UP Board Class 8 Science 10. किशोरावस्था की ओर is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर - किशोरावस्था जीवन का वह महत्वपूर्ण चरण है जब एक बच्चा वयस्क बनने की ओर बढ़ता है। इस दौरान शरीर में तेजी से वृद्धि होती है और ऐसे परिवर्तन आते हैं जिनसे व्यक्ति में जनन की क्षमता विकसित हो जाती है। यह परिवर्तनों की वह प्राकृतिक प्रक्रिया है जो जनन परिपक्वता लाती है।
उत्तर - यौवनारंभ का सबसे महत्वपूर्ण और मूलभूत परिवर्तन लड़के और लड़कियों में जनन क्षमता का विकास है। इसी के साथ अंडाशय और वृषण क्रमशः अंडाणु और शुक्राणु बनाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं।
उत्तर - यौवनारंभ के दौरान सबसे पहले और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला परिवर्तन लंबाई में अचानक और तेज वृद्धि होना है। किशोर और किशोरियाँ कुछ ही महीनों में काफी लंबे हो जाते हैं।
उत्तर - अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (जैसे पिट्यूटरी, थायरॉइड) अपने द्वारा बनाए गए रासायनिक पदार्थों (हार्मोन्स) को किसी विशेष नलिका (डक्ट) के माध्यम से नहीं छोड़तीं। बल्कि, ये हार्मोन्स सीधे रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं। इसी विशेषता के कारण इन्हें नलिकाविहीन ग्रंथियाँ कहा जाता है।
उत्तर - किशोरावस्था में शरीर में हार्मोन्स के स्तर में बदलाव होता है। इन हार्मोन्स के प्रभाव से तैल ग्रंथियाँ (सीबेसियस ग्लैंड्स) अधिक सक्रिय हो जाती हैं और ज्यादा तेल (सीबम) बनाने लगती हैं। यह अतिरिक्त तेल त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देता है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और परिणामस्वरूप फुंसियाँ व मुहाँसे निकल आते हैं।
उत्तर - गौण लैंगिक लक्षण वे शारीरिक विशेषताएँ हैं जो सीधे जनन प्रक्रिया में भाग नहीं लेतीं, लेकिन लड़के और लड़की में अंतर स्पष्ट करती हैं। ये यौवनारंभ के दौरान विकसित होते हैं।
उदाहरण: लड़कों में चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ आना, आवाज़ का भारी होना। लड़कियों में स्तनों का विकसित होना, कूल्हों का चौड़ा होना।
उत्तर - यौवनारंभ के समय निम्नलिखित शारीरिक परिवर्तन होते हैं:
उत्तर - अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित वह रासायनिक पदार्थ जो शरीर में विभिन्न परिवर्तनों को नियंत्रित करता है, हार्मोन कहलाता है। हार्मोन शरीर के अंदर संदेशवाहक का काम करते हैं।
उत्तर - ऋतुस्राव मादा प्रजनन चक्र का एक हिस्सा है। जब अंडाशय से निकला अंडाणु निषेचित नहीं हो पाता, तो गर्भाशय की दीवार पर बना मोटा और रक्तवाहिकाओं से भरपूर स्तर टूटकर रक्त के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है। इस प्रक्रिया को ही ऋतुस्राव या मासिक धर्म (Periods) कहते हैं। यह चक्र आमतौर पर 28 से 30 दिनों के अंतराल पर होता है।
उत्तर - वृषण (नर) और अंडाशय (मादा) द्वारा स्रावित हार्मोन लिंग हार्मोन कहलाते हैं। इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि ये नर और मादा के बीच के अंतर, विशेषकर गौण लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए उत्तरदायी होते हैं।
प्रकार्य:
उत्तर - मनुष्य के कोशिका के केंद्रक में पाए जाने वाले वे विशेष गुणसूत्र जो शिशु के लिंग (नर या मादा) का निर्धारण करते हैं, लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं: X गुणसूत्र और Y गुणसूत्र।
उत्तर - टेस्टोस्टेरॉन।
उत्तर - एस्ट्रोजन।
उत्तर - पीयूष या पिट्यूटरी ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहा जाता है क्योंकि यह मस्तिष्क के आधार पर स्थित होती है और शरीर की अधिकांश अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रित करती है।
उत्तर - टेस्टोस्टेरॉन।
उत्तर - एस्ट्रोजन।
उत्तर - स्त्रियों में जननकाल (प्रजनन करने की क्षमता) की अवधि आमतौर पर लगभग 10-12 वर्ष की आयु में पहले मासिक धर्म (रजोदर्शन) से शुरू होकर 40-45 वर्ष की आयु तक रहती है, जब मासिक धर्म बंद हो जाता है (रजोनिवृत्ति)।
उत्तर - मनुष्य में लिंग निर्धारण गुणसूत्रों द्वारा होता है। मादा के अंडाणु में हमेशा X गुणसूत्र होता है। नर के शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं: एक X गुणसूत्र वाला और दूसरा Y गुणसूत्र वाला।
उत्तर - लड़कियों के जीवन में यौवनारंभ के दौरान होने वाला पहला ऋतुस्राव (मासिक धर्म) ही रजोदर्शन कहलाता है। यह इस बात का संकेत है कि लड़की शारीरिक रूप से प्रजनन के योग्य हो गई है।
उत्तर - जब स्त्री की आयु लगभग 45 से 50 वर्ष के बीच हो जाती है, तो उसका मासिक धर्म चक्र स्थायी रूप से बंद हो जाता है। मासिक धर्म के इस प्रकार समाप्त हो जाने की प्रक्रिया को ही रजोनिवृत्ति कहते हैं। इसके बाद स्त्री में अंडाणु का निर्माण बंद हो जाता है।
उत्तर - गॉयटर (घेंघा) रोग थायरॉइड ग्रंथि का है, जिसमें गर्दन में स्थित यह ग्रंथि असामान्य रूप से बढ़ जाती है।
