UP Board Class 8 Science 4. पदार्थ- धातु और अधातु is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: (क) जिंक
जिंक एक धातु है और धातुओं में आघातवर्ध्यता का गुण पाया जाता है। इस गुण के कारण धातुओं को पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है। फॉस्फोरस, सल्फर और ऑक्सीजन अधातुएँ हैं, जिनमें यह गुण नहीं होता।
(क) सभी धातुएँ तन्य होती हैं।
(ख) सभी अधातुएँ तन्य होती हैं।
(ग) सामान्यतः धातुएँ तन्य होती हैं।
(घ) कुछ अधातुएँ तन्य होती हैं।
उत्तर: (ग) सामान्यतः धातुएँ तन्य होती हैं।
तन्यता का अर्थ है खींचकर पतले तार बनाने का गुण। यह धातुओं का एक विशिष्ट गुण है, लेकिन सभी धातुएँ समान रूप से तन्य नहीं होतीं। उदाहरण के लिए, पारा द्रव है, इसे तार नहीं बनाया जा सकता। इसलिए "सामान्यतः" शब्द का प्रयोग सही है। अधातुएँ तन्य नहीं होतीं।
(क) फॉस्फोरस बहुत ___ __ अधातु है।
(ख) धातुएँ ऊष्मा और ___ की ___ होती हैं।
(ग) आयरन, कॉपर की अपेक्षा ___ अभिक्रियाशील है।
(घ) धातुएँ, अम्लों से अभिक्रिया कर ___ गैस बनाती हैं।
उत्तर:
(क) सक्रिय (या अभिक्रियाशील)
(ख) विद्युत, सुचालक
(ग) अधिक
(घ) हाइड्रोजन
(क) सामान्यतः अधातु अम्लों से अभिक्रिया करते हैं। ( )
(ख) सोडियम बहुत अभिक्रियाशील धातु है। ( )
(ग) कॉपर, जिंक सल्फेट के विलयन से जिंक विस्थापित करता है। ( )
(घ) कोयले को खींच कर तारें प्राप्त की जा सकती हैं। ( )
उत्तर:
(क) F (अधातुएँ सामान्यतः अम्लों से अभिक्रिया नहीं करतीं।)
(ख) T (सोडियम अत्यधिक अभिक्रियाशील है, इसे मिट्टी के तेल में रखा जाता है।)
(ग) F (जिंक, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। इसलिए कॉपर, जिंक को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता। विस्थापन केवल अधिक अभिक्रियाशील धातु ही कर सकती है।)
(घ) F (कोयला (कार्बन) एक अधातु है और अधातुएँ तन्य नहीं होतीं, इन्हें खींचकर तार नहीं बनाया जा सकता।)
| गुण | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| 1. दिखावट | धातुएँ चमकीली होती हैं (धात्विक चमक)। | अधातुएँ चमकीली नहीं होतीं (आयोडीन को छोड़कर)। |
| 2. कठोरता | धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं (सोडियम, पोटैशियम को छोड़कर जो मुलायम हैं)। | अधातुएँ सामान्यतः भंगुर होती हैं। |
| 3. आघातवर्धनियता | धातुएँ आघातवर्ध्य होती हैं (पीटकर पतली चादर बनाई जा सकती है)। | अधातुएँ आघातवर्ध्य नहीं होतीं (पीटने पर टूट जाती हैं)। |
| 4. तन्यता | धातुएँ तन्य होती हैं (खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं)। | अधातुएँ तन्य नहीं होतीं। |
| 5. ऊष्मा चालन | धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं। | अधातुएँ ऊष्मा की कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट एक अपवाद है)। |
| 6. विद्युत चालन | धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं। | अधातुएँ विद्युत की कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट एक अपवाद है)। |
(क) ऐलुमिनियम की पन्नी का उपयोग खाद्य सामग्री को लपेटने में किया जाता है।
उत्तर: एल्युमीनियम अत्यधिक आघातवर्ध्य है, जिससे इसे बहुत पतली पन्नी (फॉयल) में बदला जा सकता है। यह पन्नी हल्की, लचीली होती है और खाद्य पदार्थों को नमी व हवा से बचाकर ताजा रखती है। साथ ही, यह गर्मी का अच्छा चालक है जिससे खाना गर्म रहता है।
(ख) निमज्जन छड़ें (इमरशन रॉड) धात्विक पदार्थों से निर्मित होती हैं।
उत्तर: निमज्जन छड़ों का उपयोग विद्युत हीटर में पानी गर्म करने के लिए किया जाता है। धातुएँ विद्युत और ऊष्मा की सुचालक होती हैं। जब इन छड़ों से विद्युत प्रवाहित होती है तो ये गर्म हो जाती हैं और अपनी ऊष्मा पानी को दे देती हैं। अधातुएँ इस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि वे ऊष्मा की कुचालक होती हैं।
(ग) कॉपर, जिंक को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता।
