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UP Board Class 11 Physics (1. भौतिक जगत) solution PDF

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UP Board Class 11 Physics (1. भौतिक जगत) solution

UP Board Class 11 Physics 1. भौतिक जगत Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 11 Physics

Chapter 1: भौतिक जगत (Physical World)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.1

विज्ञान की प्रकृति से संबंधित कुछ अत्यंत पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन का उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था “संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है।”

उत्तर: हमारे चारों ओर विश्व की अनेक जटिल परिघटनाएँ प्रत्येक समय होती रहती हैं। जीव विज्ञान की अपनी जटिल समस्याएँ हैं। अतः यह विश्व अबोधगम्य के समान लगता है। आइंस्टीन ने उस समय यह सोचा होगा कि इतनी जटिलताओं के रहते हुए भी जो संतोष की बात है, वह यह है कि इन सभी प्राकृतिक परिघटनाओं को विज्ञान के कतिपय साधारण नियमों से समझा जा सकता है। अतः संसार बोधगम्य है।

प्रश्न 1.2

“प्रत्येक महान भौतिक सिद्धान्त अपसिद्धान्त से आरंभ होकर धर्मसिद्धान्त के रूप में समाप्त होता है”। इस तीक्ष्ण टिप्पणी की वैधता के लिए विज्ञान के इतिहास से कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर: धर्मसिद्धान्त एक स्थापित विचार होता है, जिस पर कुछ लोग ही अँगुली उठा सकते हैं; परन्तु स्थापित विश्वास तथा प्रबुद्ध व्यक्ति के मन में हिलोरे वाले सिद्धांत के विपरीत किवदन्तियाँ कुछ भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए:

  1. प्रकाश का तरंग सिद्धान्त: टॉमस यंग का प्रकाश का तरंग सिद्धान्त एक किवदंती के रूप में आरंभ होकर धर्मसिद्धान्त में बदल गया।
  2. सौरकेन्द्री सिद्धान्त: प्राचीन समय में प्टोलमी ने भूकेन्द्री सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। बाद में गैलीलियो ने सौरकेन्द्री सिद्धान्त प्रस्तुत किया, जिसे प्रारंभ में अस्वीकार किया गया, लेकिन बाद में केप्लर और न्यूटन के कार्यों ने इसे स्थापित धर्मसिद्धान्त बना दिया।
  3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता: आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण E = mc² प्रारंभ में एक क्रांतिकारी विचार था, लेकिन आज भौतिकी का एक मूलभूत धर्मसिद्धान्त है।

प्रश्न 1.3

“संभव की कला ही राजनीति है”। इसी प्रकार “समाधान की कला ही विज्ञान है”। विज्ञान की प्रकृति तथा व्यवहार पर इस सुन्दर सूक्ति की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: राजनीति में असंभव को संभव बताने की कला होती है, जबकि विज्ञान वास्तविक समस्याओं का व्यवस्थित समाधान प्रस्तुत करता है। एक वैज्ञानिक प्रेक्षणों का धैर्यपूर्वक अध्ययन करके मूलभूत नियम प्रतिपादित करता है। उदाहरण के लिए, टाइको ब्राहे के प्रेक्षणों के आधार पर केप्लर ने ग्रहों की गति के तीन नियम दिए। इस प्रकार, विज्ञान विविध प्राकृतिक परिघटनाओं को कुछ मूलभूत संकल्पनाओं द्वारा समझने की कला है, जो दर्शाता है कि विविधता में एकता है।

प्रश्न 1.4

यद्यपि अब भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का विस्तृत आधार है तथा यह तीव्रता से फैल भी रहा है, परन्तु फिर भी इसे विज्ञान के क्षेत्र में विश्वनेता बनने की अपनी क्षमता को कार्यान्वित करने में काफी दूरी तय करनी है। ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण कारक लिखिए, जो आपके विचार से भारत में विज्ञान के विकास में बाधक रहे हैं।

