UP Board Class 8 Science 7. पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) वह क्षेत्र जिसमें जंतु अपने प्राकृतिक आवास में संरक्षित होते हैं, अभ्यारण्य कहलाता है।
(ख) किसी क्षेत्र विशेष में पाई जाने वाली स्पीशीज स्थानिक स्पीशीज कहलाती हैं।
(ग) प्रवासी पक्षी सुदूर क्षेत्रों से जलवायु परिवर्तन के कारण पलायन करते हैं।
(क) वन्यप्राणी उद्यान एवं जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र
वन्यप्राणी उद्यान: यह एक ऐसा संरक्षित क्षेत्र है जो विशेष रूप से वन्य जीवों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए बनाया जाता है। यहाँ मानवीय गतिविधियाँ सीमित होती हैं।
जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र: यह एक बहुत बड़ा संरक्षित क्षेत्र होता है जिसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और स्थानीय आदिवासी समुदायों की पारंपरिक जीवन शैली, तीनों का संरक्षण करना होता है। यह शोध और शिक्षा का केंद्र भी होता है।
(ख) चिडियाघर एवं अभ्यारण्य
चिडियाघर: यह एक ऐसा स्थान है जहाँ विभिन्न प्रकार के जानवरों को कृत्रिम रूप से बनाए गए पिंजरों या बाड़ों में रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना, शिक्षा देना और कुछ लुप्तप्राय प्रजातियों का प्रजनन करना होता है।
अभ्यारण्य: यह एक प्राकृतिक क्षेत्र है जहाँ जंगली जानवर और उनका आवास पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। यहाँ जानवर स्वतंत्र रूप से घूमते हैं और मानवीय हस्तक्षेप नहीं के बराबर होता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रजातियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में बचाना है।
(ग) संकटापन्न एवं विलुप्त स्पीशीज
संकटापन्न स्पीशीज: वे जीव जिनकी संख्या इतनी कम हो गई है कि उनके अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, संकटापन्न कहलाते हैं। उदाहरण: बाघ, गैंडा, एशियाई शेर।
विलुप्त स्पीशीज: वे जीव जो पृथ्वी से पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं और अब दुनिया में कहीं भी नहीं पाए जाते, विलुप्त स्पीशीज कहलाते हैं। उदाहरण: डायनासोर, डोडो पक्षी।
(घ) वनस्पतिजात एवं प्राणिजात
वनस्पतिजात: किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या समय में पाए जाने वाले पेड़-पौधों की सभी प्रजातियों के समूह को वनस्पतिजात कहते हैं। जैसे- हिमालय क्षेत्र का वनस्पतिजात।
प्राणिजात: किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या समय में पाए जाने वाले जानवरों की सभी प्रजातियों के समूह को प्राणिजात कहते हैं। जैसे- भारत का प्राणिजात।
(क) वन्यप्राणी
वनोन्मूलन से वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है। उन्हें भोजन, पानी और सुरक्षा नहीं मिल पाती। इससे उनका प्रजनन बाधित होता है और वे संकटापन्न हो जाते हैं या विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जाते हैं।
(ख) पर्यावरण
वनोन्मूलन से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। पेड़ों के कटने से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है (ग्लोबल वार्मिंग)। यह वर्षा चक्र को भी प्रभावित करता है।
(ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र)
गाँवों में वनोन्मूलन से मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और कृषि पर बुरा असर पड़ता है। जल स्रोत सूखने लगते हैं। बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीण जीवन कठिन हो जाता है।
(घ) शहर (शहरी क्षेत्र)
शहरों पर भी वनोन्मूलन का प्रभाव पड़ता है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और तापमान में वृद्धि होती है। बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि पेड़ पानी को सोख नहीं पाते। इसके अलावा, गाँवों में कृषि प्रभावित होने से शहरों में खाद्य पदार्थों की कमी और महंगाई भी बढ़ सकती है।
(ड) पृथ्वी
पृथ्वी के लिए वनोन्मूलन एक बड़ा खतरा है। यह जलवायु परिवर्तन को तेज करता है, जैव विविधता को नष्ट करता है और पारिस्थितिक तंत्र को असंतुलित कर देता है। इससे धरती का तापमान बढ़ता है, ध्रुवों की बर्फ पिघलती है और समुद्र का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।
(च) अगली पीढ़ी
अगली पीढ़ी को एक अस्थिर और प्रदूषित वातावरण विरासत में मिलेगा। उन्हें स्वच्छ हवा, पानी और विविध प्रकार के जीव-जंतु देखने को नहीं मिलेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से जूझना उनकी नियति बन सकती है।
(क) हम वृक्षों की कटाई करते रहे?
