UP Board class 9 Maths 9. समांतर चतुर्भुजों और त्रिभुजों के क्षेत्रफल is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
हल:
(i) इस आकृति में त्रिभुज PDC और चतुर्भुज ABCD का उभयनिष्ठ आधार DC है और DC की समान्तर रेखा पर त्रिभुज का शीर्ष P और चतुर्भुज के शीर्ष A व B स्थित हैं। अतः ये आकृतियाँ (त्रिभुज और चतुर्भुज) एक ही आधार DC और एक ही समान्तर रेखाओं DC और AB के बीच स्थित हैं।
(ii) इस आकृति में दोनों चतुर्भुजों का आधार SR तो उभयनिष्ठ है परन्तु उनके शीर्ष P, Q व M, N आधार के समान्तर एक ही रेखा में नहीं हैं। अतः ये एक ही आधार और एक समान्तर रेखाओं के बीच स्थित नहीं हैं।
(iii) दी गई आकृति में ΔTRQ और चतुर्भुज PQRS का आधार QR उभयनिष्ठ है जबकि आधार QR के समान्तर एक ही रेखा पर ΔTRQ का शीर्ष T और चतुर्भुज PQRS के शीर्ष P व S स्थित हैं। तब ΔTRQ और चतुर्भुज PQRS एक ही आधार और एक ही समान्तर रेखाओं के बीच स्थित हैं। उभयनिष्ठ आधार QR तथा समान्तर रेखाएँ QR व PS हैं।
(iv) दी गई आकृति में एक समान्तर चतुर्भुज व एक त्रिभुज है जिनका कोई उभयनिष्ठ आधार नहीं है। अतः ये एक ही आधार व एक ही समान्तर रेखाओं के बीच स्थित नहीं हैं।
(v) इस आकृति में दो चतुर्भुज APCD और ABQD हैं जो एक ही आधार AD व एक ही समान्तर रेखाओं AD और BQ के बीच स्थित हैं।
(vi) दी गई आकृति में ABCE एक समान्तर चतुर्भुज है जिसके अन्तर्गत चतुर्भुज FBCE, चतुर्भुज ABEF व चतुर्भुज AECD तीन समान्तर चतुर्भुज समाहित हैं पर इनका कोई उभयनिष्ठ आधार नहीं है। अतः ये आकृतियाँ एक ही आधार और एक ही समान्तर रेखाओं के बीच स्थित नहीं हैं।
हल:
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसमें AB = DC और इन समान्तर भुजाओं के बीच की लाम्बिक दूरी = AE है।
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई = AB × AE [AB = 16 सेमी] = 16 × 8 = 128 वर्ग सेमी
पुनः समान्तर चतुर्भुज ABCD में, AD = BC और AD || BC के बीच की लाम्बिक दूरी = CF है।
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = AD × CF
AD × CF = 128 वर्ग सेमी
AD × 10 = 128
AD = 128/10 = 12.8 सेमी [CF = 10 सेमी]
अतः AD = 12.8 सेमी
हल:
दिया है: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसमें बिन्दु E, F, G और H क्रमशः समान्तर चतुर्भुज की भुजाओं AB, BC, CD व DA के मध्य-बिन्दु हैं।
सिद्ध करना है: ar (EFGH) = ½ ar (ABCD)
रचना: EG को मिलाइए।
उपपत्ति: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
AB = CD और AB || CD
E, AB का मध्य-बिन्दु है और G, CD का मध्य-बिन्दु है।
AE = EB = ½ AB
DG = GC = ½ CD
तब, AE = DG [क्योंकि AB = CD]
और AE || DG [क्योंकि AB || CD]
AEGD एक समान्तर चतुर्भुज है।
ΔEHG और समान्तर चतुर्भुज AEGD एक ही आधार EG पर स्थित हैं। इनके शीर्ष H, D व A एक ही रेखा पर हैं जो EG के समान्तर है।
ΔEHG का क्षेत्रफल = ½ समान्तर चतुर्भुज AEGD का क्षेत्रफल …(1)
इसी प्रकार,
ΔEFG का क्षेत्रफल = ½ समान्तर चतुर्भुज EBCG का क्षेत्रफल …(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर,
ΔEHG का क्षेत्रफल + ΔEFG का क्षेत्रफल = ½ समान्तर चतुर्भुज AEGD का क्षेत्रफल + ½ समान्तर चतुर्भुज EBCG का क्षेत्रफल
चतुर्भुज EFGH का क्षेत्रफल = ½ [समान्तर चतुर्भुज AEGD का क्षेत्रफल + समान्तर चतुर्भुज EBCG का क्षेत्रफल]
= ½ × समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल
अतः ar (EFGH) = ½ ar (ABCD) सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, जिसमें भुजाओं DC और AD पर स्थित बिन्दु क्रमश: P और Q हैं। रेखाखण्ड AP व BP और BQ व CQ खींचकर दो त्रिभुज APB और BQC प्राप्त किए गए हैं।
सिद्ध करना है: ar (APB) = ar (BQC)
अर्थात ΔAPB का क्षेत्रफल = ΔBQC का क्षेत्रफल।
रचना: P से AB पर लम्ब PR और Q से BC पर लम्ब QS खींचे।
उपपत्ति: समान्तर चतुर्भुज ABCD में,
AB || DC और समान्तर भुजाओं AB व DC के बीच की दूरी PR है।
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = आधार × सम्मुख भुजा से लम्ब दूरी = AB × PR …(1)
और ΔAPB का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × AB × PR …(2)
तब, समीकरण (1) व (2) से,
ΔAPB का क्षेत्रफल = ½ समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल …(3)
पुनः समान्तर चतुर्भुज ABCD में, BC || AD और इनके बीच की दूरी QS है।
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = आधार × सम्मुख भुजा से लम्ब दूरी = BC × QS …(4)
परन्तु ΔBQC का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × BC × QS …(5)
तब, समीकरण (4) व (5) से,
ΔBQC का क्षेत्रफल = ½ समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल …(6)
अब, समीकरण (3) व (6) से,
ΔAPB का क्षेत्रफल = ΔBQC का क्षेत्रफल
या ar (APB) = ar (BQC) सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसके अभ्यन्तर में स्थित एक बिन्दु P है। रेखाखण्ड PA, PB, PC और PD खींचे गए हैं, जिससे चार त्रिभुज APB, PBC, PCD और APD प्राप्त हुए हैं।
सिद्ध करना है:
(i) ar (APB) + ar (PCD) = ½ ar (ABCD)
(ii) ar (APD) + ar (PBC) = ar (APB) + ar (PCD)
रचना: P से AB पर लम्ब PQ तथा CD पर लम्ब PR खींचिए।
उपपत्ति:
(i) समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = आधार × सम्मुख भुजा की लाम्बिक दूरी
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = AB × (PQ + PR) …(1)
ΔAPB का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × AB × PQ
ΔPCD का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × CD × PR
जोड़ने पर,
ΔAPB का क्षेत्रफल + ΔPCD का क्षेत्रफल = ½ (AB × PQ + CD × PR)
= ½ (AB × PQ + AB × PR) [समान्तर चतुर्भुज ABCD में CD = AB]
= ½ AB (PQ + PR)
= ½ × समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल [समीकरण (1) से]
अतः ar (APB) + ar (PCD) = ½ ar (ABCD) सिद्ध हुआ।
(ii) ar (APB) + ar (PCD) = ½ ar (ABCD)
2 [ar(APB) + ar (PCD)] = ar (ABCD)
2 ar (APB) + 2 ar (PCD) = ar (APB) + ar (PBC) + ar (PCD) + ar (APD)
2ar (APB) + 2 ar (PCD) – ar (APB) – ar (PCD) = ar (PBC) + ar (APD)
ar (APB) + ar (PCD) = ar (APD) + ar (PBC)
अतः ar (APD) + ar (PBC) = ar (APB) + ar (PCD) सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: PQRS तथा ABRS दो समान्तर चतुर्भुज हैं जिनका उभयनिष्ठ आधार SR है। भुजा BR पर कोई बिन्दु X है। रेखाखण्ड AX तथा SX खींचे गए हैं जिससे ΔAXS प्राप्त होता है।
सिद्ध करना है:
(i) ar(PQRS) = ar (ABRS)
(ii) ar (AXS) = ½ ar (PQRS)
रचना: बिन्दु A से आधार SR पर लम्ब AE खींचिए और बिन्दु X से SR पर लम्ब FX खींचिए।
उपपत्ति:
(i) समान्तर चतुर्भुज PQRS में, PQ || SR और इनके बीच की लम्ब दूरी = AE है।
समान्तर चतुर्भुज PQRS का क्षेत्रफल = एक भुजा × उस भुजा की सम्मुख भुजा से लम्ब दूरी = SR × AE
