300 / 1.414 ≈ 212.1 V
(ख) दिया है: धारा का rms मान Irms = 10 A
धारा का शिखर मान Im = √2 × Irms = 1.414 × 10 ≈ 14.14 A
एक 44 mH का प्रेरक 220 V, 50 Hz आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है: प्रेरकत्व L = 44 mH = 44 × 10-3 H, Vrms = 220 V, f = 50 Hz
प्रेरणिक प्रतिघात XL = 2πfL = 2 × 3.14 × 50 × 44 × 10-3 ≈ 13.82 Ω
परिपथ में धारा का rms मान:
Irms = Vrms / XL = 220 / 13.82 ≈ 15.92 A
एक 60 μF का संधारित्र 110 V, 60 Hz आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है: धारिता C = 60 μF = 60 × 10-6 F, Vrms = 110 V, f = 60 Hz
धारितीय प्रतिघात XC = 1 / (2πfC) = 1 / (2 × 3.14 × 60 × 60 × 10-6) ≈ 44.23 Ω
परिपथ में धारा का rms मान:
Irms = Vrms / XC = 110 / 44.23 ≈ 2.49 A
प्रश्न 3 व 4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति अवशोषित होती है? अपने उत्तर का विवरण दीजिए।
हल:
प्रश्न 3 के लिए: शुद्ध प्रेरकीय परिपथ में धारा और वोल्टेज के बीच कलान्तर 90° होता है।
औसत शक्ति P = Vrms Irms cos 90° = 0
प्रश्न 4 के लिए: शुद्ध धारितीय परिपथ में धारा और वोल्टेज के बीच कलान्तर 90° होता है।
औसत शक्ति P = Vrms Irms cos 90° = 0
इस प्रकार, दोनों ही स्थितियों में नेट शक्ति अवशोषण शून्य है।
एक L-C-R परिपथ की, जिसमें L = 2.0 H, C = 32 μF तथा R = 10 Ω है, अनुनाद आवृत्ति ωr परिकलित कीजिए। इस परिपथ के लिए Q का क्या मान है?
हल:
दिया है: L = 2 H, C = 32 μF = 32 × 10-6 F, R = 10 Ω
अनुनादी कोणीय आवृत्ति:
ωr = 1 / √(LC) = 1 / √(2 × 32 × 10-6) = 1 / √(64 × 10-6) = 1 / (8 × 10-3) = 125 rad/s
गुणता कारक Q:
Q = ωrL / R = (125 × 2) / 10 = 25
30 μF का एक आवेशित संधारित्र 27 mH के प्रेरक से जोड़ा गया है। परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति कितनी है?
हल:
दिया है: C = 30 μF = 30 × 10-6 F, L = 27 mH = 27 × 10-3 H
मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति:
ω = 1 / √(LC) = 1 / √(27 × 10-3 × 30 × 10-6) = 1 / √(810 × 10-9) ≈ 1 / (28.46 × 10-5) ≈ 1.11 × 103 rad/s
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 7 में संधारित्र पर प्रारम्भिक आवेश 6 mC है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है? बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?
हल:
दिया है: आवेश Q = 6 mC = 6 × 10-3 C, C = 30 μF = 30 × 10-6 F (प्रश्न 7 से)
प्रारम्भ में संचित ऊर्जा (संधारित्र में):
U = Q² / (2C) = (6 × 10-3)² / (2 × 30 × 10-6) = (36 × 10-6) / (60 × 10-6) = 0.6 J
बाद में, यह ऊर्जा प्रेरक और संधारित्र के बीच दोलन करती है, परन्तु कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है (यदि प्रतिरोध नगण्य है)। अतः कुल ऊर्जा सदैव 0.6 J ही रहेगी।
एक श्रेणीबद्ध L-C-R परिपथ को, जिसमें R = 20 Ω, L = 1.5 H तथा C = 35 μF है, एक परिवर्ती आवृत्ति की 200 V AC आपूर्ति से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की आवृत्ति परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर होती है तो एक पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित की गई माध्य शक्ति कितनी होगी?
हल:
दिया है: R = 20 Ω, L = 1.5 H, C = 35 μF = 35 × 10-6 F, Vrms = 200 V
अनुनाद की स्थिति में, प्रतिबाधा Z = R = 20 Ω
धारा का rms मान: Irms = Vrms / R = 200 / 20 = 10 A
अनुनाद पर कलान्तर φ = 0°, अतः cos φ = 1
एक चक्र में स्थानान्तरित माध्य शक्ति:
P = Vrms Irms cos φ = 200 × 10 × 1 = 2000 W या 2 kW
एक रेडियो को MW प्रसारण बैण्ड के एक खण्ड के आवृत्ति परास के एक ओर से दूसरी ओर (800 kHz से 1200 kHz) तक समस्वरित किया जा सकता है। यदि इसके L-C परिपथ का प्रभावकारी प्रेरकत्व 200 μH हो, तो उसके परिवर्ती संधारित्र की परास कितनी होनी चाहिए?
