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UP Board Class 4 EVS (1. चलो चलें स्कूल!) solution PDF

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UP Board Class 4 EVS (1. चलो चलें स्कूल!) solution

UP Board Class 4 EVS 1. चलो चलें स्कूल! Hindi Medium Solutions - PDF

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पाठ - 1 चलो ,चलें स्कूल!

51. कुछ इंटें लो। इन्हें किसी खुली जगह पर सीधी लाइन में रखो, जैसे चित्र में दिखाया गया है। अब इन पर चलने की कोशिश करो। क्या यह आसान लगा?

उत्तर : हाँ, यह काफी आसान लगा। इंटों पर चलते समय हमें अपना संतुलन बनाए रखना पड़ता है, जो एक मजेदार और सीखने वाला अनुभव है।

52. अपनी टीचर की मदद से चार पाँच बॉसों को बाँध कर एक छोटा सा पुल बनाओ। उस पर चल कर देखो।
(क) तुम्हें कैसा लगा? (ख) गिरे तो नहीं?

उत्तर :
(क) मुझे बाँस के पुल पर चलना बहुत रोमांचक और मजेदार लगा। यह एक नई चुनौती जैसा था।
(ख) मैं नहीं गिरा, लेकिन पुल हिलता रहा था, इसलिए चलते समय बहुत सावधानी बरतनी पड़ी।

63. जूते या चप्पल पहन कर पुल पर चलना ज्यादा आसान होगा या नंगे पैर? क्यों?

उत्तर : नंगे पैर चलना ज्यादा आसान और सुरक्षित होगा। क्योंकि नंगे पैरों से हम बाँस की सतह को अच्छी तरह पकड़ सकते हैं और फिसलने का डर कम रहता है। जूते का तला चिकना हो सकता है, जिससे फिसलन बढ़ जाती है।

करके देखो

61. चित्र 1 और 2 को देखो। बच्चे कुँए से बाल्टी खींच रहे हैं। क्या दोनों चित्रों में अंतर बता सकते हो?

उत्तर : हाँ, दोनों चित्रों में स्पष्ट अंतर है। पहले चित्र में बच्चा बिना किसी सहारे के, सीधे रस्सी पकड़कर बाल्टी खींच रहा है। दूसरे चित्र में बच्चा एक पुली (घिरनी) की मदद से बाल्टी खींच रहा है। पुली रस्सी को एक घेरे में घुमाती है, जिससे खींचने में आसानी होती है।

९2. इन दोनों में से किस तरह से खींचना आसान होगा-पुली (घिरनी) के साथ या बिना पुली के?

उत्तर : पुली (घिरनी) के साथ खींचना निश्चित रूप से ज्यादा आसान होगा। पुली रस्सी के घर्षण को कम करती है और बल लगाने की दिशा बदल देती है, जिससे भारी चीजें भी आसानी से उठाई जा सकती हैं।

53. अपने आस-पास देखो। तुम कहाँ-कहाँ पुली का प्रयोग देखते हो? उनकी सूची बनाओ।

उत्तर : मैंने पुली का प्रयोग इन जगहों पर देखा है:

  1. कुएँ से पानी खींचते समय।
  2. इमारतों के निर्माण स्थल पर भारी सामान उठाने के लिए क्रेन में।
  3. स्कूल में झंडा फहराने के लिए।
  4. कुछ खिलौनों, जैसे पुली वाली कार में।
  5. कपड़े सुखाने वाली रस्सी को कसने के लिए लगे हुक में।

54. तुम भी चरखी या खाली धागे की रील से पुली बनाकर कुछ सामान उठाने की कोशिश करो।

उत्तर : यह एक व्यावहारिक गतिविधि है। एक खाली धागे की रील लो, उसमें एक मजबूत डोरी डालो और एक छोटी टोकरी या डिब्बा बाँधकर देखो कि कैसे पुली की मदद से उसे उठाना आसान हो जाता है।

सीमेंट का पुल

01. यह पुल बाँस के बने पुल से किस तरह अलग है?

