UP Board Class 4 EVS 22. दुनिया मेरे घर मे is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर : हाँ, कभी-कभी मेरे और मेरे भाई में टेलीविज़न देखने को लेकर झगड़ा हो जाता है। वह कार्टून देखना चाहता है और मैं कोई ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखना चाहती हूँ।
उत्तर : ज्यादातर मामलों में हमारे माता-पिता ही ऐसे झगड़ों को सुलझाते हैं। वे हमें समझाते हैं कि कैसे बारी-बारी से चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए और आपस में सहयोग करना चाहिए।
उत्तर : एक बार गर्मियों में हमारे घर का एक ही पंखा काम कर रहा था। मैं, मेरी बहन और मेरा भाई तीनों उसके सामने बैठना चाहते थे। हमने एक मजेदार तरीका निकाला। हमने एक टाइमर लगाया और हर दस मिनट पर अपनी जगह बदलनी शुरू कर दी। यह देखकर हम सब हँसने लगे और झगड़ा भूल गए।
उत्तर : हाँ, मैंने पार्क में झूले के लिए बच्चों को आपस में झगड़ते देखा है। हर बच्चा सबसे पहले और सबसे ज्यादा देर तक झूलना चाहता है, जिससे कई बार तकरार हो जाती है।
उत्तर : मुझे लगता है कि अक्षय अपनी दादी की बात का सम्मान करते हुए भी, अपने दोस्त की भावनाओं को ठेस न पहुँचाए। वह प्यार से मना कर सकता है या फिर बहाना बना सकता है कि उसे प्यास नहीं है।
उत्तर : अक्षय इसलिए उलझन में पड़ गया क्योंकि उसके सामने दो विकल्प थे। एक तरफ उसकी दादी का आदेश था कि वह अनिल के घर कुछ न खाए-पिए, और दूसरी तरफ उसका अपना दोस्त अनिल उसे पानी पिलाना चाह रहा था। वह नहीं चाहता था कि उसके कारण उसके दोस्त की भावनाएँ आहत हों।
उत्तर : अक्षय की दादी-माँ ने शायद पुरानी सोच और परंपराओं के कारण ऐसा कहा होगा। कुछ लोग मानते हैं कि अलग-अलग परिवारों के रीति-रिवाज और खान-पान अलग होते हैं, इसलिए उनके घर की चीजें नहीं खानी-पीनी चाहिए। यह सोच अक्सर भेदभाव और गलतफहमी पर आधारित होती है।
उत्तर : हाँ, मेरे पड़ोस में एक बुजुर्ग दादा जी हैं जो अक्सर ऐसी ही बातें करते हैं। वे अलग-अलग जाति या समुदाय के लोगों के घर का खाना-पानी लेने से मना करते हैं।
उत्तर : नहीं, मैं अक्षय की दादी-माँ की सोच से सहमत नहीं हूँ। मेरे विचार से दोस्ती और इंसानियत सबसे बड़ी चीजें हैं। हमें किसी के धर्म, जाति या परिवार के आधार पर उसके साथ खाने-पीने से इनकार नहीं करना चाहिए। यह भेदभाव पैदा करता है।
उत्तर : मेरी राय में अक्षय को अपने दोस्त अनिल का पानी पी लेना चाहिए था। बाद में वह घर जाकर अपनी दादी को प्यार और सम्मान से समझा सकता था कि दोस्ती में ऐसी बातों का कोई महत्व नहीं होता और सभी इंसान एक समान हैं।
उत्तर : मेरे परिवार में ऐसी बातें नहीं होती, लेकिन मैंने कुछ दोस्तों से सुना है कि उनके घर में कुछ पुराने नियम हैं। मैं सोचता हूँ कि समय के साथ बदलाव जरूरी है। हमें ऐसी सोच को बदलने की कोशिश करनी चाहिए जो लोगों के बीच दूरियाँ बनाती है। सभी के साथ समान व्यवहार और आदर होना चाहिए।
