UP Board class 9 Maths 10. वृत्त is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
खाली स्थान भरिए।
(i) वृत्त का केन्द्र वृत्त के .................... में स्थित है (बहिर्भाग/अभ्यन्तर)।
(ii) एक बिन्दु, जिसकी वृत्त के केन्द्र से दूरी त्रिज्या से अधिक हो, वृत्त के ............ में स्थित होता है (बहिर्भाग/अभ्यन्तर)|
(iii) वृत्त की सबसे बड़ी जीवा वृत्त का .................. होती है।
(iv) एक चाप ..................... होता है, जब इसके सिरे एक व्यास के सिरे हों।
(v) वृत्तखण्ड एक चाप तथा .................... के बीच का भाग होता है।
(vi) एक वृत्त, जिस तल पर स्थित है, उसे ....................... भागों में विभाजित करता है।
हल:
(i) वृत्त का केन्द्र वृत्त के अभ्यन्तर में स्थित होता है।
(ii) एक बिन्दु, जिसकी वृत्त के केन्द्र से दूरी त्रिज्या से अधिक हो, वृत्त के बहिर्भाग में स्थित होता है।
(iii) वृत्त की सबसे बड़ी जीवा वृत्त का व्यास होती है।
(iv) एक चाप अर्धवृत्त होता है, जब इसके सिरे एक व्यास के सिरे हों।
(v) वृत्तखण्ड एक चाप तथा जीवा के बीच का भाग होता है।
(vi) एक वृत्त, जिस तल पर स्थित है, उसे तीन भागों में विभाजित करता है। ये तीन भाग हैं: वृत्त का अभ्यन्तर, वृत्त की परिधि और वृत्त का बहिर्भाग।
लिखिए, सत्य या असत्य। अपने उत्तर के कारण दीजिए।
(i) केन्द्र को वृत्त पर किसी बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखण्ड वृत्त की त्रिज्या होती है।
(ii) एक वृत्त में समान लम्बाई की परिमित जीवाएँ होती हैं।
(iii) यदि एक वृत्त को तीन बराबर चापों में बाँट दिया जाए, तो प्रत्येक भाग दीर्घ चाप होता है।
(iv) वृत्त की एक जीवा, जिसकी लम्बाई त्रिज्या से दो गुनी हो, वृत्त का व्यास है।
(v) त्रिज्यखण्ड, जीवा एवं संगत चाप के बीच का क्षेत्र होता है।
(vi) वृत्त एक समतल आकृति है।
हल:
(i) सत्य। कारण: त्रिज्या की परिभाषा के अनुसार, वृत्त के केन्द्र को वृत्त पर स्थित किसी भी बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखण्ड ही त्रिज्या कहलाता है।
(ii) असत्य। कारण: किसी वृत्त में समान लम्बाई वाली जीवाओं की संख्या अपरिमित (अनंत) होती है, परिमित (सीमित) नहीं। उदाहरण के लिए, एक ही लम्बाई के कितने ही व्यास खींचे जा सकते हैं।
(iii) असत्य। कारण: वृत्त को तीन बराबर चापों में बाँटने पर प्रत्येक चाप की माप 120° होगी। चूँकि 120° < 180°, इसलिए प्रत्येक चाप एक लघु चाप होगा, दीर्घ चाप नहीं। दीर्घ चाप की माप 180° से अधिक होती है।
(iv) सत्य। कारण: व्यास की लम्बाई त्रिज्या से दोगुनी होती है। अतः यदि किसी जीवा की लम्बाई त्रिज्या से दोगुनी है, तो वह जीवा वृत्त का व्यास ही होगी।
(v) असत्य। कारण: त्रिज्यखण्ड, दो त्रिज्याओं और उनके द्वारा काटे गए चाप के बीच का क्षेत्र होता है। जीवा और चाप के बीच के क्षेत्र को वृत्तखण्ड कहते हैं।
(vi) सत्य। कारण: वृत्त एक द्वि-विमीय (2D) आकृति है जो एक समतल (प्लेन) में स्थित होती है।
हल:
दिया है: O और O' केन्द्र वाले दो सर्वांगसम वृत्त हैं।
जीवा AB = जीवा CD है।
सिद्ध करना है: ∠AOB = ∠CO'D
रचना: त्रिज्याएँ OA, OB, O'C और O'D खींचिए।
उपपत्ति:
ΔAOB और ΔCO'D में,
AB = CD (दिया है।)
OA = O'C (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।)
OB = O'D (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।)
∴ ΔAOB ≅ ΔCO'D (SSS सर्वांगसमता नियम से)
अतः, ∠AOB = ∠CO'D (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण)