संकेत: समस्वरित करने के लिए मूल आवृत्ति अर्थात् L-C परिपथ के मुक्त दोलनों की आवृत्ति रेडियो तरंग की आवृत्ति के समान होनी चाहिए।
हल:
दिया है: न्यूनतम आवृत्ति f1 = 800 kHz = 8 × 105 Hz
अधिकतम आवृत्ति f2 = 1200 kHz = 12 × 105 Hz
प्रेरकत्व L = 200 μH = 200 × 10-6 H = 2 × 10-4 H
अनुनाद सूत्र: f = 1 / (2π√(LC))
न्यूनतम आवृत्ति के लिए अधिकतम धारिता:
Cmax = 1 / (4π²f1²L) = 1 / (4 × (3.14)² × (8 × 105)² × 2 × 10-4)
Cmax ≈ 197.7 pF
अधिकतम आवृत्ति के लिए न्यूनतम धारिता:
Cmin = 1 / (4π²f2²L) = 1 / (4 × (3.14)² × (12 × 105)² × 2 × 10-4)
Cmin ≈ 87.8 pF
अतः संधारित्र की धारिता परास 87.8 pF से 197.7 pF तक होनी चाहिए।
चित्र में एक श्रेणीबद्ध L-C-R परिपथ दिखलाया गया है जिसे परिवर्ती आवृत्ति के 230 V के स्रोत से जोड़ा गया है। L = 5.0 H, C = 80 μF, R = 40 Ω.
(क) स्रोत की आवृत्ति निकालिए जो परिपथ में अनुनाद उत्पन्न करे।
(ख) परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनादी आवृत्ति पर धारा का rms आयाम निकालिए।
(ग) परिपथ के तीनों अवयवों के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए। दिखलाइए कि अनुनादी आवृत्ति पर L-C संयोग के सिरों पर विभवपात शून्य है।
हल:
दिया है: Vrms = 230 V, L = 5 H, C = 80 μF = 80 × 10-6 F, R = 40 Ω
(क) अनुनादी कोणीय आवृत्ति:
ωr = 1 / √(LC) = 1 / √(5 × 80 × 10-6) = 1 / √(400 × 10-6) = 1 / (20 × 10-3) = 50 rad/s
(ख) अनुनाद पर, XL = XC, अतः प्रतिबाधा Z = R = 40 Ω
धारा का rms मान: Irms = Vrms / R = 230 / 40 = 5.75 A
(ग) प्रतिरोधक पर विभवपात: VR = Irms × R = 5.75 × 40 = 230 V
प्रेरक पर विभवपात: VL = Irms × XL = 5.75 × (50 × 5) = 5.75 × 250 = 1437.5 V
संधारित्र पर विभवपात: VC = Irms × XC = 5.75 × (1/(50 × 80×10-6)) = 5.75 × 250 = 1437.5 V
L-C संयोग पर कुल विभवपात = VL - VC = 1437.5 - 1437.5 = 0 V (क्योंकि XL = XC पर VL और VC परिमाण में बराबर पर कला में विपरीत होते हैं)।
किसी L-C परिपथ में 20 mH का एक प्रेरक तथा 50 μF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 mC है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t=0 है।
(क) प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या वह L-C दोलनों की अवधि में संरक्षित है?
(ख) परिपथ की मूल आवृत्ति क्या है?
(ग) किसी समय पर संचित ऊर्जा (i) पूरी तरह से वैद्युत है (अर्थात् वह संधारित्र में संचित है)? (ii) पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात् प्रेरक में संचित है)?
(घ) किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक एवं संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
(ङ) यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अंततः ऊष्मा के रूप में क्षयित होगी?
हल:
दिया है: L = 20 mH = 20 × 10-3 H, C = 50 μF = 50 × 10-6 F, Q0 = 10 mC = 10 × 10-3 C
(क) प्रारम्भिक संचित ऊर्जा:
U = Q0² / (2C) = (10 × 10-3)² / (2 × 50 × 10-6) = (100 × 10-6) / (100 × 10-6) = 1.0 J
हाँ, यह ऊर्जा दोलनों के दौरान संरक्षित रहती है (यदि प्रतिरोध नगण्य है)।
(ख) मूल आवृत्ति:
ω = 1 / √(LC) = 1 / √(20×10-3 × 50×10-6) = 1 / √(10-6) = 103 rad/s
f = ω / (2π) = 1000 / (2 × 3.14) ≈ 159.2 Hz
(ग) (i) ऊर्जा पूर्णतः वैद्युत होगी जब संधारित्र पर आवेश अधिकतम हो। यह t = 0, T/2, T, 3T/2,... आदि समयों पर होता है, जहाँ T दोलन काल है।
(ii) ऊर्जा पूर्णतः चुम्बकीय होगी जब संधारित्र पर आवेश शून्य हो। यह t = T/4, 3T/4, 5T/4,... आदि समयों पर होता है।
(घ) ऊर्जा समान रूप से विभाजित होगी जब संधारित्र की ऊर्जा कुल ऊर्जा की आधी हो। यह तब होता है जब संधारित्र पर आवेश Q = Q0/√2 हो। यह स्थिति t = T/8, 3T/8, 5T/8,... आदि समयों पर आती है।
(ङ) यदि प्रतिरोधक जोड़ा जाए, तो अवमंदन होगा और अंततः सम्पूर्ण प्रारम्भिक ऊर्जा (1.0 J) ही ऊष्मा के रूप में क्षयित हो जाएगी।
एक कुण्डली को जिसका प्रेरकत्व 0.50 H तथा प्रतिरोध 100 Ω है, 240 V व 50 Hz की एक आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(क) कुण्डली में अधिकतम धारा कितनी है?