ar (PQRS) = SR × AE …(1)
समान्तर चतुर्भुज ABRS में,
AB || SR और इसके बीच की दूरी = AE है।
समान्तर चतुर्भुज ABRS का क्षेत्रफल = एक भुजा × उस भुजा की सम्मुख भुजा से लम्ब-दूरी = SR × AE
ar (ABRS) = SR × AE …(2)
तब समीकरण (1) व (2) से,
ar (PQRS) = ar (ABRS) सिद्ध हुआ।
(ii) ABRS एक समान्तर चतुर्भुज है।
SR || AB और इनके बीच की लम्ब दूरी = FX
समान्तर चतुर्भुज ABRS का क्षेत्रफल = एक भुजा × उस भुजा से सम्मुख भुजा की लम्ब-दूरी = AB × FX …(3)
ar (ABRS) = AB × FX
ΔAXS का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × AS × FX
तब, समीकरण (3) से
ΔAXS का क्षेत्रफल = ½ × समान्तर चतुर्भुज ABRS का क्षेत्रफल
ar (AXS) = ½ ar (ABRS)
परन्तु हम सिद्ध कर चुके हैं कि ar (ABRS) = ar (PQRS)
अतः ar (AXS) = ½ ar (PQRS) सिद्ध हुआ।
हल:
माना किसान के पास चित्रानुसार PQRS समान्तर चतुर्भुज के आकार का एक खेत है। किसान ने भुजा RS पर एक बिन्दु A चुनकर उसे P तथा Q से मिला दिया।
खेत तीन त्रिभुजाकार भागों में विभाजित हो गया है। ये भाग ΔPAQ, ΔPAS तथा ΔQAR हैं।
किसान को गेहूँ और दालें बराबर क्षेत्रफलों में बोनी हैं इसलिए P से सम्मुख भुजा SR पर PN लम्ब डाला गया है।
ΔPQR का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × QR × PN
PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है। PQ = RS
तब, ΔPQR का क्षेत्रफल = ½ × RS × PN [क्योंकि QR = PQ = RS]
ΔPAQ का क्षेत्रफल = ½ (PS + AR) × PN
= ½ PS × PN + ½ AR × PN
= ΔPAS का क्षेत्रफल + ΔQAR का क्षेत्रफल
अतः किसान को ΔPAQ के क्षेत्रफल में गेहूँ और ΔPAS तथा ΔQAR के क्षेत्रफल में दालें बोना चाहिए।
हल:
दिया है: ΔABC में BC का मध्य-बिन्दु D है जिससे AD त्रिभुज की एक माध्यिका है। माध्यिका AD पर एक बिन्दु E है।
सिद्ध करना है: ΔABE का क्षेत्रफल = ΔACE का क्षेत्रफल
अथवा ar (ABE) = ar (ACE)
ΔABC में,
D, BC का मध्य-बिन्दु है अर्थात AD माध्यिका है।
हम जानते हैं कि त्रिभुज की एक माध्यिका उसे बराबर क्षेत्रफल के दो त्रिभुजों में विभाजित करती है।
ΔABD का क्षेत्रफल = ΔACD का क्षेत्रफल …(1)
पुनः ΔEBC की माध्यिका ED है।
ΔEBD का क्षेत्रफल = ΔECD का क्षेत्रफल …(2)
समीकरण (1) से (2) को घटाने पर,
ΔABD का क्षेत्रफल – ΔEBD का क्षेत्रफल = ΔACD का क्षेत्रफल – ΔECD का क्षेत्रफल
ΔABE का क्षेत्रफल = ΔACE का क्षेत्रफल
अर्थात ar (ABE) = ar (ACE) सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: ΔABC में AD त्रिभुज की माध्यिका है और AD का मध्य-बिन्दु E है।
ΔABD में, BD माध्यिका है।
ΔABE का क्षेत्रफल = ΔBDE का क्षेत्रफल
ΔABE का क्षेत्रफल + ΔBDE का क्षेत्रफल = ΔBDE का क्षेत्रफल + ΔCDE का क्षेत्रफल
2 ΔBDE का क्षेत्रफल = ΔABC का क्षेत्रफल
ΔBDE का क्षेत्रफल = ½ ΔABC का क्षेत्रफल …(1)
पुनः ΔABD में, E, AD का मध्य-बिन्दु है।
BE, ΔABD की माध्यिका है।
ΔBED का क्षेत्रफल = ½ ΔABD का क्षेत्रफल
= ½ × ½ ΔABC का क्षेत्रफल [समीकरण (1) से]
= ¼ ΔABC का क्षेत्रफल
अतः ar (BED) = ¼ ar (ABC) सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। जिसके विकर्ण AC और BD एक-दूसरे को बिन्दु O पर काटते हैं।
सिद्ध करना है: ΔAOB का क्षेत्रफल = ΔBOC का क्षेत्रफल = ΔCOD का क्षेत्रफल = ΔAOD का क्षेत्रफल
रचना: शीर्ष A से BD पर लम्ब AN खींचा।