यदि हम वृक्षों की कटाई इसी तरह जारी रखेंगे तो:
1. वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत बढ़ जाएगी, जिससे ग्लोबल वार्मिंग तेज होगी।
2. वर्षा का चक्र गड़बड़ा जाएगा, जिससे कहीं सूखा तो कहीं अचानक बाढ़ आएगी।
3. भूमिगत जल का स्तर गिरता जाएगा और नदियाँ सूखने लगेंगी।
4. मिट्टी का कटाव बढ़ेगा और उपजाऊ जमीन रेगिस्तान में बदल जाएगी।
5. असंख्य वन्य प्राणी और पौधों की प्रजातियाँ हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगी।
(ख) किसी जंतु का आवास बाधित हो?
यदि किसी जंतु का आवास बाधित हो जाए तो:
1. उस जंतु को भोजन और पानी ढूँढने में कठिनाई होगी।
2. शिकारियों और प्रतिकूल मौसम से खुद को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
3. प्रजनन के लिए उपयुक्त स्थान न मिलने से उनकी संख्या घटने लगेगी।
4. अंततः वह प्रजाति संकटापन्न हो जाएगी और एक दिन पूरी तरह विलुप्त भी हो सकती है।
(ग) मिट्टी की ऊपरी परत अनावरित हो जाए?
मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है क्योंकि इसमें ह्यूमस (सड़ी-गली पत्तियों से बना कार्बनिक पदार्थ) होता है। यदि यह परत अनावरित हो जाए तो:
1. हवा और पानी के साथ यह उपजाऊ मिट्टी बह जाएगी (मृदा अपरदन)।
2. भूमि की उर्वरता खत्म हो जाएगी और उसमें फसल उगाना मुश्किल हो जाएगा।
3. पौधों की जड़ें मिट्टी को नहीं पकड़ पाएँगी, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ेगा।
4. बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है क्योंकि मिट्टी पानी सोख नहीं पाएगी।
किसी विशेष उद्देश्य जैसे कृषि, निर्माण कार्य या लकड़ी प्राप्त करने के लिए वनों को बड़े पैमाने पर काटकर साफ कर देना वनोन्मूलन कहलाता है।
वनोन्मूलन के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ता है, जिससे जलचक्र का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे वर्षा की मात्रा और आवृत्ति कम हो जाती है, जो सूखे का मुख्य कारण बनती है।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस वायुमंडल में एक कंबल की तरह काम करती है और पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी को वापस अंतरिक्ष में जाने से रोकती है। इस गुण के कारण इसे एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस माना जाता है।
वनोन्मूलन और अनुचित कृषि पद्धतियों के कारण उपजाऊ भूमि की ऊपरी परत नष्ट हो जाती है। धीरे-धीरे यह भूमि बंजर होकर मरुस्थल में बदलने लगती है। इस प्रक्रिया को ही मरुस्थलीकरण कहते हैं।
अभ्यारण्य वह विशेष संरक्षित वन क्षेत्र है जहाँ वन्य जीव-जंतु और उनके प्राकृतिक आवास को किसी भी प्रकार के शिकार, रहवास या अन्य मानवीय विक्षोभ से पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाती है।
किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी सजीवों (पौधों, जानवरों, सूक्ष्मजीवों) की विभिन्न प्रजातियों, उनकी आनुवंशिक भिन्नताओं और उनके बीच के पारिस्थितिक तंत्र के समग्र स्वरूप को जैव विविधता कहते हैं।
किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में एक निश्चित समय में पाए जाने वाले पेड़-पौधों की सभी प्रजातियों के समूह को उस क्षेत्र का वनस्पतिजात कहते हैं। जैसे राजस्थान के मरुस्थल का वनस्पतिजात।
किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में एक निश्चित समय में पाए जाने वाले जानवरों की सभी प्रजातियों के समूह को उस क्षेत्र का प्राणिजात कहते हैं। जैसे अफ्रीका के सवाना घास के मैदान का प्राणिजात।
पौधों एवं जंतुओं की वे प्रजातियाँ जो दुनिया में केवल किसी एक विशेष सीमित क्षेत्र में ही पाई जाती हैं, स्थानिक या विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज कहलाती हैं। उदाहरण: भारत में केवल पश्चिमी घाट में पाया जाने वाला नीलगिरि लंगूर।
यदि किसी जंतु का आवास नष्ट हो जाए या बाधित हो जाए, तो उस जंतु का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है। उसे भोजन, पानी, सुरक्षा और प्रजनन के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाता। इससे उसकी आबादी घटती जाती है और अंततः वह प्रजाति विलुप्त हो सकती है।
भारत का पहला आरक्षित वन (राष्ट्रीय उद्यान) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जो मध्य प्रदेश में स्थित है।
प्रोजेक्ट टाइगर का मुख्य उद्देश्य भारत में बाघों की घटती हुई संख्या को रोकना और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना है। इसके तहत विशेष टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं ताकि बाघों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और उनकी आबादी में वृद्धि हो।
