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UP Board Class 4 EVS (13. पहाड़ों से समुंदर तक) solution PDF

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UP Board Class 4 EVS (13. पहाड़ों से समुंदर तक) solution

UP Board Class 4 EVS 13. पहाड़ों से समुंदर तक Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 4 EVS आस-पास

पाठ - 13: पहाडों से समुंदर तक

01. नदी के चित्र को ध्यान से देखो और नीचे दिए गए। शब्दों को पढ़ो। चित्र और शब्दों की मदद से एक कहानी लिखो। अपनी कहानी के लिए कोई नाम भी सोचो।

नाव, बहता पानी, नीला, मछलियाँ, पानी के पौधे, नदी, बड़ा जहाज, तेल, नदी के किनारे, बदबू, फैक्ट्रियाँ, जानवर, कपड़े धोना, दूसरे काम, बदलाव, शहर।

उत्तर: मैं इस कहानी का नाम "नीली से काली नदी" रखता हूँ। एक समय की बात है, पहाड़ों से एक नन्ही सी धारा निकलती थी। यह धारा धीरे-धीरे एक सुंदर नदी बन गई। इस नदी का पानी इतना साफ और नीला था कि उसमें तैरती रंग-बिरंगी मछलियाँ और हरे पानी के पौधे साफ दिखाई देते थे। गाँव के लोग इस नदी से पानी भरते, नहाते और कपड़े धोते थे। कुछ लोग छोटी नावों से नदी पार भी करते थे।

समय बीतता गया और नदी के किनारे एक बड़ी फैक्ट्री बन गई। फैक्ट्री के कर्मचारी रहने के लिए वहीं बस गए और धीरे-धीरे एक छोटा शहर बन गया। अब नदी में फैक्ट्री का कचरा और गंदा पानी गिरने लगा। शहर के लोग भी अपने घरों का कूड़ा-करकट और गंदा पानी नदी में डालने लगे। कपड़े धोने और जानवरों को नहलाने से भी नदी गंदी होने लगी। फैक्ट्री के सामान के लिए आने-जाने वाले बड़े जहाज कभी-कभी तेल भी गिरा देते थे, जो पानी पर फैल जाता था।

इन सबके कारण नदी का साफ नीला पानी गंदा और मटमैला हो गया। पानी से बदबू आने लगी। मछलियाँ मरने लगीं और पानी के पौधे गायब हो गए। नदी का वह सुंदर रूप हमेशा के लिए बदल गया।

Q2. फिर से चित्र को देखो और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखो जहाँ से नदी निकलना शुरू हो रही है, वहाँ पानी का रंग कैसा है?

उत्तर: चित्र में जहाँ से नदी पहाड़ों से निकलना शुरू हो रही है, वहाँ पानी बिल्कुल साफ और स्वच्छ दिखाई देता है। साफ पानी का कोई अपना रंग नहीं होता, इसलिए वह रंगहीन होता है। परंतु, आसमान के नीले रंग के प्रतिबिंब के कारण और पानी की गहराई से, दूर से देखने पर वह नीला दिखाई देता है।

53. नदी में मछलियाँ कहीं ज्यादा हैं, कहीं कम। कहीं-कहीं तो मछलियाँ मरी हुई हैं। ऐसा क्‍यों हुआ होगा? चर्चा करो।

उत्तर: नदी में मछलियों की संख्या अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग है क्योंकि नदी का पानी हर जगह समान रूप से साफ नहीं है।

  • जहाँ मछलियाँ ज्यादा हैं: नदी का वह हिस्सा जहाँ अभी तक मानवीय गतिविधियाँ कम हुई हैं, वहाँ पानी साफ और ऑक्सीजन से भरपूर है। यह मछलियों के रहने और साँस लेने के लिए अच्छा वातावरण है, इसलिए वहाँ मछलियाँ अधिक संख्या में हैं।
  • जहाँ मछलियाँ कम हैं या मरी हुई हैं: नदी का वह हिस्सा जहाँ शहर और फैक्ट्रियाँ हैं, वहाँ लोगों ने कचरा, गंदा पानी और हानिकारक रसायन नदी में डाल दिए हैं। इससे पानी प्रदूषित हो गया है। गंदे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और हानिकारक पदार्थ बढ़ जाते हैं। मछलियाँ इस गंदे पानी में साँस नहीं ले पातीं और जहरीले पदार्थों के कारण मर जाती हैं।

54. गाँव में पहुँचने से पहले, नदी में क्या-क्या दिखाई दे रहा है?