उपपत्ति: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है और इसके विकर्ण AC व BD परस्पर बिन्दु O पर काटते हैं।
AO = OC तथा BO = OD
अब ΔAOD तथा ΔCOD में,
AD = BC (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ)
OD = OB (ऊपर सिद्ध किया है)
AO = OC (ऊपर सिद्ध किया है)
ΔAOD ≅ ΔCOB (S.S.S. सर्वांगसमता)
अतः ΔAOD का क्षेत्रफल = ΔCOB का क्षेत्रफल …(1)
इसी प्रकार, ΔAOB तथा ΔCOD भी सर्वांगसम होंगे।
ΔAOB का क्षेत्रफल = ΔCOD का क्षेत्रफल …(2)
AN, BD पर लम्ब है।
ΔAOD का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई
= ½ × OD × AN = ½ × (½ BD) × AN
= ¼ × BD × AN …(3)
और ΔAOB का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई
= ½ × OB × AN = ½ × (½ BD) × AN [क्योंकि BO = OD = ½ BD]
= ¼ × BD × AN …(4)
ΔAOD का क्षेत्रफल = ΔAOB का क्षेत्रफल
तब समीकरण (1), (2), (3) व (4) से,
ΔAOB का क्षेत्रफल = ΔBOC का क्षेत्रफल = ΔCOD का क्षेत्रफल = ΔAOD का क्षेत्रफल
अतः स्पष्ट है कि समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण उसे समान क्षेत्रफल वाले चार त्रिभुजों में बाँटते हैं। सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: दो ΔABC व ΔABD एक ही आधार AB पर बने हैं। रेखाखण्ड CD रेखाखण्ड AB को O पर समद्विभाजित करता है।
सिद्ध करना है: त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल = त्रिभुज ABD का क्षेत्रफल
अथवा ar (ABC) = ar (ABD)
रचना: शीर्षों C तथा D से AB पर क्रमशः CE तथा DF लम्ब खींचे।
उपपत्ति: CE ⊥ AB और DF ⊥ AB (रचना से)
CE || DF; क्योंकि दोनों AB पर लम्ब हैं।
∠ECO = ∠FDO (एकान्तर कोण) …(1)
अब ΔECO तथा ΔFDO में,
∠ECO = ∠FDO [समीकरण (1) से]
CO = OD (O पर CD समद्विभाजित होता है)
∠COE = ∠DOF (शीर्षाभिमुख कोण हैं)
ΔECO ≅ ΔFDO (A.S.A. सर्वांगसमता)
CE = DF (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग) …(2)
तब, ΔABC का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई
= ½ × AB × CE
= ½ × AB × DF [समीकरण (2) से]
= ΔABD का क्षेत्रफल
अतः ΔABC का क्षेत्रफल = ΔABD का क्षेत्रफल
या ar (ABC) = ar (ABD) सिद्ध हुआ।
हल:
दिया है: ΔABC में भुजाओं BC, CA और AB के मध्य-बिन्दु क्रमशः D, E और F हैं।
सिद्ध करना है:
(i) BDEF एक समान्तर चतुर्भुज है।
(ii) ar (DEF) = ¼ ar (ABC)
(iii) ar (BDEF) = ½ ar (ABC)
उपपत्ति:
(i) ΔABC में E, CA का मध्य-बिन्दु है और F, AB का मध्य-बिन्दु है।
EF = ½ BC और EF || BC (मध्य-बिन्दु प्रमेय से)
D, BC का मध्य-बिन्दु है।
BD = ½ BC
EF = BD और EF || BD
अतः BDEF एक समान्तर चतुर्भुज है। सिद्ध हुआ।
(ii) E और F क्रमशः CA और AB के मध्य-बिन्दु हैं।
DE = ½ AB और DE || AB (मध्य-बिन्दु प्रमेय से)
परन्तु F, AB का मध्य-बिन्दु है।
AF = ½ AB
DE = AF और DE || AF
ADEF एक समान्तर चतुर्भुज है।
FD = CE और FD || EC अर्थात FD || AC
BDEF एक समान्तर चतुर्भुज है।
DE = BF और DE || BF
UP Board class 9 Maths 9. समांतर चतुर्भुजों और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 9 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board class 9 Maths 9. समांतर चतुर्भुजों और त्रिभुजों के क्षेत्रफल textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 9 Maths 9. समांतर चतुर्भुजों और त्रिभुजों के क्षेत्रफल :
There are various features of UP Board class 9 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.