UP Board Class 11 Physics 8. गुरुत्वाकर्षण is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(a) आप किसी आवेश का परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिण्ड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों द्वारा कर सकते हैं?
(b) पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्षयान आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है?
(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के कारण गुरुत्व बल से करें, तो आप यह पाएंगे कि सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप स्वयं आगामी अभ्यासों में दिए गए आंकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?
(a) नहीं, किसी पिण्ड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से उसे खोखले गोले में रखकर नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है, जबकि वैद्युत बल माध्यम पर निर्भर करता है।
(b) हाँ, यदि अन्तरिक्षयान आकार में बड़ा है, तो अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है। इस स्थिति में अन्तरिक्षयान के गुरुत्वाकर्षण का परिमाण अनुभव तथा मापने योग्य हो जाएगा।
(c) ज्वारीय प्रभाव गुरुत्वाकर्षण के व्युत्क्रम वर्ग नियम द्वारा नहीं, बल्कि दूरी के तृतीय घात के व्युत्क्रमानुपाती द्वारा बताया जा सकता है। चन्द्रमा तथा पृथ्वी के बीच दूरी, पृथ्वी तथा सूर्य के बीच दूरी की तुलना में बहुत कम है। अतः चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव की तुलना में अधिक है।
(a) बढ़ती तुंगता (ऊँचाई) के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(b) बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व का गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से r₁ तथा r₂ दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र -G M m (1/r₂ - 1/r₁) सूत्र m g (r₂ - r₁) से अधिक/कम यथार्थ है।
(a) पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण g' = g / (1 + h/Rₑ)² होता है, जहाँ Rₑ पृथ्वी की त्रिज्या है। अतः ऊँचाई बढ़ने के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है।
(b) पृथ्वी तल से d गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण g' = g (1 - d/Rₑ) होता है। अतः गहराई बढ़ने के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से r₁ तथा r₂ दूरियों पर स्थित दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र -G M m (1/r₂ - 1/r₁), सूत्र m g (r₂ - r₁) से अधिक यथार्थ है।
माना Mₛ = सूर्य का द्रव्यमान, m = ग्रह का द्रव्यमान, r = पृथ्वी की कक्षीय त्रिज्या, r' = ग्रह की कक्षीय त्रिज्या, ω = पृथ्वी का कोणीय वेग, ω' = ग्रह का कोणीय वेग है।
कक्षीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल, सूर्य तथा ग्रह के बीच गुरुत्वाकर्षण बल से प्राप्त होता है।
पृथ्वी के लिए: m ω² r = G Mₛ m / r² ...(1)
ग्रह के लिए: m ω'² r' = G Mₛ m / r'² ...(2)
समीकरण (2) को (1) से भाग देने पर:
(ω'² r') / (ω² r) = r² / r'²
चूँकि रेखीय चाल v = ω r, और दिया है कि ग्रह की चाल पृथ्वी की चाल से दोगुनी है (v' = 2v), इसलिए ω' r' = 2 ω r।
इसे उपरोक्त सम्बन्ध में रखकर हल करने पर:
