UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board Class 8 Science (14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव) solution PDF

UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 8 Science (14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव) solution

UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Image 1
UP Board Solution Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Image 2
UP Board Solution Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Image 3

UP Board Solutions for Class 8 Science

अध्याय 14: विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

इस अध्याय में आपने क्या सीखा:

  • कुछ द्रव विद्युत के सुचालक हैं तथा कुछ हीन चालक हैं।
  • किसी चालक द्रव में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।
  • विद्युत चालन करने वाले अधिकतर द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं।
  • विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वाँछित धातु की परत निशक्षेपित करने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन कहा जाता है।

अभ्यास

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(क) विद्युत चालन करने वाले अधिकाश द्रव ................, ................ तथा ................ के विलयन होते हैं।

(ख) किसी विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर ................ प्रभाव उत्पन्न होता है।

(ग) यदि कॉपर सल्फेट विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो कॉपर बैटरी के ................ टर्मिनल से संयोजित प्लेट पर निक्षेपित होता है।

(घ) विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वाछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को ................ कहते हैं।

उत्तर:
(क) अम्लों, क्षारकों, लवणों
(ख) रासायनिक
(ग) ऋण
(घ) विद्युत लेपन

2. जब किसी संपरीक्षित्र के स्वतंत्र सिरों को किसी विलयन में डुबोते हैं तो चुम्बकीय सुई विक्षेपित होती है। क्या आप ऐसा होने के कारण की व्याख्या कर सकते हैं?

उत्तर:
जब संपरीक्षित्र के सिरों को किसी विद्युत चालक विलयन में डुबोया जाता है, तो परिपथ पूरा हो जाता है और विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है। हम जानते हैं कि विद्युत धारा अपने चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुम्बकीय क्षेत्र संपरीक्षित्र के तार के चारों ओर बनता है, जो पास रखी चुम्बकीय सुई पर बल आरोपित करता है और उसे अपनी सामान्य स्थिति से हटा देता है। इसी को सुई का विक्षेपण कहते हैं। यह विक्षेपण इस बात का प्रमाण है कि विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है।

3. ऐसे तीन द्रवों के नाम लिखिए जिनका परीक्षण चित्र 14.9 में दर्शाए अनुसार करने पर चुम्बकीय सुई विक्षेपित हो सके।

उत्तर:
वे द्रव जो विद्युत के चालक हैं, उनमें संपरीक्षित्र डालने पर चुम्बकीय सुई विक्षेपित होगी। ऐसे तीन द्रव हैं:
1. नींबू का रस या सिरका (क्योंकि इसमें साइट्रिक/एसिटिक अम्ल होता है)
2. साधारण नल का पानी (क्योंकि इसमें घुले हुए लवण होते हैं)
3. कॉपर सल्फेट (तूतिया) का विलयन (क्योंकि यह एक लवण का विलयन है)

4. चित्र 14.10 में दर्शायी गई व्यवस्था में बल्ब नहीं जलता। क्या आप संभावित कारणों की सूची बना सकते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
चित्र 14.10 में दर्शाई गई व्यवस्था में बल्ब न जलने के निम्नलिखित संभावित कारण हो सकते हैं:
1. बीकर में रखा द्रव विद्युत का कुचालक हो सकता है, जैसे शुद्ध आसुत जल, तेल या शक्कर का विलयन। इनमें विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती, इसलिए परिपथ पूरा नहीं होता और बल्ब नहीं जलता।
2. बैटरी खराब या डिस्चार्ज हो सकती है, जिससे परिपथ में पर्याप्त विद्युत धारा नहीं बह पाती।
3. तारों के कनेक्शन ढीले या टूटे हुए हो सकते हैं, जिससे परिपथ में अवरोध उत्पन्न हो जाता है।
4. बल्ब का फिलामेंट टूटा हुआ (फ्यूज) हो सकता है
5. विद्युत धारा इतनी दुर्बल हो सकती है कि बल्ब का तंतु गर्म नहीं हो पाता और प्रकाश उत्पन्न नहीं कर पाता, हालाँकि संपरीक्षित्र से पता चल सकता है कि धारा बह रही है।

