UP Board Class 8 Science 16. प्रकाश is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: यदि हम पूर्ण अंधेरे कमरे में हैं, तो हम कमरे के अंदर रखी वस्तुओं को नहीं देख सकते। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम किसी भी वस्तु को तभी देख पाते हैं जब उससे परावर्तित होकर प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। अंधेरे कमरे में प्रकाश का कोई स्रोत नहीं होता, इसलिए परावर्तन नहीं हो पाता।
कमरे के बाहर की वस्तुओं को देखने के लिए भी यही शर्त लागू होती है। हम उन्हें तभी देख सकेंगे जब बाहर पर्याप्त रोशनी हो और उस रोशनी का परावर्तित प्रकाश कमरे के अंदर हमारी आँखों तक आ सके। यदि बाहर भी अंधेरा है या प्रकाश हमारी आँखों तक नहीं पहुँच रहा, तो हम बाहर की वस्तुओं को भी नहीं देख पाएँगे।
उत्तर:
नियमित परावर्तन: जब प्रकाश की किरणें किसी चिकने, पॉलिश किए हुए और समतल सतह (जैसे दर्पण) पर पड़ती हैं, तो सभी आपतित किरणें एक निश्चित दिशा में परावर्तित होती हैं। इससे स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है। इसे नियमित परावर्तन कहते हैं।
विसरित परावर्तन: जब प्रकाश की किरणें किसी खुरदुरी या अनियमित सतह (जैसे दीवार, कागज) पर पड़ती हैं, तो परावर्तन के बाद किरणें अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती हैं। इससे स्पष्ट प्रतिबिंब नहीं बनता। इसे विसरित परावर्तन कहते हैं।
नहीं, विसरित परावर्तन का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं। विसरित परावर्तन में भी प्रकाश की हर एक किरण के लिए आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है। अंतर सिर्फ इतना है कि खुरदुरी सतह पर हर बिंदु पर अभिलंब की दिशा अलग-अलग होती है, जिसके कारण समानांतर आपतित किरणें भी अलग-अलग दिशाओं में परावर्तित हो जाती हैं। इस प्रकार, परावर्तन के नियम हर छोटे बिंदु पर लागू होते हैं।
उत्तर:
(क) पॉलिश युक्त लकड़ी की मेज: नियमित परावर्तन – पॉलिश करने से मेज की सतह चिकनी और समतल हो जाती है, जो प्रकाश को एक ही दिशा में परावर्तित करने में सक्षम होती है।
(ख) चॉक पाउडर: विसरित परावर्तन – चॉक पाउडर का पृष्ठ बहुत ही खुरदुरा और अनियमित होता है, जो प्रकाश को सभी दिशाओं में बिखेर देता है।
(ग) गत्ते का पृष्ठ: विसरित परावर्तन – गत्ते की सतह खुरदुरी होती है, भले ही वह चिकनी दिखे। यह प्रकाश का विसरित परावर्तन करती है।
(घ) संगमरमर के फर्श पर फैला जल: नियमित परावर्तन – पानी एक चिकनी और समतल परत बना देता है, जो संगमरमर की खुरदुरी सतह को ढक लेती है। यह चिकनी सतह प्रकाश का नियमित परावर्तन करती है।
(ङ) दर्पण: नियमित परावर्तन – दर्पण की सतह अत्यंत चिकनी और पॉलिश की हुई होती है, जो प्रकाश का पूर्ण रूप से नियमित परावर्तन करती है।
(च) कागज का टुकड़ा: विसरित परावर्तन – कागज की सतह सूक्ष्म स्तर पर खुरदुरी होती है, भले ही वह चिकना लगे। यह प्रकाश को विभिन्न दिशाओं में परावर्तित कर देता है।
उत्तर: प्रकाश के परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं:
नियम 1: आपतन कोण (∠i) सदैव परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है। अर्थात्, ∠i = ∠r.
