UP Board Class 8 Science 3. संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
कुछ रेशों को संश्लेषित इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्हें प्रयोगशाला में मनुष्य द्वारा रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बनाया जाता है। ये रेशे प्राकृतिक रूप से पौधों या जंतुओं से प्राप्त नहीं होते। इन्हें बनाने के लिए पेट्रोलियम, कोयला जैसे कच्चे माल से प्राप्त सरल रासायनिक इकाइयों (मोनोमर्स) को आपस में जोड़कर लंबी श्रृंखलाएँ (पॉलिमर) बनाई जाती हैं। इस संश्लेषण (बनाने) की प्रक्रिया के कारण ही इन्हें संश्लेषित रेशे कहते हैं। उदाहरण: नायलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रिलिक।
(ख) इसे काष्ठ लुगदी से प्राप्त किया जाता है।
रेयॉन को एक प्राकृतिक स्रोत यानी लकड़ी की लुगदी (सेलुलोज) से रासायनिक उपचार द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह एक प्राकृतिक पॉलिमर (सेलुलोज) का पुनर्निर्मित रूप है, जबकि संश्लेषित रेशे पूरी तरह से नए रासायनिक पदार्थों से बनाए जाते हैं। इसलिए इसे अर्ध-संश्लेषित रेशा माना जाता है, पूर्णतः संश्लेषित नहीं।
(क) संश्लेषित रेशे अथवा कृत्रिम या मानव-निर्मित रेशे भी कहलाते हैं।
(ख) संश्लेषित रेशे पेट्रोलियम कच्चे माल से संश्लेषित किये जाते हैं, जो कहलाता है।
(ग) संश्लेषित रेशे की भांति प्लास्टिक भी एक बहुलक (पॉलिमर) है।
नाइलॉन रेशे की अद्भुत मजबूती और टिकाऊपन को दर्शाने वाली दो वस्तुएँ हैं:
1. पैराशूट और पैराशूट की रस्सियाँ: नायलॉन इतना मजबूत और हल्का होता है कि यह हवा के दबाव और झटके को आसानी से सहन कर लेता है, जिससे पैराशूट सुरक्षित रूप से काम करते हैं।
2. पर्वतारोहण की रस्सियाँ: चट्टानों पर चढ़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली रस्सियाँ नायलॉन की बनी होती हैं क्योंकि ये भारी भार सहन करने के साथ-साथ खिंचाव और घर्षण के प्रति भी बहुत प्रबल होती हैं।
खाद्य पदार्थों को स्टोर करने के लिए प्लास्टिक के बर्तनों के उपयोग के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. हल्केपन और सुविधा: प्लास्टिक के डिब्बे धातु या कांच के डिब्बों की तुलना में बहुत हल्के होते हैं, जिससे उन्हें ले जाना, उठाना और संभालना आसान होता है।
2. असंक्षारक प्रकृति: प्लास्टिक पानी और हवा से प्रतिक्रिया नहीं करता, इसलिए यह जंग नहीं लगाता और न ही आसानी से टूटता-फूटता है। यह खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है।
3. सस्ते और टिकाऊ: प्लास्टिक के बर्तन अन्य विकल्पों की तुलना में कम कीमत में उपलब्ध होते हैं और इनका उपयोग बार-बार किया जा सकता है क्योंकि ये आसानी से नहीं टूटते।
| थर्मोप्लास्टिक | थर्मोसेटिंग प्लास्टिक |
|---|---|
| इन्हें गर्म करने पर नरम हो जाते हैं और आसानी से मोड़े जा सकते हैं या नया आकार दिया जा सकता है। | एक बार जब इन्हें एक निश्चित आकार दे दिया जाता है, तो गर्म करने पर भी ये नरम नहीं होते और न ही मुड़ते हैं। |
| ये पुनर्चक्रण योग्य होते हैं। इन्हें पिघलाकर दोबारा नई वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं। | ये पुनर्चक्रण योग्य नहीं होते। गर्म करने पर ये जलने लगते हैं, पिघलते नहीं। |
