UP Board Class 11 Physics 5. गति के नियम is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:
F = ma, अर्थात किसी अत्वरित कण पर कार्यरत बल शून्य होता है। (∵ a = 0, ∴ F = 0)
0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक परिस्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए।
यदि कंकड़ को क्षैतिज दिशा से 45° कोण पर फेंका जाए, तो क्या आपके उत्तर में कोई परिवर्तन होगा? (वायु प्रतिरोध को उपेक्षणीय मानिए)
जब एक वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है अथवा वह मुक्त रूप से गुरुत्व के अंतर्गत गिरता है, तब उस पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण एक त्वरण g = 10 m/s² नीचे की ओर कार्य करता है।
कंकड़ का द्रव्यमान (m) = 0.05 kg
यदि कंकड़ को क्षैतिज से 45° के कोण पर फेंका जाए, तब उस पर कार्यरत त्वरण तथा उस पर कार्यरत बल अर्थात 0.50 N (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर) अपरिवर्तित रहता है। खण्ड (c) में उच्चतम बिन्दु पर वेग का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होगा, परन्तु वेग का क्षैतिज घटक शून्य नहीं होगा।
0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थितियों में ज्ञात कीजिए:
उपरोक्त सभी स्थितियों में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।
पत्थर का द्रव्यमान (m) = 0.1 kg
l लंबाई की एक डोरी का एक सिरा m संहति के किसी कण से तथा दूसरा सिरा चिकनी क्षैतिज मेज पर लगी खूँटी से बँधा है। यदि कण v चाल से वृत्त में गति करता है, तो कण पर (केंद्र की ओर निर्देशित) नेट बल है:
(यहाँ T डोरी में तनाव है।) सही विकल्प चुनिए।
जब डोरी से बंधा एक पिण्ड वृत्तीय पथ पर गति करता है, तब आवश्यक अभिकेन्द्र बल डोरी में तनाव से प्राप्त होता है।
कण पर केन्द्र की ओर कार्यरत परिणामी बल = अभिकेन्द्र बल = डोरी में तनाव (T)
∴ सही विकल्प (i) T है।
15 m/s की आरंभिक चाल से गतिशील 20 kg संहति के किसी पिण्ड पर 50 N का स्थाई मंदन बल आरोपित किया गया है। पिण्ड को रुकने में कितना समय लगेगा?
मंदन बल (F) = -50 N
पिण्ड की संहति (m) = 20 kg
प्रारम्भिक चाल (u) = 15 m/s
अंतिम चाल (v) = 0
माना रुकने में लगा समय = t
F = ma ⇒ a = F/m = -50/20 = -2.5 m/s²
गति के समीकरण v = u + at से,
0 = 15 + (-2.5)t ⇒ t = 15 / 2.5 = 6 s
3.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर आरोपित कोई बल 25 s में उसकी चाल को 2.0 m/s से 3.5 m/s कर देता है। पिण्ड की गति की दिशा अपरिवर्तित रहती है। बल का परिमाण व दिशा क्या है?
पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 3.0 kg
प्रारम्भिक चाल (u) = 2.0 m/s
अंतिम चाल (v) = 3.5 m/s
समय (t) = 25 s
गति के प्रथम समीकरण v = u + at से,
3.5 = 2.0 + a × 25 ⇒ a = (3.5 - 2.0) / 25 = 1.5 / 25 = 0.06 m/s²
पिण्ड पर कार्यरत बल (F) = ma = 3.0 × 0.06 = 0.18 N
क्योंकि पिण्ड की गति की दिशा अपरिवर्तित रहती है, इसलिए पिण्ड पर कार्यरत बल की दिशा गति की दिशा में है।
5.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर 8 N व 6 N के दो लंबवत् बल आरोपित हैं। पिण्ड के त्वरण का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिए।
पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 5.0 kg
बल F₁ = 8 N, बल F₂ = 6 N, दोनों बलों के बीच कोण θ = 90°
पिण्ड पर कार्यरत परिणामी बल (F) = √(F₁² + F₂² + 2F₁F₂ cosθ)
= √(8² + 6² + 2×8×6×cos90°) = √(64 + 36 + 0) = √100 = 10 N
यदि परिणामी बल F, बल F₁ से α कोण बनाए, तब
tan α = F₂ / F₁ = 6/8 = 0.75 ⇒ α = tan⁻¹(0.75) ≈ 36.87°
सम्बन्ध F = ma से, a = F/m = 10/5 = 2 m/s²
अतः पिण्ड पर 2 m/s² का त्वरण बल F₁ की दिशा से 36.87° पर कार्य कर रहा है।
36 km/h की चाल से गतिमान किसी ऑटो रिक्शा का चालक सड़क के बीच एक बच्चे को खड़ा देखकर अपने वाहन को ठीक 4.0 s में रोककर उस बच्चे को बचा लेता है। यदि ऑटो रिक्शा बच्चे के ठीक निकट रुकता है, तो वाहन पर लगा औसत मंदन बल क्या है? ऑटो रिक्शा तथा चालक की संहतियाँ क्रमशः 400 kg और 65 kg हैं।
ऑटो रिक्शा की प्रारम्भिक चाल (u) = 36 km/h = 36 × (5/18) = 10 m/s
ऑटो रिक्शा की अंतिम चाल (v) = 0
समय (t) = 4.0 s
ऑटो रिक्शा का द्रव्यमान (m₁) = 400 kg
चालक का द्रव्यमान (m₂) = 65 kg
कुल द्रव्यमान (m) = m₁ + m₂ = 400 + 65 = 465 kg
गति के समीकरण v = u + at से,
0 = 10 + a × 4.0 ⇒ a = -10/4 = -2.5 m/s² (मंदन)
वाहन पर लगा औसत मंदन बल (F) = ma = 465 × (-2.5) = -1162.5 N
20000 kg उत्थापन संहति के किसी रॉकेट में 5 m/s² के आरंभिक त्वरण के साथ ऊपर की ओर स्फोट किया जाता है। स्फोट का आरंभिक प्रणोद (बल) परिकलित कीजिए।
रॉकेट का प्रारम्भिक द्रव्यमान (m) = 20000 kg
प्रारम्भिक त्वरण (a) = 5.0 m/s² (ऊपर की ओर)
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 9.8 m/s² (नीचे की ओर)
माना स्फोट का आरम्भिक प्रणोद T है।
T - mg = ma ⇒ T = m(g + a) = 20000 × (9.8 + 5.0)
= 20000 × 14.8 = 2.96 × 10⁵ N
उत्तर की ओर 10 m/s की एकसमान आरंभिक चाल से गतिमान 0.40 kg संहति के किसी पिण्ड पर दक्षिण दिशा के अनुदिश 8.0 N का स्थाई बल 30 s के लिए आरोपित किया गया है। जिस क्षण बल आरोपित किया गया उसे t = 0 तथा उस समय पिण्ड की स्थिति x = 0 लीजिए। t = -5 s, 25 s, 100 s पर इस कण की स्थिति क्या होगी?
पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 0.40 kg
पिण्ड की प्रारम्भिक चाल (u) = 10 m/s (उत्तर की ओर)
बल (F) = 8.0 N (दक्षिण की ओर) = -8.0 N (ऋणात्मक चिह्न मंदन दर्शाता है)
समय t = 30 s
समय t = 0 पर पिण्ड की स्थिति x = 0
चित्र में 0.04 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है। इस गति के लिए कोई उचित भौतिक संदर्भ प्रस्तावित कीजिए। पिण्ड द्वारा प्राप्त दो क्रमिक आवेगों के बीच समय-अंतराल क्या है? प्रत्येक आवेग का परिमाण क्या है?
(स्थिति-समय ग्राफ यहाँ वर्णित है: पिण्ड 2 cm विस्थापन तक जाता है और वापस आता है, यह दोहराता है।)
पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 0.04 kg
ग्राफ से, पिण्ड का वेग (v) = ग्राफ का ढाल = 2 cm / 2 s = 1 cm/s = 0.01 m/s
यह गति 0 तथा 2 m पर स्थित दो दीवारों के बीच 0.01 m/s के नियत वेग से गतिमान गेंद की है, जो प्रत्येक बार दीवार से टकराने पर प्रतिक्षिप्त हो जाती है।
गेंद को प्रति 2 s के बाद दिए गए आवेग का परिमाण = गेंद के संवेग में परिवर्तन = m(v - u)
= 0.04 [0.01 - (-0.01)] = 0.04 × 0.02 = 8 × 10⁻⁴ kg·m/s
दो क्रमिक आवेगों के बीच समय-अंतराल = 2 s
चित्र में कोई व्यक्ति 1 m/s² त्वरण से गतिशील क्षैतिज संवाहक पट्टे पर स्थिर खड़ा है। उस व्यक्ति पर आरोपित नेट बल क्या है? यदि व्यक्ति के जूतों और पट्टे के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.2 है, तो पट्टे के कितने त्वरण तक वह व्यक्ति उस पट्टे के सापेक्ष स्थिर रह सकता है? (व्यक्ति की संहति = 65 kg)
संवाहक पट्टे का त्वरण (a) = 1 m/s²
व्यक्ति पट्टे पर स्थिर खड़ा है, अतः व्यक्ति का त्वरण भी = 1 m/s²
व्यक्ति की संहति (m) = 65 kg
व्यक्ति पर कार्यरत कुल बल (F) = ma = 65 × 1 = 65 N (पट्टे की गति की दिशा में)
घर्षण गुणांक (μ) = 0.2
माना पट्टे के त्वरण a' तक व्यक्ति पट्टे के सापेक्ष स्थिर रह सकता है।
इस स्थिति में, अधिकतम स्थैतिक घर्षण (f_max) = μmg = ma'
⇒ a' = μg = 0.2 × 9.8 = 1.96 m/s²
m संहति के पत्थर को किसी डोरी के एक सिरे से बाँधकर R त्रिज्या के ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है। वृत्त के निम्नतम तथा उच्चतम बिंदुओं पर ऊर्ध्वाधरत: अधोमुखी दिशा में नेट बल है (सही विकल्प चुनिए):
यहाँ T₁ तथा v₁ निम्नतम बिन्दु पर तनाव तथा चाल दर्शाते हैं। T₂ तथा v₂ इनके उच्चतम बिन्दु पर तदनुरूपी मान हैं।
निम्नतम बिन्दु पर: डोरी में तनाव T₁ ऊपर की ओर, भार mg नीचे की ओर। अतः नेट बल (नीचे की ओर) = mg - T₁
उच्चतम बिन्दु पर: डोरी में तनाव T₂ तथा भार mg दोनों नीचे की ओर। अतः नेट बल (नीचे की ओर) = mg + T₂
∴ सही विकल्प (a) है।
1000 kg संहति का कोई हेलीकॉप्टर 15 m/s² के ऊर्ध्वाधर त्वरण से ऊपर उठता है। चालक दल तथा यात्रियों की संहति 300 kg है। निम्नलिखित बलों का परिमाण व दिशा लिखिए:
हेलीकॉप्टर की संहति (m₁) = 1000 kg
चालक दल एवं यात्रियों की संहति (m₂) = 300 kg
त्वरण (a) = 15 m/s² (ऊपर की ओर)
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 10 m/s² (नीचे की ओर)
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