उत्तर : सीमेंट का पुल बाँस के पुल से कई तरह से अलग है:

  • सामग्री: यह सीमेंट, गिट्टी, रेत और लोहे की सलाखों से बना होता है, जबकि बाँस का पुल केवल बाँस और रस्सी से बनता है।
  • मजबूती: सीमेंट का पुल बहुत ज्यादा मजबूत, भारी और टिकाऊ होता है।
  • उपयोग: इस पर एक साथ कई लोग, जानवर और भारी वाहन भी चल सकते हैं, जबकि बाँस के पुल पर एक समय में सिर्फ एक या दो लोग ही सावधानी से चल सकते हैं।

52. अंदाजा लगाओ, इस पुल को एक समय पर कितने लोग पार कर सकते हैं?

उत्तर : सीमेंट के बने पुल की चौड़ाई के आधार पर, एक समय पर 30 से 50 या इससे भी अधिक लोग आसानी से पार कर सकते हैं। यह पुल इतना मजबूत होता है कि उनके चलने से हिलता भी नहीं है।

53. तुमने देखा कैसे बच्चे अलग-अलग पुलों की मदद से उबड़-खाबड़ रास्ते और नदियों को पार करके स्कूल पहुँचते हैं।

उत्तर : हाँ, मैंने देखा कि कुछ बच्चे पहाड़ी नदियों को पार करने के लिए लकड़ी या रस्सी के झूलते पुलों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ बच्चे नदी के उथले हिस्से से पैदल पार करते हैं, तो कुछ सीमेंट के मजबूत पुलों से गुजरते हैं। पुल उनके सफर को सुरक्षित और आसान बना देते हैं।

54. अगर तुम्हें मौका मिले, तो तुम कौन-से पुल से जाना चाहोगे? क्यों?

उत्तर : मैं सीमेंट के मजबूत पुल से जाना पसंद करूँगा। क्योंकि यह पूरी तरह सुरक्षित होता है, इसमें गिरने का डर नहीं रहता और इस पर चलना बहुत आसान है। हालाँकि, बाँस के पुल पर चलने का अनुभव भी रोमांचक लगता है, लेकिन वह केवल मजे के लिए एक बार ही ठीक है।

55. स्कूल जाने के लिए क्या तुम भी कोई पुल पार करते हो? वह पुल कैसा दिखाई देता है?

उत्तर : मेरे स्कूल जाने के रास्ते में कोई बड़ा पुल नहीं है, लेकिन मैंने शहर में एक बड़ा सीमेंट का पुल देखा है। वह पुल बहुत चौड़ा और लंबा है, उसके नीचे से सड़क गुजरती है और उस पर कारें, बाइक और लोग चलते रहते हैं। उसके किनारों पर ऊँची रेलिंग लगी हुई है।

56. अपने दादा-दादी से पता करो कि उनके बचपन के समय में पुल कैसे होते थे?

उत्तर : मेरे दादाजी ने बताया कि उनके बचपन में गाँवों में ज्यादातर लकड़ी के मजबूत खंभों वाले पुल होते थे या फिर नदियों में पत्थर रखकर बनाए गए छोटे पुल होते थे। बड़े शहरों में ही पक्के सीमेंट के पुल हुआ करते थे। रस्सी के पुल भी कुछ पहाड़ी इलाकों में मिल जाते थे।

57. अपने आस-पास किसी पुल या पुलिया को देखो और उसके बारे में कुछ बातें पता करो वह कहाँ बना है-पानी पर, सड़क पर, पहाड़ों के बीच या कहीं और?

उत्तर : मैंने अपने शहर में एक पुल देखा है। वह एक नहर के ऊपर बना हुआ है, यानी पानी पर बना है। इस पुल से होकर लोग एक तरफ की कॉलोनी से दूसरी तरफ की मुख्य सड़क पर जाते हैं।

58. पुल को कौन-कौन पार करता है? लोग ही जाते हैं या जानवर और गाड़ियाँ भी?