नियम 2: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब (लंब) तीनों एक ही तल (समतल) में स्थित होते हैं।
उत्तर: इस नियम को सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित क्रियाकलाप किया जा सकता है:
सामग्री: एक समतल दर्पण, एक स्टैंड, एक ड्राइंग शीट, एक पेंसिल, पैमाना, एक पिन और एक टॉर्च।
विधि:
उत्तर:
(क) 2 m (क्योंकि प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु सामने होती है। इसलिए व्यक्ति और उसके प्रतिबिंब के बीच की कुल दूरी 1 m + 1 m = 2 m होगी।)
(ख) बाएँ, बाएँ (समतल दर्पण में पार्श्व परिवर्तन होता है, इसलिए दाएँ हाथ का प्रतिबिंब बाएँ हाथ जैसा दिखता है।)
(ग) बड़ा या फैल जाता है (मंद प्रकाश में अधिक प्रकाश आँख में प्रवेश कर सके, इसके लिए पुतली का आकार बढ़ जाता है।)
(घ) अधिक (शंकु कोशिकाएँ रंग देखने के लिए होती हैं और दिन के समय काम आती हैं, जबकि रात्रि पक्षियों को रात में देखने की आवश्यकता होती है, इसलिए उनकी आँखों में शलाकाओं (रोड्स) की संख्या अधिक होती है जो मंद प्रकाश में देखने में सहायक होती हैं।)
उत्तर: (क) सदैव
उत्तर: (ख) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज के बराबर।
उत्तर: कैलाइडोस्कोप (बहुमूर्तिदर्शी) एक ऐसी युक्ति है जो प्रकाश के बहुलित परावर्तन के सिद्धांत पर काम करती है और सुंदर रंगीन पैटर्न दिखाती है। इसकी रचना इस प्रकार है:
संरचना:
मानव नेत्र का नामांकित चित्र
_________________________
| (नेत्र गोलक) |
| |
| कॉर्निया (स्वच्छ मंडल) |
| / \ |
| / \ |
| / \ परितारिका |
| | पुतली | |
| \ / |
| \ / |
| \ / लेंस |
| || |
| || |
| रेटिना (दृष्टिपटल) |
| |
| प्रकाशिक तंत्रिका |
|_________________________|
मुख्य भाग: 1. कॉर्निया, 2. परितारिका (आइरिस), 3. पुतली, 4. लेंस, 5. रेटिना, 6. प्रकाशिक तंत्रिका
स्पष्टीकरण: मानव नेत्र एक कैमरे की तरह कार्य करता है। प्रकाश सबसे पहले पारदर्शी कॉर्निया से होकर प्रवेश करता है। परितारिका नेत्र का रंगीन भाग है, जो पुतली के आकार को नियंत्रित करती है और प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। प्रकाश पुतली से होकर लेंस से गुजरता है, जो वस्तु की दूरी के अनुसार अपनी फोकस दूरी बदलकर प्रकाश किरणों को रेटिना पर केंद्रित करता है। रेटिना प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलती है, जो प्रकाशिक तंत्रिका के द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचाए जाते हैं। मस्तिष्क इन संकेतों की व्याख्या करके हमें दृश्य दिखाता है।
उत्तर: अध्यापक द्वारा गुरमीत को लेजर टॉर्च का उपयोग करने से मना करना पूर्णतः उचित और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक था। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
1. आँखों के लिए खतरा: लेजर प्रकाश अत्यंत संकेंद्रित, तीव्र और शक्तिशाली होता है। यदि यह सीधे आँखों पर पड़े, तो यह नेत्र के संवेदनशील ऊतकों, विशेषकर रेटिना को क्षति पहुँचा सकता है। रेटिना पर जलन या स्थायी क्षति हो सकती है, जिससे दृष्टि हानि या अंधापन भी हो सकता है।
2. सुरक्षा नियम: विद्यालयों में विज्ञान के प्रयोगों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है। लेजर उपकरणों का बिना उचित सुरक्षा उपायों और वयस्क पर्यवेक्षण के उपयोग खतरनाक माना जाता है।
3. वैकल्पिक व्यवस्था: क्रियाकलाप 16.8 (जिसमें शायद प्रकाश के पथ को दर्शाना है) को साधारण टॉर्च या प्रकाश स्रोत से भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है, जो लेजर की तुलना में सुरक्षित है।
इस प्रकार, अध्यापक ने छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह समझदारी भरा निर्णय लिया।
उत्तर: हमें अपनी आँखों की देखभाल निम्नलिखित तरीकों से करनी चाहिए:
उत्तर: परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r).
दिया है: परावर्तित किरण और आपतित किरण के बीच का कोण = 90°.
चूँकि यह कोण आपतन कोण और परावर्तन कोण के योग के बराबर होता है, अर्थात i + r = 90°.
और क्योंकि i = r, इसलिए i + i = 90° ⇒ 2i = 90° ⇒ i = 45°.
अतः आपतन कोण का मान 45° होगा।
उत्तर: जब दो समतल दर्पण एक-दूसरे के समानांतर रखे जाते हैं, तो वे बहुलित परावर्तन करते हैं। एक वस्तु का पहला प्रतिबिंब एक दर्पण में बनता है, फिर यह प्रतिबिंब दूसरे दर्पण के लिए वस्तु का काम करता है और उसमें प्रतिबिंब बनता है। यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है।
सैद्धांतिक रूप से, इस प्रकार की व्यवस्था में अनंत (Infinite) प्रतिबिंब बनते हैं। हालाँकि, व्यवहार में प्रकाश की तीव्रता हर परावर्तन के बाद कम होती जाती है, इसलिए हमें केवल कुछ ही स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देते हैं। लेकिन प्रश्न के सैद्धांतिक उत्तर के अनुसार, अनंत संख्या में प्रतिबिंब बनेंगे।
उत्तर: इस प्रश्न में हमें किरण आरेख बनाना है। चूँकि यहाँ टेक्स्ट में आरेख बनाना संभव नहीं है, इसलिए चरणबद्ध विधि दी जा रही है:
चरण 1: म
UP Board Class 8 Science 16. प्रकाश Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 8 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board Class 8 Science 16. प्रकाश textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 8 Science 16. प्रकाश :
There are various features of UP Board Class 8 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.