उत्तर: विस्थापन अभिक्रिया तभी होती है जब अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल दे। धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी में जिंक, कॉपर से ऊपर (अधिक अभिक्रियाशील) है। इसलिए, जिंक कॉपर को विस्थापित कर सकता है, लेकिन कॉपर जिंक को विस्थापित नहीं कर सकता।
(घ) सोडियम और पोटैशियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है।
उत्तर: सोडियम और पोटैशियम अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ हैं। ये वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी से बहुत तेजी से अभिक्रिया करके आग पकड़ लेती हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी के तेल में डुबोकर रखा जाता है क्योंकि ये मिट्टी के तेल से अभिक्रिया नहीं करतीं और तेल इन्हें वायु के संपर्क में आने से बचाता है।
उत्तर: नहीं, नींबू के अचार को एल्युमीनियम के बर्तन में नहीं रखना चाहिए। नींबू में साइट्रिक अम्ल होता है। जब अम्ल एल्युमीनियम धातु के संपर्क में आता है तो रासायनिक अभिक्रिया होती है। इस अभिक्रिया में एल्युमीनियम संक्षारित हो जाता है और अचार में विषैले यौगिक मिल सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। साथ ही, बर्तन भी खराब हो जाता है। इसलिए अचार को काँच या स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में रखना चाहिए।
उत्तर: वे धातुएँ जो प्रकृति में शुद्ध अवस्था (स्वतंत्र अवस्था) में पाई जाती हैं, अक्रिय धातुएँ कहलाती हैं। ये अन्य तत्वों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं। उदाहरण: सोना (Gold), चाँदी (Silver), प्लेटिनम (Platinum)।
उत्तर: धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें पीट-पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है, आघातवर्ध्यता कहलाता है। उदाहरण: सोने को पीटकर बहुत पतली पन्नी (स्वर्णपत्र) बनाई जा सकती है।
उत्तर: धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें खींचकर पतले तारों के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है, तन्यता कहलाता है। उदाहरण: ताँबे (कॉपर) और एल्युमीनियम के मोटे टुकड़ों से खींचकर पतले विद्युत तार बनाए जाते हैं।
उत्तर: कॉपर में जंग लगने (संक्षारण) पर उसकी सतह पर एक हरे रंग की परत चढ़ जाती है। इस परत को 'कॉपर कार्बोनेट बेसिक' या 'मैलाकाइट' कहते हैं।
उत्तर: धात्विक ऑक्साइड की प्रकृति सामान्यतः क्षारीय होती है। ये अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। उदाहरण: कैल्शियम ऑक्साइड (CaO)।
उत्तर: अधात्विक ऑक्साइड की प्रकृति सामान्यतः अम्लीय होती है। ये क्षारों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। उदाहरण: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)।
उत्तर: धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H₂) उत्पन्न करती हैं।
उदाहरण: Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
उत्तर: हाइड्रोजन गैस (H₂)। जब एक जलती हुई माचिस की तीली हाइड्रोजन गैस के पास ले जाई जाती है तो यह पॉप की तेज आवाज के साथ जलती है।
उत्तर: कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का विलयन नीले रंग का होता है। जब इसमें जिंक (Zn) डाला जाता है तो जिंक, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर देता है। इस अभिक्रिया में रंगहीन जिंक सल्फेट (ZnSO₄) का विलयन बनता है और कॉपर धातु भूरे रंग की परत के रूप में निकल आती है। इसीलिए नीला रंग गायब हो जाता है।
रासायनिक अभिक्रिया: Zn(s) + CuSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Cu(s)
उत्तर: पारा (Mercury - Hg)। यह एकमात्र ऐसी धातु है जो सामान्य कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाई जाती है। इसका उपयोग थर्मामीटर में किया जाता है।
उत्तर:
उत्पाद: सल्फर डाइऑक्साइड गैस (SO₂)।
