UP Board Class 4 EVS 18. पाऩी कहीं ज़्यादा कहीं कम is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
01. गंदा पानी पीने से शरीर को क्या नुकसान हो सकता है?
उत्तर: गंदा पानी पीने से पेट में कीड़े पनच सकते हैं और हमें बहुत सी बीमारियाँ हो सकती हैं, जैसे कि पेट दर्द, उल्टी, दस्त (डायरिया), टायफाइड और पीलिया। ये बीमारियाँ हमें कमजोर बना देती हैं और स्कूल जाने से भी रोक सकती हैं।
उत्तर: हाँ, कभी-कभी हमारे इलाके के नलों से गंदा और मटमैला पानी आता है। ऐसा अक्सर तब होता है जब बारिश के मौसम में पानी की मुख्य पाइपलाइन में कोई दरार आ जाती है या मरम्मत का काम चल रहा होता है, जिससे मिट्टी और गंदगी पानी में घुल जाती है।
उत्तर: हाँ, मेरे पड़ोस में एक बच्चा गंदा पानी पीने के कारण बीमार हो गया था। उसे तेज बुखार और पेट में दर्द हुआ। डॉक्टर ने बताया कि यह टायफाइड है, जो दूषित पानी से फैलता है। उसे कई दिनों तक दवाई लेनी पड़ी और आराम करना पड़ा।
उत्तर: सुगुणा के परिवार वाले शायद दूर से साफ पानी लाने के लिए कुएँ या हैंडपंप पर लंबी कतार में लगते होंगे। वे पानी को साफ करने के लिए उसे अच्छी तरह उबालते होंगे या फिर कपड़े से छानकर पीते होंगे। कभी-कभी वे बोतलबंद पानी भी खरीदते होंगे, लेकिन यह महँगा पड़ता होगा।
उत्तर: मेहमान ने शायद इसलिए कोल्ड ड्रिंक पीने से मना किया होगा क्योंकि कोल्ड ड्रिंक में बहुत अधिक चीनी और केमिकल्स होते हैं, जो सेहत के लिए अच्छे नहीं होते। वे शायद यह भी सोच रहे होंगे कि जहाँ साफ पानी की कमी है, वहाँ कोल्ड ड्रिंक पर पैसा खर्च करने से अच्छा है कि उस पैसे से सभी के लिए साफ पानी का इंतजाम किया जाए।
उत्तर: दीपक की बस्ती में शायद पानी की आपूर्ति केवल कुछ घंटों के लिए ही होती है, इसलिए सभी लोगों को उसी समय में बाल्टी-मटके भरने के लिए एक ही नल पर लाइन में लगना पड़ता है। रजिया के घर में शायद ऊपर एक बड़ी पानी की टंकी (ओवरहेड टैंक) है, जो उस समय भर ली जाती है जब नल से पानी आता है। फिर पूरे दिन इस टंकी से पाइप के जरिए घर के सभी नलों में पानी आता रहता है।
उत्तर: हाँ, मैंने अखबार में अक्सर पानी से जुड़ी खबरें पढ़ी हैं। जैसे कि किसी शहर में पानी की भारी किल्लत होना, कहीं बाढ़ आने से पानी भर जाना, या फिर किसी कॉलोनी में गंदे पानी की सप्लाई के कारण लोगों का बीमार पड़ना। एक खबर में यह भी था कि लोगों ने पानी बचाने के लिए वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) शुरू किया है।
उत्तर: हाँ, गर्मियों के मौसम में अक्सर हमारे घर में पानी की किल्लत हो जाती है। जब बहुत तेज गर्मी पड़ती है, तो पानी के स्रोत सूखने लगते हैं और नगर निगम द्वारा पानी की सप्लाई भी कम समय के लिए होती है, जिससे पानी जल्दी खत्म हो जाता है।
उत्तर: जब पानी की किल्लत हुई, तो हमने पानी बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। नहाने और कपड़े धोने के पानी को फेंकने की बजाय, हमने उसे फ्लश और पौधों में डालने के काम में लिया। हमने एक बड़ा ड्रम भी खरीदा, ताकि जब पानी आए तो उसे ज्यादा से ज्यादा भरकर रख सकें।