उत्तर : उस पुल को सभी तरह के लोग पार करते हैं - स्कूली बच्चे, ऑफिस जाने वाले, बुजुर्ग। साथ ही, साइकिल, मोटरसाइकिल, रिक्शा और कारें भी उस पर से गुजरती हैं। कभी-कभी लोग अपने पालतू कुत्तों को भी साथ लेकर चलते हैं।

09. क्या वह पुल पुराना-सा लगता है या नया ?

उत्तर : वह पुल बहुत पुराना नहीं लगता। उसकी सतह अच्छी है और रेलिंग पर जंग भी नहीं लगी है। लगता है कि उसे कुछ साल पहले ही बनाया गया है या फिर उसकी मरम्मत की गई है।

010. पता करो कि वह पुल किन-किन चीजों से बना है? उन चीजों की सूची बनाओ।

उत्तर : यह पुल मुख्य रूप से इन चीजों से बना हुआ है:

  1. सीमेंट
  2. बजरी (गिट्टी)
  3. रेत
  4. पानी
  5. लोहे की मजबूत सलाखें (सरिया)
  6. कंक्रीट को सहारा देने के लिए लकड़ी के फ़्रेम (फॉर्मवर्क)

011. उस पुल का चित्र कॉपी में बनाओ। पुल पर चलती ट्रेन, गाड़ियाँ, जानवर और लोग दिखाना मत भूलना।

उत्तर : यह एक रचनात्मक कार्य है। अपनी कॉपी में पुल का चित्र बनाते समय उसके नीचे पानी, ऊपर सड़क, कारें, बाइक, साइकिल चलाते लोग और पुल के किनारे लगी लाइट के खंभे भी बनाना न भूलें।

012. सोचो, अगर वह पुल नहीं होता, तो क्या-क्या परेशानियाँ होतीं?

उत्तर : अगर पुल नहीं होता, तो बहुत सारी परेशानियाँ होतीं:

  • नहर पार करने के लिए लोगों को काफी लंबा चक्कर लगाना पड़ता।
  • समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती।
  • आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या अग्निशमन दल को देरी हो सकती थी।
  • बच्चों का स्कूल और लोगों का काम पर पहुँचना मुश्किल हो जाता।
  • सामान ढोने में बहुत कठिनाई आती।

कुछ अन्य तरीके देखें, जिनसे बच्चे स्कूल पहुँचते

51. क्या तुमने किसी और तरह की नाव देखी है?

उत्तर : हाँ, मैंने कई तरह की नावें देखी हैं। जैसे लकड़ी की लंबी पतली नाव (डोंगी), लोहे की बड़ी मोटरबोट, समुद्र में चलने वाले विशाल जहाज और पारंपरिक रंग-बिरंगी पाल वाली नावें भी।

52. पानी पार करने के और क्या तरीके हो सकते हैं?

उत्तर : पानी पार करने के कई तरीके हैं:

  1. पुल: सीमेंट, लोहे या लकड़ी के बने।
  2. नाव: डोंगी, मोटरबोट, स्टीमर।
  3. जहाज: समुद्र में लंबी दूरी के लिए।
  4. हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर: पानी के ऊपर से उड़कर।
  5. तैरकर: छोटी नदी या तालाब के लिए।
  6. बांस का बेड़ा: कुछ गाँवों में प्रचलित।

ऊठ गाड़ी

51. क्या तुम भी कभी उँट-गाड़ी या ताँगे पर बैठे हो?

उत्तर : हाँ, मैं एक बार मेले में ताँगे पर बैठा हूँ। ताँगा घोड़े से खींची जाने वाली एक सुंदर रंग-बिरंगी गाड़ी होती है।

52. कहाँ? खुद चढ़े थे या किसी ने बिठाया था?

उत्तर : मैं शहर के एक बड़े मेले में ताँगे पर बैठा था। ताँगा चलाने वाले चाचा (कोचमैन) ने मेरी मदद की और मुझे सावधानी से ताँगे पर बिठाया।

63. तुम्हें उस गाड़ी पर बैठकर कैसा लगा?