इस प्रकार सिद्ध हुआ कि सर्वांगसम वृत्तों की बराबर जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं।
हल:
दिया है: O और O' केन्द्र वाले दो सर्वांगसम वृत्त हैं।
केन्द्रों पर बने कोण ∠AOB = ∠CO'D हैं।
सिद्ध करना है: जीवा AB = जीवा CD
उपपत्ति:
ΔAOB और ΔCO'D में,
OA = O'C (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।)
∠AOB = ∠CO'D (दिया है।)
OB = O'D (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।)
∴ ΔAOB ≅ ΔCO'D (SAS सर्वांगसमता नियम से)
अतः, AB = CD (सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ)
इस प्रकार सिद्ध हुआ कि यदि सर्वांगसम वृत्तों की जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करें, तो जीवाएँ बराबर होती हैं।
हल:
वृत्तों के युग्म निम्नलिखित प्रकार से हो सकते हैं:
स्थिति 1: एक-दूसरे को न काटने वाले वृत्त।
उभयनिष्ठ बिन्दु: 0 (शून्य)
स्थिति 2: एक-दूसरे को स्पर्श करने वाले वृत्त (बाह्य या अन्तः स्पर्श)।
उभयनिष्ठ बिन्दु: 1
स्थिति 3: एक-दूसरे को दो बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करने वाले वृत्त।
उभयनिष्ठ बिन्दु: 2
इस प्रकार, दो वृत्तों के उभयनिष्ठ बिन्दुओं की अधिकतम संख्या 2 होती है।
हल:
दिया है: एक अज्ञात केन्द्र वाला वृत्त।
ज्ञात करना है: वृत्त का केन्द्र।
रचना के चरण:
यह बिन्दु O ही दिए गए वृत्त का अभीष्ट केन्द्र है।
कारण: किसी वृत्त की किसी भी जीवा का लम्ब समद्विभाजक सदैव वृत्त के केन्द्र से होकर जाता है। चूँकि दो भिन्न जीवाओं के लम्ब समद्विभाजक केवल केन्द्र पर ही मिल सकते हैं, अतः प्रतिच्छेदन बिन्दु O वृत्त का केन्द्र होगा।
हल:
दिया है: O और O' केन्द्र वाले दो वृत्त दो बिन्दुओं A और B पर प्रतिच्छेद करते हैं। AB उभयनिष्ठ जीवा है।
सिद्ध करना है: केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा OO', जीवा AB का लम्ब समद्विभाजक है।
रचना: OA, OB, O'A, O'B तथा OO' खींचिए। मान लीजिए OO', AB को बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करती है।
उपपत्ति:
ΔOAO' और ΔOBO' में,
OA = OB (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)
O'A = O'B (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)
OO' = OO' (उभयनिष्ठ भुजा)
∴ ΔOAO' ≅ ΔOBO' (SSS सर्वांगसमता नियम से)
अतः, ∠AOO' = ∠BOO' (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण) ...(1)
अब, ΔAOP और ΔBOP में,
OA = OB (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)
∠AOP = ∠BOP (समीकरण (1) से)
OP = OP (उभयनिष्ठ भुजा)
∴ ΔAOP ≅ ΔBOP (SAS सर्वांगसमता नियम से)
अतः, AP = BP (सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ) ...(2)
और ∠APO = ∠BPO (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण) ...(3)
समीकरण (2) से सिद्ध होता है कि OO', AB को समद्विभाजित करती है।
समीकरण (3) में, ∠APO + ∠BPO = 180° (रैखिक युग्म)
∴ 2∠APO = 180° ⇒ ∠APO = 90°
अतः, OO' जीवा AB पर लम्ब है।
चूँकि OO', AB को समद्विभाजित करती है और उस पर लम्ब भी है, इसलिए OO' जीवा AB का लम्ब समद्विभाजक है।
इस प्रकार सिद्ध हुआ कि दो प्रतिच्छेदी वृत्तों के केन्द्र, उनकी उभयनिष्ठ जीवा के लम्ब-समद्विभाजक पर स्थित होते हैं।
हल:
दिया है: दो वृत्तों के केन्द्र O और O' हैं।
त्रिज्या OA = 5 सेमी, त्रिज्या O'A = 3 सेमी, OO' = 4 सेमी।
ज्ञात करना है: उभयनिष्ठ जीवा AB की लम्बाई।
गणना:
मान लीजिए उभयनिष्ठ जीवा AB, केन्द्र रेखा OO' को P पर प्रतिच्छेद करती है।
हम जानते हैं कि OO', AB का लम्ब समद्विभाजक है। ∴ AP = PB और OP ⊥ AB.