उत्तर: चित्र में गाँव में पहुँचने से पहले, नदी बिल्कुल साफ और प्रदूषण मुक्त दिखाई दे रही है। उसमें बहुत सारी मछलियाँ तैरती हुई दिख रही हैं। पानी के पौधे भी हरे-भरे हैं। नदी का पानी नीला और स्वच्छ दिखता है।

65. नदी के पानी का रंग कहाँ-कहाँ बदला? यह क्यों बदला? चर्चा Het

उत्तर: चित्र में नदी के पानी का रंग दो मुख्य जगहों पर बदला हुआ दिखाई देता है:

  1. गाँव/बस्ती के पास: यहाँ पानी का रंग थोड़ा मटमैला हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि गाँव के लोग नदी में कपड़े धोते हैं, जानवरों को नहलाते हैं और अन्य घरेलू काम करते हैं, जिससे गंदगी पानी में मिल जाती है।
  2. शहर और फैक्ट्री के पास: यहाँ पानी का रंग सबसे ज्यादा गहरा और गंदा (भूरा या कालापन लिए हुए) दिखता है। इसका मुख्य कारण फैक्ट्रियों से निकलने वाला रासायनिक कचरा और रंगीन गंदा पानी है जो सीधे नदी में गिराया जा रहा है। शहर का कूड़ा और गंदा पानी भी इसमें मिलकर पानी के रंग और गुणवत्ता को बदल देता है।

56. चित्र में दिखाई गई जगहों में से तुम किस जगह रहना पसंद करोगे? क्‍यों?

उत्तर: मैं चित्र में दिखाई गई उस जगह पर रहना पसंद करूँगा जहाँ नदी गाँव से गुजर रही है। क्योंकि वहाँ नदी का पानी अभी भी काफी साफ और स्वच्छ दिख रहा है। वहाँ प्रकृति का सौंदर्य है, हरियाली है और शांति है। गाँव में रहने से मैं प्रदूषण से दूर रहूँगा और ताजी हवा व साफ पानी का आनंद ले पाऊँगा। शहर और फैक्ट्री के पास का प्रदूषित वातावरण मुझे पसंद नहीं है।

07. चित्र में जो कुछ हो रहा है, उसमें क्या तुम कुछ बदलनी चाहोगे? क्या और कैसे?

उत्तर: हाँ, मैं चित्र में दिख रही नदी की स्थिति में दो बड़े बदलाव करना चाहूँगा:

  1. प्रदूषण रोकना: मैं चाहूँगा कि फैक्ट्रियों और शहर का गंदा पानी सीधे नदी में न गिराया जाए। इसके लिए फैक्ट्रियों को अपने कचरे को साफ करने के प्लांट (ETP) लगाने चाहिए। शहर के गंदे पानी (सीवेज) को भी ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके ही नदी में छोड़ना चाहिए।
  2. जागरूकता फैलाना: गाँव और शहर के लोगों को नदी को साफ रखने के लिए जागरूक करूँगा। उन्हें समझाऊँगा कि नदी में कूड़ा न फेंके, कपड़े व बर्तन न धोएँ और नदी को गंदा करने वाली किसी भी गतिविधि से बचें।
इस तरह, नदी फिर से अपने मूल स्वरूप में वापस आ सकती है।

68. अगर तुम्हें पानी पीना हो, तो नदी के कौन-से हिस्से का पानी पीना चाहोगे? क्‍यों?

