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UP Board class 11 Chemistry (10. S - ब्लॉक के तत्व) solution PDF

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UP Board class 11 Chemistry (10. S - ब्लॉक के तत्व) solution

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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry

अध्याय 10: s-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 10.1. क्षार धातुओं के सामान्य भौतिक एवं रासायनिक गुण क्या हैं?

उत्तर: क्षार धातुएँ आवर्त सारणी के s-ब्लॉक में वर्ग 1 के तत्व हैं। इनके गुण उनके संयोजी कक्षक में उपस्थित s-इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:

  • लीथियम (Li): 1s² 2s¹
  • सोडियम (Na): 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹
  • पोटैशियम (K): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹
  • रुबिडियम (Rb): [Kr] 5s¹
  • सीजियम (Cs): [Xe] 6s¹
  • फ्रान्सियम (Fr): [Rn] 7s¹

परमाण्वीय एवं आयनिक त्रिज्या: अपने आवर्त में क्षार धातु की परमाण्वीय त्रिज्या सबसे बड़ी होती है। इनके धनायन (M⁺) संगत परमाणु से छोटे होते हैं।

आयनन एन्थैल्पी: क्षार धातुओं की आयनन एन्थैल्पी बहुत कम होती है।

भौतिक गुण:

  1. भौतिक अवस्था: ये बहुत नरम, हल्की एवं चाँदी के समान चमकदार धातुएँ हैं।
  2. घनत्व: इनका घनत्व कम होता है और लीथियम से सीजियम तक बढ़ता है। हालाँकि पोटैशियम सोडियम से हल्का होता है।
  3. गलनांक एवं क्वथनांक: इनके गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं क्योंकि इनके बीच दुर्बल धात्विक बंध होते हैं।

रासायनिक गुण:

  1. वायु से क्रियाशीलता: ये वायु की ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्साइड बनाती हैं। इसलिए इन्हें मिट्टी के तेल में रखा जाता है।
    उदाहरण: 4Li + O₂ → 2Li₂O
  2. जल से क्रिया: ये जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस देती हैं।
    2M + 2H₂O → 2MOH + H₂↑
  3. हाइड्रोजन से अभिक्रिया: 2M + H₂ → 2MH (हाइड्राइड)
  4. हैलोजन से क्रिया: 2M + X₂ → 2MX (हैलाइड)
  5. द्रव अमोनिया में विलेयता: क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलकर गहरे नीले रंग का चालक विलयन बनाती हैं जो प्रबल अपचायक होता है।
  6. अपचायक गुण: ये प्रबल अपचायक हैं क्योंकि ये आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग देती हैं। इनमें लीथियम सबसे प्रबल अपचायक है।
  7. मिश्रधातु बनाना: ये अन्य तत्वों के साथ मिलकर मिश्रधातुएँ बनाती हैं। पारे के साथ ये अमलगम बनाती हैं।

प्रश्न 10.2. क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण एवं गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए।

उत्तर: आवर्त सारणी के वर्ग 2 के तत्व बेरीलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्सियम (Ca), स्ट्रॉन्शियम (Sr), बेरियम (Ba) एवं रेडियम (Ra) क्षारीय मृदा धातुएँ कहलाती हैं।

परमाण्वीय गुण:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [उत्कृष्ट गैस] ns² है।
  2. परमाण्वीय एवं आयनिक त्रिज्या: क्षार धातुओं की तुलना में इनका आकार छोटा होता है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आकार बढ़ता है।
    Be²⁺ < Mg²⁺ < Ca²⁺ < Sr²⁺ < Ba²⁺
  3. आयनन एन्थैल्पी: क्षार धातुओं की तुलना में इनकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है।

भौतिक गुण:

  1. भौतिक अवस्था: ये चाँदी के समान सफेद, चमकदार एवं नरम धातुएँ हैं। क्षार धातुओं की तुलना में ये अधिक कठोर होती हैं।
  2. गलनांक एवं क्वथनांक: क्षार धातुओं की तुलना में इनके गलनांक एवं क्वथनांक अधिक होते हैं।
  3. ज्वाला रंग: Be और Mg को छोड़कर शेष धातुएँ अपने क्लोराइड की ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं।
  4. घनत्व: Mg और Ca हल्की धातुएँ हैं। घनत्व का क्रम: Be < Sr < Ca < Ba

रासायनिक गुण:

  1. जल एवं वायु से अभिक्रिया: Be और Mg की सतह पर ऑक्साइड की परत चढ़ जाने के कारण ये जल एवं वायु के प्रति निष्क्रिय हो जाते हैं। अन्य धातुएँ वायु में जलकर ऑक्साइड एवं नाइट्राइड बनाती हैं।
    2Ca + O₂ → 2CaO
    3Mg + N₂ → Mg₃N₂
  2. हैलोजन से क्रिया: M + X₂ → MX₂
  3. हाइड्रोजन से क्रिया: Be को छोड़कर शेष सभी हाइड्राइड बनाती हैं।
    Ca + H₂ → CaH₂
  4. अम्ल से क्रिया: अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।
    Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl₂ + H₂↑
  5. अपचायक गुण: ये प्रबल अपचायक हैं, परन्तु क्षार धातुओं की तुलना में कम।
  6. द्रव अमोनिया में विलेयता: ये द्रव अमोनिया में घुलकर गहरे नीले-काले रंग का विलयन बनाती हैं।
    M + (x+y)NH₃ → [M(NH₃)ₓ]²⁺ + 2[e⁻(NH₃)ᵧ]

प्रश्न 10.3. क्षार धातुएँ प्रकृति में क्यों नहीं पाई जाती हैं?

उत्तर: क्षार धातुएँ अत्यधिक क्रियाशील होती हैं। ये अपने संयोजी कोश के एकमात्र s-इलेक्ट्रॉन को बहुत आसानी से त्यागकर M⁺ आयन बना लेती हैं। इसलिए ये प्रकृति में कभी भी शुद्ध या मुक्त अवस्था में नहीं पाई जाती हैं, बल्कि सदैव यौगिकों (जैसे क्लोराइड, कार्बोनेट) के रूप में पाई जाती हैं।

प्रश्न 10.4. Na₂O₂ में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात कीजिए।

हल: माना सोडियम की ऑक्सीकरण संख्या x है।
Na₂O₂ में, 2(x) + 2(-1) = 0
2x - 2 = 0
2x = 2
x = +1
अतः सोडियम की ऑक्सीकरण संख्या +1 है।

प्रश्न 10.5. पोटैशियम की तुलना में सोडियम कम अभिक्रियाशील क्यों है?

उत्तर: सोडियम की आयनन एन्थैल्पी पोटैशियम से अधिक होती है। इसका अर्थ है कि सोडियम से इलेक्ट्रॉन निकालना पोटैशियम से इलेक्ट्रॉन निकालने की तुलना में अधिक कठिन है। चूँकि रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन का त्याग या साझा करना शामिल होता है, इसलिए सोडियम पोटैशियम की तुलना में कम अभिक्रियाशील है।

प्रश्न 10.6. निम्नलिखित के संदर्भ में क्षार धातुओं एवं क्षारीय मृदा धातुओं की तुलना कीजिए-
(क) आयनन एन्थैल्पी, (ख) ऑक्साइडों की क्षारकता, (ग) हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता।

उत्तर:

(क) आयनन एन्थैल्पी: क्षारीय मृदा धातुओं की प्रथम आयनन एन्थैल्पी संगत क्षार धातुओं से अधिक होती है क्योंकि इन पर नाभिकीय आवेश अधिक होता है। उदाहरण: I.E.(Mg) > I.E.(Na)

(ख) ऑक्साइडों की क्षारकता: क्षार धातुओं के ऑक्साइड (जैसे Na₂O) अत्यधिक क्षारीय होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के ऑक्साइड (जैसे MgO, CaO) भी क्षारीय होते हैं, परन्तु क्षार धातु ऑक्साइडों की तुलना में इनकी क्षारकता कम होती है।

(ग) हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता: क्षार धातुओं के हाइड्रॉक्साइड (जैसे NaOH, KOH) जल में अत्यधिक विलेय होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइड (जैसे Ca(OH)₂, Mg(OH)₂) जल में कम विलेय होते हैं। विलेयता का क्रम: NaOH > Ca(OH)₂

प्रश्न 10.7. लीथियम किस प्रकार मैग्नीशियम से रासायनिक गुणों में समानताएँ दर्शाता है?

उत्तर: लीथियम (वर्ग 1) और मैग्नीशियम (वर्ग 2) के परमाणु तथा आयनिक आकार लगभग समान होने के कारण इनके गुणों में समानता पाई जाती है। इसे विकर्ण संबंध कहते हैं।
समानताएँ:

  1. दोनों के हाइड्रॉक्साइड जल में कम विलेय हैं।
  2. दोनों नाइट्रोजन से सीधे संयोग कर नाइट्राइड बनाते हैं।
    6Li + N₂ → 2Li₃N
    3Mg + N₂ → Mg₃N₂
  3. दोनों के कार्बोनेट गर्म करने पर आसानी से वियोजित हो जाते हैं।
    Li₂CO₃ → Li₂O + CO₂
    MgCO₃ → MgO + CO₂
  4. दोनों ठोस हाइड्रोजनकार्बोनेट नहीं बनाते।
  5. दोनों परॉक्साइड एवं सुपरॉक्साइड नहीं बनाते।
  6. दोनों के फ्लोराइड, कार्बोनेट तथा फॉस्फेट जल में अल्प विलेय हैं।
  7. दोनों के क्लोराइड कार्बनिक विलायकों जैसे एथेनॉल में विलेय होते हैं।

प्रश्न 10.8. क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातुएँ रासायनिक अपचयन विधि से क्यों नहीं प्राप्त किए जा सकते हैं?