5. दो द्रवों A तथा B के विद्युत चालन की जाँच करने के लिए एक संपरीक्षित्र का प्रयोग किया गया। यह देखा गया कि संपरीक्षित्र का बल्ब द्रव A के लिए चमकीला दीप्त हुआ जबकि द्रव B के लिए अत्यंत धीमा दीप्त हुआ। आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि:

(i) द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।
(ii) द्रव B, द्रव A से अच्छा चालक है।
(iii) दोनों द्रवों की चालकता समान है।
(iv) द्रवों की चालकता के गुणों की तुलना इस प्रकार नहीं की जा सकती।

उत्तर:
(i) द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।
व्याख्या: संपरीक्षित्र के बल्ब की चमक विद्युत धारा की प्रबलता पर निर्भर करती है। जिस द्रव की चालकता अधिक होती है, उसमें अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, जिससे बल्ब तेज चमकता है। चूँकि द्रव A में बल्ब चमकीला जला, इसका मतलब है कि द्रव A द्रव B की तुलना में विद्युत का बेहतर चालक है।

6. क्या शुद्ध जल विद्युत का चालन करता है? यदि नहीं, तो इसे चालक बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

उत्तर:
नहीं, शुद्ध जल (आसुत जल) विद्युत का चालन नहीं करता क्योंकि इसमें आयन (धनात्मक या ऋणात्मक आवेशित कण) नहीं होते हैं जो विद्युत धारा को वहन कर सकें।
इसे विद्युत का चालक बनाने के लिए हमें इसमें आयनिक पदार्थ घोलने होंगे। उदाहरण के लिए:
- थोड़ा सा साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड) मिलाने पर।
- थोड़ी चीनी नहीं, बल्कि नींबू का रस, सिरका या बेकिंग सोडा मिलाने पर।
- कोई अम्ल, क्षार या लवण का विलयन मिलाने पर।
इन पदार्थों के घुलने से जल में स्वतंत्र आयन उत्पन्न हो जाते हैं, जो विद्युत धारा का संवहन करते हैं और जल चालक बन जाता है।

7. आग लगने के समय, फायरमैन पानी के हौज (पाइपों) का उपयोग करने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य विद्युत आपूर्ति को बंद कर देते हैं। व्याख्या कीजिए कि वे ऐसा क्यों करते हैं।

उत्तर:
फायरमैन ऐसा सुरक्षा कारणों से करते हैं। साधारण पानी (नल का पानी, नदी का पानी आदि) में विभिन्न लवण घुले होते हैं, जिससे यह विद्युत का सुचालक बन जाता है। यदि आग बुझाते समय विद्युत आपूर्ति चालू रहे और पानी का छिड़काव टूटे हुए तारों, स्विचबोर्ड या अन्य विद्युत उपकरणों पर हो जाए, तो पानी के माध्यम से विद्युत धारा फायरमैन तक या आसपास के लोगों तक पहुँच सकती है। इससे भीषण विद्युत झटका (बिजली का करंट) लगने का खतरा रहता है, जिससे जानलेवा दुर्घटना हो सकती है। इसलिए, सबसे पहले विद्युत आपूर्ति बंद करके इस खतरे को समाप्त किया जाता है।

8. तटीय क्षेत्र में रहने वाला एक बालक अपने संपरीक्षित्र से पीने के पानी तथा समुद्र के पानी का परीक्षण करता है। वह देखता है कि समुद्र के पानी के लिए चुम्बकीय सुई अधिक विक्षेप दर्शाती है। क्या आप इसके कारण की व्याख्या कर सकते हैं?