| उदाहरण: पॉलिथीन, पीवीसी, पॉलीस्टाइरीन (कूलर, खिलौने)। | उदाहरण: बैकेलाइट (स्विच, हत्थे), मेलामाइन (बर्तन)। |
(क) डेगची के हत्थे: डेगची (कुकर) के हत्थे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (जैसे बैकेलाइट) से बनाए जाते हैं क्योंकि यह प्लास्टिक ऊष्मा का कुचालक है और अत्यधिक गर्मी सहन कर सकता है। गर्म डेगची को पकड़ने पर भी यह हत्था नर्म नहीं होता और हाथ को जलने से बचाता है।
(ख) विद्युत प्लग/स्विच/प्लग बोर्ड: इन्हें भी थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (बैकेलाइट) से बनाया जाता है क्योंकि यह प्लास्टिक दोहरी सुरक्षा प्रदान करता है। पहली, यह विद्युत का कुचालक है, जो बिजली के झटके से बचाता है। दूसरी, यह ऊष्मा का भी कुचालक है और आग पकड़ने में भी आसान नहीं होता, जिससे शॉर्ट सर्किट के समय आग लगने का खतरा कम होता है।
पुनः चक्रित किये जा सकते हैं (थर्मोप्लास्टिक):
- प्लास्टिक खिलौने
- सामग्री लाने वाले थैले (पॉलिथीन बैग)
- बाल प्वाइंट पेन का बॉडी
- प्लास्टिक के कटोरे
- विद्युत तारों के प्लास्टिक आवरण (पीवीसी)
- प्लास्टिक की कुर्सियाँ
पुनः चक्रित नहीं किये जा सकते हैं (थर्मोसेटिंग प्लास्टिक):
- टेलीफोन यंत्र का बॉडी (पुराने प्रकार के)
- कुक्कर के हत्थे
- विद्युत स्विच
राणा को गर्मियों के लिए सूती कमीजें खरीदनी चाहिए। इसके कारण हैं:
1. हवादारपन: सूती कपड़े में छोटे-छोटे रंध्र होते हैं जो शरीर की पसीने की नमी को सोखकर हवा में उड़ा देते हैं, जिससे शरीर ठंडा रहता है।
2. आराम: सूती कपड़ा नरम और त्वचा के अनुकूल होता है, जबकि संश्लेषित कपड़े (पॉलिएस्टर आदि) गर्मी में चिपचिपे और असहज महसूस हो सकते हैं क्योंकि वे हवा कम गुजरने देते हैं।
3. प्राकृतिक स्रोत: सूती कपड़ा प्राकृतिक रेशे (कपास) से बनता है, जो गर्मी में पहनने के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
प्लास्टिक की असंक्षारक प्रकृति का मतलब है कि यह नमी, पानी, हवा या रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आने पर आसानी से खराब नहीं होता या जंग नहीं लगाता।
उदाहरण:
1. पानी की टंकियाँ और पाइप: पीवीसी से बने पानी के पाइप और टंकियाँ लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने के बाद भी जंग नहीं लगातीं, जबकि लोहे के पाइप जल्दी जंग लग जाते हैं।
2. रसायनों के कंटेनर: प्रयोगशालाओं और कारखानों में अनेक रसायनों को स्टोर करने के लिए प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग किया जाता है क्योंकि प्लास्टिक अधिकांश रसायनों के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता।
3. समुद्री वातावरण: प्लास्टिक से बनी नावें या उपकरण खारे समुद्री पानी में भी लंबे समय तक खराब नहीं होते, जबकि धातु की वस्तुएँ जल्दी खराब हो जाती हैं।
नहीं, दाँत साफ करने के ब्रश का हैन्डल और ब्रिस्टल (शूक) एक ही पदार्थ के नहीं बनाने चाहिए। इसके निम्न कारण हैं:
1. ब्रिस्टल के गुण: ब्रिस्टल को नरम, लचीले और मुलायम होने चाहिए ताकि वे मसूड़ों और दाँतों के इनेमल को नुकसान पहुँचाए बिना सफाई कर सकें। इन्हें अक्सर नायलॉन जैसे मजबूत लेकिन लचीले संश्लेषित रेशे से बनाया जाता है।