ΔOAO' में,
OA = 5 सेमी, O'A = 3 सेमी, OO' = 4 सेमी
अब, (O'A)² + (OO')² = (3)² + (4)² = 9 + 16 = 25
और (OA)² = (5)² = 25
∴ (OA)² = (O'A)² + (OO')²
पाइथागोरस प्रमेय के विलोम से, ΔOAO' समकोण त्रिभुज है जिसमें ∠AO'O = 90° है।
इसका अर्थ है कि OO', त्रिज्या O'A पर लम्ब है।
परन्तु OO', जीवा AB पर भी लम्ब है। अतः, O'A और AB एक ही रेखा पर हैं, जिससे P और O' संपाती हो जाते हैं।
∴ AP = O'A = 3 सेमी (क्योंकि ΔAO'B में, O' केन्द्र से जीवा पर लम्ब है।)
चूँकि AB = 2 × AP
∴ AB = 2 × 3 सेमी = 6 सेमी
अतः, उभयनिष्ठ जीवा की लम्बाई 6 सेमी है।
हल:
दिया है: O केन्द्र वाले वृत्त में दो बराबर जीवाएँ AB और CD हैं जो वृत्त के अन्दर बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करती हैं।
सिद्ध करना है: (i) AP = CP (ii) BP = DP
रचना: केन्द्र O से जीवा AB पर OM तथा जीवा CD पर ON लम्ब खींचिए। OP को मिलाइए।
उपपत्ति:
चूँकि OM ⊥ AB और ON ⊥ CD, ∴ ∠OMP = ∠ONP = 90°.
ΔOMP और ΔONP समकोण त्रिभुज हैं।
ΔOMP और ΔONP में,
OM = ON (एक वृत्त की बराबर जीवाएँ केन्द्र से समान दूरी पर होती हैं।)
OP = OP (उभयनिष्ठ भुजा)
∠OMP = ∠ONP (प्रत्येक 90°)
∴ ΔOMP ≅ ΔONP (RHS सर्वांगसमता नियम से)
अतः, MP = NP ...(1) (सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ)
अब, OM ⊥ AB ⇒ AM = MB = AB/2 ...(2)
और ON ⊥ CD ⇒ CN = ND = CD/2 ...(3)
समीकरण (2) से, AP + PM = AB/2 ⇒ AP = (AB/2) - PM ...(4)
समीकरण (3) से, CP + PN = CD/2 ⇒ CP = (CD/2) - PN
परन्तु AB = CD (दिया है) और PN = PM [समीकरण (1) से]
∴ CP = (AB/2) - PM ...(5)
समीकरण (4) और (5) की तुलना करने पर, AP = CP
अब, AB = CD ⇒ AP + BP = CP + DP
परन्तु AP = CP (ऊपर सिद्ध किया)
दोनों ओर से AP (या CP) घटाने पर, BP = DP
इस प्रकार सिद्ध हुआ कि AP = CP और BP = DP। अर्थात् एक जीवा के खण्ड दूसरी जीवा के संगत खण्डों के बराबर हैं।
हल:
दिया है: O केन्द्र वाले वृत्त में दो बराबर जीवाएँ AB और CD हैं जो वृत्त के अन्दर बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करती हैं।
सिद्ध करना है: ∠APO = ∠DPO (या ∠BPO = ∠CPO)
रचना: केन्द्र O से जीवा AB पर OM तथा जीवा CD पर ON लम्ब खींचिए।
उपपत्ति:
चूँकि जीवा AB = जीवा CD,
∴ OM = ON (एक वृत्त की बराबर जीवाएँ केन्द्र से समान दूरी पर होती हैं।)
अब, ΔOMP और ΔONP में,
OM = ON (ऊपर सिद्ध)
∠OMP = ∠ONP (प्रत्येक 90°)
OP = OP (उभयनिष्ठ भुजा)
∴ ΔOMP ≅ ΔONP (RHS सर्वांगसमता नियम से)
अतः, ∠MPO = ∠NPO (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण)