r' = r / (2^(2/3)) ≈ 0.63 r
अतः पृथ्वी की कक्षा की तुलना में ग्रह का कक्षीय आमाप लगभग 0.63 गुना है।
दिया है: T = 1.769 दिन = 1.528 × 10⁵ s, r = 4.22 × 10⁸ m, G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m²/kg², सूर्य का द्रव्यमान Mₛ ≈ 2 × 10³⁰ kg
कक्षीय गति के लिए: T² = (4π² / G M_J) r³, जहाँ M_J बृहस्पति का द्रव्यमान है।
इससे: M_J = (4π² r³) / (G T²)
मान रखने पर:
M_J = (4 × (3.14)² × (4.22 × 10⁸)³) / (6.67 × 10⁻¹¹ × (1.528 × 10⁵)²)
M_J ≈ 1.9 × 10²⁷ kg ≈ 2 × 10²⁷ kg
अब, M_J / Mₛ = (2 × 10²⁷) / (2 × 10³⁰) = 1/1000
अतः बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 गुना है।
माना तारों की संख्या N = 2.5 × 10¹¹, प्रत्येक का द्रव्यमान m = सौर द्रव्यमान = 2 × 10³⁰ kg
आकाशगंगा का कुल द्रव्यमान M = N × m = 2.5 × 10¹¹ × 2 × 10³⁰ = 5 × 10⁴¹ kg
तारे की कक्षीय त्रिज्या r = 50,000 ly = 50,000 × 9.46 × 10¹⁵ m ≈ 4.73 × 10²⁰ m
कक्षीय गति के लिए: v² = G M / r
परिक्रमण काल T = 2πr / v = 2πr / √(G M / r) = 2π √(r³ / G M)
मान रखने पर:
T ≈ 2 × 3.14 × √( (4.73 × 10²⁰)³ / (6.67 × 10⁻¹¹ × 5 × 10⁴¹) )
T ≈ 1.12 × 10¹⁶ s
वर्षों में: T ≈ (1.12 × 10¹⁶) / (365 × 24 × 3600) ≈ 3.55 × 10⁸ वर्ष
(a) यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर है, तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
(b) कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊँचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिण्ड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक/कम होती है।
(a) उपग्रह की कुल ऊर्जा E = -G M m / (2r)। गतिज ऊर्जा K = G M m / (2r)। अतः कुल ऊर्जा, गतिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
(b) कक्षा में परिक्रमा करने वाले उपग्रह को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा, समान ऊँचाई के स्थिर पिण्ड को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा से कम होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उपग्रह पहले से ही कक्षीय गतिज ऊर्जा रखता है।
पलायन वेग vₑ = √(2 G M / R) = √(2 g R) होता है, जहाँ M व R पृथ्वी का द्रव्यमान व त्रिज्या हैं।
(a) नहीं, पलायन वेग पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
(b) हाँ, प्रक्षेपण बिन्दु की स्थिति (अक्षांश व ऊँचाई) पर निर्भर करती है, क्योंकि g का मान भिन्न होता है।
(c) नहीं, प्रक्षेपण की दिशा पर निर्भर नहीं करती है।
(d) हाँ, प्रमोचन बिन्दु की ऊँचाई पर निर्भर करती है (vₑ ∝ 1/√(R+h))।
(a) नहीं, रैखिक चाल परिवर्तित होती है (सूर्य के निकट अधिक, दूर कम)।
(b) नहीं, कोणीय चाल भी परिवर्तित होती है।
(c) हाँ, कोणीय संवेग नियत रहता है (कोई बाह्य बल आघूर्ण नहीं)।
(d) नहीं, गतिज ऊर्जा परिवर्तित होती है।
(e) नहीं, स्थितिज ऊर्जा परिवर्तित होती है।
(f) हाँ, कुल ऊर्जा नियत रहती है (संरक्षित रहती है)।
(b) चेहरे पर सूजन, (c) सिरदर्द, (d) दिक्विन्यास समस्या अन्तरिक्ष यात्री के लिए दुखदायी हो सकते हैं। अन्तरिक्ष में शून्य गुरुत्व के कारण शरीर के तरल पदार्थों का वितरण बदल जाता है, जिससे चेहरे पर सूजन, सिरदर्द और दिशा का भ्रम हो सकता है।