वे जीव-जंतु जिनकी संख्या इतनी कम रह गई है कि अगर उनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास नहीं किए गए तो वे निकट भविष्य में पृथ्वी से विलुप्त हो सकते हैं, संकटापन्न जंतु कहलाते हैं। जैसे- भारतीय गैंडा, गिद्ध, लाल पांडा।
किसी क्षेत्र के सभी जैव घटक (पौधे, प्राणी, सूक्ष्मजीव) और अजैव घटक (जलवायु, मिट्टी, पानी, प्रकाश) आपस में मिलकर एक संतुलित प्रणाली बनाते हैं, जिसे पारिस्थितिकी तंत्र या परितंत्र कहते हैं। जैसे- वन परितंत्र, तालाब परितंत्र।
पारिस्थितिकी तंत्र के वे भौतिक और रासायनिक घटक जो निर्जीव होते हैं, अजैव घटक कहलाते हैं। इनमें सूर्य का प्रकाश, तापमान, वर्षा, हवा, मिट्टी, खनिज और पानी शामिल हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र के वे सभी घटक जो सजीव हैं या एक समय सजीव थे, जैव घटक कहलाते हैं। इनमें सभी प्रकार के पौधे (उत्पादक), जानवर (उपभोक्ता) और सूक्ष्मजीव (अपघटक) शामिल हैं।
रेड डाटा बुक एक अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है जिसमें दुनिया भर की संकटापन्न और विलुप्त हो चुकी पौधों एवं जानवरों की प्रजातियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। यह वैज्ञानिकों और संरक्षणकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
प्रवास वह प्राकृतिक घटना है जिसमें कुछ जानवर (विशेषकर पक्षी) भोजन की तलाश या प्रजनन के लिए अनुकूल मौसम पाने हेतु हर साल एक निश्चित समय पर सैकड़ों-हजारों किलोमीटर का सफर तय करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। जैसे- साइबेरियन सारस का भारत आना।
मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है। यदि यह अनावरित (खुली/बिना वनस्पति के) हो जाए, तो तेज हवा और बारिश के पानी के साथ यह परत बह जाएगी। इससे भूमि बंजर हो जाएगी, कृषि असंभव हो जाएगी और बाढ़ व भूस्खलन का खतरा बढ़ जाएगा।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र तीन मुख्य उद्देश्यों से बनाए गए हैं:
1. संरक्षण: पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और आनुवंशिक विविधता का संरक्षण करना।
2. विकास: क्षेत्र के स्थानीय समुदायों का सतत और पर्यावरण-अनुकूल आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।
3. सहयोग: शोध, निगरानी, शिक्षा और सूचना के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करना।
वनोन्मूलन के प्रमुख कारण हैं:
1. कृषि विस्तार: फसलें उगाने या पशु चराने के लिए जंगल साफ करना।
2. निर्माण कार्य: शहर, सड़कें, बाँध और कारखाने बनाने के लिए।
3. लकड़ी की माँग: ईंधन, फर्नीचर, कागज और निर्माण सामग्री के लिए पेड़ काटना।
4. खनन: जमीन के अंदर से खनिज निकालने के लिए वन क्षेत्र साफ करना।
जैव विविधता का संरक्षण इसलिए जरूरी है क्योंकि:
1. प्रत्येक प्रजाति पारिस्थितिकी तंत्र में एक विशेष भूमिका निभाती है, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहता है।
2. विविध प्रजातियाँ हमें भोजन, दवाइयाँ, ईंधन और कच्चा माल प्रदान करती हैं।
3. आनुवंशिक विविधता प्रजातियों को रोगों और बदलते पर्यावरण के अनुकूल ढलने में मदद करती है।
4. यह हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी हिस्सा है।
(क) जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
यह UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त एक विशाल संरक्षित क्षेत्र है जहाँ पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के सतत विकास और वैज्ञानिक शोध पर भी ध्यान दिया जाता है।
(ख) स्पीशीज
सजीवों का वह समूह जिसके सदस्य आपस में स्वतंत्र रूप से प्रजनन करके स्वस्थ और उर्वर (प्रजननक्षम) संतान पैदा कर सकते हैं, एक स्पीशीज कहलाता है।
(ग) अभ्यारण्य
यह एक ऐसा संरक्षित वन क्षेत्र है जहाँ वन्य जीवों और उनके आवास को किसी भी प्रकार के शिकार, घुसपैठ या विक्षोभ से पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाती है, ताकि वे शांति से रह सकें और उनकी संख्या बढ़ सके।
(घ) राष्ट्रीय उद्यान
यह एक ऐसा संरक्षित क्षेत्र है जहाँ प्राकृतिक पर्यावरण, वनस्पति, वन्य जीव और ऐतिहासिक स्थलों को सुरक्षित रखा जाता है। यहाँ मानवीय गतिविधियाँ बहुत सीमित होती हैं और जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से रहने का अवसर मिलता है।
UP Board Class 8 Science 7. पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 8 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board Class 8 Science 7. पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 8 Science 7. पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण :
There are various features of UP Board Class 8 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.