उत्तर:

  1. क्षार एवं क्षारीय मृदा धातुएँ स्वयं प्रबल अपचायक होती हैं। किसी भी अन्य अपचायक की तुलना में ये अधिक सरलता से इलेक्ट्रॉन दान करती हैं, इसलिए इनके यौगिकों का रासायनिक अपचयन करके इन्हें प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  2. ये अत्यधिक विद्युत धनात्मक होती हैं, इसलिए इनके जलीय विलयनों का विद्युत-अपघटन करने पर कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है, धातु नहीं मिलती।

प्रश्न 10.9. प्रकाश वैद्युत सेल में लीथियम के स्थान पर पोटैशियम एवं सीजियम क्यों प्रयुक्त किए जाते हैं?

उत्तर: प्रकाश वैद्युत प्रभाव के लिए धातु से इलेक्ट्रॉन का निकलना आवश्यक है। पोटैशियम एवं सीजियम की आयनन एन्थैल्पी लीथियम की तुलना में बहुत कम होती है, जिसके कारण ये प्रकाश (फोटॉन) की आपतित ऊर्जा से आसानी से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित कर देते हैं। लीथियम की आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण यह प्रकाश से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने में कम कुशल है।

प्रश्न 10.10. जब एक क्षार धातु को द्रव अमोनिया में घोला जाता है, तब विलयन विभिन्न रंग प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार के रंग परिवर्तन का कारण बताइए।

उत्तर: क्षार धातु द्रव अमोनिया में घुलकर एक गहरे नीले रंग का विलयन बनाती है। यह रंग विलयन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है। जब ये अमोनिया-युक्त इलेक्ट्रॉन [e⁻(NH₃)ₓ] दृश्य प्रकाश को अवशोषित करते हैं, तो वे उच्च ऊर्जा स्तर में संक्रमण करते हैं, जिससे नीला रंग दिखाई देता है। जब इस सांद्र नीले विलयन को और तनु किया जाता है या लंबे समय तक रखा जाता है, तो यह कॉपर (ताँबे) जैसे रंग में बदल सकता है और अंततः धात्विक चमक प्रदर्शित कर सकता है।

प्रश्न 10.11. बेरीलियम एवं मैग्नीशियम ज्वाला को कोई रंग नहीं प्रदान करते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुएँ ऐसा करती हैं। क्यों?

उत्तर: ज्वाला रंग तब उत्पन्न होता है जब धातु आयन की ऊर्जा से उत्तेजित होकर संयोजी इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर में जाता है और वापस निम्न स्तर में आने पर विशिष्ट तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित करता है। बेरीलियम (Be²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयनों का आकार बहुत छोटा तथा आयनन एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है। इस कारण ये ज्वाला की ऊर्जा से अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित नहीं कर पाते, अतः कोई ज्वाला रंग नहीं देते। Ca, Sr, Ba के आयनों का आकार बड़ा व आयनन एन्थैल्पी कम होने के कारण ये सरलता से उत्तेजित होकर ज्वाला को क्रमशः ईंटिया लाल, किरमिजी लाल व हरा रंग प्रदान करते हैं।

प्रश्न 10.12. साल्वे प्रक्रम में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर: साल्वे प्रक्रम सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) के औद्योगिक निर्माण की एक विधि है। इसमें होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. अमोनिया गैस को संतृप्त ब्राइन (NaCl विलयन) में प्रवाहित किया जाता है।
  2. इस मिश्रण में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर अमोनियम कार्बोनेट बनता है।
    2NH₃ + H₂O + CO₂ → (NH₄)₂CO₃
  3. अमोनियम कार्बोनेट, अधिक CO₂ से क्रिया करके अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनाता है।
    (NH₄)₂CO₃ + H₂O + CO₂ → 2NH₄HCO₃
  4. अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, सोडियम क्लोराइड से क्रिया करके सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (अल्प विलेय) और अमोनियम क्लोराइड बनाता है।
    NaCl + NH₄HCO₃ → NH₄Cl + NaHCO₃↓
  5. अवक्षेपित NaHCO₃ को छानकर अलग कर लिया जाता है और गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट में परिवर्तित हो जाता है।
    2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + CO₂↑ + H₂O
  6. उप-उत्पाद अमोनियम क्लोराइड को चूने के दूध [Ca(OH)₂] के साथ गर्म करके अमोनिया गैस पुनः प्राप्त की जाती है, जिसे प्रक्रम में पुनः उपयोग किया जाता है।
    2NH₄Cl + Ca(OH)₂ → 2NH₃↑ + CaCl₂ + 2H₂O

