UP Board Class 4 EVS 16. चुं चुं कऱती आई चिड़िय़ा is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: गिजुभाई बधेका ने यह पत्र लगभग 75 से 80 साल पहले लिखा था। यह पत्र आज से बहुत पहले का है, जब हमारे दादा-नाना भी छोटे बच्चे थे।
उत्तर: मेरे दादाजी उस समय लगभग 5 साल के थे। मेरी दादीजी का तब जन्म भी नहीं हुआ था। मेरे नानाजी उस समय 10 साल के थे और नानीजी 3 साल की थीं।
उत्तर: इस पत्र में जिन पक्षियों के नाम आए हैं, उनमें से मैंने कौवा, गोरैया (चिड़िया), कबूतर, कोयल और दर्जिन चिड़िया को देखा है। ये पक्षी हमारे आस-पास अक्सर दिखाई देते हैं।
उत्तर: मैंने इन पक्षियों के अलावा मैना, तोता, बुलबुल, चील, गिद्ध, हंस, बतख, सारस, उल्लू और मोर जैसे कई पक्षियों को भी देखा है।
उत्तर: हाँ, मैंने पक्षी का घोंसला देखा है। मैंने एक घोंसला हमारे घर के आँगन में आम के पेड़ पर देखा था। एक घोंसला मैंने स्कूल की इमारत की एक खिड़की के कोने में भी देखा है।
उत्तर: मेरा मनपसंद पक्षी मोर है क्योंकि उसके पंख बहुत सुंदर और रंग-बिरंगे होते हैं। वह जब नाचता है तो बहुत अच्छा लगता है।
उत्तर: यह एक मजेदार गतिविधि है। विद्यार्थियों को स्वयं अपने मनपसंद पक्षी की तरह उड़ने का अभिनय करना चाहिए और उसकी आवाज निकालनी चाहिए, जैसे कबूतर की आवाज "गुटर गूँ", कोयल की आवाज "कुहू कुहू" या कौवे की आवाज "काँव-काँव"।
उत्तर: यह पक्षी मोर है। मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है। उसकी लंबी और सुंदर पूँछ पर चंद्रिका (आँख) जैसे निशान होते हैं जो सिक्के जैसे दिखते हैं और उसका शरीर नीले रंग का होता है।
उत्तर: हाँ, कठफोड़वा (वुडपेकर) नामक पक्षी भी बसंत गौरी की तरह अपनी मजबूत चोंच से पेड़ के तने को काटकर उसमें घोंसला बनाता है।
अपने घर में या आस-पास किसी पक्षी का घोंसला ध्यान से देखो। ध्यान रहे, घोंसले के बहुत पास नहीं जाना और उसे छूना भी नहीं। गलती से भी छू लिया, तो फिर पक्षी घोंसले में दोबारा नहीं आएँगे। कुछ दिन तक किसी एक घोंसले को देखो और इन बातों को पता करके लिखो -
उत्तर: घोंसला हमारे घर के सामने वाले नीम के पेड़ की एक मोटी और ऊँची डाल पर बना हुआ है।
उत्तर: घोंसला सूखी घास, पतले तिनके, पत्तियों के रेशे, कुछ रूई और पतले कपड़े के टुकड़ों से बना हुआ है।
उत्तर: घोंसला पूरी तरह बन चुका है और अब पक्षी उसमें रह रहा है।
उत्तर: हाँ, मैं पक्षी को पहचानता हूँ। यह गोरैया (घरेलू चिड़िया) है। यह छोटी और भूरे-स्लेटी रंग की होती है।
उत्तर: पक्षी घोंसले में छोटे-छोटे कीड़े, दाने, रोटी के छोटे टुकड़े और कभी-कभी फल के टुकड़े लेकर आते हैं।
उत्तर: हाँ, घोंसले में एक पक्षी लगातार बैठा रहता है। शायद वह अंडे सेने का काम कर रहा है।
उत्तर: हाँ, मुझे लगता है कि घोंसले में अंडे हैं क्योंकि एक पक्षी लगातार वहाँ बैठा रहता है और दूसरा पक्षी उसके लिए खाना लाता है।
उत्तर: अभी तो घोंसले से कोई आवाज नहीं आ रही है। लेकिन जब दूसरा पक्षी खाना लेकर आता है, तब हल्की-हल्की "चिर्र-चिर्र" की आवाज आती है।
उत्तर: अगर घोंसले में बच्चे हैं, तो उनके माँ-बाप छोटे-छोटे कीड़े, फूलों के परागकण और नरम दाने लाते हैं ताकि बच्चे आसानी से खा सकें।
उत्तर: पक्षी एक घंटे में लगभग 4 से 5 बार घोंसले पर आते-जाते हैं। वे या तो खाना लाते हैं या फिर बैठे हुए पक्षी की जगह लेने आते हैं।
उत्तर: पक्षी के बच्चे आमतौर पर अंडे से निकलने के लगभग 15 से 20 दिन बाद घोंसला छोड़कर उड़ने लगते हैं।
उत्तर: विद्यार्थियों को स्वयं अपनी कॉपी में देखे गए घोंसले का चित्र बनाना चाहिए। घोंसले का आकार कटोरे जैसा होता है और वह पेड़ की डाल पर टिका होता है।