उत्तर: अगर मुझे नदी का पानी पीना ही हो, तो मैं नदी के उस हिस्से का पानी पीना चाहूँगा जो पहाड़ों से निकलने के बाद सबसे पहले आता है, यानी गाँव से पहले वाला हिस्सा। क्योंकि चित्र में साफ दिख रहा है कि वहाँ नदी का पानी सबसे ज्यादा साफ और स्वच्छ है। उस हिस्से में अभी तक मानवीय गतिविधियों का प्रदूषण नहीं पहुँचा है, इसलिए वह पीने के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित होगा। फिर भी, किसी भी नदी का पानी बिना उबाले या फिल्टर किए पीना ठीक नहीं है।

09. चित्र के आखिर में नदी समुद्र में मिल गई। क्या तुमने कभी समुद्र देखा है? कहाँ? फिल्म में यो और कहीं?

उत्तर: हाँ, मैंने समुद्र देखा है। मैं गर्मियों की छुट्टियों में अपने परिवार के साथ गोवा गया था और वहाँ पर अरब सागर का समुद्र तट देखा था। मैंने टीवी पर डिस्कवरी चैनल पर भी समुद्र के बारे में कई कार्यक्रम देखे हैं।

010. क्या तुम कभी किसी नदी या समुद्र के पास गए हो? कब?

उत्तर: हाँ, मैं पिछले साल दिवाली की छुट्टियों में अपने मामा के साथ हरिद्वार गया था। वहाँ मैंने पवित्र नदी गंगा के किनारे घूमा और उसकी धारा देखी। समुद्र के पास मैं गोवा की यात्रा के दौरान गया था।

011. अपने हाथों से करके दिखाओ कि समुद्र की लहरें कैसे उठती हैं।

उत्तर: समुद्र की लहरें पानी के ऊपर उठने और गिरने जैसी गति से बनती हैं। इसे हाथों से दिखाने के लिए:

  1. एक बड़े बर्तन या टब में पानी भर लो।
  2. अपनी हथेली को पानी की सतह के समानांतर रखो।
  3. अब हथेली को आगे-पीछे धीरे-धीरे हिलाओ।
तुम देखोगे कि तुम्हारे हाथ के आगे पानी ऊपर उठकर एक छोटी लहर बनाता है और फिर आगे बढ़ जाता है। ठीक इसी तरह हवा के दबाव से समुद्र में बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं।

012. क्या समुद्र का पानी पीया जा सकता है? क्यों?

उत्तर: नहीं, समुद्र का पानी सीधे पीने के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसके दो मुख्य कारण हैं:

  1. खारापन (नमक): समुद्र के पानी में बहुत अधिक मात्रा में नमक (लगभग 35 ग्राम प्रति लीटर) घुला होता है। यह नमक हमारे शरीर के लिए हानिकारक है। इसे पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और गुर्दे खराब हो सकते हैं।
  2. अशुद्धियाँ: समुद्र के पानी में सिर्फ नमक ही नहीं, बल्कि और भी कई खनिज और कभी-कभी प्रदूषक तत्व मिले होते हैं, जो पीने के लिए सुरक्षित नहीं हैं।
समुद्र का पानी पीने लायक बनाने के लिए उसे एक विशेष प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) से नमक हटाकर साफ करना पड़ता है।

0513. क्या पूरे साल में नदी, तालाब और झरनों के पानी में कुछ बदलाव होते हैं? किस तरह के बदलाव होते हैं? चर्चा करो।

उत्तर: हाँ, पूरे साल नदी, तालाब और झरनों के पानी में मौसम के अनुसार कई बदलाव होते रहते हैं:

  • बरसात का मौसम (वर्षा ऋतु): इस मौसम में बारिश का पानी नदियों और तालाबों में भर जाता है। जलस्तर (पानी की ऊँचाई) सबसे अधिक हो जाती है। पानी का बहाव तेज हो जाता है और कई बार पानी का रंग मिट्टी मिलने से मटमैला हो सकता है। झरने और भी तेज और खूबसूरत दिखते हैं।
  • सर्दी का मौसम (शीत ऋतु): इस मौसम में बारिश नहीं होती, इसलिए पानी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। पानी ठंडा और साफ दिखाई देता है। कुछ ठंडे इलाकों में पानी जमकर बर्फ भी बन सकता है।
  • गर्मी का मौसम (ग्रीष्म ऋतु): गर्मियों में तापमान बहुत बढ़ जाता है, जिससे पानी का वाष्पीकरण (भाप बनकर उड़ना) तेजी से होता है। इस कारण नदियों और तालाबों का जलस्तर सबसे कम हो जाता है। कई छोटी नदियाँ और तालाब सूख भी सकते हैं। पानी गर्म हो जाता है।

७14. बरसात के मौसम में जितना पानी तालाब या नदी में होता है, क्या उतना ही पानी गर्मी के दिनों में भी रहता है?

उत्तर: नहीं, बरसात के मौसम में तालाब या नदी में जितना पानी होता है, उतना पानी गर्मी के दिनों में नहीं रहता। बरसात में पानी का स्तर सबसे ऊँचा होता है क्योंकि लगातार बारिश से पानी भरता रहता है। गर्मियों में बारिश नहीं होती और तेज धूप के कारण पानी वाष्प बनकर उड़ता रहता है, जिससे पानी की मात्रा धीरे-धीरे कम होती जाती है और जलस्तर नीचे गिर जाता है।

0615. अपने गाँव या शहर के आस-पास की नदी, झील या तालाब के बारे में जानकारी इकट्ठी करो। क्या उसके पानी में सर्दी, गर्मी या बरसात के महीनों में कुछ बदलाव होते हैं?

उत्तर: मैं दिल्ली में रहता हूँ और यहाँ यमुना नदी बहती है। बड़ों से पूछने और अपने अवलोकन के आधार में पाया कि:

  • बरसात में (जुलाई-सितंबर): यमुना नदी में पानी का स्तर काफी बढ़ जाता है और पानी का बहाव तेज हो जाता है। पानी का रंग भूरा हो जाता है क्योंकि बारिश के साथ मिट्टी बहकर आती है।
  • सर्दी में (नवंबर-फरवरी): पानी का स्तर कम हो जाता है और बहाव धीमा पड़ जाता है। सुबह के समय नदी के किनारे कोहरा दिखाई देता है।
  • गर्मी में (अप्रैल-जून): यह सबसे चिंताजनक समय होता है। नदी में पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है। कई जगहों पर नदी की चौड़ाई सिकुड़ जाती है और पानी की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है।

516. उसमें किस तरह की मछलियाँ पाई जाती हैं?

उत्तर: यमुना नदी में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं। कुछ स्थानीय नाम हैं: रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प आदि। दुर्भाग्य से, प्रदूषण के कारण मछलियों की संख्या और प्रजातियाँ पहले के मुकाबले कम हो गई हैं।

5७17. उसके आस-पास किस तरह के पेड़-पौधे उगते हैं?

उत्तर: नदी के किनारों पर अक्सर ऐसे पेड़-पौधे उगते हैं जिन्हें अधिक पानी की जरूरत होती है या जो नम मिट्टी में जीवित रह सकते हैं। यमुना नदी के किनारे बबूल, कीकर, नीम, पीपल जैसे पेड़ देखे जा सकते हैं। पानी के किनारे घास, सरकंडे और दूब भी उगी हुई दिखती है। कुछ जगहों पर जलीय पौधे भी होते हैं।

518. वहाँ कौन-सी तरह के पक्षी आते हैं?

उत्तर: नदी के किनारे पानी और भोजन की तलाश में कई प्रकार के पक्षी आते हैं। मैंने वहाँ बगुला (सफेद और भूरे), किंगफिशर (रामचिरैया), कौवे, गिद्ध, चील, घरेलू गौरैया, मैना और सर्दियों में प्रवासी पक्षी जैसे विभिन्न प्रकार की बत्तखें देखी हैं।

019. क्या तुमने कभी बाढ़ के बारे में सुना या पढ़ा है? कहाँ?