उत्तर: भारत में विज्ञान के विकास में बाधक कुछ प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

  1. वैज्ञानिकों के लिए रोजगार के सीमित अवसर।
  2. अधिकांश तकनीक उधार ली हुई एवं पुरानी है।
  3. प्रारम्भिक अनुसंधान के लिए पर्याप्त धनराशि का अभाव।
  4. अनुसंधान पत्रों के प्रकाशन की सुस्त प्रक्रिया।
  5. स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर विज्ञान शिक्षा का अपर्याप्त स्तर।
  6. प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को पर्याप्त संसाधन, पद एवं अवसर न मिलना।
  7. मूलभूत शोध सुविधाओं का अभाव।
  8. विज्ञान प्रबंधन पर नौकरशाही का प्रभुत्व।

प्रश्न 1.5

किसी भी भौतिक विज्ञानी ने इलेक्ट्रॉन के कभी भी दर्शन नहीं किए हैं। परन्तु फिर भी सभी भौतिक विज्ञानियों का इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास है। कोई बुद्धिमान परन्तु अन्धविश्वासी व्यक्ति इसी तुल्यरूपता को इस तर्क के साथ आगे बढ़ाता है कि यद्यपि किसी ने “देखा” नहीं है, परन्तु “भूतों” का अस्तित्व है। आप इस तर्क का खंडन किस प्रकार करेंगे?

उत्तर: इलेक्ट्रॉन का अस्तित्व प्रयोगों एवं प्रेक्षणों द्वारा सिद्ध एक वैज्ञानिक तथ्य है। इसके अस्तित्व के बिना विद्युत प्रवाह, रसायनिक बंधन जैसी अनेक परिघटनाओं की व्याख्या असंभव है। दूसरी ओर, भूतों का अस्तित्व किसी वैज्ञानिक प्रमाण, प्रयोग या तार्किक व्याख्या पर आधारित नहीं है। इसलिए दोनों स्थितियों की तुलना करना तर्कसंगत नहीं है।

प्रश्न 1.6

जापान के एक विशेष समुद्र तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले केकड़े के कवच (खोल) में से अधिकांश समुराई के अनुश्रुत चेहरे से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं। नीचे इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ दी गई हैं। इनमें से आपको कौन-सा वैज्ञानिक स्पष्टीकरण लगता है?

  1. कई शताब्दियों पूर्व किसी भयानक समुद्री दुर्घटना में एक युवा समुराई डूब गया। प्रकृति ने श्रद्धांजली स्वरूप उसके चेहरे को केकड़े के कवच पर अंकित कर दिया।
  2. मछुआरे उन केकड़ों के कवच को, जिनकी आकृति संयोगवश समुराई से मिलती-जुलती थी, सम्मानवश वापस समुद्र में फेंक देते थे। इस कृत्रिम चयन (Artificial Selection) के कारण ऐसे कवच वाले केकड़ों का अनुवांशिक विकास हुआ।

उत्तर: दूसरा स्पष्टीकरण (कृत्रिम वरण द्वारा विकास) वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत है। यह आनुवांशिकी के सिद्धांतों पर आधारित है।

प्रश्न 1.7

दो शताब्दियों से भी अधिक समय पूर्व इंग्लैंड तथा पश्चिमी यूरोप में जो औद्योगिक क्रांति हुई थी, उसकी चिंगारी का कारण कुछ प्रमुख वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ थीं। ये उपलब्धियाँ क्या थीं?

