UP Board Class 8 Science 15. कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
इस अध्याय में आपने सीखा कि कुछ वस्तुओं को रगड़कर आवेशित किया जा सकता है। आवेश दो प्रकार के होते हैं - धनावेश और ऋणावेश। सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। रगड़ से उत्पन्न आवेश स्थिर होते हैं। आवेश के प्रवाह से विद्युत धारा बनती है। विद्युतदर्शी से किसी वस्तु के आवेशित होने का पता लगाया जा सकता है। किसी आवेशित वस्तु का आवेश पृथ्वी में स्थानांतरित करना भूसम्पर्कण कहलाता है। बादलों के बीच या बादल और पृथ्वी के बीच विद्युत विसर्जन से तड़ित उत्पन्न होती है, जो खतरनाक हो सकती है। तड़ित चालक इससे बचाव में सहायक होता है। पृथ्वी के अचानक कंपन को भूकंप कहते हैं, जो भूपर्पटी के भीतर गहराई में होने वाले विक्षोभ के कारण आता है। भूकंप की भविष्यवाणी संभव नहीं है, परंतु पृथ्वी की प्लेटों की सीमाओं (भ्रंश क्षेत्र) पर इनके आने की संभावना अधिक होती है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर मापी जाती है। हमें इन प्राकृतिक परिघटनाओं से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
उत्तर: (ख) तांबे की छड़
व्याख्या: तांबा एक विद्युत का सुचालक है। जब हम किसी चालक वस्तु को रगड़ते हैं, तो उत्पन्न आवेश तुरंत हमारे हाथों से होकर पृथ्वी में चला जाता है (भूसम्पर्कण)। इसलिए तांबे की छड़ पर आवेश एकत्रित नहीं हो पाता और उसे घर्षण द्वारा आसानी से आवेशित नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, प्लास्टिक का पैमाना, रबर का फूला हुआ गुब्बारा और ऊनी वस्त्र कुचालक (विद्युतरोधी) पदार्थों के बने होते हैं, जिन पर रगड़ने से आवेश स्थिर रहता है।
उत्तर: (ख) धनावेशित हो जाती है तथा कपड़ा ऋणावेशित हो जाता है।
व्याख्या: जब काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ा जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है। काँच की छड़ से कुछ इलेक्ट्रॉन रेशम के कपड़े पर चले जाते हैं। परिणामस्वरूप, काँच की छड़ पर इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है और वह धनावेशित हो जाती है। दूसरी ओर, रेशम का कपड़ा अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके ऋणावेशित हो जाता है।
उत्तर:
(क) F (गलत) – सजातीय (समान) आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, आकर्षित नहीं।
(ख) T (सही) – आवेशित काँच की छड़ और आवेशित प्लास्टिक स्ट्रॉ पर विपरीत आवेश होने की संभावना होती है, इसलिए वे एक-दूसरे को आकर्षित कर सकते हैं।
(ग) F (गलत) – तड़ित चालक भवन की तड़ित से सुरक्षा करने का ही एक प्रभावी उपाय है। यह तड़ित के आवेश को सीधे पृथ्वी में पहुँचा देता है।
(घ) F (गलत) – वर्तमान विज्ञान और तकनीक के साथ भूकंप की सटीक भविष्यवाणी कर पाना संभव नहीं है।
उत्तर: सर्दियों में हम अक्सर ऊनी या सिंथेटिक स्वेटर पहनते हैं। जब हम स्वेटर उतारते हैं, तो वह हमारे शरीर या अंदर के कपड़ों से तेजी से रगड़ खाता है। इस घर्षण के कारण स्वेटर और हमारे शरीर पर विपरीत आवेश उत्पन्न हो जाते हैं। जब ये आवेश एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाते हैं, तो हवा के माध्यम से तेजी से विसर्जित होकर एक दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। आवेशों के इस तेजी से विसर्जन के दौरान ही चट-चट की ध्वनि सुनाई देती है और कभी-कभी चिंगारी भी दिखाई दे सकती है। यह एक छोटे स्तर पर तड़ित जैसी ही घटना है।