जल में विलेय करने पर: जब सल्फर डाइऑक्साइड गैस को जल में घोला जाता है तो सल्फ्यूरस अम्ल (H₂SO₃) बनता है।
रासायनिक समीकरण:
S + O₂ → SO₂ (सल्फर डाइऑक्साइड)
SO₂ + H₂O → H₂SO₃ (सल्फ्यूरस अम्ल)
उत्तर: यह हरे रंग की परत बेसिक कॉपर कार्बोनेट [CuCO₃.Cu(OH)₂] है, जिसे सामान्य भाषा में 'कॉपर का जंग' या 'मैलाकाइट' कहते हैं। यह कॉपर के वायु में उपस्थित ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और नमी के साथ अभिक्रिया से बनती है।
उत्तर: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K)। ये धातुएँ अत्यंत मुलायम होती हैं और इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
उत्तर: फॉस्फोरस (सफेद फॉस्फोरस) एक बहुत ही अभिक्रियाशील अधातु है। यह वायु में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ तेजी से अभिक्रिया करके स्वतः जलने लगता है। इसे जल में डुबोकर रखने से यह वायु (विशेषकर ऑक्सीजन) के संपर्क में नहीं आ पाता, जिससे यह सुरक्षित रहता है और आग नहीं पकड़ता।
उत्तर: मैग्नीशियम रिबन वायु में जलकर चमकदार सफेद रोशनी के साथ मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनाता है। यह एक तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
रासायनिक अभिक्रिया: 2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s)
उत्तर: पॉप की तेज ध्वनि किसी गैस के नमूने में हाइड्रोजन गैस (H₂) की उपस्थिति को दर्शाती है। जब हाइड्रोजन गैस के पास एक जलती हुई माचिस की तीली ले जाई जाती है तो यह तेज आवाज (पॉप) के साथ जलती है।
उत्तर: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अधिक अभिक्रियाशील धातु (या तत्व), कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक (लवण) के विलयन से बाहर निकाल देती है, विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
यहाँ, लोहा (Fe) ताँबे (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए उसने कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर दिया।
उत्तर: एक ही तत्व के भौतिक गुणों में भिन्नता रखने वाले विभिन्न रूपों को उस तत्व के अपररूप कहते हैं।
कार्बन के दो प्रमुख अपररूप:
1. हीरा (Diamond)
2. ग्रेफाइट (Graphite)
उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं, या एक धातु और एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं। मिश्र धातुएँ अपने घटक तत्वों से भिन्न गुण रखती हैं।
उदाहरण: स्टेनलेस स्टील (लोहा, कार्बन, निकल, क्रोमियम), काँसा (ताँबा और टिन), पीतल (ताँबा और जस्ता)।
| हीरा (Diamond) | ग्रेफाइट (Graphite) |
|---|---|
| 1. यह रंगहीन, पारदर्शी और चमकदार होता है। | 1. यह काले रंग का, चमकदार और अपारदर्शी होता है। |
| 2. यह प्रकृति का सबसे कठोर पदार्थ है। | 2. यह बहुत मुलायम और चिकना होता है। |
| 3. यह विद्युत का कुचालक है। | 3. यह विद्युत का सुचालक है। |
| 4. इसका उपयोग आभूषणों और काटने वाले उपकरणों में होता है। | 4. इसका उपयोग पेंसिल के लीड, इलेक्ट्रोड और स्नेहक के रूप में होता है। |
उत्तर: मिश्र धातु बनाने के प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
1. मजबूती बढ़ाना: मिश्र धातुएँ अपने घटक धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत और कठोर होती हैं। (जैसे: लोहे में कार्बन मिलाकर स्टील बनाई जाती है जो अधिक मजबूत होती है।)
2. संक्षारण रोधिता: कई मिश्र धातुओं पर जंग नहीं लगता। (जैसे: स्टेनलेस स्टील।)
3. गलनांक में परिवर्तन: मिश्र धातुओं का गलनांक उनकी घटक धातुओं से कम होता है, जिससे उन्हें आसानी से ढाला जा सकता है। (जैसे: सोल्डर।)
4. विशिष्ट गुण प्राप्त करना: विशेष उपयोगों के लिए विशिष्ट गुणों वाली मिश्र धातुएँ बनाई जाती हैं। (जैसे: एलनिको - शक्तिशाली चुंबक बनाने के लिए।)
उत्तर: शुद्ध सोना (24 कैरेट) एक बहुत कोमल और नमनीय धातु है। यदि इससे आभूषण बनाए जाएँ तो वे आसानी से मुड़
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