उत्तर: हाँ, मैंने अखबारों और टीवी समाचारों में बाढ़ के बारे में बहुत बार सुना और पढ़ा है। हर साल बरसात के मौसम में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में बाढ़ की खबरें आती रहती हैं। मैंने पिछले साल बिहार के कुछ जिलों में आई भयंकर बाढ़ के बारे में पढ़ा था।

520. जब बाढ़ आती है, तब क्या होता है?

उत्तर: जब बाढ़ आती है तो नदी का पानी अपने किनारों (तटबंधों) को तोड़कर या लाँघकर आसपास के इलाकों में फैल जाता है। इससे:

  • खेत, गाँव और शहर के कई हिस्से पानी में डूब जाते हैं।
  • फसलें नष्ट हो जाती हैं।
  • लोगों के घर टूट जाते हैं या पानी से भर जाते हैं, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागना पड़ता है।
  • सड़कें और पुल बह जाते हैं, जिससे यातायात ठप्प हो जाता है।
  • बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो जाती है।
  • पानी में बहने से या डूबने से जान-माल का बहुत नुकसान होता है।
  • बाढ़ का पानी उतरने के बाद गंदगी और बीमारियाँ फैलने का खतरा रहता है।

521. क्‍या तुमने कभी किसी नदी या तालाब में गंदा पानी देखा है?

उत्तर: हाँ, मैंने अक्सर शहरी इलाकों से गुजरने वाली नदियों और तालाबों में गंदा पानी देखा है। यमुना नदी का पानी दिल्ली में कई जगहों पर बहुत गंदा और झागयुक्त दिखाई देता है। कई पार्कों के तालाबों का पानी भी हरा हो जाता है और उसमें से बदबू आती है।

522. तुम कैसे जानोगे कि पानी गंदा है?

उत्तर: हम अपनी इंद्रियों (आँख, नाक) की मदद से पानी के गंदा होने का पता लगा सकते हैं:

  1. देखकर (आँखों से): गंदा पानी साफ और पारदर्शी नहीं होता। उसका रंग बदला हुआ हो सकता है - जैसे पीला, भूरा, हरा या कालापन लिए हुए। पानी के ऊपर झाग, तेल की परत, तैरता हुआ कचरा (प्लास्टिक, कागज आदि) दिखाई दे सकता है।
  2. सूँघकर (नाक से): गंदे पानी से अक्सर तेज और अप्रिय गंध आती है। यह गंध सड़े हुए अंडे, कचरे या केमिकल जैसी हो सकती है।
ध्यान रहे: कुछ पानी देखने में साफ हो सकता है लेकिन उसमें हानिकारक कीटाणु या रसायन घुले हो सकते हैं, जिन्हें सिर्फ देखकर या सूँघकर नहीं पहचाना जा सकता। इसलिए पीने का पानी हमेशा उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए।

5623. अगर पानी देखने में साफ हो, तो क्या यह जरूरी है कि वह पीने के लिए भी ठीक होगा? चर्चा करो।

उत्तर: नहीं, यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि देखने में साफ पानी पीने के लिए भी सुरक्षित होगा। देखने में साफ पानी भी निम्नलिखित खतरों से युक्त हो सकता है:

  • अदृश्य कीटाणु: पानी में हैजा, टाइफाइड, दस्त जैसी बीमारियाँ फैलाने वाले लाखों सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया, वायरस) हो सकते हैं, जो आँखों से नहीं दिखते।
  • घुले हुए हानिकारक पदार्थ: कुछ रसायन जैसे आर्सेनिक, लेड, कीटनाशक आदि पानी में घुल जाते हैं लेकिन पानी का रंग या स्वरूप नहीं बदलते। ये लंबे समय में शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  • क्लोरीन या अन्य कीटाणुनाशक: कभी-कभी

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Other Chapters of Class 4 EVS
1. चलो चलें स्कूल!
2. कान-कान मे
3. नन्दू हाथी
4. अमृता की कहानी
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6. ओमना का सफर
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