(ख) वोल्टेज शीर्ष व धारा शीर्ष के बीच समय-पश्चता (time lag) कितनी है?
हल:
दिया है: L = 0.50 H, R = 100 Ω, Vrms = 240 V, f = 50 Hz
(क) प्रेरणिक प्रतिघात XL = 2πfL = 2 × 3.14 × 50 × 0.5 = 157 Ω
प्रतिबाधा Z = √(R² + XL²) = √(100² + 157²) ≈ √(10000 + 24649) ≈ √34649 ≈ 186.1 Ω
Irms = Vrms / Z = 240 / 186.1 ≈ 1.29 A
अधिकतम धारा Im = √2 × Irms = 1.414 × 1.29 ≈ 1.82 A
(ख) कलान्तर φ = tan-1(XL/R) = tan-1(157/100) = tan-1(1.57) ≈ 57.5°
समय पश्चता Δt = φ / ω = (57.5 × π/180) / (2π × 50) = (57.5 / 180) / 100 ≈ 3.19 × 10-3 s
यदि परिपथ को उच्च आवृत्ति की आपूर्ति (240 V, 10 kHz) से जोड़ा जाता है तो प्रश्न 13 (क) तथा (ख) के उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक लगभग खुले परिपथ के तुल्य होता है। स्थिर अवस्था के पश्चात् किसी DC परिपथ में प्रेरक किस प्रकार का व्यवहार करता है?
हल:
दिया है: Vrms = 240 V, f = 10 kHz = 104 Hz, L = 0.50 H, R = 100 Ω
XL = 2πfL = 2 × 3.14 × 104 × 0.5 = 31400 Ω
Z = √(R² + XL²) ≈ √(100² + 31400²) ≈ 31400 Ω (क्योंकि XL >> R)
Irms = Vrms / Z = 240 / 31400 ≈ 0.00764 A
Im = √2 × Irms ≈ 0.0108 A
कलान्तर φ ≈ tan-1(31400/100) ≈ tan-1(314) ≈ 90°
समय पश्चता Δt = φ/ω ≈ (π/2) / (2π × 104) = 1/(4 × 104) = 2.5 × 10-5 s
व्याख्या: अति उच्च आवृत्ति पर XL बहुत अधिक हो जाता है, जिससे प्रतिबाधा बहुत अधिक और धारा नगण्य हो जाती है। अतः प्रेरक खुले परिपथ की भाँति व्यवहार करता है।
DC परिपथ में स्थायी अवस्था में (f=0), XL = 0 होता है, अतः प्रेरक एक शुद्ध चालक (केवल उसके तार के प्रतिरोध तक सीमित) की तरह व्यवहार करता है।
40 Ω प्रतिरोध के श्रेणी क्रम में एक 100 μF के संधारित्र को 110 V, 60 Hz की आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(क) परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है?
(ख) धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?
हल:
दिया है: R = 40 Ω, C = 100 μF = 100 × 10-6 F, Vrms = 110 V, f = 60 Hz
(क) XC = 1/(2πfC) = 1/(2×3.14×60×100×10-6) ≈ 26.5 Ω
Z = √(R² + XC²) = √(40² + 26.5²) ≈ √(1600 + 702.25) ≈ √2302.25 ≈ 48.0 Ω
Irms = Vrms/Z = 110/48 ≈ 2.29 A
Im = √2 × Irms = 1.414 × 2.29 ≈ 3.24 A
(ख) कलान्तर φ = tan-1(-XC/R) = tan-1(-26.5/40) ≈ -33.5° (धारा अग्रगामी)
समय पश्चता Δt = |φ|/ω = (33.5 × π/180) / (2π × 60) = 33.5/(180×120) ≈ 1.55 × 10-3 s
यदि परिपथ को 110 V, 12 kHz आवृत्ति से जोड़ा जाए तो प्रश्न (क) व (ख) का उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी DC परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।
हल:
दिया है: Vrms = 110 V, f = 12 kHz = 12 × 103 Hz, C = 100 μF, R = 40 Ω
XC = 1/(2πfC) = 1/(2×3.14×12×103×100×10-6) ≈ 0.133 Ω
Z ≈ √(R² + XC²) ≈ √(40² + 0.133²) ≈ 40 Ω (क्योंकि R >> XC)
Irms = Vrms/Z = 110/40 = 2.75 A
Im = √2 × Irms
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