गोलीय कोश के भीतर सभी बिन्दुओं पर गुरुत्वीय तीव्रता शून्य होती है। यदि ऊपरी अर्धगोलीय कोश हटा दिया जाए, तो केन्द्र पर स्थित कण पर कार्य करने वाला गुरुत्वीय बल नीचे की ओर (अर्थात् शेष अर्धगोलीय कोश के केन्द्र की ओर) होगा। अतः गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा नीचे की ओर (चित्र में तीर 'c' के अनुरूप) होगी।
बिन्दु P अर्धगोलीय कोश की सतह पर स्थित है। किसी गोलीय कोश के बाहर स्थित बिन्दु के लिए, गुरुत्वीय तीव्रता कोश के केन्द्र की ओर कार्य करती है। अतः बिन्दु P पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा कोश के केन्द्र O की ओर (चित्र में तीर 'e' के अनुरूप) होगी।
माना पृथ्वी के केन्द्र से x दूरी पर बिन्दु पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है। माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
उस बिन्दु पर, सूर्य द्वारा रॉकेट पर आरोपित बल = पृथ्वी द्वारा रॉकेट पर आरोपित बल
G Mₛ m / (r - x)² = G Mₑ m / x²
जहाँ r = 1.5 × 10¹¹ m (पृथ्वी-सूर्य दूरी), Mₛ = 2 × 10³⁰ kg, Mₑ = 6.0 × 10²⁴ kg
हल करने पर: x = r / (1 + √(Mₛ/Mₑ))
मान रखने पर: x ≈ (1.5 × 10¹¹) / (1 + √( (2×10³⁰) / (6×10²⁴) ) ) ≈ (1.5 × 10¹¹) / (1 + 577.35) ≈ 2.6 × 10⁸ m (पृथ्वी के केन्द्र से)
सूर्य के परितः पृथ्वी की गति के लिए, आवश्यक अभिकेन्द्र बल सूर्य-पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण बल से प्राप्त होता है।
m ω² r = G Mₛ m / r²
जहाँ T पृथ्वी का आवर्तकाल (1 वर्ष = 3.15 × 10⁷ s), r = 1.5 × 10¹¹ m है।
इससे: Mₛ = (4π² r³) / (G T²)
मान रखने पर: Mₛ ≈ 2 × 10³⁰ kg
कैप्लर के तृतीय नियम से: T² ∝ r³
(T_S / T_E)² = (r_S / r_E)³
दिया है: T_S = 29.5 T_E, r_E = 1.5 × 10⁸ km
(29.5)² = (r_S / r_E)³
r_S = r_E × (29.5)^(2/3)
गणना करने पर: r_S ≈ 1.5 × 10⁸ × 9.53 ≈ 1.43 × 10⁹ km
पृथ्वी की सतह पर भार W = m g = 63 N
ऊँचाई h = R/2 पर गुरुत्वीय त्वरण: g' = g / (1 + h/R)² = g / (1 + 1/2)² = g / (1.5)² = (4/9) g
अतः नया भार W' = m g' = m g × (4/9) = W × (4/9) = 63 × (4/9) = 28 N
पृथ्वी की सतह पर भार W = m g = 250 N
गहराई d = R/2 पर गुरुत्वीय त्वरण: g' = g (1 - d/R) = g (1 - 1/2) = g/2
अतः नया भार W' = m g' = m g / 2 = W / 2 = 250 / 2 = 125 N
ऊर्जा संरक्षण के नियम से: (1/2) m v² - (G M m / R) = - (G M m / (R + h))
हल करने पर: h = (v² R) / (2 g R - v²), जहाँ g = G M / R² ≈ 9.8 m/s²
दिया है: v = 5 km/s = 5000 m/s, R = 6.4 × 10⁶ m
मान रखने पर: h ≈ ( (5000)² × 6.4 × 10⁶ ) / (2 × 9.8 × 6.4 × 10⁶ - (5000)² )
h ≈ 1.6 × 10⁶ m = 1600 km (पृथ्वी की सतह से)
पलायन चाल vₑ = 11.2 km/s, प्रक्षेपण चाल v = 3 vₑ
ऊर्जा संरक्षण से: (1/2) m v² - (G M m / R) = (1/2) m v'² + 0 (अनन्त पर)
चूँकि (1/2) m vₑ² = G M m / R, इसलिए G M m / R = (1/2) m vₑ²
उपरोक्त में रखने पर: (1/2) m (9 vₑ²) - (1/2) m vₑ² = (1/2) m v'²
=> 9 vₑ² - vₑ² = v'² => v'² = 8 vₑ²
v' = √8 × vₑ = 2√2 × 11.2 ≈ 2 × 1.414 × 11.2 ≈ 31.68 km/s
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