उत्तर: औद्योगिक क्रांति के लिए उत्तरदायी प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं:

  1. विद्युत की खोज, डायनेमो तथा मोटर का विकास।
  2. लोहे को उच्च श्रेणी के स्टील में बदलने वाली ब्लास्ट फर्नेस।
  3. विस्फोटकों की खोज।
  4. गुरुत्वाकर्षण एवं प्रक्षेप्य गति के अध्ययन से तोपखाने का विकास।
  5. हाथ से काम करने वाली मशीनों की तुलना में 300 गुना तेज़ सूती कपड़ा बुनने वाली मशीन (स्पिनिंग जेनी)।
  6. ऊष्मागतिकी पर आधारित ऊष्मा इंजन का आविष्कार।

प्रश्न 1.8

प्रायः यह कहा जाता है कि संसार अब दूसरी औद्योगिक क्रान्ति के दौर से गुजर रहा है, जो समाज में पहली क्रान्ति की भाँति आमूल परिवर्तन ला देगी। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के उन प्रमुख समकालीन क्षेत्रों की सूची बनाइए, जो इस क्रान्ति के लिए उत्तरदायी हैं।

उत्तर: दूसरी औद्योगिक क्रांति के लिए उत्तरदायी प्रमुख क्षेत्र:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी: इंटरनेट, उच्च गति के कम्प्यूटर, उपग्रह संचार।
  2. अंतरिक्ष विज्ञान: विभिन्न उपयोगों के लिए उपग्रह।
  3. कृषि में नवीन तकनीकें।
  4. प्लाज्मा भौतिकी एवं चुम्बकीय परिरोध।
  5. बायोटेक्नोलॉजी एवं आनुवंशिक इंजीनियरिंग।
  6. प्रकाश विद्युत प्रभाव एवं सौर ऊर्जा।
  7. कमरे के ताप पर अतिचालक पदार्थों का विकास।
  8. लेजर तकनीक एवं परमाणु शीतलन।
  9. अवरक्त संसूचक (रात्रि दृष्टि, चिकित्सा निगरानी)।
  10. नाभिकीय रिएक्टरों में सुधार से ऊर्जा उत्पादन।

प्रश्न 1.9

बाइसवीं शताब्दी के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पर अपनी निराधार कल्पनाओं को आधार मान कर लगभग 1000 शब्दों में कोई कथा लिखिए।

उत्तर: (संक्षिप्त सारांश) एक काल्पनिक कथा में, पाँच सौ प्रकाश वर्ष दूर एक तारे की ओर जाता हुआ एक अंतरिक्ष यान अतिचालक मोटरों से चलता है। मार्ग में उच्च ताप के कारण मोटर विफल हो जाती है। यान को एक विपरीतक पदार्थ (Antimatter) द्वारा ऊर्जा मिलती है। चालक दल कई चुनौतियों जैसे गुरुत्वहीनता, बाह्य आक्रमण, उच्च ताप का सामना करता है। वे आयुवर्धक दवाओं के सहारे लंबी यात्रा करते हैं, लेकिन तारे के निकट अत्यधिक ताप के कारण वापस लौटने का निर्णय लेते हैं। कथा इस बात पर प्रकाश डालती है कि 22वीं सदी में भी मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को इतनी दूरी तक भेजना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी, हालाँकि मानवरहित यान भेजने की संभावना अधिक है।

प्रश्न 1.10

विज्ञान के व्यवहार पर अपने 'नैतिक' दृष्टिकोणों को रचने का प्रयास कीजिए। कल्पना कीजिए कि आप स्वयं किसी संयोगवश ऐसी खोज पर लगे हैं, जो शैक्षिक दृष्टि से रोचक है; परन्तु उसके परिणाम निश्चित रूप से मानव समाज के लिए भयंकर होने के अतिरिक्त कुछ नहीं होंगे। फिर भी यदि ऐसा है, तो आप इस दुविधा के हल के लिए क्या करेंगे?