उत्तर : नहीं, लड़के-लड़कियों और पुरुष-महिलाओं के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। सभी इंसान हैं और उनके अधिकार, कर्तव्य और अवसर समान होने चाहिए। अलग नियम बनाना भेदभाव है और यह समाज की प्रगति में रुकावट डालता है।
उत्तर : अगर ऐसा होता है तो सबको पता चल जाएगा कि ये नियम कितने अनुचित और मनमाने हैं। जैसे, अगर लड़कों को शाम को घर से बाहर न निकलने का नियम लागू हो, तो वे भी असहज महसूस करेंगे। इसी तरह, अगर लड़कियों को हर तरह के खेल खेलने और मनचाहा करियर चुनने की आजादी मिले, तो वे बहुत आगे बढ़ेंगी। इससे साबित होगा कि समान नियम सबके लिए बेहतर हैं।
उत्तर : पीलू मामी जब कम पैसे देकर जाने लगीं, तो सबसे छोटे बच्चे ने आवाज़ लगाई, "मामी, आपने गलती से कम पैसे दिए हैं!" यह सुनकर पीलू मामी का चेहरा लाल हो गया। वह तुरंत वापस लौटीं और कुल्फी वाले से माफ़ी माँगते हुए बाकी के पैसे दिए। घर आकर उन्होंने बच्चों को समझाया कि उनसे गलती हो गई थी और ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है। बच्चों ने मामी की इस बात की तारीफ की।
उत्तर : नहीं, मेरे परिवार में कोई भी पीलू मामी की तरह नहीं है। मेरे माता-पिता हमेशा सिखाते हैं कि चाहे कितनी भी छोटी चीज क्यों न हो, दुकानदार को उसके सही पैसे देने चाहिए। ईमानदारी हमारे परिवार का मूल मंत्र है।
उत्तर : बच्चे निश्चित रूप से यह सोचते कि पीलू मामी बेईमान हैं और उनकी नकल करना गलत है। वे मामी के प्रति अपना विश्वास खो देते। मेरी सोच भी यही है। छोटी-छोटी बेईमानियाँ ही बाद में बड़ी गलत आदतें बन जाती हैं। हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए, चाहे कोई देख रहा हो या नहीं।
उत्तर : हाँ, कभी-कभी अजनबी लोगों द्वारा गाल या सिर पर थपथपाना या जबरदस्ती गले लगाना मुझे अच्छा नहीं लगता। इससे मुझे असहजता महसूस होती है।
उत्तर : एक बार मेरे एक रिश्तेदार, जिनकी आदत थी बहुत जोर से गाल खींचने की, उन्होंने मेरे गाल दबोच लिए। यह मुझे बहुत दर्दनाक और अप्रिय लगा, और मैं तुरंत वहाँ से हट गया।
उत्तर : अगर मैं रितु की जगह होता और मीना के मामा का हाथ पकड़ना मुझे अच्छा नहीं लगता, तो मैं विनम्रता से अपना हाथ खींच लेता। मैं उन्हें या मीना को स्पष्ट बता देता कि मुझे इस तरह छूना पसंद नहीं है। साथ ही, मैं यह बात अपने माता-पिता को भी जरूर बताता।
उत्तर : ऐसी स्थिति में बहुत कुछ किया जा सकता है:
उत्तर : इसका अंतर भरोसे और सहजता से जुड़ा है। रितु मीना की अच्छी सहेली थी, उस पर उसे पूरा भरोसा था और उसका साथ सुरक्षित और खुशनुमा लगता था। दूसरी ओर, मीना के मामा एक बड़े व्यक्ति थे जिनसे रितु का ज्यादा परिचय नहीं था। हो सकता है उनकी आवाज़, तरीका या फिर रितु की अपनी अनजान लोगों से डरने की भावना के कारण उसे उनका छूना अच्छा नहीं लगता था। हर बच्चे के मन में एक 'कम्फर्ट जोन' होता है, और उस जोन के बाहर के लोगों का छूना उसे असहज कर सकता है।
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