उत्तर:
हाँ, इसका कारण स्पष्ट है। समुद्र का पानी, पीने के साधारण पानी की तुलना में विद्युत का बहुत अच्छा चालक है। समुद्र के पानी में सोडियम क्लोराइड (नमक), मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्शियम सल्फेट आदि अनेक खनिज लवण अधिक मात्रा में घुले रहते हैं। ये लवण पानी में आयनों (Na+, Cl-, Mg2+ आदि) की संख्या बहुत बढ़ा देते हैं। चूँकि विद्युत धारा का प्रवाह इन्हीं आयनों के कारण होता है, इसलिए अधिक आयन होने पर विद्युत धारा अधिक प्रबल होगी। अधिक प्रबल विद्युत धारा अधिक प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करेगी, जिसके कारण चुम्बकीय सुई में अधिक विक्षेप दिखाई देगा।

9. क्या तेज वर्षा के समय किसी लाइनमैन के लिए बाहरी मुख्य लाइन के विद्युत तारों की मरम्मत करना सुरक्षित होता है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
नहीं, तेज वर्षा के समय बाहरी मुख्य लाइन के तारों की मरम्मत करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। इसके दो मुख्य कारण हैं:
1. पानी विद्युत का सुचालक है: वर्षा का पानी, खंभों, सीढ़ियों, टूल्स और लाइनमैन के कपड़ों को भिगो देता है। यदि तारों से कोई विद्युत रिसाव हो रहा है, तो यह गीले पानी के माध्यम से लाइनमैन के शरीर में प्रवेश कर सकता है, जिससे उसे जानलेवा विद्युत झटका लग सकता है।
2. फिसलन और दृश्यता कम होना: भीगी हुई सतहों पर फिसलने का खतरा बढ़ जाता है और तेज बारिश में साफ देख पाना मुश्किल होता है। इससे दुर्घटना की संभावना और बढ़ जाती है।
इसीलिए, ऐसे कार्य सूखे मौसम में और उचित सुरक्षा उपकरण पहनकर ही किए जाते हैं।

10. पहेली ने सुना था कि वर्षा का जल उतना ही शुद्ध है जितना कि आसुत जल। इसलिए उसने एक स्वच्छ काँच के बर्तन में कुछ वर्षा का जल एकत्रित करके संपरीक्षित्र से उसका परीक्षण किया। उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि चुम्बकीय सुई विक्षेप दर्शाती है। इसका क्या कारण हो सकता है?

उत्तर:
पहेली को आश्चर्य इसलिए हुआ क्योंकि शुद्ध (आसुत) जल विद्युत का चालन नहीं करता। वर्षा का जल वायुमंडल में बनने के समय वास्तव में शुद्ध होता है, लेकिन नीचे आते समय यह अशुद्ध हो जाता है, जिसके कारण संपरीक्षित्र में विक्षेप दिखाई दिया। इसके प्रमुख कारण हैं:
1. वायुमंडलीय गैसों का घुलना: वर्षा की बूंदें हवा में से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों को घोल लेती हैं, जिससे वह थोड़ा अम्लीय (कार्बोनिक अम्ल) बन जाता है और विद्युत का चालक हो जाता है।
2. वायु प्रदूषण: वायु में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें भी बारिश के पानी में घुलकर अम्ल बनाती हैं और उसकी चालकता बढ़ा देती हैं।
3. एकत्रित करने के बाद की अशुद्धियाँ: काँच का बर्तन पूरी तरह रासायनिक रूप से शुद्ध नहीं हो सकता। उसकी सतह से कुछ आयन पानी में आ सकते हैं। साथ ही, बर्तन में पानी इकट्ठा करने और रखने की प्रक्रिया में भी धूल के कण या अन्य अशुद्धियाँ मिल सकती हैं।
इन सभी कारणों से एकत्र किया गया वर्षा जल शुद्ध आसुत जल नहीं रह जाता और विद्युत का चालन करने लगता है।

11. अपने आस-पास उपलब्ध विद्युतलेपित वस्तुओं की सूची बनाइए।

उत्तर:
विद्युतलेपन एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है जिसका उपयोग वस्तुओं को सजाने, संक्षारण (जंग) से बचाने और उनकी सतह को कठोर बनाने के लिए किया जाता है। हमारे आस-पास मिलने वाली विद्युतलेपित वस्तुओं की सूची:

क्रम सं.वस्तु का नामलेपित धातुउद्देश्य
1.नकली आभूषण (गहने)सोना या चाँदीसुन्दर दिखने के लिए
2.नई साइकिल का हैंडल, रिम व भागक्रोमियमचमकदार व जंगरोधी बनाने के लिए
3.कार के कुछ भाग (बम्पर, ग्रिल)क्रोमियम या निकलचमक व सुरक्षा के लिए
4.स्नानघर की टोंटी (नल) व फिटिंगक्रोमियमचमकदार, जंगरोधी व साफ करने में आसान
5.गैस बर्नर, चूल्हे के भागक्रोमियम या निकलऊष्मा व संक्षारण से बचाने के लिए
6.लोहे की खिड़की, दरवाजे, टैंकजिंक (जस्ता)जंग लगने से बचाने के लिए (गैल्वेनाइजेशन)
7.रसोई के बर्तन (कुकवेयर)निकल या क्रोमियमसजावट व सुरक्षा के लिए
8.पुरस्कार (ट्रॉफी), नामपट्टसोना, चाँदी या क्रोमियमआकर्षक बनाने के लिए
9.इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्डसोना या टिनबेहतर विद्युत संपर्क व संक्षारण रोधिता

12. जो प्रक्रिया आपने क्रियाकलाप 14.7 में देखी वह कॉपर के शोधन में उपयोग होती है। एक पतली शुद्ध कॉपर छड़ एवं एक अशुद्ध कॉपर की छड़ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग की जाती है। कौन-सा इलेक्ट्रोड बैटरी के धन टर्मिनल से संयोजित किया जाए। कारण भी लिखिए?

उत्तर:
अशुद्ध कॉपर की मोटी छड़ को बैटरी के धन टर्मिनल (+) से संयोजित किया जाना चाहिए।

कारण: विद्युतलेपन या विद्युत-शोधन की इस प्रक्रिया में, जिस इलेक्ट्रोड को ऐनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) बनाया जाता है, वह विलयन में घुलता है।
1. जब अशुद्ध कॉपर की छड़ को ऐनोड बनाया जाता है, तो विद्युत धारा प्रवाहित होने पर उसका कॉपर विलयन (कॉपर सल्फेट) में घुलने लगता है। इस प्रकार अशुद्धियाँ (जैसे सोना, चाँदी) नीचे बैठ जाती हैं और शुद्ध कॉपर आयन के रूप में विलयन में चला जाता है।
2. ये कॉपर आयन (Cu2+) विलयन से होकर दूसरे इलेक्ट्रोड (कैथोड) की ओर आकर्षित होते हैं।
3. शुद्ध कॉपर की पतली छड़ को कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) बनाया जाता है और इसे बैटरी के ऋण टर्मिनल (-) से जोड़ा जाता है।
4. कैथोड पर पहुँचकर ये कॉपर आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं और शुद्ध कॉपर धातु के रूप में शुद्ध छड़ पर जमा (निक्षेपित) होने लगते हैं।
इस प्रकार, अशुद्ध कॉपर से शुद्ध कॉपर एक इलेक्ट्रोड से दूसरे इलेक्ट्रोड पर स्थानांतरित हो जाता है और हमें शुद्ध कॉपर प्राप्त होता है।

Get UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Solution in Hindi Medium

UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 8 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 8 Science 14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board Class 8 textSolutions

There are various features of UP Board Class 8 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board Class 8 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of Class 8 Science
1. फ़सल उत्पादन एवं प्रबंध
2. सूक्ष्मजीव मित्र एवं शत्रु
3. संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक
4. पदार्थ- धातु और अधातु
5. कोयला और पेट्रोलियम
6. दहन और ज्वाला
7. पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण
8. कोशिका - संरचना एवं प्रकार्य
9. जंतुओं में जनन
10. किशोरावस्था की ओर
11. बल तथा दाब
12. घर्षण
13.ध्वनि
14. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव
15. कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ
16. प्रकाश
17. तारे एवं सौर परिवार
18. वायु तथा जल का प्रदूषण
;