उत्तर : मुझे ताँगे पर बैठकर बहुत अच्छा लगा। यह आजकल की कारों या बाइक से बिल्कुल अलग अनुभव था। घोड़े की टापों की आवाज और हल्का-हल्का झूमना बहुत सुखद था।

54. अपना अनुभव कक्षा में बताओ।

उत्तर : मेरे प्यारे साथियों, मैंने पिछले सप्ताह ताँगे की सवारी का अनुभव किया। ताँगा लकड़ी का बना होता है और उसे एक सुंदर घोड़ा खींचता है। बैठते ही लगा जैसे हम पुराने जमाने में चले गए हैं। चलते समय हल्का-हल्का झूलना और आस-पास का नज़ारा देखना बहुत मजेदार था। यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा है क्योंकि इसमें धुआँ नहीं निकलता। मैं चाहूँगा कि आप भी एक बार यह अनुभव जरूर लें।

बैलगाड़ी

51. क्या तुम्हारे यहाँ भी बैलगाड़ियाँ होती हैं?

उत्तर : हाँ, मेरे नाना-नानी के गाँव में आज भी बैलगाड़ियाँ होती हैं। लोग उन पर खेत का सामान, घास या अनाज लादकर ले जाते हैं।

52. क्या उसमें छत होती है?

उत्तर : ज्यादातर बैलगाड़ियों में छत नहीं होती, वे खुली होती हैं ताकि सामान लादना आसान रहे। हालाँकि, कुछ बैलगाड़ियों में यात्रियों के बैठने के लिए बनी सीटों के ऊपर छत भी बनी होती है, ताकि धूप और बारिश से बचा जा सके।

563. उसके पहिये कैसे होते हैं?

उत्तर : पुराने जमाने की बैलगाड़ियों के पहिये पूरी तरह लकड़ी के बने होते थे। आजकल, ज्यादातर बैलगाड़ियों में लोहे के रिम वाले पहिए लगे होते हैं, जिन पर ट्रैक्टर या कार जैसे रबर के टायर चढ़े होते हैं। इससे गाड़ी चलाना आसान और कम खड़खड़ाहट वाला हो गया है।

54. बैलगाड़ी का चित्र कॉपी में बनाओ।

उत्तर : यह एक रचनात्मक कार्य है। अपनी कॉपी में दो बैल, उनके सिर पर जूआ (जुआ), लकड़ी का डंडा और पीछे लकड़ी की पट्टियों से बना हुआ गाड़ी का ढाँचा बनाओ। दो बड़े पहिए और उनमें लकड़ी के तीलियाँ (स्पोक्स) भी बनाना न भूलें।

साईकिल की सवारी

51. तुम्हारे स्कूल में कितने बच्चे साइकिल से आते हैं?

उत्तर : हमारे स्कूल में लगभग आधे से ज्यादा बच्चे साइकिल से आते-जाते हैं। साइकिल एक स्वस्थ, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साधन है। मैं भी प्रतिदिन साइकिल से ही स्कूल आता हूँ।

52. क्या तुम्हें साइकिल चलानी आती है? यदि हाँ तो किससे सीखी?

उत्तर : हाँ, मुझे साइकिल चलानी आती है। मैंने यह कला अपने बड़े भैया से सीखी। पहले उन्होंने पीछे से साइकिल को पकड़कर संतुलन बनाना सिखाया, फिर धीरे-धीरे मैंने खुद चलाना शुरू कर दिया। शुरू में कुछ गिरने के बाद भी मैंने हार नहीं मानी और अभ्यास करते रहा।

जुगाड़

61. क्या तुम्हारे इलाके में भी इस तरह की गाड़ी होती है?

उत्तर : हाँ, हमारे गाँव के आस-पास के इलाकों में किसान पुराने पम्पसेट के इंजन और लकड़ी के पहियों का इस्तेमाल करके ऐसी ही गाड़ियाँ बना लेते हैं। इन पर वे खेत का सामान ले जाते हैं या फिर लोगों को छोटी दूरी के लिए ले जाते हैं।

62. तुम्हारे यहाँ इसे क्या कहते हैं?