प्रश्न 10.13. पोटैशियम कार्बोनेट साल्वे विधि द्वारा नहीं बनाया जा सकता है, क्यों?

उत्तर: साल्वे प्रक्रम NaHCO₃ के कम विलेयता के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसे अवक्षेपित कर अलग किया जा सकता है। पोटैशियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (KHCO₃) जल में अत्यधिक विलेय होता है, इसलिए इसे अवक्षेप के रूप में अलग नहीं किया जा सकता। अतः पोटैशियम कार्बोनेट के निर्माण के लिए साल्वे विधि प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

प्रश्न 10.14. Li₂CO₃ कम ताप पर एवं Na₂CO₃ उच्च ताप पर क्यों विघटित होता है?

उत्तर: Li⁺ आयन का आकार बहुत छोटा होता है। छोटे Li⁺ आयन का बड़े CO₃²⁻ आयन के साथ बना जालक अस्थायी होता है क्योंकि छोटा Li⁺ आयन बड़े ऋणायन को पर्याप्त रूप से ध्रुवित करके उसके बंध को कमजोर कर देता है। इसलिए Li₂CO₃ कम ताप पर ही वियोजित होकर Li₂O और CO₂ दे देता है।
Na⁺ आयन का आकार Li⁺ से बड़ा होता है, जिससे Na₂CO₃ का जालक अधिक स्थायी होता है और यह बहुत उच्च ताप पर ही वियोजित होता है।

प्रश्न 10.15. क्षार धातुओं के निम्नलिखित यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिए-
(क) नाइट्रेट, (ख) कार्बोनेट, (ग) सल्फेट।

उत्तर:

(क) नाइट्रेट:
तापीय स्थायित्व: क्षार धातु नाइट्रेट (LiNO₃ को छोड़कर) गर्म करने पर नाइट्राइट और ऑक्सीजन देते हैं। क्षारीय मृदा धातु नाइट्रेट गर्म करने पर ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन देते हैं।
विलेयता: दोनों वर्गों के नाइट्रेट जल में विलेय होते हैं।

(ख) कार्बोनेट:
तापीय स्थायित्व: क्षार धातु कार्बोनेट (Li₂CO₃ को छोड़कर) अधिक ताप पर भी स्थायी होते हैं। क्षारीय मृदा धातु कार्बोनेट गर्म करने पर ऑक्साइड और CO₂ में वियोजित हो जाते हैं। स्थायित्व वर्ग में नीचे बढ़ता है: BeCO₃ < MgCO₃ < CaCO₃ < SrCO₃ < BaCO₃
विलेयता: क्षार धातु कार्बोनेट जल में विलेय होते हैं। क्षारीय मृदा धातु कार्बोनेट जल में अल्प विलेय होते हैं और विलेयता वर्ग में नीचे जाने पर घटती है।

(ग) सल्फेट:
तापीय स्थायित्व: क्षार धातु सल्फेट अत्यधिक ताप पर भी स्थायी होते हैं। क्षारीय मृदा धातु सल्फेट गर्म करने पर ऑक्साइड और SO₃ देते हैं।
विलेयता: क्षार धातु सल्फेट जल में विलेय होते हैं। क्षारीय मृदा धातु सल्फेटों की विलेयता वर्ग में नीचे जाने पर तेजी से घटती है। BeSO₄ और MgSO₄ विलेय हैं, CaSO₄ अल्प विलेय है, जबकि SrSO₄, BaSO₄ अविलेय हैं।

प्रश्न 10.16. सोडियम क्लोराइड से प्रारम्भ करके निम्नलिखित को आप किस प्रकार बनाएँगे-
(i) सोडियम धातु, (ii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड, (iii) सोडियम परॉक्साइड, (iv) सोडियम कार्बोनेट।

उत्तर:

(i) सोडियम धातु: गलित सोडियम क्लोराइड (NaCl) के विद्युत-अपघटन द्वारा (डाउन विधि)। कैथोड पर सोडियम धातु एकत्र होती है।
कैथोड: Na⁺ + e⁻ → Na
ऐनोड: 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻

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