2. हैन्डल के गुण: हैन्डल को मजबूत, कठोर और आराम से पकड़ में आने वाला होना चाहिए। इसे थर्मोप्लास्टिक या थर्मोसेटिंग प्लास्टिक से बनाया जाता है ताकि यह टूटे नहीं और अच्छी पकड़ दे।
निष्कर्ष: चूंकि हैन्डल और ब्रिस्टल के कार्य और आवश्यक गुण अलग-अलग हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग पदार्थों से बनाया जाता है।
यह कथन पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह है। प्लास्टिक के उपयोग से बचने के निम्नलिखित कारण हैं:
1. जैव अनिम्नीकरणीय: अधिकांश प्लास्टिक प्रकृति में आसानी से विघटित नहीं होते। ये सैकड़ों वर्षों तक मिट्टी या पानी में पड़े रहकर प्रदूषण फैलाते हैं।
2. भूमि प्रदूषण: प्लास्टिक कचरा जमीन में दबने पर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कम करता है और भूजल को दूषित कर सकता है।
3. जीव-जंतुओं के लिए खतरा: जानवर अक्सर प्लास्टिक को भोजन समझकर खा लेते हैं, जिससे उनकी आंतों में अवरोध हो सकता है और उनकी मृत्यु भी हो सकती है।
4. दहन से विषैली गैसें: प्लास्टिक को जलाने पर हानिकारक और विषैली गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं।
सलाह: हमें प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर कपड़े या जूट के थैले, प्लास्टिक के बर्तनों के स्थान पर स्टील या कांच के बर्तनों का उपयोग करना चाहिए और पुन: प्रयोग (Reuse) तथा पुनर्चक्रण (Recycle) को बढ़ावा देना चाहिए।
| कॉलम A | कॉलम B |
|---|---|
| पॉलिएस्टर | कपड़े में आसानी से बल नहीं पड़ते। |
| टेफ्लॉन | न चिपकने वाले भोजन बनाने के पात्रों के निर्माण में उपयोग में लाया जाता है। |
| रेयॉन | काष्ठ लुगदी का उपयोग कर तैयार किया जाता है। |
| नाइलॉन | पैराशूट और मोजा बनाने में उपयोग किया जाता है। |
यह कथन रेयॉन (कृत्रिम रेशम) के संदर्भ में सही है। रेयॉन लकड़ी की लुगदी (सेलुलोज) से रासायनिक उपचार द्वारा बनाया जाता है।
वन संरक्षण में सहायक होने के कारण:
1. प्राकृतिक रेशम के विकल्प के रूप में: प्राकृतिक रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम के कीड़ों (सिल्कवर्म) को पाला जाता है, जिन्हें पालने के लिए बड़ी मात्रा में शहतूत के पेड़ों की आवश्यकता होती है। रेयॉन के आविष्कार से रेशम की मांग का एक हिस्सा पूरा हो जाता है, जिससे शहतूत के जंगलों पर दबाव कम हो सकता है।
2. टिकाऊ वानिकी से लुगदी: आधुनिक समय में रेयॉन बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी की लुगदी अक्सर विशेष रूप से उगाए गए वृक्षों (जैसे यूकेलिप्टस) से प्राप्त की जाती है, न कि प्राकृतिक जंगलों से। इससे प्राकृतिक वनों की कटाई कम होती है।
इस प्रकार, मानव निर्मित रेशम (रेयॉन) एक उपयोगी विकल्प प्रदान करके अप्रत्यक्ष रूप से वन संरक्षण में मदद करता है।
क्रियाकलाप: थर्मोप्लास्टिक विद्युत का कुचालक है, यह सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित प्रयोग किया जा सकता है।
सामग्री: एक सरल विद्युत परिपथ जिसमें एक बैटरी, एक बल्ब, तार और एक स्विच लगा हो। साथ ही, थर्मोप्लास्टिक की एक पतली पट्टी (जैसे पॉलिथीन की थैली का टुकड़ा या पीवीसी पाइप का टुकड़ा)।