परन्तु ∠APO = ∠MPO और ∠DPO = ∠NPO (क्योंकि M, A और P तथा N, D और P संरेख हैं।)
∴ ∠APO = ∠DPO
इसी प्रकार, यह भी सिद्ध किया जा सकता है कि ∠BPO = ∠CPO।
इस प्रकार सिद्ध हुआ कि केन्द्र को प्रतिच्छेद बिन्दु से मिलाने वाली रेखा जीवाओं से बराबर कोण बनाती है।
हल:
दिया है: O केन्द्र वाले दो संकेन्द्रीय वृत्त हैं। एक रेखा बड़े वृत्त को A और D पर तथा छोटे वृत्त को B और C पर काटती है।
सिद्ध करना है: AB = CD
रचना: केन्द्र O से दी गई रेखा पर लम्ब OM खींचिए।
उपपत्ति:
चूँकि OM रेखा AD पर लम्ब है और AD बड़े वृत्त की जीवा है,
∴ AM = MD ...(1) (वृत्त के केन्द्र से जीवा पर डाला गया लम्ब जीवा को समद्विभाजित करता है।)
इसी प्रकार, रेखा BC छोटे वृत्त की जीवा है और OM उस पर लम्ब है,
∴ BM = MC ...(2) (उपरोक्त कारण से)
समीकरण (1) में से समीकरण (2) को घटाने पर,
AM - BM = MD - MC
⇒ (AM - BM) = (MD - MC)
परन्तु AM - BM = AB और MD - MC = CD
∴ AB = CD
इस प्रकार सिद्ध हुआ कि AB = CD।
हल:
दिया है: O केन्द्र वाला 5 मीटर त्रिज्या का एक वृत्ताकार पार्क है। तीन लड़कियाँ रेशमा (A), सलमा (B) और मनदीप (C) वृत्त की परिधि पर खड़ी हैं।
AB = 6 मीटर, BC = 6 मीटर।
ज्ञात करना है: AC की दूरी।
गणना:
OA = OB = OC = 5 मीटर (त्रिज्याएँ)
AB = BC = 6 मीटर (दिया है)
मान लीजिए OB, AC को बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करती है।
ΔOAB में, OA = 5 मीटर, OB = 5 मीटर, AB = 6 मीटर।
त्रिभुज का अर्धपरिमाप, s = (5+5+6)/2 = 8 मीटर।
हीरोन के सूत्र से ΔOAB का क्षेत्रफल = √[s(s-a)(s-b)(s-c)]
= √[8 × (8-5) × (8-5) × (8-6)]
= √[8 × 3 × 3 × 2] = √144 = 12 वर्ग मीटर।
क्षेत्रफल की दूसरी विधि से:
ΔOAB का क्षेत्रफल = (1/2) × आधार × ऊँचाई = (1/2) × AB × OP
⇒ 12 = (1/2) × 6 × OP
⇒ 12 = 3 × OP ⇒ OP = 4 मीटर।
अब, समकोण ΔOAP में, पाइथागोरस प्रमेय से,
AP² = OA² - OP² = (5)² - (4)² = 25 - 16 = 9
∴ AP = 3 मीटर।
चूँकि OB, जीवा AC का लम्ब समद्विभाजक है (क्योंकि AB = BC, ∴ ΔABC समद्विबाहु है),
∴ AP = PC
अतः, AC = AP + PC = 3 + 3 = 6 मीटर।
रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी 6 मीटर है।
हल:
दिया है: O केन्द्र वाला 20 मीटर त्रिज्या का एक वृत्ताकार पार्क है। तीन लड़के A, B और C वृत्त की परिधि पर इस प्रकार बैठे हैं कि AB = BC = AC।
ज्ञात करना है: प्रत्येक डोरी (जीवा AB, BC, CA) की लम्बाई।
विश्लेषण: चूँकि AB = BC = AC, इसलिए ΔABC एक समबाहु त्रिभुज है। वृत्त, ΔABC का परिवृत्त है।
गणना:
वृत्त की त्रिज्या OA = 20 मीटर।
माना ΔABC की भुजा 'a' मीटर है।
समबाहु त
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