उत्तर: हाँ, मैं पानी में खेलना बहुत पसंद करता/करती हूँ। पिछली गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने चाचा जी के घर समुद्र के किनारे गया/गई था। वहाँ मैंने समुद्र के किनारे लहरों के साथ खूब खेला और बाल्टी-फावड़े से बालू के महल भी बनाए।
उत्तर: हाँ, बारिश के मौसम में तालाब या नाले के पानी में खेलने से मना किया जाता है। माँ कहती हैं कि इन जगहों का पानी गंदा होता है और उसमें कीड़े-मकोड़े या बीमारी फैलाने वाले जीव हो सकते हैं। साथ ही, गहरे पानी में डूबने का भी खतरा रहता है।
उत्तर: वॉटर पार्क में खेलने के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी अक्सर भूमिगत कुओं या बोरवेल से आता है। इसे बड़ी-बड़ी मोटरों के द्वारा खींचकर बड़ी टंकियों में भर लिया जाता है। फिर इस पानी को फिल्टर करके और उसमें क्लोरीन जैसे केमिकल मिलाकर साफ किया जाता है, ताकि यह खेलने के लिए सुरक्षित रहे।
उत्तर: रजिया अखबार में पढ़कर परेशान हो गई क्योंकि उसमें खबर थी कि उनके इलाके में सीवर (गटर) की एक पाइप फट गई थी और उसका गंदा पानी पीने के साफ पानी की पाइपलाइन में मिल गया था। इसका मतलब था कि नल से आने वाला पानी पीने लायक नहीं रह गया था और उसे पीने से लोग बीमार पड़ सकते थे।
उत्तर: हाँ, उस पानी को फेंकने की बजाय कई दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता था। जैसे कि पौधों में पानी देने, शौचालय (टॉयलेट) के फ्लश में डालने, फर्श या गाड़ी धोने, या फिर दरवाजे-खिड़कियाँ पोंछने के काम में लाया जा सकता था। इस तरह पानी की बर्बादी भी नहीं होती।
उत्तर: रजिया ने पानी को साफ करने के लिए उबालने (बॉयलिंग) का तरीका अपनाया। उसने पानी को एक साफ बर्तन में डालकर अच्छी तरह उबाला। उबलने के बाद पानी को ठंडा होने दिया। इस प्रक्रिया से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक कीटाणु और बैक्टीरिया मर जाते हैं, जिससे पानी पीने के लिए सुरक्षित हो जाता है।
उत्तर: पानी साफ करने के कई तरीके हैं:
उत्तर: अगर रजिया ने खबर नहीं पढ़ी होती और सभी ने वह गंदा पानी बिना उबाले पी लिया होता, तो पूरा परिवार बीमार पड़ सकता था। उन्हें पेट में तेज दर्द, बार-बार दस्त और उल्टी, तेज बुखार जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती थीं। छोटे बच्चे और बुजुर्गों की तो हालत और भी गंभीर हो सकती थी, उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ सकता था।
उत्तर: (यह क्रियाकलाप विद्यार्थियों द्वारा स्वयं करने के लिए है। विद्यार्थियों को सलाह दें कि वे अखबारों से पानी की किल्लत, बाढ़, जल संरक्षण, नदी प्रदूषण आदि से जुड़ी खबरें काटकर एक कॉलाज बनाएँ और कक्षा में उस पर चर्चा करें।)
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उत्तर: हमारे स्कूल में पीने के पानी के लिए नल और बड़ी टंकियाँ (वाटर कूलर) हैं, इसलिए कहीं और से पानी लाने की जरूरत नहीं पड़ती।
उत्तर: हाँ, हमारे स्कूल के सभी नलों और वाटर कूलर में पानी आता है। कभी-कभी किसी एक की मरम्मत हो रही होती है, लेकिन बाकी सभी ठीक काम करते हैं।
