UP Board Class 11 Physics 1. भौतिक जगत is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
विज्ञान की प्रकृति से संबंधित कुछ अत्यंत पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन का उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था “संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है।”
उत्तर: हमारे चारों ओर विश्व की अनेक जटिल परिघटनाएँ प्रत्येक समय होती रहती हैं। जीव विज्ञान की अपनी जटिल समस्याएँ हैं। अतः यह विश्व अबोधगम्य के समान लगता है। आइंस्टीन ने उस समय यह सोचा होगा कि इतनी जटिलताओं के रहते हुए भी जो संतोष की बात है, वह यह है कि इन सभी प्राकृतिक परिघटनाओं को विज्ञान के कतिपय साधारण नियमों से समझा जा सकता है। अतः संसार बोधगम्य है।
“प्रत्येक महान भौतिक सिद्धान्त अपसिद्धान्त से आरंभ होकर धर्मसिद्धान्त के रूप में समाप्त होता है”। इस तीक्ष्ण टिप्पणी की वैधता के लिए विज्ञान के इतिहास से कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर: धर्मसिद्धान्त एक स्थापित विचार होता है, जिस पर कुछ लोग ही अँगुली उठा सकते हैं; परन्तु स्थापित विश्वास तथा प्रबुद्ध व्यक्ति के मन में हिलोरे वाले सिद्धांत के विपरीत किवदन्तियाँ कुछ भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए:
“संभव की कला ही राजनीति है”। इसी प्रकार “समाधान की कला ही विज्ञान है”। विज्ञान की प्रकृति तथा व्यवहार पर इस सुन्दर सूक्ति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: राजनीति में असंभव को संभव बताने की कला होती है, जबकि विज्ञान वास्तविक समस्याओं का व्यवस्थित समाधान प्रस्तुत करता है। एक वैज्ञानिक प्रेक्षणों का धैर्यपूर्वक अध्ययन करके मूलभूत नियम प्रतिपादित करता है। उदाहरण के लिए, टाइको ब्राहे के प्रेक्षणों के आधार पर केप्लर ने ग्रहों की गति के तीन नियम दिए। इस प्रकार, विज्ञान विविध प्राकृतिक परिघटनाओं को कुछ मूलभूत संकल्पनाओं द्वारा समझने की कला है, जो दर्शाता है कि विविधता में एकता है।
यद्यपि अब भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का विस्तृत आधार है तथा यह तीव्रता से फैल भी रहा है, परन्तु फिर भी इसे विज्ञान के क्षेत्र में विश्वनेता बनने की अपनी क्षमता को कार्यान्वित करने में काफी दूरी तय करनी है। ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण कारक लिखिए, जो आपके विचार से भारत में विज्ञान के विकास में बाधक रहे हैं।
उत्तर: भारत में विज्ञान के विकास में बाधक कुछ प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
किसी भी भौतिक विज्ञानी ने इलेक्ट्रॉन के कभी भी दर्शन नहीं किए हैं। परन्तु फिर भी सभी भौतिक विज्ञानियों का इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास है। कोई बुद्धिमान परन्तु अन्धविश्वासी व्यक्ति इसी तुल्यरूपता को इस तर्क के साथ आगे बढ़ाता है कि यद्यपि किसी ने “देखा” नहीं है, परन्तु “भूतों” का अस्तित्व है। आप इस तर्क का खंडन किस प्रकार करेंगे?
उत्तर: इलेक्ट्रॉन का अस्तित्व प्रयोगों एवं प्रेक्षणों द्वारा सिद्ध एक वैज्ञानिक तथ्य है। इसके अस्तित्व के बिना विद्युत प्रवाह, रसायनिक बंधन जैसी अनेक परिघटनाओं की व्याख्या असंभव है। दूसरी ओर, भूतों का अस्तित्व किसी वैज्ञानिक प्रमाण, प्रयोग या तार्किक व्याख्या पर आधारित नहीं है। इसलिए दोनों स्थितियों की तुलना करना तर्कसंगत नहीं है।
जापान के एक विशेष समुद्र तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले केकड़े के कवच (खोल) में से अधिकांश समुराई के अनुश्रुत चेहरे से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं। नीचे इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ दी गई हैं। इनमें से आपको कौन-सा वैज्ञानिक स्पष्टीकरण लगता है?
उत्तर: दूसरा स्पष्टीकरण (कृत्रिम वरण द्वारा विकास) वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत है। यह आनुवांशिकी के सिद्धांतों पर आधारित है।
दो शताब्दियों से भी अधिक समय पूर्व इंग्लैंड तथा पश्चिमी यूरोप में जो औद्योगिक क्रांति हुई थी, उसकी चिंगारी का कारण कुछ प्रमुख वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ थीं। ये उपलब्धियाँ क्या थीं?