उत्तर - आहार में आयोडीन तत्व की कमी के कारण थायरॉइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर पाती और फूलकर गॉयटर रोग का कारण बनती है।
उत्तर - मधुमेह (डायबिटीज) रोग का मुख्य कारण अग्न्याशय (पैंक्रियाज) ग्रंथि द्वारा स्रावित इंसुलिन हार्मोन की कमी या अनुपस्थिति है। इंसुलिन की कमी से रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर बढ़ जाता है।
उत्तर - शरीर में नमक (सोडियम और पोटैशियम) की मात्रा का संतुलन एड्रिनल ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन एल्डोस्टेरोन के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
उत्तर - एड्रिनेलिन हार्मोन को 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) हार्मोन कहा जाता है। यह हार्मोन क्रोध, भय, चिंता या उत्तेजना की स्थिति में स्रावित होता है और शरीर को तनाव से निपटने के लिए तैयार करता है। इसके प्रभाव से हृदय गति बढ़ जाती है, रक्तचाप बढ़ता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है।
उत्तर - पीयूष या पिट्यूटरी ग्रंथि वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone - GH) को स्रावित करती है।
उत्तर - वृद्धि हार्मोन शरीर की सामान्य वृद्धि और विकास के लिए जिम्मेदार है। यह हड्डियों और मांसपेशियों की लंबाई व मजबूती बढ़ाने, और शरीर के ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बचपन और किशोरावस्था में इसका स्राव सबसे अधिक होता है।
उत्तर - इंसुलिन हार्मोन का मुख्य कार्य रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करना है। यह कोशिकाओं को रक्त से ग्लूकोज लेने और उसे ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। साथ ही, अतिरिक्त ग्लूकोज को यकृत (लिवर) में ग्लाइकोजन के रूप में संचित करवाता है।
उत्तर - कुछ जीवों (जैसे मेंढक, तितली) के जीवन चक्र में, अंडे से निकलने के बाद जीव का रूप पूरी तरह वयस्क जैसा नहीं होता। लार्वा (अपरिपक्व अवस्था) से वयस्क (परिपक्व अवस्था) में होने वाले इस आकारिक और शारीरिक परिवर्तन को कायांतरण (Metamorphosis) कहते हैं।
उत्तर - कीटों में कायांतरण की प्रक्रिया कीट हार्मोन्स (जैसे एक्डिसोन, जुवेनाइल हार्मोन) के द्वारा नियंत्रित होती है। ये हार्मोन लार्वा से प्यूपा और फिर वयस्क में बदलने की गति और समय को नियंत्रित करते हैं।
उत्तर - यदि टैडपोल (मेंढक के बच्चे) के रहने वाले पानी में आयोडीन तत्व की पर्याप्त मात्रा नहीं होती, तो वे वयस्क मेंढक में विकसित नहीं हो पाते। ऐसा इसलिए क्योंकि आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के लिए आवश्यक है, जो कायांतरण के लिए जिम्मेदार हार्मोन बनाती है।
उत्तर - स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमार न होना नहीं है। स्वास्थ्य व्यक्ति की वह अवस्था है जिसमें वह पूर्ण रूप से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ एवं सक्रिय होता है। यह केवल रोगों की अनुपस्थिति ही नहीं, बल्कि पूर्ण कल्याण की स्थिति है।
उत्तर - किशोरावस्था तेज वृद्धि और विकास की अवधि है। इस दौरान हड्डियाँ लंबी होती हैं, मांसपेशियाँ बनती हैं, रक्त की मात्रा बढ़ती है और शरीर के सभी अंग पूर्ण विकसित होते हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के लिए ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज आदि पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है, जो केवल संतुलित आहार से ही पूरी हो सकती है।
उत्तर - वह आहार जिसमें सही मात्रा और सही अनुपात में सभी आवश्यक पोषक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, रुक्षांश (फाइबर) और पानी उपस्थित हों, संतुलित आहार कहलाता है। यह आहार शरीर की सभी जरूरतों को पूरा करके स्वास्थ्य को बनाए रखता है।
उत्तर - दूध को एक संपूर्ण या लगभग संतुलित आहार माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन (A, B, D) और खनिज (कैल्शियम) जैसे अधिकांश आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं।
उत्तर - लौह तत्व (आयरन) रक्त के महत्वपूर्ण घटक हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आवश्यक है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है और शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन करता है। आयरन की कमी से एनीमिया (खून की कमी) रोग हो सकता है।
उत्तर - एड्स (AIDS - Acquired Immuno Deficiency Syndrome) HIV (Human Immunodeficiency Virus) नामक एक खतरनाक विषाणु के कारण होने वाला रोग है। यह विषाणु शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को नष्ट कर देता है, जिससे व्यक्ति छोटे-छोटे संक्रमणों से भी नहीं लड़ पाता।
यह मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से फैलता है:
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