उत्तर: एक वैज्ञानिक का प्राथमिक कर्तव्य सत्य की खोज करना और उसे प्रस्तुत करना है। कोई भी खोज स्वयं में न अच्छी है न बुरी, यह उसके उपयोग पर निर्भर करता है। आइंस्टीन के E = mc² समीकरण का उपयोग परमाणु बम बनाने में भी हुआ और ऊर्जा उत्पादन में भी। यदि मैं कोई ऐसी खोज करता हूँ जो विनाशकारी प्रतीत होती है, तो मेरा दायित्व होगा कि मैं उसके दुष्परिणामों से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय और जनता को अवगत कराऊँ। साथ ही, उस खोज के सकारात्मक पहलुओं (यदि कोई हों) पर शोध को प्रोत्साहित करूँगा। अंततः, खोज को गुप्त रखने के बजाय सार्वजनिक चर्चा और नैतिक नियमन के दायरे में लाना ही उचित होगा।

प्रश्न 1.11

किसी भी ज्ञान की भाँति विज्ञान का उपयोग भी, उपयोग करने वाले पर निर्भर करते हुए, अच्छा अथवा बुरा हो सकता है। नीचे विज्ञान के कुछ अनुप्रयोग दिए गए हैं। विशेषकर कौन-सा अनुप्रयोग अच्छा है, बुरा है अथवा ऐसा है कि जिसे स्पष्ट रूप से वर्गबद्ध नहीं किया जा सकता। इसके बारे में अपने दृष्टिकोणों को सूचीबद्ध कीजिए---

  1. अच्छा: चेचक के टीके लगाकर रोग का उन्मूलन।
  2. अच्छा: निरक्षरता दूर करने एवं जनसंचार के लिए टेलीविजन।
  3. बुरा: जन्म से पूर्व लिंग निर्धारण (लिंग चयन के दुरुपयोग के कारण)।
  4. अच्छा: कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए कम्प्यूटर।
  5. मिश्रित: पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह (संचार, अनुसंधान के लिए अच्छा; अंतरिक्ष कचरा, सैन्य उपयोग के जोखिम)।
  6. बुरा: नाभिकीय शस्त्रों का विकास।
  7. बुरा: रासायनिक एवं जैविक युद्ध की तकनीकें।
  8. अच्छा: पीने के जल का शोधन।
  9. मिश्रित: प्लास्टिक सर्जरी (चिकित्सीय कारणों से अच्छा; केवल सौंदर्य के लिए अत्यधिक उपयोग चिंताजनक)।
  10. मिश्रित: क्लोनिंग (चिकित्सीय शोध के लिए संभावनापूर्ण; नैतिक एवं सामाजिक चुनौतियाँ)।

प्रश्न 1.12

भारत में गणित, खगोलिकी, भाषा विज्ञान, तर्क तथा नैतिकता में महान् विद्वता की एक लम्बी एवं अटूट परम्परा रही है। फिर भी इसके साथ एवं समान्तर हमारे समाज में बहुत-से अन्धविश्वासी तथा रुढ़िवादी दृष्टिकोण व परम्पराएँ, फली-फूली हैं... इन दृष्टिकोणों का विरोध करने के लिए अपनी रणनीति बनाने में आप अपने विज्ञान के ज्ञान का उपयोग किस प्रकार करेंगे?

उत्तर: अन्धविश्वास और रुढ़िवादिता को दूर करने के लिए निम्नलिखित रणनीति अपनाई जा सकती है:

  1. वैज्ञानिक साक्षरता बढ़ाना: रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से विज्ञान के मूल सिद्धांतों को सरल भाषा में पहुँचाना।
  2. शिक्षा पर जोर: माता-पिता को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना, विशेषकर लड़कियों की शिक्षा पर।
  3. विज्ञान प्रदर्शनियाँ एवं कार्यशालाएँ: व्यावहारिक प्रयोगों के माध्यम से वैज्ञानिक सोच विकसित करना।
  4. तार्किक चर्चा: अन्धविश्वासों के पीछे के कारणों (जैसे अज्ञानता, शोषण) पर खुलकर चर्चा करना और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करना।
  5. रोल मॉडल: वैज्ञानिकों और तर्कशील विचारकों को रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना।

प्रश्न 1.13

यद्यपि भारत में स्त्री तथा पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त हैं, फिर भी बहुत-से लोग महिलाओं की स्वाभाविक प्रकृति, क्षमता, बुद्धिमता के बारे में अवैज्ञानिक विचार रखते हैं... वैज्ञानिक तथ्यों तथा विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में महान महिलाओं का उदाहरण देकर इन विचारों को धराशायी करिए...