उत्तर : हमारे यहाँ ऐसी गाड़ियों को "चुग्गा" या "मोटर वाली बैलगाड़ी" कहते हैं, क्योंकि यह बैलगाड़ी जैसी दिखती है लेकिन इसमें बैल की जगह इंजन लगा होता है।

53. तुम ऐसी गाड़ी में बैठना पसंद करोगे? क्यों?

उत्तर : हाँ, मैं एक बार ऐसी गाड़ी में बैठना जरूर चाहूँगा। क्योंकि यह एक अलग तरह का अनुभव होगा। यह गाड़ी पुराने सामान से बनी है, इसलिए इसमें बैठकर लगेगा कि हम किसी नए आविष्कार पर सवार हैं। साथ ही, यह देखने में भी बहुत दिलचस्प लगती है।

54. क्या तुम बता सकते हो, इसे 'जुगाड़' क्यों कहते हैं?

उत्तर : इसे 'जुगाड़' इसलिए कहते हैं क्योंकि यह गाड़ी नए और डिज़ाइन किए हुए पुर्जों से नहीं, बल्कि घर या खेत में पड़े पुराने और बेकार समझे जाने वाले सामानों को जोड़-तोड़कर (जुगाड़ करके) बनाई जाती है। जैसे पुराना इंजन, लकड़ी के तख्ते, ट्रैक्टर के पुराने पहिए आदि। यह हमारी सूझ-बूझ और कल्पनाशीलता का उदाहरण है।

65. जुगाड़ पुराने बचे सामान के इस्तेमाल से बनता है। तुम भी कुछ चीजों के जुगाड़ से कोई नई चीज बनाओ।

उत्तर : मैंने पुराने अखबारों को मोड़कर और चिपकाकर एक मजबूत फाइल फोल्डर बनाया है। इसी तरह, एक पुरानी प्लास्टिक की बोतल को काटकर और उसमें मिट्टी भरकर मैंने एक सुंदर गमला बनाया है, जिसमें अब मेरा पौधा उग रहा है।

66. सोचो क्या ऐसी कोई जगह है, जहाँ इनमें से कोई भी गाड़ी नहीं पहुँच सकती?

उत्तर : हाँ, ऐसी बहुत सी जगहें हैं। जैसे:

  • ऊँचे पहाड़ों की चोटियाँ, जहाँ सिर्फ रस्सी या पैदल ही पहुँचा जा सकता है।
  • घने जंगलों के भीतरी हिस्से, जहाँ रास्ता नहीं है।
  • दलदली इलाके, जहाँ गाड़ियाँ फँस जाएँगी।
  • समुद्र के बीच में या नदी के बीच के टापू, जहाँ सिर्फ नाव या हेलीकॉप्टर से ही पहुँचा जा सकता है।

जंगल से जाते बच्चे

61. क्या तुम कभी घने जंगल या ऐसी किसी जगह से गुजरे हो? कहाँ?

उत्तर : हाँ, पिछली गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ एक वन्यजीव अभयारण्य (वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी) घूमने गया था। वहाँ हम जीप में बैठकर घने जंगल के रास्ते से गुजरे थे।

52. अपने अनुभवों के बारे में कॉपी में लिखो।

उत्तर : जंगल का अन

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Other Chapters of Class 4 EVS
1. चलो चलें स्कूल!
2. कान-कान मे
3. नन्दू हाथी
4. अमृता की कहानी
5. अनिता कि मधुमक्खियां
6. ओमना का सफर
7. ख़िड़क़ी से
8. नानी के घर तक
9. बदलते परिवार
10. हु तू तू; हु तू तू
11. फुलवारी
13. पहाड़ों से समुंदर तक
14. बसवा का खेत
15. मंड़ी से घर तक
16. चुं चुं कऱती आई चिड़िय़ा
17. नंदीता मुंबई से
18. पाऩी कहीं ज़्यादा कहीं कम
19. ज़ड़ों क़ा ज़ाल
20. मिलक़र ख़ाऐँ
21. खाऩा ख़िलाऩा
22. दुनिया मेरे घर मे
23. पोचमपल्ली
24. दूर देश कि बात
25. चटपटी पहेलियाँ!
26. फ़ैज़ी वहीदा
27. कोशिश हुई कामियाब
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