UP Board Class 11 Physics 7. कणों के नियम तथा घूर्णी गति is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
हल:
(क) गोले का द्रव्यमान केन्द्र उसके ज्यामितीय केन्द्र पर होता है।
(ख) बेलन का द्रव्यमान केन्द्र उसके ज्यामितीय केन्द्र पर, अर्थात् सममित अक्ष के मध्य बिन्दु पर होता है।
(ग) छल्ले का द्रव्यमान केन्द्र उसके ज्यामितीय केन्द्र पर होता है।
(घ) घन का द्रव्यमान केन्द्र उसके ज्यामितीय केन्द्र पर होता है, जहाँ इसके विकर्ण एक-दूसरे को काटते हैं।
(ङ) नहीं, द्रव्यमान केन्द्र का पिण्ड के भीतर होना आवश्यक नहीं है। उदाहरण के लिए, छल्ले, खोखले बेलन तथा खोखले घन का द्रव्यमान केन्द्र पिण्ड के बाहर स्थित होता है।
हल:
दिया है: H और Cl के नाभिकों के बीच दूरी = 1.27 Å = 1.27 × 10-10 m
माना हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान = m
तब क्लोरीन परमाणु का द्रव्यमान = 35.5 m
हाइड्रोजन नाभिक को मूल बिन्दु (r1 = 0) मानते हुए, क्लोरीन नाभिक का स्थिति सदिश r2 = 1.27 × 10-10 m
द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश:
rcm = (m1r1 + m2r2) / (m1 + m2)
= (m × 0 + 35.5m × 1.27 × 10-10) / (m + 35.5m)
= (35.5 × 1.27 × 10-10) / 36.5
≈ 1.235 × 10-10 m ≈ 1.24 Å
अतः द्रव्यमान केन्द्र हाइड्रोजन नाभिक से लगभग 1.24 Å की दूरी पर है।
हल:
निकाय (ट्रॉली + बच्चा) के द्रव्यमान केन्द्र की चाल नियत रहेगी, अर्थात् v ही रहेगी। कारण: दौड़ने में ट्रॉली पर आरोपित बल आन्तरिक बल है, और किसी निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का वेग केवल बाह्य बल द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है।
हल:
माना सदिश a तथा b त्रिभुज की दो संलग्न भुजाओं OA तथा OB को निरूपित करते हैं तथा इनके बीच का कोण θ है।
त्रिभुज OAB का क्षेत्रफल = (1/2) × आधार × ऊँचाई
= (1/2) × |b| × (|a| sinθ) = (1/2) |a| |b| sinθ
सदिश गुणन के अनुसार: |a × b| = |a| |b| sinθ
अतः त्रिभुज का क्षेत्रफल = (1/2) |a × b|
हल:
माना तीन सदिश a, b, c से बना समान्तर षट्फलक है।
b × c का परिमाण = |b| |c| sin90° = bc (यदि b व c परस्पर लम्ब हैं)
तथा इसकी दिशा b व c के तल के लम्बवत् है।
अब a · (b × c) = |a| |b × c| cos0° = a · (bc) = abc
जो कि समान्तर षट्फलक के आयतन के बराबर है।
हल:
कोणीय संवेग L = r × p
r = x i + y j + z k
p = px i + py j + pz k
L = (y pz – z py) i + (z px – x pz) j + (x py – y px) k
अतः L के अवयव:
Lx = y pz – z py
Ly = z px – x pz
Lz = x py – y px
यदि कण x-y तल में गतिमान है, तो z = 0 तथा pz = 0
तब Lx = 0, Ly = 0, केवल Lz = x py – y px शून्येतर रहता है।
अतः कोणीय संवेग का केवल z-अवयव ही होता है।
हल:
प्रत्येक कण का रेखीय संवेग p = m v
माना किसी क्षण दोनों कणों की स्थिति सदिश किसी बिन्दु O के सापेक्ष r1 व r2 हैं।
निकाय का कुल कोणीय संवेग L = r1 × m v + r2 × (-m v) = (r1 – r2) × m v
चूँकि |r1 – r2| = d (नियत), तथा v की दिशा नियत है, अतः L का परिमाण m v d नियत रहता है तथा दिशा भी नियत रहती है।
इस प्रकार निकाय का सदिश कोणीय संवेग समय के साथ नियत रहता है।
हल:
माना डोरियों में तनाव T1 व T2 हैं तथा छड़ का भार W = Mg है।
क्षैतिज दिशा में सन्तुलन: T1 cos 53.1° = T2 cos 36.9° …(1)
ऊर्ध्वाधर दिशा में सन्तुलन: T1 sin 53.1° + T2 sin 36.9° = W …(2)
बाएँ सिरे के परितः आघूर्ण लेने पर: T2 sin 36.9° × 2 = W × d …(3)
समीकरणों को हल करने पर: d ≈ 0.721 m = 72.1 cm
हल:
कार का कुल भार W = 1800 × 9.8 = 17640 N
माना अगली धुरी पर प्रत्येक पहिये पर अभिलम्ब प्रतिक्रिया Rf तथा पिछली धुरी पर Rr है।
ऊर्ध्वाधर सन्तुलन: 2Rf + 2Rr = W …(1)
गुरुत्व केन्द्र के परितः आघूर्ण लेने पर:
Rf × 1.05 = Rr × (1.8 – 1.05) = Rr × 0.75 …(2)
हल करने पर: Rf ≈ 3675 N, Rr ≈ 5145 N
अतः प्रत्येक अगले पहिये पर बल ≈ 3675 N, प्रत्येक पिछले पहिये पर बल ≈ 5145 N
हल:
(क) समान्तर अक्ष प्रमेय से: I = Icm + M d²
यहाँ Icm = (2/5) M R², d = R
∴ I = (2/5) M R² + M R² = (7/5) M R²
(ख) लम्बवत् अक्ष प्रमेय से: Iz = Ix + Iy
दिया है: व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण Ix = Iy = (1/4) M R²
∴ केन्द्र से गुजरने वाली तथा तल के लम्बवत् अक्ष के परितः Iz = (1/4) M R² + (1/4) M R² = (1/2) M R²
अब कोर से गुजरने वाली समान्तर अक्ष के लिए समान्तर अक्ष प्रमेय से:
I = Iz + M R² = (1/2) M R² + M R² = (3/2) M R²
हल:
खोखले बेलन का जड़त्व आघूर्ण Ic = M R²
ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण Is = (2/5) M R²
बल आघूर्ण τ समान है। कोणीय त्वरण α = τ / I
चूँकि Is < Ic, अतः αs > αc
समान समय के बाद कोणीय चाल ω = ω0 + α t
अतः ठोस गोला अधिक कोणीय चाल प्राप्त करेगा।
हल:
दिया है: M = 20 kg, ω = 100 rad/s, R = 0.25 m
ठोस बेलन का जड़त्व आघूर्ण I = (1/2) M R² = (1/2) × 20 × (0.25)² = 0.625 kg m²
घूर्णन गतिज ऊर्जा K = (1/2) I ω² = (1/2) × 0.625 × (100)² = 3125 J
कोणीय संवेग L = I ω = 0.625 × 100 = 62.5 J s
हल:
(क) कोणीय संवेग संरक्षण से: I1 ω1 = I2 ω2
दिया है: ω1 = 40 rev/min, I2 = (2/5) I1
∴ ω2 = (I1 / I2) ω1 = (5/2) × 40 = 100 rev/min
(ख) गतिज ऊर्जा K = (1/2) I ω²
K1 = (1/2) I1 ω1², K2 = (1/2) I2 ω2² = (1/2) × (2/5 I1) × (5/2 ω1)² = (5/2) × (1/2 I1 ω1²) = (5/2) K1
अतः K2 > K1
गतिज ऊर्जा में यह वृद्धि बच्चे द्वारा हाथ सिकोड़ने में किए गए कार्य (पेशीय ऊर्जा) के कारण होती है।
हल:
दिया है: M = 3 kg, R = 0.4 m, F = 30 N
खोखले बेलन का जड़त्व आघूर्ण I = M R² = 3 × (0.4)² = 0.48 kg m²
बल आघूर्ण τ = F × R = 30 × 0.4 = 12 N m
कोणीय त्वरण α = τ / I = 12 / 0.48 = 25 rad/s²
रैखिक त्वरण a = α R = 25 × 0.4 = 10 m/s²
हल:
शक्ति P = τ ω = 180 × 200 = 36000 W = 36 kW
हल:
माना डिस्क का प्रति इकाई क्षेत्रफल द्रव्यमान σ है।
पूरी डिस्क का द्रव्यमान M = σ π R²
काटे गए भाग का द्रव्यमान m = σ π (R/2)² = M/4
माना अवशिष्ट भाग का द्रव्यमान केन्द्र, मूल केन्द्र O से x दूरी पर है।
द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा से: M × 0 = (M – m) × x + m × (R/2)
0 = (3M/4) x + (M/4) × (R/2)
⇒ (3M/4) x = – M R / 8
⇒ x = – R / 6
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि गुरुत्व केन्द्र, काटे गए भाग के विपरीत दिशा में है।
अतः अवशिष्ट डिस्क का गुरुत्व केन्द्र मूल केन्द्र से R/6 दूरी पर काटे गए भाग के विपरीत दिशा में है।
हल:
माना छड़ का द्रव्यमान M ग्राम है।
छड़ का गुरुत्व केन्द्र 50 cm पर है।
सिक्कों का कुल द्रव्यमान = 10 g, स्थिति = 12 cm
नया संतुलन बिन्दु = 45 cm
आघूर्ण सिद्धान्त लगाने पर:
M × (50 – 45) = 10 × (45 – 12)
M × 5 = 10 × 33
M = 66 g
अतः मीटर छड़ का द्रव्यमान 66 ग्राम है।
हल:
(क) हाँ, दोनों स्थितियों में गोला तली पर समान चाल से पहुँचेगा क्योंकि ऊर्जा संरक्षण के अनुसार mgh = (1/2)mv² + (1/2)Iω², और चूँकि h समान है, v भी समान होगा।
(ख) हाँ, कम ढाल वाले आनत तल पर लुढ़कने में अधिक समय लगेगा।
(ग) कम कोण वाले आनत तल पर त्वरण कम होता है (a = g sinθ / (1 + k²/R²)), अतः नियत दूरी तय करने में अधिक समय लगता है।
हल:
दिया है: R = 2 m, M = 100 kg, v = 0.2 m/s
वलय का जड़त्व आघूर्ण I = M R²
कुल गतिज ऊर्जा K = स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा + घूर्णन गतिज ऊर्जा
= (1/2) M v² + (1/2) I ω²
चूँकि ω = v/R, तथा I = M R²
∴ K = (1/2) M v² + (1/2) M R² × (v²/R²) = (1/2) M v² + (1/2) M v² = M v²
= 100 × (0.2)² = 4 J
अतः वलय को रोकने के लिए 4 J कार्य करना होगा।
हल:
दिया है: m = 5.30 × 10-26 kg, I = 1.94 × 10-46 kg m², v = 500 m/s
स्थानान्तरण गतिज ऊर्जा Ktrans = (1/2) m v²
घूर्णन गतिज ऊर्जा Krot = (1/2)
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