उत्तर: औद्योगिक क्रांति के लिए उत्तरदायी प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं:
प्रायः यह कहा जाता है कि संसार अब दूसरी औद्योगिक क्रान्ति के दौर से गुजर रहा है, जो समाज में पहली क्रान्ति की भाँति आमूल परिवर्तन ला देगी। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के उन प्रमुख समकालीन क्षेत्रों की सूची बनाइए, जो इस क्रान्ति के लिए उत्तरदायी हैं।
उत्तर: दूसरी औद्योगिक क्रांति के लिए उत्तरदायी प्रमुख क्षेत्र:
बाइसवीं शताब्दी के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पर अपनी निराधार कल्पनाओं को आधार मान कर लगभग 1000 शब्दों में कोई कथा लिखिए।
उत्तर: (संक्षिप्त सारांश) एक काल्पनिक कथा में, पाँच सौ प्रकाश वर्ष दूर एक तारे की ओर जाता हुआ एक अंतरिक्ष यान अतिचालक मोटरों से चलता है। मार्ग में उच्च ताप के कारण मोटर विफल हो जाती है। यान को एक विपरीतक पदार्थ (Antimatter) द्वारा ऊर्जा मिलती है। चालक दल कई चुनौतियों जैसे गुरुत्वहीनता, बाह्य आक्रमण, उच्च ताप का सामना करता है। वे आयुवर्धक दवाओं के सहारे लंबी यात्रा करते हैं, लेकिन तारे के निकट अत्यधिक ताप के कारण वापस लौटने का निर्णय लेते हैं। कथा इस बात पर प्रकाश डालती है कि 22वीं सदी में भी मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को इतनी दूरी तक भेजना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी, हालाँकि मानवरहित यान भेजने की संभावना अधिक है।
विज्ञान के व्यवहार पर अपने 'नैतिक' दृष्टिकोणों को रचने का प्रयास कीजिए। कल्पना कीजिए कि आप स्वयं किसी संयोगवश ऐसी खोज पर लगे हैं, जो शैक्षिक दृष्टि से रोचक है; परन्तु उसके परिणाम निश्चित रूप से मानव समाज के लिए भयंकर होने के अतिरिक्त कुछ नहीं होंगे। फिर भी यदि ऐसा है, तो आप इस दुविधा के हल के लिए क्या करेंगे?
उत्तर: एक वैज्ञानिक का प्राथमिक कर्तव्य सत्य की खोज करना और उसे प्रस्तुत करना है। कोई भी खोज स्वयं में न अच्छी है न बुरी, यह उसके उपयोग पर निर्भर करता है। आइंस्टीन के E = mc² समीकरण का उपयोग परमाणु बम बनाने में भी हुआ और ऊर्जा उत्पादन में भी। यदि मैं कोई ऐसी खोज करता हूँ जो विनाशकारी प्रतीत होती है, तो मेरा दायित्व होगा कि मैं उसके दुष्परिणामों से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय और जनता को अवगत कराऊँ। साथ ही, उस खोज के सकारात्मक पहलुओं (यदि कोई हों) पर शोध को प्रोत्साहित करूँगा। अंततः, खोज को गुप्त रखने के बजाय सार्वजनिक चर्चा और नैतिक नियमन के दायरे में लाना ही उचित होगा।
किसी भी ज्ञान की भाँति विज्ञान का उपयोग भी, उपयोग करने वाले पर निर्भर करते हुए, अच्छा अथवा बुरा हो सकता है। नीचे विज्ञान के कुछ अनुप्रयोग दिए गए हैं। विशेषकर कौन-सा अनुप्रयोग अच्छा है, बुरा है अथवा ऐसा है कि जिसे स्पष्ट रूप से वर्गबद्ध नहीं किया जा सकता। इसके बारे में अपने दृष्टिकोणों को सूचीबद्ध कीजिए---
भारत में गणित, खगोलिकी, भाषा विज्ञान, तर्क तथा नैतिकता में महान् विद्वता की एक लम्बी एवं अटूट परम्परा रही है। फिर भी इसके साथ एवं समान्तर हमारे समाज में बहुत-से अन्धविश्वासी तथा रुढ़िवादी दृष्टिकोण व परम्पराएँ, फली-फूली हैं... इन दृष्टिकोणों का विरोध करने के लिए अपनी रणनीति बनाने में आप अपने विज्ञान के ज्ञान का उपयोग किस प्रकार करेंगे?
उत्तर: अन्धविश्वास और रुढ़िवादिता को दूर करने के लिए निम्नलिखित रणनीति अपनाई जा सकती है:
यद्यपि भारत में स्त्री तथा पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त हैं, फिर भी बहुत-से लोग महिलाओं की स्वाभाविक प्रकृति, क्षमता, बुद्धिमता के बारे में अवैज्ञानिक विचार रखते हैं... वैज्ञानिक तथ्यों तथा विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में महान महिलाओं का उदाहरण देकर इन विचारों को धराशायी करिए...
उत्तर: वैज्ञानिक दृष्टि से पुरुष और स्त्री की मानसिक क्षमताओं में कोई जन्मजात अंतर नहीं है। समान अवसर मिलने पर महिलाएँ हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उदाहरण स्वरूप:
निष्कर्षतः, महिलाएँ पुरुषों के समकक्ष हैं और अक्सर उनसे भी आगे निकल जाती हैं।
“भौतिकी के समीकरणों में सुन्दरता होना उनका प्रयोगों के साथ सहमत होने की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है।” यह मत महान् ब्रिटिश वैज्ञानिक पी.ए.एम. डिरैक का था। इस दृष्टिकोण की समीक्षा कीजिए। इस पुस्तक में ऐसे संबंधों तथा समीकरणों को खोजिए, जो आपको सुन्दर लगते हैं।
उत्तर: डिरैक का यह कथन इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि प्रकृति के मूलभूत नियम अक्सर सरलता और गणितीय सुन्दरता से परिपूर्ण होते हैं। एक सुन्दर समीकरण न केवल प्रयोगों से मेल खाता है, बल्कि गहन सत्य को भी व्यक्त करता है। कुछ सुन्दर समीकरण:
ये समीकरण अपनी सरलता में गहन अर्थ छिपाए हुए हैं।
...भौतिकी के महान नियम एक ही साथ सरल एवं सुन्दर होते हैं... भौतिकी के इन विद्वानों तथा अन्य महानायकों द्वारा रचित सामान्य पुस्तकों एवं लेखों तक पहुँचने के लिए विशेष प्रयास अवश्य करें...
उत्तर: भौतिकी के अनेक महान नियम सरलता एवं सुन्दरता का अनूठा संगम हैं। कुछ उदाहरण:
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