उत्तर: नहीं, हमारे स्कूल में कोई नल बहता या टपकता नहीं रहता। अगर कभी ऐसा होता है, तो तुरंत स्कूल के माली या चपरासी उसे ठीक करवा देते हैं ताकि पानी की बर्बादी न हो।
उत्तर: हाँ, स्कूल में रखे गए पानी के सभी बर्तन (जैसे मटके या घड़े) हमेशा पानी से भरे रहते हैं और उनके ऊपर ढक्कन लगे रहते हैं। इससे पानी साफ और धूल-मिट्टी से बचा रहता है।
उत्तर: हाँ, बिल्कुल। हर शनिवार को स्कूल के सफाई कर्मचारी सभी पानी के बर्तनों को खाली करके, साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोते हैं और धूप में सुखाते हैं। इससे बर्तनों में कीटाणु नहीं पनप पाते।
उत्तर: हमारे स्कूल में पीने का पानी नगर निगम की सप्लाई से आता है, जो पहले से ही साफ किया हुआ होता है। फिर भी, स्कूल में लगे वाटर प्यूरीफायर (RO मशीन) उस पानी को एक बार फिल्टर करते हैं, जिससे वह और भी साफ और सुरक्षित हो जाता है।
उत्तर: हाँ, हैं। हर मटके के पास एक लोटा या मग (कप) रखा हुआ है, जिसकी मदद से बच्चे पानी निकालकर पीते हैं। हर वाटर कूलर के साथ भी एक मग बँधा हुआ है। इससे कोई भी अपने हाथ या मुँह सीधे नल या मटके के संपर्क में नहीं लाता, जिससे पानी गंदा होने से बच जाता है।
उत्तर: हाँ, पानी पीने की जगह (जैसे वाटर कूलर के आसपास और नल के नीचे) की रोज सुबह और दोपहर में सफाई की जाती है। फर्श को पोंछा जाता है ताकि वह गीला और फिसलन भरा न रहे और वहाँ सफाई बनी रहे।
उत्तर: पानी पीने की जगहें गंदी हो जाती हैं क्योंकि कभी-कभी बच्चे पानी पीते समय लोटे से पानी गिरा देते हैं या मुँह धोते हैं। गिरा हुआ पानी फर्श पर जमा हो जाता है और उस पर धूल-मिट्टी चिपक जाती है। अगर उस जगह की नियमित सफाई न हो, तो वह चिपचिपी और गंदी हो सकती है।
उत्तर: इन जगहों को साफ रखने के लिए हम यह कर सकते हैं:
उत्तर: हमारे स्कूल में मटकों और लोटों की धुलाई हर शनिवार को की जाती है। यह काम स्कूल के सफाई कर्मचारी और माली मिलकर करते हैं। वे उन्हें गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करते हैं।
उत्तर: हमारे स्कूल में कुल लगभग 1200 बच्चे पढ़ते हैं, जो कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक में हैं।
उत्तर: हमारे स्कूल में पीने के पानी के लिए ये सुविधाएँ हैं:
उत्तर: हाँ, ये सभी सुविधाएँ बच्चों के लिए काफी हैं। क्योंकि पानी पीने के समय (जैसे लंच ब्रेक में) सभी बच्चे एक साथ नहीं आते, बल्कि अलग-अलग समय पर आते हैं, इसलिए कहीं भी भीड़ नहीं लगती और सभी को आसानी से पानी मिल जाता है।
उत्तर: इन जगहों की सफाई का जिम्मा स्कूल के सफाई कर्मचारियों का है। वे सुबह स्कूल खुलने से पहले और दोपहर के ब्रेक के बाद पूरे स्कूल परिसर की सफाई करते हैं, जिसमें पानी पीने की जगहें भी शामिल हैं।
उत्तर: नल या मटके के नीचे गिरा हुआ पानी फर्श पर बने छोटे नालों (ड्रेनेज) में बह जाता है। ये नाले स्कूल के बाहर बने बड़े नाले (सीवर) से जुड़े होते हैं, जहाँ से यह पानी शहर की मुख्य सीवर लाइन में चला जाता है।
उत्तर:
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