उत्तर: वैज्ञानिक दृष्टि से पुरुष और स्त्री की मानसिक क्षमताओं में कोई जन्मजात अंतर नहीं है। समान अवसर मिलने पर महिलाएँ हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उदाहरण स्वरूप:

  • विज्ञान: मैडम क्यूरी (दो बार नोबेल पुरस्कार), डॉ. ए. लालिता (भारतीय वैज्ञानिक)।
  • राजनीति: इन्दिरा गाँधी, गोल्डा मायर, श्रीमती भण्डारनायके।
  • सामाजिक कार्य: मदर टेरेसा।
  • रक्षा: रानी लक्ष्मीबाई।
  • प्रशासन एवं व्यवसाय: आज अनेक महिलाएँ सीईओ, प्रबंधक, इंजीनियर और पायलट के रूप में कार्यरत हैं।

निष्कर्षतः, महिलाएँ पुरुषों के समकक्ष हैं और अक्सर उनसे भी आगे निकल जाती हैं।

प्रश्न 1.14

“भौतिकी के समीकरणों में सुन्दरता होना उनका प्रयोगों के साथ सहमत होने की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है।” यह मत महान् ब्रिटिश वैज्ञानिक पी.ए.एम. डिरैक का था। इस दृष्टिकोण की समीक्षा कीजिए। इस पुस्तक में ऐसे संबंधों तथा समीकरणों को खोजिए, जो आपको सुन्दर लगते हैं।

उत्तर: डिरैक का यह कथन इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि प्रकृति के मूलभूत नियम अक्सर सरलता और गणितीय सुन्दरता से परिपूर्ण होते हैं। एक सुन्दर समीकरण न केवल प्रयोगों से मेल खाता है, बल्कि गहन सत्य को भी व्यक्त करता है। कुछ सुन्दर समीकरण:

  1. आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण: E = mc²
  2. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम: F = G(m₁m₂/r²)
  3. दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य: λ = h/p
  4. आइंस्टीन का फोटोइलेक्ट्रिक समीकरण: E = hν

ये समीकरण अपनी सरलता में गहन अर्थ छिपाए हुए हैं।

प्रश्न 1.15

...भौतिकी के महान नियम एक ही साथ सरल एवं सुन्दर होते हैं... भौतिकी के इन विद्वानों तथा अन्य महानायकों द्वारा रचित सामान्य पुस्तकों एवं लेखों तक पहुँचने के लिए विशेष प्रयास अवश्य करें...

उत्तर: भौतिकी के अनेक महान नियम सरलता एवं सुन्दरता का अनूठा संगम हैं। कुछ उदाहरण:

  1. दे ब्रॉग्ली संबंध (λ = h/p): कण-तरंग द्वैत की सरल अभिव्यक्ति।
  2. बोर का क्वांटीकरण नियम (L = nħ): परमाणु में कोणीय संवेग का परिमाणीकरण।
  3. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत (ΔxΔp ≥ ħ/2): प्रकृति की मौलिक सीमा को दर्शाता है।
  4. आइंस्टीन का क्षेत्र समीकरण (Gμν = 8πGTμν): सामान्य सापेक्षता का सार।
  5. न्यूटन का द्वितीय नियम (F = dp/dt): गति का मूलभूत नियम

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Other Chapters of Class 11 Physics
1. भौतिक जगत
2. मात्रक तथा मापन
3. सरल रेखा में गति
4. समतल में गति
5. गति के नियम
6. कार्य ऊर्जा तथा शक्ति
7. कणों के नियम तथा घूर्णी गति
8. गुरुत्वाकर्षण
9. ठोसों के यांत्रिक गुण
10. तरलों के यांत्रिक गुण
11. द्रव्य के तापीय गुण
12. ऊष्मागतिकी
13. अणुगति सिद्धांत
14. दोलन
15. तरंगें
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