विधि:
1. सबसे पहले विद्युत परिपथ को पूरा करके जाँच लें कि बल्ब जल रहा है।
2. अब परिपथ के तारों के बीच में एक जगह काट लें, जिससे परिपथ टूट जाए और बल्ब बंद हो जाए।
3. अब थर्मोप्लास्टिक की पट्टी को उन दोनों कटे हुए सिरों के बीच में रखकर अच्छी तरह से जोड़ दें (तार के सिरे प्लास्टिक को छू रहे हों)।
4. स्विच ऑन करके देखें।
प्रेक्षण: बल्ब नहीं जलेगा।
निष्कर्ष: थर्मोप्लास्टिक पदार्थ से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो पाई, क्योंकि यह विद्युत का कुचालक है। इस गुण के कारण ही प्लास्टिक का उपयोग विद्युत के स्विच, प्लग और तारों के ऊपर के आवरण बनाने में किया जाता है ताकि बिजली के झटके से बचा जा सके।
कपड़े मुख्य रूप से दो प्रकार के रेशों से बनते हैं:
1. प्राकृतिक रेशे (जैसे: कपास, ऊन, रेशम, पटसन)
2. कृत्रिम या संश्लेषित रेशे (जैसे: नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयॉन, ऐक्रिलिक)
1. कपास: स्रोत - कपास के पौधे के बीजों के चारों ओर की रूई।
2. ऊन: स्रोत - भेड़, बकरी, याक आदि जंतुओं के बाल।
3. रेशम: स्रोत - रेशम के कीड़े (सिल्कवर्म) के कोकून।
4. पटसन: स्रोत - पटसन के पौधे के तने।
वे रेशे जिन्हें मनुष्य प्रयोगशालाओं में रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा पेट्रोलियम, कोयला आदि कच्चे माल से स्वयं बनाता है, संश्लेषित रेशे कहलाते हैं। ये प्रकृति में सीधे उपलब्ध नहीं होते। उदाहरण: नायलॉन, पॉलिएस्टर।
रेयॉन एक अर्ध-संश्लेषित रेशा है जिसे लकड़ी की लुगदी (सेलुलोज) के रासायनिक उपचार से बनाया जाता है। इसे कृत्रिम रेशम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी चमक, मुलायमपन और बुनावट प्राकृतिक रेशम के समान होती है। यह रेशम जैसा दिखता है और उसी तरह के वस्त्र बनाने के काम आता है, लेकिन यह प्राकृतिक रेशम की तुलना में सस्ता होता है।
नायलॉन। नायलॉन रेशा बहुत ही मजबूत और लचीला होता है। इसकी तन्य शक्ति (खिंचाव सहन करने की क्षमता) इस्पात के तार से भी अधिक हो सकती है, इसीलिए इसका उपयोग पैराशूट की रस्सियाँ और पर्वतारोहण के उपकरण बनाने में किया जाता है।
पीईटी (PET) का पूरा नाम पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट है। यह पॉलिएस्टर का एक बहुत ही सामान्य और परिचित प्रकार है। इसका उपयोग पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलें, खाद्य पदार्थों के पैकेजिंग के लिए फिल्म, कपड़े के रेशे और इंसुलेशन के लिए तार आदि बनाने में किया जाता है।
संश्लेषित रेशों (जैसे नायलॉन, पॉलिएस्टर) से बने वस्त्रों का एक प्रमुख हानिकारक गुण यह है कि ये आसानी से आग पकड़ लेते हैं और जलने पर पिघलकर चिपचिपे हो जाते हैं। यह पिघला हुआ प्लास्टिक पहनने वाले व्यक्ति की त्वचा से चिपक सकता है, जिससे गंभीर जलन हो सकती है।
ऐक्रिलिक एक प्रकार का संश्लेषित रेशा है जो देखने और महसूस करने में प्राकृतिक ऊन के समान होता है। इसे पेट्रोलियम उत्पादों से रासायनिक रूप से बनाया जाता है। इससे बने स्वेटर, शॉ
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