उत्तर: मानव शरीर और पृथ्वी दोनों ही विद्युत के सुचालक हैं। जब हम किसी आवेशित वस्तु को हाथ से छूते हैं, तो उस वस्तु पर एकत्रित अतिरिक्त आवेश (धनात्मक या ऋणात्मक) हमारे शरीर से होकर एक सुगम मार्ग पाता है। यह आवेश हमारे शरीर, पैरों से होते हुए सीधे पृथ्वी में चला जाता है। इस प्रक्रिया को भूसम्पर्कण या अर्थिंग कहते हैं। आवेश के पृथ्वी में स्थानांतरित हो जाने के कारण वह वस्तु अनावेशित (तटस्थ) हो जाती है, यानी उसका आवेश खो देती है।
उत्तर:
(i) पैमाने का नाम: भूकंपों की विनाशी ऊर्जा रिक्टर पैमाने पर मापी जाती है।
(ii) रिकॉर्ड करने की क्षमता: हाँ, रिक्टर पैमाने पर 3 माप वाले भूकंप को भूकंपलेखी (सीसमोग्राफ) से रिकॉर्ड किया जा सकता है। भूकंपलेखी बहुत हल्के झटकों को भी रिकॉर्ड करने में सक्षम होता है।
(iii) हानि की संभावना: नहीं, रिक्टर पैमाने पर 3 की तीव्रता वाला भूकंप एक हल्का भूकंप माना जाता है। आमतौर पर ऐसे भूकंप का पता लोगों को भी नहीं चल पाता और इससे कोई विशेष हानि नहीं होती है।
उत्तर: तड़ित (बिजली गिरने) से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-
1. सुरक्षित आश्रय लें: तूफान के दौरान किसी मजबूत भवन के अंदर रहें। यदि वाहन में हैं तो उसकी खिड़कियाँ बंद कर लें। वाहन का धातु का ढाँचा आपकी सुरक्षा करता है।
2. खुले स्थान पर सावधानी: यदि खुले मैदान में फँस गए हैं, तो किसी भी पेड़, बिजली के खंभे या धातु की संरचना से दूर रहें। जमीन पर घुटने मोड़कर बैठ जाएँ, सिर को घुटनों के बीच छुपा लें और दोनों हाथों से कान बंद कर लें। जमीन पर लेटें नहीं।
3. विद्युत उपकरणों से दूरी: तड़ित के समय टेलीफोन, बिजली के स्विच, नल के पाइप और धातु के पाइपों को न छुएँ। बिजली के साधनों का उपयोग बंद कर दें और स्नान न करें।
उत्तर: यह घटना आवेशों के मूल गुणों पर आधारित है-
(क) प्रतिकर्षण का कारण: जब दोनों गुब्बारे आवेशित होते हैं, तो संभावना है कि उन पर समान प्रकार का आवेश (दोनों धनात्मक या दोनों ऋणात्मक) होगा। हम जानते हैं कि सजातीय (समान) आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। इसीलिए एक आवेशित गुब्बारा दूसरे आवेशित गुब्बारे को प्रतिकर्षित करता है।
(ख) आकर्षण का कारण: जब एक गुब्बारा आवेशित होता है और दूसरा अनावेशित (तटस्थ) होता है, तो आवेशित गुब्बारा अनावेशित गुब्बारे में आवेश पृथक्करण उत्पन्न कर देता है। मान लीजिए आवेशित गुब्बारा ऋणात्मक है, तो वह अनावेशित गुब्बारे के पास वाले हिस्से में धनात्मक आवेश को आकर्षित करेगा और दूर वाले हिस्से में ऋणात्मक आवेश छोड़ देगा। चूँकि धनात्मक आवेश (आकर्षण बल) निकट है और ऋणात्मक आवेश (प्रतिकर्षण बल) दूर है, इसलिए आकर्षण बल प्रबल होता है और अनावेशित गुब्बारा आवेशित गुब्बारे की ओर खिंच जाता है।
उत्तर: वह उपकरण जिसकी सहायता से यह पता लगाया जाता है कि कोई वस्तु आवेशित है या नहीं, विद्युतदर्शी (इलेक्ट्रोस्कोप) कहलाता है। इसे हम घर पर भी बना सकते हैं-
निर्माण विधि:
1. एक साफ, सूखी काँच की बोतल लें और उसके मुँह को कार्डबोर्ड/गत्ते के ढक्कन से बंद कर दें।
2. ढक्कन के बीच में एक छेद करें।
3. एक धातु की पेपर क्लिप को सीधा करके उसके एक सिरे को मोड़कर एक हुक बना लें।
4. इस पेपर क्लिप को ढक्कन के छेद में इस प्रकार डालें कि हुक वाला सिरा बोतल के अंदर लटक जाए और दूसरा सिरा बाहर निकला रहे।
5. अब एल्युमीनियम पन्नी की दो पतली पट्टियाँ (लगभग 4 cm x 1 cm) काटकर उन्हें पेपर क्लिप के हुक पर लटका दें।
कार्य विधि: जब किसी आवेशित वस्तु (जैसे आवेशित प्लास्टिक की रिफिल) को विद्युतदर्शी के बाहर निकले हुए धातु के सिरे को छूाया जाता है, तो आवेश पेपर क्लिप से होकर एल्युमीनियम की पट्टियों तक पहुँच जाता है। चूँकि दोनों पट्टियों पर समान आवेश आ जाता है, और समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए वे पट्टियाँ एक-दूसरे से दूर हटकर फैल जाती हैं। पट्टियों का यह फैलना यह दर्शाता है कि जिस वस्तु से छुआया गया था, वह आवेशित थी।
(यहाँ विद्युतदर्शी का चित्र होना चाहिए।)
उत्तर: भारत के वे तीन राज्य/क्षेत्र जहाँ भूकंप आने की संभावना सबसे अधिक है, वे हैं-
1. गुजरात (विशेषकर कच्छ का रन क्षेत्र)
2. जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश का कुछ भाग
3. उत्तर-पूर्वी राज्य (जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम)
(अन्य: उत्तराखंड और राजस्थान के कुछ भाग भी भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं।)
उत्तर: यदि भूकंप के झटके लगते समय हम घर से बाहर हैं, तो निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए-
1. खुले स्थान पर जाएँ: तुरंत किसी खुले मैदान में चले जाएँ। भवनों, ऊँची दीवारों, बिजली के खंभों, पेड़ों और ओवरहेड तारों से जितना दूर रह सकें, उतना दूर रहें क्योंकि भूकंप में ये गिर सकते हैं।
2. वाहन में सुरक्षा: यदि आप कार या बस में सफर कर रहे हैं, तो वाहन को धीरे-धीरे रोककर अंदर ही बैठे रहें। बाहर न निकलें। वाहन को पुल, फ्लाईओवर या सुरंग से दूर खुले स्थान पर रोकें।
3. समुद्र तट से दूर रहें: यदि समुद्र तट के पास हैं, तो तुरंत ऊँचे स्थान पर चले जाएँ क्योंकि भूकंप से सुनामी आने का खतरा होता है।
4. शांत रहें: घबराएँ नहीं और दूसरों को भी शांत रहने के लिए कहें। झटके रुकने के बाद ही सुरक्षित स्थान से हिलें।
उत्तर: नहीं, यदि मौसम विभाग ने तड़ित झंझा (बिजली चमकने और गरजने वाले तूफान) की चेतावनी दी है, तो उस दिन छतरी लेकर बिल्कुल भी बाहर नहीं जाना चाहिए।
व्याख्या: अधिकांश छतरियों की डंडी धातु (मेटल) की बनी होती है या उनमें धातु की नोक लगी होती है। धातु विद्युत की सुचालक है। खुले मैदान में ऊँची हुई धातु की छड़ तड़ित (बिजली) को आकर्षित करने का काम करती है। यदि तूफान के दौरान हम हाथ में धातु वाली छतरी लेकर चल रहे हैं, तो वह एक खतरनाक विद्युत चालक का काम कर सकती है। तड़ित उस पर आघात कर सकती है और विद्युत प्रवाह हमारे शरीर से होकर गुजर सकता है, जिससे गंभीर चोट या मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए ऐसे मौसम में बाहर जाना जरूरी हो तो वाटरप्रूफ जैकेट पहनकर जाएँ, छतरी लेकर नहीं।
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