उत्तर: यह एक रचनात्मक गतिविधि है। विद्यार्थी सूखी घास, तिनके, रूई, लकड़ी की छोटी डंडियाँ और मिट्टी का इस्तेमाल करके एक छोटा सा घोंसला बना सकते हैं। फिर रंगीन कागज से एक पक्षी बनाकर उसमें बिठा सकते हैं।
उत्तर: यह एक समूह गतिविधि है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी पसंद के एक जानवर का चित्र बनाकर रंग भरना चाहिए और फिर उसे कैंची से सावधानीपूर्वक काट लेना चाहिए।
उत्तर: पहले समूह के विद्यार्थी चार्ट पर भूरा रंग करके जमीन का दृश्य बनाएँ। फिर शेर, हाथी, गाय, कुत्ता, बिल्ली, चूहा, साँप आदि जमीन पर रहने वाले जानवरों के चित्र चिपकाएँ।
उत्तर: दूसरे समूह के विद्यार्थी चार्ट पर नीला रंग करके पानी, कमल के पौधे और पत्थर बनाएँ। फिर मछली, मगरमच्छ, मेंढक, कछुआ, ऑक्टोपस, हिप्पोपोटेमस आदि जलचर जानवरों के चित्र चिपकाएँ।
उत्तर: तीसरे समूह के विद्यार्थी चार्ट पर हरे रंग से पेड़, लताएँ और पत्ते बनाएँ। फिर बंदर, गिलहरी, कोआला, पक्षी, चमगादड़, लंगूर आदि पेड़ों पर रहने वाले जानवरों के चित्र चिपकाएँ।
उत्तर: तीनों समूहों द्वारा बनाए गए चार्ट्स को कक्षा की दीवार पर सजाएँ। इससे कक्षा सुंदर लगेगी और सभी को जानवरों के अलग-अलग आवासों के बारे में जानने को मिलेगा।
उत्तर: मेरी उम्र 9 साल है।
उत्तर: मेरे मुँह में इस समय कुल 24 दाँत हैं। इनमें कुछ दूध के दाँत और कुछ नए स्थायी दाँत हैं।
उत्तर: अब तक मेरे 6 दाँत टूट गए हैं। ये सामने के दूध के दाँत थे।
उत्तर: मेरे 5 नए स्थायी दाँत आ चुके हैं जो टूटे हुए दूध के दाँतों की जगह आए हैं।
उत्तर: मेरे एक दूध का दाँत (नीचे का एक दाढ़) टूटा है, लेकिन अभी तक उसकी जगह पर नया दाँत नहीं आया है।
उत्तर: हाँ, दाँत अलग-अलग तरह के होते हैं। सामने के दाँत पतले और नुकीले होते हैं जबकि पीछे के दाँत चौड़े और सपाट होते हैं। ये अलग-अलग काम करते हैं।
उत्तर: विद्यार्थियों को अपनी कॉपी में दो चित्र बनाने चाहिए:
सामने का दाँत (कर्तन दाँत): पतला, नुकीला और चपटा, जैसे छुरी का फल।
पीछे का दाँत (चर्वणक दाँत): चौड़ा, मोटा और ऊपर से उभार वाला, जैसे पहाड़ी इलाका।
उत्तर: हाँ, मैं इन दाँतों में स्पष्ट अंतर देख सकता हूँ। सामने के दाँत काटने के लिए होते हैं, ये पतले और तेज धार वाले होते हैं। पीछे के दाँत चबाने और पीसने के लिए होते हैं, इसलिए ये बड़े, मोटे और ऊपर से थोड़े खुरदरे होते हैं।
उत्तर: अगर सामने के दाँत नहीं होंगे तो अमरूद को काटना मुश्किल होगा। मैं अमरूद के छोटे-छोटे टुकड़े चाकू से काट लूँगा या फिर उसे पीछे के दाँतों से दबाकर तोड़ने की कोशिश करूँगा और फिर पीछे के दाँतों से ही चबा-चबाकर खाऊँगा।
उत्तर: अगर पीछे के दाँत नहीं होंगे तो रोटी को चबाना और पीसना मुश्किल होगा। मैं रोटी के बहुत छोटे-छोटे टुकड़े सामने के दाँतों से काटकर सीधे निगलने की कोशिश करूँगा या फिर रोटी को दाल या सब्जी में भिगोकर नरम बना लूँगा ताकि चबाने की जरूरत कम पड़े।
उत्तर: अगर मेरे मुँह में एक भी दाँत नहीं होगा, तो मैं केवल वही चीजें खा सकूँगा जिन्हें चबाने की जरूरत नहीं होती। जैसे - दूध, दही, खीर, केला, आइसक्रीम, सूप, दलिया, उबले आलू का मसला हुआ भर्ता आदि।
उत्तर: विद्यार्थियों को अपनी कॉपी में एक चेहरे का चित्र बनाना चाहिए जिसमें होंठ अंदर की ओर धंसे हुए हों और मुँह के आस-पास की त्वचा ढीली और झुर्रीदार दिखे, क्योंकि दाँत होंठों को सहारा देते हैं। बिना दाँतों के चेहरा बूढ़ा और अलग दिखता है।
उत्तर: जिन बूढ़े लोगों के दाँत नहीं होते, वे कठोर और कुरकुरी चीजें जैसे सेब, नाशपाती, गाजर, मूँगफली, चना, बिस्कुट, पापड़ आदि आसानी से नहीं खा पाते। उन्हें नरम और आसानी से पचने वाला भोजन ही खाना पड़ता है।
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